Common Specialities
{{speciality.keyWord}}
Common Issues
{{issue.keyWord}}
Common Treatments
{{treatment.keyWord}}
Call Clinic
Book Appointment

Astha Clinic

Homeopath Clinic

Prakash Road, Nagra Ajmer
1 Doctor · ₹500
Book Appointment
Call Clinic
Astha Clinic Homeopath Clinic Prakash Road, Nagra Ajmer
1 Doctor · ₹500
Book Appointment
Call Clinic
Report Issue
Get Help
Services
Feed

About

We are dedicated to providing you with the personalized, quality health care that you deserve....more
We are dedicated to providing you with the personalized, quality health care that you deserve.
More about Astha Clinic
Astha Clinic is known for housing experienced Homeopaths. Dr. Rajesh Khandelwal, a well-reputed Homeopath, practices in Ajmer. Visit this medical health centre for Homeopaths recommended by 42 patients.

Timings

MON-SUN
10:30 AM - 01:30 PM

Location

Prakash Road, Nagra
Ajmer, Rajasthan - 305001

Doctor in Astha Clinic

4 Years experience
500 at clinic
₹300 online
Unavailable today
View All
View All

Services

View All Services

Submit Feedback

Submit a review for Astha Clinic

Your feedback matters!
Write a Review

Feed

Nothing posted by this doctor yet. Here are some posts by similar doctors.

एंटी एजिंग उपाय - Anti Aging Upay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
एंटी एजिंग उपाय - Anti Aging Upay!

एंटी एजिंग का मतलब है बढ़ते हुए उम्र के प्रभाव को कम करना. जाहिर है बढ़ती उम्र का स्पष्ट प्रभाव हमारे त्वचा पर ही नजर आता है. त्वचा में झुर्रियां और ढीलापन आने लगता है. यदि आप अपने त्वचा को एजिंग के प्रभाव से बचा सकते है तो आप बड़े आसानी से अपनी बढती उम्र के प्रभाव को कम कर सकते हैं. जब आपकी त्‍वचा से चमक गायब होने लगता है तब आप बूढ़े दिखने शुरु हो जाते हैं. इसलिए आपको हमेशा अपनी त्‍वचा पर ध्‍यान देना चाहिए. चेहरे की चमक को बरकरार रखने के लिये बाजारू उत्पादों की जगह हमेशा प्राकृतिक उपचार का सहारा लेना चाहिए जिससे अंदर से निखार आ सके. आइए इस लेख के माध्यम से हम एंटी एजिंग के विभिन्न उपायों को जानें.

1. त्वचा की नियमित देखभाल करें-

आपको रोजाना त्वचा की देखभाल के लिए सीटीएम यानी क्लिंजिंग-टोनिंग-म्यॉस्चुराइज़िंग करना चाहिए. इस स्किन केयर रिजीम को दिनचर्या में शामिल किया तो लंबे समय तक आपकी त्वचा स्वस्थ और जवां दिखेगी. इसके अलावा, जब भी आप घर से बाहर निकलें, चाहे बारिश हो या सर्दी का मौसम, सनस्क्रीन ज़रूर लगाएं. फेशियल किसी अच्छे पार्लर में ही कराएं और जल्दी-जल्दी ब्यूटी प्रॉडक्ट्स न बदलें.

2. हमेशा हाइड्रेट रहें-
स्वस्थ शरीर के लिए दिन में 6-8 ग्लास पानी ज़रूर पीना चाहिए. इससे त्वचा की नमी बरकरार रहती है जिससे झुर्रियां नहीं आतीं हैं. सादे पानी के साथ साथ ज्यादा से ज्यादा तरल चीज़ों जैसे जूस, नारियल पानी, दाल आदी को अपनी डाइट में शामिल करें.

3. दुष्प्रभाव उत्पन्न करने वाली चीजों को करें इनकार-
कभी अपनी क्रेविंग की वजह से तो कभी दूसरों के ज़ोर देने पर, हम शराब, कैफीन और तंबाकू का सेवन करते हैं. इसका हमारे मेटाबॉलिज़म पर बुरा असर पड़ता है. देर रात तक जागना और बिंग इटिंग भी हमारे हेल्थ के लिए नुकसानदायक है. ज़ाहिर है, अगर शरीर को किसी भी तरह का नुकसान होता है, तो उसका असर हमारे चेहरे पर भी नज़र आता है.

