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MS Ramaiah Indic Centre For Ayurveda And Integrative Medicine

Ayurveda Hospital

MSR Nagar, Matikere Post, Landmark : MS Ramaiah Educational Institute, Bangalore Bangalore
4 Doctors · ₹250
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MS Ramaiah Indic Centre For Ayurveda And Integrative Medicine Ayurveda Hospital MSR Nagar, Matikere Post, Landmark : MS Ramaiah Educational Institute, Bangalore Bangalore
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Our goal is to offer our patients, and all our community the most affordable, trustworthy and professional service to ensure your best health....more
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More about MS Ramaiah Indic Centre For Ayurveda And Integrative Medicine
MS Ramaiah Indic Centre For Ayurveda And Integrative Medicine is known for housing experienced Ayurvedas. Dr. Swetha Suvarna, a well-reputed Ayurveda, practices in Bangalore. Visit this medical health centre for Ayurvedas recommended by 89 patients.

Timings

MON-FRI
09:30 AM - 04:00 PM
SAT
09:30 AM - 02:00 PM

Location

MSR Nagar, Matikere Post, Landmark : MS Ramaiah Educational Institute, Bangalore
New BEL Road Bangalore, Karnataka
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Doctors in MS Ramaiah Indic Centre For Ayurveda And Integrative Medicine

Dr. Swetha Suvarna

BAMS, MS (OBGY), PhD. Persuing
Ayurveda
13 Years experience
250 at clinic
Available today
09:30 AM - 01:30 PM

Dr. T K Girija Kumari

BAMS, MD (Kayachikitsa), MBA
Ayurveda
32 Years experience
250 at clinic
Available today
09:30 AM - 01:30 PM

Dr. Sriranjini Jaideep

Ph.D (Neurophysiology), MD (Kayachikitsa), BAMS
Ayurveda
18 Years experience
250 at clinic
Available today
09:30 AM - 01:00 PM

Dr. Shashidhar

BAMS, MD - Ayurveda
Ayurveda
19 Years experience
250 at clinic
Available today
09:30 AM - 02:00 PM
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Sexual Health - Is a Taste of Mint Good or Bad?

MD - General Medicine
Sexologist, Delhi
Sexual Health - Is a Taste of Mint Good or Bad?

Sexual Health: Is a Taste of Mint Good or Bad?

Men who are concerned about appropriate penis care - and every man should be - want to make sure they do all they can to ensure premium sexual health. But the world of sexual health matters is littered with all sorts of misinformation, old wives tales and myths. One of the recurring ones concerns the use of mint as it relates to the penis. According to some sources, mint can be a fine sexual aid, but other sources insist there are dangers to sexual health in the overuse of mint. So what is a guy to believe?

Mint

It seems as if mint is everywhere around us. Spearmint is a popular flavor of chewing gum. Peppermint candies are a treat for kids and adults alike. The range of mint teas seems to have grown exponentially. As menthol, mint is found in several brands of cigarettes and cough drops. And "minty fresh" has become synonymous with toothpastes and other oral hygiene products. It's even used in some environmentally friendly pesticides in place of toxic chemicals.

There are well over a dozen different kinds of mint plants, and they grow across most of the inhabited continents (although not so often in South America). This popular herb can grow all year long in the appropriate conditions.

The penis connection

So why should this mint have any connection with the penis? Certainly, anything that is ingested has the potential to affect parts of the body, including the penis.

One of the more common theories associated with mint is that it has the effect of numbing the penis naturally. According to this theory, performing oral sex on an erect penis after sucking on a mint cough drop will temporarily de-sensitize the member so that it can stay harder for a longer period of time during sex. A variant on this theory recommends using mint oil on an erect penis for the same purpose.

There is a little scientific reasoning to back up this claim. Parts of the body contain a protein with a long scientific name which is more generally known as TRPM8. When mint comes into contact with TRPM8, it sends a signal to the brain that says "Experience this sensation as cold." So although mint itself is not cold, it makes the body think it is. And so the theory is that getting mint on an erect penis will numb it sufficiently that it acts as a kind of "delay spray." However, there are no studies to prove that mint applied to the penis will indeed result in longer-lasting sex.

