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Swaasthya Ayurvedic Center

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No 19 / 21 -1 Dathatreya Cross Nr Base Institute Bull Temple Rd . Basavanagudi Bangalore - 560004 Bangalore
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Swaasthya Ayurvedic Center is known for housing experienced Ayurvedas. Dr. Roopa, a well-reputed Ayurveda, practices in Bangalore. Visit this medical health centre for Ayurvedas recommended by 60 patients.

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Location

No 19 / 21 -1 Dathatreya Cross Nr Base Institute Bull Temple Rd . Basavanagudi Bangalore - 560004
Basavanagudi Bangalore, Karnataka - 560004
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Doctor in Swaasthya Ayurvedic Center

Dr. Roopa

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda
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What is the best diet for lunch/dinner I can have to reduce cholesterol? Please suggest me.

MBBS
General Physician, Udaipur
What is the best diet for lunch/dinner I can have to reduce cholesterol? Please suggest me.
Just intake almonds, cashews which is help to build hdl which is good cholesterol. For more details kindly take online consultation.

काला नमक के फायदे - Kala Namak Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
काला नमक के फायदे - Kala Namak Ke Fayde!

काला नमक स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई गुणों से भरपूर होता है. काला नमक के अनेक फायदे हैं. विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में मिलाकर इसका उपयोग किया जाता है. इसके सेवन से भोजन का स्वाद तो बढ़ता ही है, इसके अलावा यह हमें कई प्रकार से स्वास्थ्य लाभ देता है. काला नमक जी मचलना, कब्ज, पेट में जलन, पेट संबंधी कई बीमारियों या मॉर्निंग सिकनेस सहित कई व्याधि में फायदेमंद होता है. आयुर्वेदिक उपचार में काला नमक का प्रयोग एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में होता है. काला नमक में सोडियम क्लोराइड, सोडियम सल्फेट, सोडियम बाइसल्फेट, सोडियम सल्फाइड, हाइड्रोजन सल्फाइड इत्यादि रहता है. जिस कारण से काला नमक कई गुणों से भरपूर होता है. काला नमक के कई स्वास्थ्य लाभ हैं. आइये काला नमक के फायदे के बारे में जानते हैं.

काला नमक के फायदे

कब्ज व पाचन क्रिया सुधारने में फायदेमंद: - काला नमक का उपयोग पेट में जलन, कब्ज सहित कई प्रकार के पेट के बीमारियों में किया जाता है. पाचन क्रिया सुधारने के लिए भोजन में काला नमक का प्रयोग करना चाहिए. सलाद में काला नमक का प्रयोग किया जा सकता है.

साइनस, एलर्जी व अस्थमा में उपयोगी: - गला में खराश की वजह से श्वास लेने में परेशानी हो रहा हो या अस्थमा की शिकायत हो तो काला नमक का सेवन करना चाहिए. श्वसन संबंधी विकार में काला नमक लाभकारी होता है. साइनस व एलर्जी में भी काला नमक उपयोगी होता है.

गैस की समस्या में उपयोगी: - पेट में गैस बनने की समस्या में काला नमक फायदेमंद होता है. यह पाचन में सुधार करता है व एसिड रिफ्लक्स को कम करता है. आंतों में बनने वाले गैस से तत्काल राहत पाने के लिए काला नमक का घरेलू उपचार किया जा सकता है. इसके लिए तांबा के बर्तन में एक गिलास पानी में एक चम्मच काला नमक मिलाकर हल्का आंच पर तब तक गर्म करना चाहिए जबतक कि पानी का रंग बदल न जाए. जब एक चौथाई पानी रह जाए तब इस पानी का सेवन करना चाहिए.

पेट व सीने में जलन के इलाज में लाभकारी: - काला नमक खनिजों से भरपूर होता है व यह क्षारीय प्रकृति का होता है, जो पेट में अम्ल उत्पादन को संतुलित करता है. इस गुण के कारण पेट व सीने में जलन के इलाज में काला नमक का उपयोग किया जाता है.

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक: - नियमित रूप से साधारण नमक के प्रयोग के बजाय काला नमक का सेवन करने से अस्थिर कोलेस्ट्रॉल का स्तर स्थिर हो सकता है. काला नमक रक्त के पतलेपन में मदद करता है जिससे शरीर में रक्त का प्रवाह सही ढंग से होता है. इस प्रकार काला नमक हाई कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप को कम करने में मदद करता है.

हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है: - हड्डियों को ताकत देने के लिए कैल्शियम के अलावा मिनरल्स (नमक) की भी बहुत जरूरी होती है. काला नमक में कई सारे खनिज लवण पाये जाते हैं. ओस्टियोपोरोसिस में हड्डियों में सोडियम की कमी हो जाती है जिससे हड्डियों की ताकत कम हो जाती है. इस समस्या को काला नमक से रोका जा सकता है. एक चुटकी काला नमक को बहुत सारे पानी के साथ सेवन करना चाहिए.

मांसपेशियों के ऐंठन से राहत दिलाता है: - काला नमक में पोटैशियम पाया जाता है, जो हमारे मांसपेशियों के लिए बहुत ही आवश्यक है. काला नमक मांसपेशियों की दर्दनाक ऐंठन से राहत दिलाने में मदद करता है. मांसपेशियों के दर्द और ऐंठन में नियमित रूप से उपयोग किए जाने वाले साधारण नमक के स्थान पर काला नमक का उपयोग करना चाहिए.

डिप्रेशन के उपचार में लाभकारी: - काला नमक दो हार्मोन मेलेटोनिन और सेरोटोनिन को संरक्षित करने में मदद करता है. यह हार्मोन अच्छी नींद के लिए आवश्यक है. अपने इस गुण के कारण काला नमक डिप्रेशन (अवसाद) के उपचार में लाभकारी हो सकता है.

ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक: - शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में काला नमक बहुत ही प्रभावी पाया जाता है. इसलिए डायबिटीज (मधुमेह) के मरीज को साधारण नमक के स्थान पर काला नमक का सेवन करना अच्छा रहता है.

बच्चों को बीमारियों से रखे दूर: - काला नमक अपच और कफ सहित कई बीमारियों का इलाज में सहायक है. बच्चों के लिए काला नमक का सेवन अच्छा होता है. पाचन व गैस्ट्रिक समस्या दूर करने के लिए नियमित रूप से बच्चे के आहार में एक चुटकी काला नमक मिलाना चाहिए. खांसी के इलाज के लिए भी बच्चे को काला नमक के दाने चबाने के लिए दे सकते हैं. शहद के साथ भी काला नमक का प्रयोग किया जा सकता है.

सूजन व मुहाँसे में लाभकारी: - काला नमक पैर या शरीर के किसी भी भाग में सूजन या मुँहासे में लाभकारी होता है. नहाने के पानी में थोड़ा काला नमक मिलाकर फिर उस पानी से स्नान करना ठीक रहता है. पर यहाँ यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए. क्लींजर या स्क्रब में थोड़ा काला नमक मिलाकर प्रयोग करने से यह त्वचा को एक अलग चमक प्रदान करता है. यह रोम के छिद्र खोलता है व त्वचा को तेल मुक्त बनाता है. यह त्वचा में चमक प्रदान करता है व मुंहासा भी ठीक करता है.

रूसी (डैंड्रफ) के इलाज में सहायक: - रूसी के इलाज में भी काला नमक उपयोगी होता है. यदि रूसी हो या बाल गिरने के समस्या हो तो टमाटर के रस में काला नमक मिलाकर इसे सिर पर यानि बाल के जड़ में लागाना चाहिए. यह रूसी को समाप्त कर देगा व आगे रूसी बढ़ने से रोकेगा.

कद्दू के बीज के फायदे - Kaddu Ke Beej Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
कद्दू के बीज के फायदे - Kaddu Ke Beej Ke Fayde!

कद्दू के साथ-साथ कद्दू के बीज में भी कई पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं. कद्दू के बीज के कई फायदे हैं. कद्दू के बीज में मैंगनीज, मैग्नीशियम, फास्फोरस, तांबा, जस्ता, आयरन, ट्रिप्टोफेन और प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन ई, विटामिन के, विटामिन सी और विटामिन बी पाये जाते हैं. इसके अलावा कद्दू के बीज में अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन और आवश्यक फैटी एसिड के अलावा फेनोलिक और फ्री रेडिकल को खत्म करने के वाले एंटीऑक्सीडेंट भी पाये जाते हैं. कद्दू के बीज कई प्रकार के पौष्टिक गुणों से भरपूर होते हैं. आगे हम कद्दू के बीज के फायदे के बारे में चर्चा करेंगे.