4. खाने का भी रखें ध्यान-
हम जैसे खाते-पीते हैं, वैसे ही दिखते हैं. फैटी खाना खाने से हमारे शरीर में चर्बी बढ़ती है. हमारे बॉडी में चेहरे और पेट के पास सबसे जल्दी फैट जमा होता है. इसके कारण आपके त्वचा की चमक और खूबसूरती पर बुरा असर पड़ता है. सही खान-पान के अलावा रोजाना कम से कम आधे घंटे की वर्जिश भी ज़रूरी है.

इन खाद्य पदार्थों का सेवन न करें-
1. रिफाइंड शुगर से बनी चीज़ें,
2. रिफाइंड स्टार्च-मैदा, पास्ता
3. हाई स्टार्च-आलू,
4. डब्बा बंद जूस और खाना

5. पूरी नींद लेना है जरूरी-
ये बात सभी को पता है कि स्वस्थ शरीर और दिमाग के लिए हमें 6-8 घंटे की नींद लेनी चाहिए. वर्ना न केवल हमारी पाचन शक्ति और याददाश्त कमज़ोर होगी, बल्कि आंखों के नीचे काले गड्ढे पड़ने लगेंगे. बढ़ती उम्र के साथ आई बैग्स और डार्क सर्किल्स जैसी समस्याओं से निजात पाना मुश्किल होता जाता है.
टिप: पेट के बल कभी न सोएं वर्ना चेहरे पर क्रीज़ पड़ सकते हैं.

6. शहद-
चेहरे को पहले धो लें, फिर कुछ बूंद शहद की चेहरे पर लगाएं. इसे कुछ मिनट तक ऐसे ही छोड़ दें और फिर चेहरे को धो लें. शहद चेहरे को नमी पहुंचाता है और उसे साफ करता है. शहद के सेवन के कई अन्य फायदे भी होते हैं.

7. जैतून तेल-
हर रात को सोने से पहले चेहरे पर कुछ बूंद जैतून के तेल की मालिश करने से चेहरे को नमी पहुंचती है. आप चाहें तो नहाने वाले पानी में भी कुछ बूंद जैतून के तेल की डाल सकती हैं. इससे त्‍वचा पर जमी डार्क स्‍किन भी निकल जाती है.

8. थोड़ा सा विटामिन सी-
चेहरे पर चमक बढाने के लिये विटामिन सी काफी प्रभावशाली होता है. आप चाहें तो रोज नींबू पानी पी सकती हैं या फिर चेहरे पर हल्‍का नींबू का रस लगा सकती हैं. यह अंदर से भी अच्‍छा है और बाहर से भी. आप इसे किसी भी एंटी एजिंग मास्‍क में डाल कर भी प्रयोग कर सकती हैं.

अंकुरित मूंग के लाभ - Ankurit Mung Ke Laabh!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अंकुरित मूंग के लाभ - Ankurit Mung Ke Laabh!

अंकुरित मूंग दाल आपके सेहत और शरीर के लिए एक आवश्यक खाद्य पदार्थ है. जाहीर है ज़्यादातर अंकुरित अनाज बेहद लाभकारी साबित होते हैं लेकिन मूंग दाल को उनमें सबसे बेहतर मान सकते हैं. हालांकि अंकुरित मूंग का सीधा सेवन स्वाद में थोड़ा अजीब लग सकता है. जरूरी नहीं कि स्‍वाद में जो अच्‍छा हो, वो स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक भी हो. अक्‍सर ऐसा ही होता है, जो चीज खाने में बिल्‍कुल अच्‍छी नहीं लगती है वो गुणों से भरपूर ही होती है. इसलिए स्‍वादिष्‍ट भोजन करने से पहले आपको इस बात को हमेशा ध्‍यान में रखना चाहिए कि शरीर के विकास के लिए विटामिन और खनिज की जरूरत होती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम अंकुरित मूंग के विभिन्न लाभ के बारे में जानें.

पौष्टिक तत्वों का खजाना-

अंकुरित मूंग दाल में मैग्‍नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन, विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी -6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है. मतलब अंकुरित मूंग पौष्टिक तत्वों का वास्तव में खजाना है.