Testosterone

And in fact, some people believe that mint could have a negative effect on sexual health and function. Some men have claimed that mint depresses their sex drive. A 2004 study involving mint tea given to male rats seemed to back this up. The intake of mint tea was associated with both an increase in female hormones and a decrease in testosterone.

A study in women with high testosterone levels later found the same thing - that mint caused their testosterone levels to drop and their female hormone levels to rise.

Since testosterone in men is associated with an increased sex drive, the studies suggest that too much mint could indeed cause an effect. But more studies would be needed to definitively prove this.

चेहरे पर काले दाग उपाय - Chehare Par Kaale Daag Ke Upaay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
चेहरे पर काले दाग उपाय - Chehare Par Kaale Daag Ke Upaay!

कई कारणों से चेहरे पर कले दाग का निशान आ जाता है. इन निशानों को ख़त्म करने के लिए बहु सारे उपाय हैं. लोग इसे इसलिए ख़त्म करना चाहते हैं क्योंकि इससे चेहरे की खूबसूरती प्रभावित होती है. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम चहरे के काले दाग खत्म करने के उपायों को जानें.

1. काला दाग का घरेलू नुस्खा है नींबू

नींबू को सबसे पहले कट करें और इसके जूस को एक कटोरे में डाल लें. नींबू के जूस में अब शहद को मिला लें और इस मिश्रण को अच्छे से चलाएं. अब इस मिश्रण को अपनी त्वचा के प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. 15 मिनट तक इसे लगाकर रखें. इसके बाद अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से धोएं. जब तक आप नतीजा न देख लें तब तक इसे पूरे दिन में दो बार ज़रूर लगाएं. नींबू का जूस एक प्राकृतिक ब्लीचिंग पदार्थ है साथ ही शहद भी त्वचा को नमी देता है. ये गुण काला दाग को कम करने में मदद करते हैं. नींबू विटामिन सी का स्त्रोत होता है और इसमें प्रभावित एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं जो त्वचा को सूरज की किरणों से बचाते हैं.

2. मसूर दाल का फेस पैक

दाल को दूध में डालकर रातभर के लिए सोखने के लिए रख दें. सुबह में, दाल को मिक्स कर लें और फिर मिक्स करने के बाद अन्य बची सामग्रियों को मिला लें. पूरे मिश्रण को अच्छे से मिक्सर में मिक्स कर लें. अब इस पेस्ट को अपने प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. 15 मिनट के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. इस पेस्ट को हफ्ते में दो बार ज़रूर लगाएं. मसूर दाल प्रोटीन से भरपूर होती हैं और मृत त्वचा का इलाज करने में ये बेहद फायदेमंद होती है. ये आपकी त्वचा को नमी के साथ साथ स्वस्थ भी रखती है और काला दाग को भी दूर करती है.

3. बादाम

रातभर के लिए बादाम को पानी में डालकर सोखने के लिए रख दें. फिर सुबह को बादाम को मिक्सर में मिक्स कर लें और एक मुलायम पेस्ट तैयार कर लें. आप थोड़ा दूध भी मिला सकते हैं अगर पेस्ट मुलायम नहीं हो रहा है तो. अब अन्य बची सामग्रीयों को बादाम के पेस्ट में मिला दें. पेस्ट को अच्छे से मिलाने के बाद इसे अपनी त्वचा के प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. फिर इसे रातभर के लिए त्वचा पर ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. सुबह में त्वचा को ठंडे पानी से धो लें. हर रात, सोने से पहले इसे दो हफ्ते तक अपनी त्वचा पर लगाएं. दो हफ्ते के बाद इलाज को थोड़ा कम कर दें. फिर इसे आप हफ्ते में दो बार लगा सकते हैं.

4. लाल प्याज का उपयोग

प्याज के सबसे पहले टुकड़े कर लें. अब टुकड़ों को हाथों में लें और फिर उसे प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. दस मिनट तक इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें और फिर अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें. इसके आलावा आप प्याज को मिक्स करके निचोड़ लें और जूस को अपने प्रभावित क्षेत्रों पर लगाए. जब तक आपको नतीजा न दिख जाये तब तक पूरे दिन में दो बार इसे ज़रूर लगाएं. प्याज विटामिन सी का सबसे अच्छा स्त्रोत है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट के गुण काला दाग का इलाज करने में मदद करते हैं.