कद्दू के बीज के फायदे-
खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है: - कद्दू के बीज को नियमित खाने से यह शरीर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल LDL के स्तर को कम करता है व अच्छा कोलेस्ट्रॉल HDL को बढ़ाता है. इसके अलावा यह एथेरोस्लेरोसिस और रक्त के जमने से रोकता है. खराब कोलेस्ट्रॉल LDL के स्तर को कम करने के लिए भुने हुये कद्दू के बीज के 2 से 4 चम्मच रोज खाना चाहिए.

मधुमेह के रोगी के लिए फायदेमंद: - एक अध्ययन से पता चला है कि कद्दू के बीज इंसुलिन को नियमित करता है और तनाव को कम करके मधुमेह की समस्या को रोकता है. कद्दू के बीज के तेल में फाइटोकेमिकल्स यौगिक पाया जाता है जो डायबिटिक नेफ्रोपैथी को रोकने में मदद करता है. मधुमेह के रोगी को रोज नाश्ते में 2 बड़े चम्मच भुने हुये कद्दू के बीज का सेवन करना चाहिए.

चिंता कम करने में सहायक: - जब हमारे शरीर में ट्रिप्टोफेन कम होता है तब चिंता, अवसाद और अन्य मूड संबंधित समस्याएँ जन्म लेती हैं. कद्दू के बीज में ट्रिप्टोफेन एमिनो एसिड पाया जाता है, जो चिंता को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा कद्दू के बीज में विटामिन बी और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है जो तंत्रिका तंत्र को अच्छी तरह काम करने में मदद करता है और चिंता को कम करके तंत्रिका तंत्र को शांत करता है. तनाव महसूस करने पर अपने तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए भुने हुए कद्दू के बीज खाना चाहिए.

गठिया में लाभदायक: - कद्दू के बीज के तेल में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाया जाता जो गठिया के इलाज में फायदेमंद है. यह जोड़ों में दर्द और सूजन कम करने में मदद करता है. पुराने आस्टियोआर्थराइटिस और रुमेटाइड गठिया में कद्दू के बीज लाभदायक होता है. गठिया से संबंधित सूजन को कम करने के लिए प्रभावित हिस्से पर कद्दू के बीज के तेल से प्रतिदिन दो बार दो मिनट के लिए मालिश करना चाहिए. इसके अलावा कद्दू के बीज को अपने आहार में भी शामिल करना चाहिए.

मूत्राशय के उपचार में लाभदायक: - कद्दू के बीज मूत्राशय के कार्य को अच्छा करता है और यह अतिसक्रिय मूत्राशय को कम करता है. यह प्रोस्टेट के बढ़ने – BPH के इलाज में भी मदद करता है. इसमें मौजूद जस्ता प्रोस्टेट को स्वस्थ रखता है और मूत्र प्रवाह को बेहतर करता है व रात को होने वाले अधिक मूत्र प्रवाह को कम करता है. BPH के उपचार के लिए रोज एक मुट्ठी भुने हुये कद्दू के बीज खाना चाहिए.

हड्डियों को स्वस्थ रखता है: - कद्दू के बीज में मैग्नीशियम, फास्फोरस व जिंक पाया जाता है. जो हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार करता है और आस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है. ये हड्डी के फ्रेक्चर के जोखिम को कम करता है. रोज चौथाई कप कद्दू के बीज के सेवन से हड्डियों की कमजोरी और आस्टियोपोरोसिस के लक्षण को कम किया जा सकता है.

हार्ट अटैक और स्ट्रोक को रोकने में मदद करता है: - कद्दू के बीज में मैग्नीशियम पाया जाता है जो दिल के पंपिंग कार्य और रक्त वाहिकाओं के रिलेक्सेशन सहित कई महत्वपूर्ण हृदय कार्य में मदद करता है. यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है और हृदय रोग जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक रोकने में मदद करता है. इसके अलावा कद्दू में तांबा भी पाया जाता है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिका को बढ़ाने में मदद करता है और ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह ठीक करता है. कद्दू में पाया जाने वाला स्वस्थ वसा, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर दिल के लिए फायदेमंद होता है. हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए अपने आहार में कद्दू के बीज को शामिल करना फायदेमंद रहता है.