वजन के नियंत्रण में सहयोगी-
इसके सेवन से शरीर में कैलोरी भी बहुत नहीं बढ़ती है. अगर अंकुरित मूंग दाल खाएं तो शरीर में कुल 30 कैलोरी और 1 ग्राम फैट ही पहुंचता है. यानि इसके सेवन से आपके वजन में वृद्धि नहीं होती है. तो डाइटिंग करने वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद है.

दालों का राजा-
विभिन्न दालों में सार्वाधिक पौष्टिक दाल अंकुरित मूंग को ही माना जाता है. इसमें मौजूद विटामिन ए, बी, सी और ई की प्रचुर मात्रा इसे पौष्टिकता प्रदान करती है. इसके साथ ही पौटेशियम, आयरन, कैल्शियम इत्यादि की मात्रा भी मूंग में पर्याप्त होती है.

मधुमेह एवं अन्य रोगियों के लिए भी लाभकारी-
अंकुरित मूंग के स्‍प्राउट में ग्‍लूकोज लेवल बहुत कम होता है इस वजह से मधुमेह रोगी इसे खा सकते हैं. अंकुरित मूंग के स्‍प्राउट में ओलियोसाच्‍चाराइडस होता है जो पॉलीफिनॉल्‍स से आता है. ये दोनों की घटक, गंभीर रोगों से लड़ने की क्षमता को प्रबल करते हैं. कैंसर के रोगी भी इसका सेवन आराम से कर सकते हैं.

संक्रमण से बचाव-
अंकुरित मूंग में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देते हैं और उसे बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. इसमें एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफलामेट्री गुण होते हैं जो शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाते हैं.

शरीर को साफ करने में मददगार-
अंकुरित मूंग में शरीर के टॉक्सिक को निकालने के गुण होते हैं. इसके सेवन से शरीर में विषाक्‍त तत्‍वों में कमी आती है. इस प्रकार अंकुरित मूंग के सेवन से हमारे शरीर का शुद्धिकरण होने के साथ ही कई आवश्यक तत्वों की आपूर्ति भी हो जाती है.

लम्‍बा खुशनुमा जीवन प्रदान करे-
इस बात को मजाक में न लें, अंकुरित मूंग के स्‍प्राउट के सेवन से पाचन क्रिया हमेशा सही बनी रहती है जिसके कारण, आपको पेट सम्‍बंधी समस्‍या नहीं होती है और जीवन खुशहाल रहता है. तो अच्छे और बेहतर स्वस्थ्य के लिए आपको भी मूंग का सेवन करना चाहिए.

युवा बनाए रखे-
अंकुरित मूंग में साइट्रोजेन होता है जो शरीर में कोलेजन और एलास्टिन बनाएं रखता है जिससे उम्र का असर, जल्‍दी ही चेहरे पर दिखाई नहीं देता है. अर्थात अंकुरित मूंग का इस्तेमाल एंटी एजिंग के लिए भी कर सकते हैं.

कब्‍ज से राहत दिलाये-
अंकुरित मूंग में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है. जिससे फ्रेश होने में कोई समस्‍या नहीं होती है व पाचन क्रिया दुरूस्‍त बनी रहती है. जाहीर है पाचन क्रिया का दुरुस्त होना कई अनावश्यक रोगों से आपको बचा सकता है.

पेप्टिसाइड युक्‍त मूंग के स्‍प्राउट-
अंकुरित मूंग में पेप्टिसाइड होता है जो बीपी को संतुलित रखता है और शरीर को फिट बनाएं रखने में कारगर होता है. इसलिए यदि आप फिट रहना चाहते हैं तो आपको भी अंकुरित मूंग का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए.

संतुलित खुराक-
अगर आप शाकाहारी हैं तो मूंग के स्‍प्राउट का सेवन अवश्‍य करें. यह शरीर में आवश्‍यक तत्‍वों की कमी हो पूरी करता है और शरीर को मजबूत बनाती है. इससे बेहतर शाकाहारी खाद्य सामग्री कोई नहीं होती है. यह पाचन में सहायक भी होता है.