5. उपयोग करें आवश्यक तेलों का

जैतून का तेल, नारियल का तेल, अरंडी का तेल, नीम का तेल या जोजोबा तेल. इसके अलावा आप इन तेलों को एक साथ भी मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. सबसे पहले अपनी त्वचा को साफ़ कर लें और तौलिये से अच्छे से सूखा लें. अपनी पसंद के तेल से आप अपनी त्वचा पर मसाज करें. कुछ मिनट मसाज करने के बाद आधे घंटे तक इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. अब अपनी त्वचा को क्लीन्ज़र से धो लें. इन तेल का इस्तेमाल पूरे दिन में एक बार ज़रूर करें.

6. इलाज है एलो वेरा

एक कटोरे में शहद और एलो वेरा जेल को मिला लें. अब दस मिनट के लिए मिश्रण को ऐसे ही छोड़ दें. दस मिनट के बाद अपनी त्वचा पर मिश्रण को लगाएं. फिर इसे ऐसे ही 20 मिनट तक लगा हुआ छोड़ दें. अब अपनी त्वचा को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. काला दाग पर एलो वेरा का इस्तेमाल कब तक करें – दो हफ्ते के लिए इस मिश्रण को पूरे दिन में एक बार ज़रूर लगाएं. त्वचा के प्राकृतिक PH स्तर और तेल के स्तर को छेड़े बिना एलो वेरा को त्वचा को साफ़ करने के लिए जाना जाता है. ये काले धब्बों को दूर करता है साथ ही सूरज की किरणों से भी बचाता है.

7. उपयोग करें केला

सबसे पहले केले को मैश कर लें और तब तक करें जब तक इसकी गुठली बनना कम न हो जाएँ. फिर इसमें शहद और दूध मिलाएं. फिर सारी सामग्रियां मिलाने के बाद एक मुलायम पेस्ट तैयार कर लें. इस मिश्रण को प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं. अब इसे त्वचा पर आधे घंटे के लिए लगा हुआ छोड़ दें और फॉर अपनी त्वचा को गर्म पानी से साफ़ कर लें. हफ्ते में दो बार करें. आपको परिणाम तीन हफ़्तों में ही नज़र आने लगेगा. केला एक प्राकृतिक एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है जो त्वचा को साफ करता है, जिसकी मदद से काला दाग का इलाज होता है. इसमें विटामिन k और पोटैशियम भी होता है जो त्वचा को नमी देता है साथ ही स्वस्थ भी रखता है.

8. अपनी त्वचा को सूरज से दूर रखें

सूरज आपकी काला दाग की समस्या को और भी खराब कर देता है और आपके मेलानोसाईट को और भी ज़्यादा बढ़ा देताहै. काला दाग बहुत ही आम समस्या है और इसे ठीक होने में थोड़ा समय लगता है. सनस्क्रीन मिनिमम SPF 30 काला दाग को हटाने के लिए खासतौर पर बताई जाती है. इसके अलावा त्वचा को सीधे तौर पर सूरज के सामने न आने दें और अपनी त्वचा को समय समय पर साफ़ करते रहें.
 

पिम्पल हटाने के उपाय - Pimples Removal Tips!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
पिम्पल हटाने के उपाय  - Pimples Removal Tips!

चेहरे पर होने वाले अनावश्यक पिंपल्स से लगभग सभी लोग परेशान होते हैं. ये एक ऐसी समस्या है जो स्वतः उत्पन्न हो जाती है. हलांकी ये सबके चेहरे पर भिन्नता लिए हुए रहता है. कुछ लोगों को स्वाभाविक रूप से हो जाता है जबकि कई ऐसे भी लोग होते हैं जिनके चेहरे पर पिंपल्स होने का कारण है विभिन्न प्रकार के रासायनिक क्रीम. खैर कारण जो भी हो लेकिन ये परेशान तो सबको एक समान ही करते हैं. इनसे निपटने के लिए भी कई तरह के क्रीम और दवाइयाँ उपलब्ध हैं. लेकिन इन्हें प्र्ककृतिक उपायों से भी दूर किया जा सकता है. तो आइए इस लेख के माध्यम से हम आपको पिंपल दूर करने के कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं. ये नुस्खे पिंपल्स हटाने के लिए बेहद प्रभावी हैं.