पेट के कीड़े के समस्या में फायदेमंद: - कद्दू के बीज में एंटी पैरासिटिक गुण होते हैं, जो आंत के कीड़े जैसे टेपवार्म, पिनवार्म इत्यादि को शक्तिहीन बनाते हैं. वैसे कद्दू के बीज कीड़े को मारते नहीं हैं बल्कि उन्हें शक्तिहीन करके उन्हें आंतों की दीवारों पर चिपकने से रोकते हैं. आंतों के कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए रोज खाली पेट कद्दू के बीज चबाना चाहिए और कीड़े को बाहर निकालने के लिए खूब पानी पीना चाहिए. ऐसा कुछ हफ्तों तक करना चाहिए.

अच्छी नींद के लिए फायदेमंद: - कद्दू के बीज में ट्रिप्टोफेन पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन में परिवर्तित हो जाता है और फिर यह मेलेटोनिन में परिवर्तित होता है. सेरोटोनिन और मेलेटोनिन रात के समय अच्छी नींद लाते हैं. कद्दू में जस्ता पाया जाता है जो ट्रिप्टोफेन को सेरोटोनिन में परिवर्तित करने में मदद करता है. कद्दू के बीज के इस गुण के कारण अच्छी नींद पाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है. अच्छी नींद पाने के लिए रात में सोने से एक घंटे पहले एक गिलास गरम दूध में एक बड़ा चम्मच कद्दू के बीज के पाउडर को मिलकर पीना चाहिए.

प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में सहायक: - कद्दू के बीज में जस्ता (जिंक) अधिक मात्रा में पाया जाता है जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके अलावा कद्दू के बीज में एंटीऑक्सीडेंट होता है जो हमें स्वस्थ व रोगमुक्त रहने के लिए आवश्यक होता है. कद्दू के बीज में सेलेनियम भी पाये जाते हैं जो फ्री रेडिकल को रोकने में मदद करता है. प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने, चपापचय में सुधार करने व ऊर्जा स्तर को बढ़ाने के लिए रोज सुबह एक मुट्ठी कद्दू के बीज का सेवन करना चाहिए.

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कंडोम के नुकसान - Condom Ke Nuksan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
कंडोम के नुकसान - Condom Ke Nuksan!

कंडोम (या कॉन्डोम) का इस्तेमाल संतति नियमन के लिए किया जाता है. दरअसल ये पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक का एक रूप होने के साथ ही यौन संक्रामक संक्रमण (एसटीआई) से सुरक्षा प्रदान करने का काम भी करता है. इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ये है कि ये बहुत ही सस्ता होता है, इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान होने के साथ ही इसके उपयोग से कोई नुकसान भी नहीं होता है. इन सब वजहों से सुरक्षित यौन जीवन के लिए शायद ही कंडोम से बेहतर कोई साधन है. लेकिन जाहीर है कि हर चीज के इस्तेमाल में कुछ नुकसान भी होते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हम कंडोम के नुकसान के बारे में जानें ताकि इसके संभावित खतरों को कम किया जा सके.

क्या है कंडोम?

कंडोम लेटेक्स , प्लास्टिक या लंबस्किन से बने छोटे, पतले पाउच हैं, जो सेक्स के दौरान आपके लिंग को ढकने और स्पर्म स्टोर करने का कार्य करते हैं. इस प्रकार से कंडोम स्पर्म को वेजाइना में प्रवेश होने से रोकता है जिससे शुक्राणु का अंडे के साथ मिलन नहीं हो पाता है और गर्भधारण नहीं होता है. कंडोम से पेनिस को कवर करके एसटीडी को भी रोका जा सकता है. इसके बिना स्पर्म और वेजाइनल फ्लूइड में संपर्क होता है जिससे यौन संचारित संक्रमण फैल सकता है. इस बात का ध्यान रखें कि लंबस्किन कंडोम एसटीडी के खिलाफ प्रभावी नहीं होते हैं. इससे सिर्फ लेटेक्स और प्लास्टिक कंडोम ही सुरक्षा करते हैं.