त्वचा से टैनिंग कैसे हटाए - How To Remove Tan In Hindi!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
त्वचा से टैनिंग कैसे हटाए - How To Remove Tan In Hindi!

त्वचा से टैनिंग हटाने के लिए कुछ घरेलू उपाय हैं. जिनका प्रयोग कर त्वचा से टैनिंग हटाया जा सकता है. वैसे कुछ सावधानियाँ बरतकर टैनिंग से बचा जा सकता है. चूँकि अधिक देर तक धूप में रहने की वजह से सूर्य के हानिकारक पाराबैगनी किरणों से त्वचा पर टैनिंग की समस्या होती है. इसमें त्वचा सूर्य के हानिकारक किरणों से काला हो जाता है, जो अधिक मेलेनिन के उत्पादन के कारण होता है. त्वचा के रंग में यह परिवर्तन स्पष्ट होता है जो कि आगे चलकर समस्या बन जाती है. अतः टैनिंग से बचने के लिए जहां तक संभव हो त्वचा को अधिक देर तक धूप में रखने से बचाना चाहिए. यदि धूप में रहना ही पड़े तो अपने लिए उचित सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए. पर यदि त्वचा पर टैनिंग हो जाए तो इसे हटाने के लिए कुछ घरेलू उपाय भी हैं. कुछ घरेलू उपाय से त्वचा से टैनिंग हटाया जा सकता है. आगे त्वचा से टैनिंग हटाने के कुछ घरेलू उपाय के बारे में जानेंगे.

त्वचा से टैनिंग हटाने के घरेलू उपाय-

केसर और मलाई: - केसर में त्वचा के रंग को हल्का करने व टैनिंग को दूर करने के गुण होते हैं. अतः टैनिंग को हटाने में केसर का उपयोग बहुत ही कारगर होती है. मलाई में केसर मिलाकर रात में त्वचा पर लगा कर रात भर के लिए छोड़ देना चाहिए. फिर सुबह इसे धो लेना चाहिए.

नींबू और खीरा: - नींबू में विटामिन सी और साइट्रिक एसिड रहता है जो त्वचा को चमकाने में मदद करता है. इसके अलावा नींबू में पाया जाने वाला एंटी-ऑक्सीडेंट सूरज की किरणों से त्वचा को हुये नुकसान को कम करता है. खीरा त्वचा को ठंडक प्रदान करता है. त्वचा के टैनिंग में नींबू व खीरा के रस को मिलाकर प्रभावित हिस्से पर प्रतिदिन लगाना चाहिए.

चंदन पाउडर: - चंदन त्वचा के दाग-धब्बे को कम करने में मदद करता है व यह त्वचा में चमक भी प्रदान करता है. काफी समय से त्वचा से टैनिंग हटाने व त्वचा के क्लींजर के रूप में इसका प्रयोग किया जा रहा है. गुलाबजल या नारियल पानी में चंदन पाउडर मिलाकर चेहरे पर सप्ताह में तीन दिन प्रयोग करना चाहिए.

शहद और पपीता: - पपीता में पपाइन नामक एंजाइम होता है जो त्वचा को चमकाने व टैनिंग को दूर करने में मदद करता है. यह त्वचा पर के निशान व काले धब्बे को भी कम करता है. शहद त्वचा को मुलायम बनाता है व नमी प्रदान करता है. चेहरे पर से टैनिंग कम करने के लिए शहद व पपीते के पेस्ट को सप्ताह में चार बार लगाना चाहिए.

हल्दी व बेसन: - हल्दी त्वचा के चमक बढ़ाती है व टैनिंग दूर करने में मदद करती है. बेसन मृत कोशिकाओं को हटा देती है. आता चेहरे की टैनिंग दूर करने के लिए हल्दी व बेसन का प्रयोग किया जाता है. इसके लिए हल्दी व बेसन को गुलाबजल में मिलाकर चेहरा पर लगाना चाहिए. 15 मिनट बाद चेहरा धो लेना चाहिए. सप्ताह में दो बार इसका प्रयोग करना चाहिए.