पुदीना

पुदीना, घरेलू उपयोगों के लिए बहुत आसानी से उपलब्ध हो सकने वाला एक आयुर्वेदिक पौधा है. इसके लिए आपको पुदीने के पेस्ट का लेप एक माह तक अपने चेहरे पर करना होगा. इसके बाद आप देखेंगे कि पिंपल्स खत्म होने के साथ ही आपका चेहरा सुंदर हो जाएगा.

कपूर नारियल तेल

कपूर और नारियल का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाना भी एक बेहद कारगर घरेलू उपाय है पिंपल्स दूर करने का. आप इसे मिलाकरके मुँहासे के निशान पर लगाने के लगभग 10 मिनट बाद इसे धो लें, यह कील मुहाँसों का बेहद कारगर इलाज है .

राई

पिंलस दूर करने के लिए आप तीन चम्मच राई को पानी में भिगो दें. फिर सुबह मेन इसे ठीक से पीस लें. ध्यान रहे कि इतना ही पानी डालें जिससे आसानी से पेस्ट बन जाए. फिर इसे चेहरे पर लगायें और 20 मिनट बाद धो लें इससे भी आपके कील मुंहासे मिट जायेंगे.

करेला

करेले का नाम सुनकर ही कई लोग मुंह बनाने लगते हैं. लेकिन आपको बता दें कि करेला पिंपल्स को दूर करने के लिए बेहद उपयोगी है. इसके लिए आप दो करेला को धो-काटकर इसे आधा गिलास पानी में उबालें. इसके बाद इस पानी को पीएं इससे लाभ होगा.

टमाटर

टमाटर भी पिंपल्स दूर करने का एक कारगर घरेलू उपाय है. आप अपने चेहरे के काले दागों को मिटाने के लिए टमाटर के रस में रुई भिगोकर दागों पर मलें. ऐसा करने से काले धब्बे साफ हो जाएंगे. आप चाहें तो रोजाना सुबह एक गिलास टमाटर के रस में नमक, जीरा, कालीमिर्च मिलाकर इसका जूस भी ले सकते हैं.

आलू

आलू का इस्तेमाल कील-मुंहासों को दूर करने के लिए भी किया जाता है. इसके लिए आपको आलू को उबालना होगा. इसके बाद आलू से छिलका उतारकर इस छिलके को चेहरे पर रगड़ें. ऐसा करने से भी मुहांसे ठीक हो जाएंगे.

जामुन

जामुन स्वाद मेन कैसाला लेकिन स्वादिष्ट फल है. आप इससे पिंपल्स दूर करना चाहते हैं तो आपको इसकी गुठली को पानी के साथ घिसकर मुंहासों पर लगाना होगा. नियमित रूप से ऐसा करने पर आपको निश्चित रूप से लाभ होगा.

जायफल

जायफल को घिसकर इसमें 10 पिसी काली मिर्च और थोड़े कच्चे दूध में मिलाकर इसका पेस्ट बनाएं. फिर इस पेस्ट को आप अपने चेहरे पर लगाएं फिर इसके दो घंटे बाद अपना चेहरा साफ पानी से ठीक से चेहरा धो लें. ऐसा करना पिंपल्स मेन लाभदायक साबित होता है.

नींबू

त्वचा पर जहां कभी चकते हो उन पर नींबू का टुकड़ा रगड़े. नींबू में फिटकरी भरकर रगड़े. इससे चकते हल्के पड़ जाएंगे और त्वचा में निखार आएगा. नींबू के छिलके गर्दन पर रगडऩे से गर्दन का कालापन दूर होता है.

संतरे के छिलके

संतरे के छिलकों को सुखाकर पीस लें. इसमें नारियल का तेल व थोड़ा सा गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा कोमल बन जाती है. संतरे के छिलके व नींबू छिलके को बारीक पीसकर दूध में मिलाकर चेहरे पर लगाने से निखार आ जाता है.

मसूर की दाल और बरगद

मसूर की दाल और बरगद के पेड़ की नर्म पत्तियों के द्वारा भी आप कील-मुंहासों का उपचार कर सकते हैं. इसके लिए इसे पीसकर लेप करें अथवा दालचीनी पीसकर दूध की मलाई के साथ लगाने से लाभ होता है.