कंडोम के नुकसान-
कंडोम को लगाना मूड खराब करने वाला माना जाता है, क्योंकि इसको लगाने के लिए रुकने से मूड बर्बाद हो जाता है और उत्तेजना भी पहले जैसी नहीं रहती है. यह यौन क्रियाओं के क्रम को तोड़कर सेक्स से पूर्व की क्रिया (फोरप्ले) और सेक्स में दखल देता है. पुरुष कंडोम गलत तरीके से उपयोग किए जाने पर निकल या फट सकते हैं.
कई पुरुष शिकायत करते हैं कि कंडोम को लगाने के बाद वे लिंग में उत्तेजना बरक़रार नहीं कर पाते हैं. इस प्रकार की असुविधा आम तौर पर सामान्य-मोटाई वाले कंडोम में अनुभव की जाती है. अल्ट्रा थिन कंडोम का उपयोग करके देखना चाहिए, जो समान सुरक्षा प्रदान करता है.

लेटेक्स से एलर्जी कंडोम के इस्तेमाल की एक और सीमा है. लेटेक्स कंडोम के रसायनों के प्रति संवेदनशील लोगों को पॉलीयुरेथेन के बने कंडोम का उपयोग करना चाहिए. इसके अलावा, तेल आधारित लुब्रिकेंट्स (हाइपोएलर्जेनिक कंडोम), जैसे - शरीर पर इस्तेमाल किये जाने वाले तेल या लोशन, कभी भी लेटेक्स कंडोम के साथ प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए. तेल मिनटों में ही लेटेक्स को घोल सकते हैं और कंडोम को नुकसान पंहुचा सकते हैं.
कंडोम घर्षण को बढ़ाता है और कभी-कभी बहुत अधिक घर्षण के लिए जिम्मेदार होता है. बहुत अधिक घर्षण लिंग के प्रवेश को मुश्किल बना देता है.

पुरुष कंडोम इस्तेमाल करने का तरीका-

  • सबसे पहले कंडोम पैक की जांच करके यह सुनिश्चित करें कि समाप्ति की तारीख पारित निकली तो नहीं है.
  • पैकेट को सावधानी से खोलें नाखूनों, अंगूठियां और दांत से कंडोम फट सकता हैं, इसलिए सावधानी रखें.
  • सुनिश्चित करें कि लिंग कंडोम द्वारा कवर किए जाने से पहले साथी की योनि, मुंह या गुदा को नहीं छूता है.
  • कंडोम उल्टा तो नहीं है पहनने से पहले एक बार जांच लें.
  • कंडोम की नोक से हवा को हटाने के लिए कंडोम की नोक को चुटकी में दबाएं.
  • पूर्णतः उत्तेजित लिंग के मुँह पर कंडोम की नोक को कुटकी में पकड़े हुए इसे नीचे की तरफ रोल करें.
  • अगर चिकनाई बढ़ाना चाहते है तो केवल पानी आधारित लुब्रीकेंट (जैसे KY जेली, गीला पदार्थ, सिल्क और टॉप जेल) का प्रयोग करें.


तेल-आधारित लुब्रिकेंट्स जैसे कि वेसिलीन से लेटेक्स या रबर कंडोम को फाड़ सकते हैं.

वीर्यस्राव के बाद और जब लिंग योनि से बाहर करते है तो कंडोम को पकड़ लें ताकि यह लिंग से फिसले ना और वीर्य योनि पर न फैले.

  • टिश्यू या टॉयलेट पेपर में उपयोग किये गए कंडोम को लपेटें और उसे कचरे के बॉक्स में डाल दें.
  • हर बार जब आप सेक्स करते हैं तो एक नए कंडोम और चिकनाई का प्रयोग करें! अन्त में, कंडोम के साथ गोली, रिंग, शॉट, इम्प्लांट या आईयूडी जैसे जन्म नियंत्रण के अन्य रूपों का उपयोग करना एक अच्छा विचार है.
  • यह गर्भावस्था को रोकने में मदद कर सकता है. यदि आप गलती करते हैं या कंडोम फट जाता हैं, तो भी ये आपको अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं. यदि आपके साथ कंडोम दुर्घटना हो जाती है लेकिन आप किसी अन्य जन्म नियंत्रण पद्धति का उपयोग भी नहीं कर रहे हैं, तो आपातकालीन गर्भनिरोधक (मॉर्निंग-आफ्टर पिल) असुरक्षित यौन संबंध के 5 दिनों तक गर्भावस्था को रोकने में मदद कर सकती है.

Tips For Prevention Of Dengue!

MBBS, MD, PG Fellowship in Diabetes, Diploma in Diabetology
General Physician, Gurgaon
Tips For Prevention Of Dengue!