टमाटर व दही: - टमाटर त्वचा पिगमेंटेशन पर काबू पाने के लिए व काले धब्बे हटाने के लिए एक बड़ा घटक है. दही त्वचा को नमी प्रदान करती है. टैनिंग दूर करने के लिए टमाटर और दही के पेस्ट को चेहरा पर लगाकर कुछ देर में अच्छी तरह धो लेना चाहिए. सप्ताह में 4-5 बार इसका प्रयोग करना चाहिए.

बादाम: - त्वचा से टैनिंग हटाने में बादाम काफी उपयोगी होता है. इसके लिए पाँच-दस ताजा हरा बादाम लेकर इसे ग्राइंड करके पेस्ट बना लेना चाहिए. इस पेस्ट में पाँच बूंद चंदन का तेल डालकर इसे त्वचा के टैनिंग से प्रभावित हिस्से पर लगाना चाहिए. यदि ताजा बादाम उपलब्ध न हो तो रात भर बादाम को पानी में भिंगोकर इसका उपयोग करना चाहिए.

एलोवेरा, मसूर की दाल व टमाटर: - एलोवेरा चेहरे के लिए मास्क की तरह काम करता है. यह चेहरे को सूर्य की यूवी किरणों से बचाता है. मसूर की दाल से त्वचा में तनाव आता है व चेहरा दमकता है. इससे झुर्री व झाई भी कम होती है. टमाटर से चेहरे के दाग-धब्बे कम होते हैं. इसलिए टैनिंग में व चेहरे के लिए ये तीनों काफी लाभकारी हैं. मसूर की दाल को पानी में भिंगो कर दरदरा पीस लेना चाहिए. इसमें एलोवेरा का ताजा जेल व टमाटर मिलाकर पेस्ट बना लेना चाहिए. इस पेस्ट से चेहरे व गर्दन पर मसाज करना चाहिए. 15 मिनट बाद इसे धो लेना चाहिए.

संतरा और दही: - संतरा में साइट्रिक एसिड रहता है जो चेहरे को यूवी किरणों से बचाता है. संतरा में विटामिन सी भी होता है जिससे नई त्वचा बनती है तथा इससे चेहरे पर ताजगी भी आती है. इससे चेहरे की बनावट दुरुस्त होती है. इससे त्वचा में तनाव आती है व झुर्रियां कम होती है. दही से त्वचा साफ होता है व प्राकृतिक रूप से ब्लीच होता है व चेहरा प्राकृतिक रूप से मोइश्चराइज होकर सॉफ्ट होता है. दही में संतरे का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करना चाहिए. फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर 30 मिनट बाद धो लेना चाहिए.

आलू व दही: - आलू को एंटी-टैन माना जाता है. आलू को अच्छी तरह पीसकर इसमें नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लेना चाहिए. अब इस पेस्ट को गर्दन व चेहरा पर लगाना चाहिए. 30-40 मिनट बाद इसे धो लेना चाहिए.

पपीता व दूध: - टैनिंग हटाने के लिए पपीता और दूध बेहद कारगर होता है. इसके लिए मसला हुआ पपीता और दूध को मिलाकर पेस्ट बना लेना चाहिए. फिर इस पेस्ट को प्रभावित हिस्से पर लगाना चाहिए. सूखने पर इसे ठंडे पानी से धो लेना चाहिए.

मुल्तानी मिट्टी और गुलाबजल: - मुल्तानी मिट्टी प्राकृतिक खनिज पदार्थों से भरपूर होती है. इससे त्वचा की टैनिंग दूर करने में काफी मदद मिलती है. गुलाबजल त्वचा को पोषण देता है. 3 चम्मच मुल्तानी मिट्टी को पर्याप्त गुलाबजल में 1 घंटे तक डुबोकर छोड़ देना चाहिए. जब मुल्तानी मिट्टी नर्म हो जाये तो इसमें आवश्यकतानुसार और गुलाबजल मिलाकर नर्म पेस्ट बना लेना चाहिए. अब इस पेस्ट को चेहरा पर लगाना चाहिए. 15 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लेना चाहिए. यदि आपकी त्वचा रुखी हो तो इसके बाद मोइश्चराइजर का प्रयोग करना चाहिए.

नारियल का पानी: - नरियाला का पानी सूरज के हानिकारक किरणों के प्रभाव से बचाता है. त्वचा पर रोज नारियल का पानी लगाने से निखार तो आता ही है, इसके अलावा यह टैनिंग से बचने में भी मदद करता है.