दही

मुंहसों को दूर करने के कारगर उपायों में दही का भी नाम आता है. इसके लिए आपको ज्यादा ताम-झाम भी नहीं करना है. बस आपको दही को उबटन की तरह इस्तेमाल करेना है और आपके पिंपल्स खत्म हो जाएंगे.

कच्चा दूध

नियमित रूप से सुबह में चेहरे की धुलाई करने से भी आपके चेहरे पर कोई भी दाग या कील मुहांसे नहीं रहते हैं. इसके साथ ही आपका चेहरा बिलकुल बे दाग और कांतिमय हो जायेगा, और आपको कोई भी क्रीम वगैरह लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.
 

Maintain Health!

MBBS,PGDCC
Cardiologist, Nagaon
Maintain Health!

Please try to manage atleast 30 minutes daily for own health.

Dentafix Oral Gyaan!

MDS - Periodontics, Certified Implantologist, BDS
Dentist, Panchkula
Dentafix Oral Gyaan!

Dentists prescribing too many antibiotics, says bccdc

While antibiotic prescription by other doctors is dropping, the opposite is true in field of dentistry.
 

Are You Satisfied With Your Penis Size?

MD - General Medicine
Sexologist, Delhi
Are You Satisfied With Your Penis Size?

Are You Satisfied With Your Penis Size?

Sex is considered as the most important part of a happy life. To lead a prosperous and happy life, it is necessary to have a very satisfactory sex life. Dissatisfaction in sex has ruined the happy marriages of millions of people. So, it is certainly a very pertinent question whether penis size has any influence on the sexual performance or not.

Researches have shown that the penis size really influences the sexual performance. As per research, larger the penis size and thicker is the volume, more is the pleasure. The researchers also provide reasons for that. The main reason for this is that during sexual intercourse the penis has to get inserted into the vaginal cavity. The penis having larger size and thicker volume gets rubbed with the vaginal wall causing the secretion of the enzyme which provides pleasure to both the partners.

According to this theory, it is utmost necessary to have a larger size and thicker volume to provide ultimate pleasure to the partner. The sexual satisfaction is necessary between partners to lead a happy life. The small size at most of the time results in the inferiority complex. Sometimes, the male partners avoid sexual intercourse with the partner because of the small size or inferiority complex . 

रोजाना 1 कप तुलसी की चाय कम करती है अर्थराइटिस का दर्द और शुगर लेवल!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS), MD - Ayurveda, Ph.d Arthritic Disorder
Ayurveda, Surat
पवित्र तुलसी को 'जड़ी बूटियों की रानी' के रूप में भी जाना जाता है। तुलसी भारत में सबसे पवित्र जड़ी बूटी के तौर पर माना गया है। हिंदू संस्‍कृति में तुलसी की पूजा की जाती है। यह आयुर्वेद में अपने औषधीय उपयोगों के लिए जाना जाता है जो इसे कई बीमारियों के लिए एक प्रभावी उपाय बनाता है। पवित्र तुलसी में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट की एक श्रृंखला होती है जो शरीर के ऊतकों को मुक्‍त कणों की क्षति से बचाने में मदद कर सकती है। तुलसी सभी रूपों में- सूखे, ताजे और पाउडर में कई उपचार गुण होते हैं।

1. श्वसन विकार में है लाभदायक

तुलसी चाय ठंड और खांसी से ब्रोंकाइटिस और अस्थमा तक की कुछ श्वसन बीमारियों को रोकने में मदद करती है। यह प्रतिरक्षा में वृद्धि करने में मदद करती है। खांसी से राहत दिलाती है। और श्लेष्म बाहर निकालने में मदद कर श्वसन प्रणाली में राहत प्रदान करती है। इसमें कुछ तेल हैं जो कंजक्‍शन को दूर करने में मदद करते हैं।

2. तनाव दूर करती है 

काफी कुछ अध्ययनों के मुताबिक, तुलसी चाय शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन के सामान्य स्तर को बनाए रखने में मदद करती है जिसे तनाव हार्मोन के नाम से जाना जाता है। यह कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है, जिससे आप तनाव मुक्त हो जाते हैं। वास्तव में, यह अवसाद के विभिन्न लक्षणों को कम करने के लिए जाना जाता है, जिसमें चिंता शामिल हो सकती है।

3. रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करती है 

नियमित दूध के बजाए तुलसी चाय पीएं क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है। तुलसी चाय का दैनिक सेवन कार्बो और वसा के चयापचय को सुविधाजनक बनाने में भी मदद कर सकता है। 

4. दांतों और मुख स्‍वास्‍थ्‍य के लिए है बेहतर 

तुलसी चाय में एंटी-माइक्रोबियल गुणों की उपस्थिति मुंह में हानिकारक बैक्टीरिया और रोगाणुओं के खिलाफ मुकाबला करने में मदद करती है। माउथ फ्रेशनर के रूप में कार्य करती है। इसके अलावा यह बदबूदार सांस को रोकती है। 

5. गठिया के दर्द के कम करे 

तुलसी में तेल में यूगेनॉल नामक एक घटक मौजूद होता है जो पाचन तंत्र के लिए लाभदायक होता है। साथ ही इस घटक में एंटी-इंफ्लामेट्री गुण भी पाए जाते हैं जो गठिया के दर्द को शांत करते हैं। 

What Is Dengue Fever?

BHMS, Diploma in Dermatology
Homeopath, Hyderabad
What Is Dengue Fever?

What Is Dengue Fever?

There The dengue virus is spread by mosquitos, mainly the Aedes Aegypti mosquito. These mosquitos are known to bite early in the morning and late in the night. Infections can be acquired by a single bite!

Medical records have shown that the Dengue fever has been around since as early as 1779. However, details on the transmission and the cause of the diseases came to light only in the 20th century.There The dengue virus is spread by mosquitos, mainly the Aedes Aegypti mosquito. These mosquitos are known to bite early in the morning and late in the night. Infections can be acquired by a single bite!

Medical records have shown that the Dengue fever has been around since as early as 1779. However, details on the transmission and the cause of the diseases came to light only in the 20th century.

Types:

Dengue is spread by several species of mosquito of the Aedes type, principally A. aegypti. The virus has five different types; infection with one type usually gives lifelong immunity to that type, but only short-term immunity to the others.

Causes:

Dengue fever is caused by any one of four types of dengue viruses spread by mosquitoes that thrive in and near human lodgings. When a mosquito bites a person infected with a dengue virus, the virus enters the mosquito. When the infected mosquito then bites another person, the virus enters that person's bloodstream.

After you've recovered from dengue fever, you have immunity to the type of virus that infected you ó but not to the other three dengue fever virus types. The risk of developing severe dengue fever, also known as dengue hemorrhagic fever, actually increases if you're infected a second, third or fourth time.

Symptoms:

Symptoms, which usually begin four to six days after infection and last for up to 10 days, may include

-Sudden, high fever
-Severe headaches
-Pain behind the eyes
-Severe joint and muscle pain
-Fatigue
-Nausea
-Vomiting
-Skin rash, which appears two to five days after the onset of fever
-Mild bleeding (such a nose bleed, bleeding gums, or easy bruising)

Sometimes, symptoms are mild and can be mistaken for those of the flu or another viral infection. Younger children and people who have never had the infection before tend to have milder cases than older children and adults. However, serious problems can develop. These include dengue hemorrhagic fever, a rare complication characterized by high fever, damage to lymph and blood vessels, bleeding from the nose and gums, enlargement of the liver, and failure of the circulatory system. The symptoms may progress to massive bleeding, shock, and death. This is called dengue shock syndrome (DSS).
People with weakened immune systems as well as those with a second or subsequent dengue infection are believed to be at greater risk for developing dengue hemorrhagic fever.

Diagnosis:

Doctors can diagnose dengue infection with a blood test to check for the virus or antibodies to it. If you become sick after traveling to a tropical area, let your doctor know. This will allow your doctor to evaluate the possibility that your symptoms were caused by a dengue infection.

Role of Homeopathy in Dengue Fever:

The Homeopathic medicines are time tested and have been in use for almost two centuries. They have been used all over the world and have shown very good results. The reason for this almost miraculous result is that Homeopathy does not try to tame individual viruses. It just strengthens the bodyís immunity and allows it to form antibodies against the offending antigens. These offending antigens may be viruses or bacteria; it does not matter. Nature has provided a very robust immune system to humans. This immune system is capable of dealing with such threats. At times, it just needs a little gentle support and this is all that is needed to help the immunity do the job it is meant for.