Clothing: reduce the amount of skin exposed by wearing long pants, long-sleeved shirts, and socks, tucking pant legs into shoes or socks, and wearing a hat.
Mosquito repellents: use a repellent with at least 10 percent concentration of diethyltoluamide (deet), or a higher concentration for longer lengths of exposure. Avoid using deet on young children.

Mosquito traps and nets: nets treated with insecticide are more effective, otherwise the mosquito can bite through the net if the person is standing next to it. The insecticide will kill mosquitoes and other insects, and it will repel insects from entering the room.

Door and window screens: structural barriers, such as screens or netting, can keep mosquitos out.

Avoid scents: heavily scented soaps and perfumes may attract mosquitos.

Camping gear: treat clothes, shoes, and camping gear with permethrin, or purchase clothes that have been pretreated.

Timing: try to avoid being outside at dawn, dusk, and early evening.

Stagnant water: the aedes mosquito breeds in clean, stagnant water. Checking for and removing stagnant water can help reduce the risk.

To reduce the risk of mosquitoes breeding in stagnant water:

  • Turn buckets and watering cans over and store them under shelter so that water cannot accumulate
  • Remove excess water from plant pot plates
  • Scrub containers to remove mosquito eggs
  • Loosen soil from potted plants, to prevent puddles forming on the surface
  • Make sure scupper drains are not blocked and do not place potted plants and other objects over them
  • Use non-perforated gully traps, install anti-mosquito valves, and cover any traps that are rarely used
  • Do not place receptacles under an air-conditioning unit
  • Change the water in flower vases every second day and scrub and rinse the inside of the vase
  • Prevent leaves from blocking anything that may result in the accumulation of puddles or stagnant water.

Muscular Dystrophy & Homeopathic Solution!

BHMS & MD, MCAH
Homeopath, Vijayawada
Muscular Dystrophy & Homeopathic Solution!

Muscular Dystrophy-

Muscular Dystrophy is not a single disease but a group of hereditary muscle-destroying disorders. There are more than 30 types of these disorders, vary in their inheritance pattern, rate of progression, initial muscle attacked and age of onset.

The skeletal muscles are the main group of muscles affected by this disorder. The skeletal muscles are used during voluntary body movements. There are progressive weakness and degeneration of these group of muscles.

The disease may occur in adulthood or childhood, but the more severe form tends to occur in early childhood.

Causes of Muscular Dystrophy

It is an inherited disorder, means it is passed down through generations in a family. Many cases occur from spontaneous mutation, that is not found in genes of either of the parent, and this defect can be passed to the next generation.

Symptoms of Muscular Dystrophy

The day to day activities of the patient is affected. Some of them are

  • inability to walk
  • poor balance
  • loss of bowel control
  • drooping eyelids
  • waddling gait
  • respiratory difficulty
  • limited range of movements
  • frequent falls
  • loss of strength in a muscle or a group of muscles as an adult
  • low muscle tone (hypotonia)
  • joint contracture (club foot, claw hand or others)
  • abnormally curved spine (scoliosis)

Some types involve heart muscles, causing cardiomyopathy or disturbed heart rhythm (arrhythmias)

Diagnosis of Muscular Dystrophy:

The diagnosis is based on the combination of characteristic clinical presentation and the results of a muscle biopsy.

Prognosis of Muscular Dystrophy-

There is no remission in this disease. The severity of the disability depends on the type of muscular dystrophy. Some cases may be mild and progress very slowly over a normal lifespan, while others produce severe muscle weakness and functional disability. All types of Muscular Dystrophy slowly get worse, but how fast this happens varies widely.

Treatment of Muscular Dystrophy-

It is not an incurable disorder, rather a genetic disorder for which no satisfactory treatment has been found in any system of medicine.

The treatment is aimed at controlling the symptoms.

The progressive loss of muscle mass is primarily responsible for reduced quality and length of life. The drug treatment is based on slowing the process of muscle degeneration and thus improvement of the quality of life. Corticosteroids are known to extend the ability of these patients to walk but have substantial side effects and their mechanism of action is unknown.

Inactivity (such as bed rest and sitting for long periods) can worsen the disease.

Physical therapy, exercises, orthopedic instruments (wheelchairs and standing frames), speech therapy and corrective orthopedic surgeries may help to preserve muscle function and prevent joint contractures.