नींबू, गुलाबजल व ककड़ी: - चेहरे से टैनिंग हटाने के लिए नींबू, गुलाबजल व ककड़ी भी काफी प्रभावशाली होता है. इसके उपयोग के लिए नींबू, गुलाबजल व ककड़ी के रस को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह मिला लेना चाहिए. अब इस मिश्रण को चेहरे व गर्दन पर लगाकर छोड़ देना चाहिए. 15 मिनट के बाद ठंडे पानी से धो लेना चाहिए.

सावधानियाँ-
यहाँ त्वचा से टैनिंग हटाने के घरेलू नुस्खे मात्र जानकारी के लिए दिये गए हैं. पाठकों को सलाह दी जाती है कि यदि उन्हें इन नुस्खे में बताये गए किसी भी सामग्री से एलर्जी हो तो उन्हें उससे संबंधित नुस्खे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. एलर्जी वाले वस्तु का प्रयोग हानिकारक हो सकता है.

बालों को घना करने के उपाय - Balo Ko Ghana Karne Ke Upay!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
बालों को घना करने के उपाय - Balo Ko Ghana Karne Ke Upay!

बालों का घना और सुंदर होना हमारे खूबसूरती में चार चाँद लगाने के लिए के बेहद आवश्यक है. हर कोई बाल घने करने का उपचार जल्द से जल्द करना चाहता है. कुछ सामान्य कारण जो आपके बालों को घना होने से रोकते हैं, उनमे तनाव, हर्मोन का असंतुलित होना, पोषण की कमी, प्रदुषण, एलर्जी, हानिकारक उत्पादों का इस्तेमाल, बालों का ध्यान न रखना और जेनेटिक्स समस्या इत्यादि शामिल है. अगर आपके बाल पतले हैं तो आपको महंगे ट्रीटमेंट या महंगे उत्पादों पर पैसे खर्च करने की ज़रूरत नहीं है. आइए इस लेख के माध्यम से हम बालों को धना करने के उपायों को जानें.

1. स्वस्थ आहार से

स्वस्थ और घने बालों के लिए महत्वपूर्ण है कि आप अपने डाइट में प्रोटीन और सभी तरह के महत्वपूर्ण विटामिन और मिनरल्स का रोजाना सेवन करें. प्रोटीन और विटामिन बी बालों को घना और लम्बा करने में सहायता करते हैं. इसलिए अपने आहार में प्राचुरता के साथ दूध, अंडे, चिकन, फैटी फिश, फलियां बीज और सूखे मेवे, साबुत अनाज और ताजा हरी सब्जियां इत्यादि अवश्य शामिल करें.

2. संतरे की मदद से
संतरे के जूस में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है साथ ही इसमें मौजूद प्रेक्टिन आपके बालों की प्राकृतिक चमक लौटाने में भी मदद करते हैं. अपने बालों में स्टाइल देने के कारण बालों के जड़ो को नुकसान पहुंचता है, जो संतरे में मौजूद एसिड इस नुकसान को ठीक करने में मदद करता है. इसके लिए एक संतरे के छिलका समेत मिक्सर में डाल दें. जब ये अच्छी तरह से से मिक्स हो जाए तो इसे अपने बालों में आधा घंटे के लिए लगाकर रखें. अब अपने बालों को शैम्पू से धो लें. शैम्पू से धोने के बाद कंडीशनर भी ज़रूर लगाएं, क्योंकि इसमें मौजूद एसिड आपके बालों को रूखा बना सकता है. इस मिश्रण को हफ्ते में एक बार ज़रूर लगाएं.

3. आंवला
आंवला में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सिडेंट, एंटीबायोटिक और एक्सफ़ोलीएटिंग गुण होते हैं जो बालों के जड़ों को स्वस्थ बनाते हैं और बालों के विकास को भी में भी सहायता करते हैं. इसका उपयोग करने के लिए एक चम्मच आंवला या आंवला पाउडर को दो चम्मच के साथ नारियल के तेल में मिलाकर उबलने तक गर्म करें. अब तेल को छान लें और गुनगुना होने के बाद सोने से पहले अपने बालों और जड़ों में लगा लें. इसके अगली सुबह हमेशा की तरह अपने बालों को शैम्पू से धो लें. इसके अलावा आप आधा कप गर्म पानी को एक या आधा कप आंवला पाउडर में 10 मिनट तक अच्छे से मिलाने के बाद उसे दस मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें. अब पेस्ट को अपने बालों में लगाएं और 15-20 के लिए ऐसे लगा हुआ छोड़ दें. पानी से धोने के बाद कुछ घंटों तक बालों को शैम्पू से न धोएं.