Diet and non diet:

PAtient suffering from dengue needs to have sufficient intake of nutrients and healthy diet to overcome the loss caused by the dengue. Diet for dengue should include the following: Easily digestible food e.g boiled food, green vegetables, banana, apple, soups, porridge, and herbal tea

What Is Dengue Fever?

BHMS
Homeopath, Hyderabad
What Is Dengue Fever?

What Is Dengue Fever?

There The dengue virus is spread by mosquitos, mainly the Aedes Aegypti mosquito. These mosquitos are known to bite early in the morning and late in the night. Infections can be acquired by a single bite!

Medical records have shown that the Dengue fever has been around since as early as 1779. However, details on the transmission and the cause of the diseases came to light only in the 20th century.There The dengue virus is spread by mosquitos, mainly the Aedes Aegypti mosquito. These mosquitos are known to bite early in the morning and late in the night. Infections can be acquired by a single bite!

Medical records have shown that the Dengue fever has been around since as early as 1779. However, details on the transmission and the cause of the diseases came to light only in the 20th century.

Types:

Dengue is spread by several species of mosquito of the Aedes type, principally A. aegypti. The virus has five different types; infection with one type usually gives lifelong immunity to that type, but only short-term immunity to the others.

Causes:

Dengue fever is caused by any one of four types of dengue viruses spread by mosquitoes that thrive in and near human lodgings. When a mosquito bites a person infected with a dengue virus, the virus enters the mosquito. When the infected mosquito then bites another person, the virus enters that person's bloodstream.

After you've recovered from dengue fever, you have immunity to the type of virus that infected you ó but not to the other three dengue fever virus types. The risk of developing severe dengue fever, also known as dengue hemorrhagic fever, actually increases if you're infected a second, third or fourth time.

Symptoms:

Symptoms, which usually begin four to six days after infection and last for up to 10 days, may include

-Sudden, high fever
-Severe headaches
-Pain behind the eyes
-Severe joint and muscle pain
-Fatigue
-Nausea
-Vomiting
-Skin rash, which appears two to five days after the onset of fever
-Mild bleeding (such a nose bleed, bleeding gums, or easy bruising)

Sometimes, symptoms are mild and can be mistaken for those of the flu or another viral infection. Younger children and people who have never had the infection before tend to have milder cases than older children and adults. However, serious problems can develop. These include dengue hemorrhagic fever, a rare complication characterized by high fever, damage to lymph and blood vessels, bleeding from the nose and gums, enlargement of the liver, and failure of the circulatory system. The symptoms may progress to massive bleeding, shock, and death. This is called dengue shock syndrome (DSS).
People with weakened immune systems as well as those with a second or subsequent dengue infection are believed to be at greater risk for developing dengue hemorrhagic fever.

Diagnosis:

Doctors can diagnose dengue infection with a blood test to check for the virus or antibodies to it. If you become sick after traveling to a tropical area, let your doctor know. This will allow your doctor to evaluate the possibility that your symptoms were caused by a dengue infection.

Role of Homeopathy in Dengue Fever:

The Homeopathic medicines are time tested and have been in use for almost two centuries. They have been used all over the world and have shown very good results. The reason for this almost miraculous result is that Homeopathy does not try to tame individual viruses. It just strengthens the bodyís immunity and allows it to form antibodies against the offending antigens. These offending antigens may be viruses or bacteria; it does not matter. Nature has provided a very robust immune system to humans. This immune system is capable of dealing with such threats. At times, it just needs a little gentle support and this is all that is needed to help the immunity do the job it is meant for.

Diet and non diet:

PAtient suffering from dengue needs to have sufficient intake of nutrients and healthy diet to overcome the loss caused by the dengue. Diet for dengue should include the following: Easily digestible food e.g boiled food, green vegetables, banana, apple, soups, porridge, and herbal tea

Benefit Of Mouthwashes!

MDS - Orthodontics, BDS
Dentist, Meerut
Benefit Of Mouthwashes!

Mouthwashes containing listerine are very helpful as they help to kill the bacteria in the mouth, maintain good breath & maintain strong teeth.

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