Occupational therapy may be given as a supportive line of therapy for being self-sufficient to do daily activities (self-care, self-feeding, etc)

Homeopathic treatment for Muscular Dystrophy

Homeopathic treatment helps to slow down the process of muscular degeneration and can work on bringing some symptomatic relief, such as improving muscle power. It is aimed at a better quality life.

Homeopathic medicines are prescribed after the detailed case study consisting of the physical, emotional and genetic makeup of an individual. Homeopathic medicines help to reduce muscle weakness and control disease progression. There are some specific Homeopathic remedies, which help for muscle paralysis and weakness and which have been found effective in the treatment of Muscular Dystrophy. Homeopathic treatment is recommended.

My wife is 28 years old and she is very slim. Her weight is only 40 kg. Please consult me any medicine for weight gain. She is very much upset for her health. Her height is 5.5.

M.Sc - Dietitics / Nutrition, Diploma in Naturopathy & Yogic Science (DNYS)
Dietitian/Nutritionist, Vadodara
My wife is 28 years old and she is very slim. Her weight is only 40 kg. Please consult me any medicine for weight gai...
Hello, To gain weight include protein-rich foods which include pulses, milk and milk products, eggs and chicken, should have fiber rich foods which help you to pass smooth bowels. Protein rich foods will help you gain muscle mass. Have 5 pieces of any dry fruit once a day daily. Have fruits and vegetables in good quantity. Do 30 minutes of exercise daily. Thank you.

Energy Centre & Three Principle Energies In Our Body!

MSC in Nutrition & Dietetics, BSc in Food Nutrition & Dietetics
Dietitian/Nutritionist, Thane
Energy Centre & Three Principle Energies In Our Body!

According to Ayurveda, our body has energy center & three principle energies circulate in our body. They are known as doshas.

Tri-doshas are - 

1) Vata

2) Pitta

3) Kapha

Any disease can be prevented if our doshas are in balance. If our dosha goes out of balance then it can lead to an accumulation of toxins in our bodies. 

The doshas govern all physical, mental, & emotional processes. Every individual has a unique combination of these elements. 

#vata time (2am-6am & 2pm-6pm)
Vata means transition. It is the best time for creative work, ideas, problem-solving. 
2am-6pm is the best time to do meditation, prayer, yoga, & other spiritual practices.

#pitta time (10am-2pm & 10pm-2am)
It refers to Agni or digestive fire which is strongest at this time (10am-2pm). So, have the heaviest meal of the day at this time as our digestive fire is strongest in the afternoon. Make sure you eat your lunch before 2 pm. 
But, at night (10pm-2am) avoid eating, as it’s the time when our body is busy digesting the food we ate throughout the day. Try to sleep by 10 pm or max by 11 pm as you might end up munching on something at this time.

#kapha time (6am-10am & 6pm-10pm)
The best time to wake up before 6 am, as kapha becomes dominant at 6 am. Kapha is heavy and sluggish. So if you wake up during this period, then you’ll probably feel very heavy & won’t feel like waking up. It’s the best time to exercise to get your heart pumping & give an energetic start to your day. Have a light breakfast with some spices added to your meal. Light breakfast because Kapha will make you feel heavy.

Food For Healthy Skin!

MBBS, MD - Dermatology
Dermatologist, Bhubaneswar

Consuming foods which contain essential fatty acids like almonds, sunflower seeds and flax seeds can prove to be healthy for the skin and reduce inflammation which accelerates fine lines, sagging and blotchiness.

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What Is PCOD (Polycystic Ovarian Disease)?

MBBS, MD, PG Fellowship in Diabetes, Diploma in Diabetology
General Physician, Gurgaon
What Is PCOD (Polycystic Ovarian Disease)?

Polycystic ovary syndrome (PCOS), also known as a polycystic ovarian syndrome, is a common health problem caused by an imbalance of reproductive hormones. The hormonal imbalance creates problems in the ovaries. The ovaries make the egg that is released each month as part of a healthy menstrual cycle. With PCOS, the egg may not develop as it should or it may not be released during ovulation as it should be.

PCOS can cause missed or irregular menstrual periods. Irregular periods can lead to:

Infertility (inability to get pregnant). In fact, PCOS is one of the most common causes of infertility in women.
Development of cysts (small fluid-filled sacs) in the ovaries.

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