4. अंडे का उपयोग
बालों के इलाज के लिए प्रोटीन से भरपूर अंडा सबसे अच्छा घरेलू उपाय माना जाता है. अंडे का इस्तेमाल करने के लिए अपने बालों की लम्बाई के अनुसार एक या दो अंडे लेकर इसे ठीक से मिला लें. अब अंडे को गीले बालों में लगाकर आधे घंटे के लिए इसे बालों में लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपने बालों को गुनगुने पानी से धोकर शैम्पू कर लें. आप इस प्रोटीन ट्रीटमेंट को एक या दो बार हफ्ते में लगा सकते हैं. इसके अलावा एक अंडे की जर्दी ले और उसे अच्छे से मिला लें. अब अपनी पसंद का कोई भी एक चम्मच बालों में लगाने वाला तेल लें और दो चम्मच पानी लें. अब इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने के बाद अपनी जड़ों में लगाएं.

5. जैतून का तेल
जैतून का तेल आपके बालों को घना बनाने में मदद करेगा. साथ ही ये आपके बालों को कोमल और मजबूत भी बनाएगा. जैतून के तेल का इस्तेमाल करने के लिए अपने बालों और जड़ों में गर्म तेल से मसाज करें और इसे ऐसे ही 30 से 45 मिनट के लिए लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपने बालों को पानी से धोने के बाद शैम्पू से धो लें. आप अपने बालों में तेल को रातभर के लिए भी लगा हुआ छोड़ सकते हैं और फिर सुबह को शैम्पू से धो लें. इसके साथ ही आप जैतून के तेल को शहद के साथ मिलाकर अपने बालों में लगा सकते हैं. फिर इसे आधे घंटे तक लगा हुआ छोड़ दें और फिर अपने बालों को पानी से धोने के बाद शैम्पू से धो लें.

6. एवोकाडो
एवोकाडो बालों को मॉइस्चराइस करता है जिसकी मदद से बाल घने होने लगते हैं. इसके साथ ही इसमें मौजूद विटामिन ई हेयर शाफ़्ट को स्वस्थ बनाने में मदद करता है. एवोकाडो का इस्तेमाल करने के लिए इसे एक केले के साथ क्रश करके उसमें एक चम्मच जैतून का तेल मिला लें. अब इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने के बाद अपनी जड़ों में लगाकर मसाज करें. अपने बालों में इस मिश्रण को आधे घंटे के लिए लगा हुआ छोड़ दें. अंत में बालों को पानी से धोकर शैम्पू कर लें. इसके अलावा आप एक हाइड्रेटिंग हेयर मास्क भी बना सकते हैं. सबसे पहले दो चम्मच गेहूं के बीज के तेल को एक आधा क्रश एवोकाडो के साथ मिला दें. अब इस हेयर मास्क को शैम्पू किये हुए बालों में लगा लें और बीस मिनट के लिए इसे ऐसे ही लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपने बालों को पानी से धोने के बाद शैम्पू से धो लें.

7. मेथी के बीज
मेथी के बीज का इस्तेमाल बालों को झड़ने से रोकने और बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मेथी के बीज का इस्तेमाल करने के लिए एक या दो चम्मच मेथी के बीज को पानी में 8 से 10 घंटे के लिए भिगोकर रख दें. अब इन्हे मिक्सर में पीस लें. फिर उसमें दो चम्मच नारियल के तेल को भी मिला सकते हैं. अब इस पेस्ट को अपने बालों और जड़ों में आधे घंटे के लिए लगाकर रखें. फिर बालों को गुनगुने पानी से धोकर शैम्पू से धो दें. एक हफ्ते तक रोज़ाना इस पेस्ट का इस्तेमाल करने से आपके जड़ों का रूखापन दूर रहेगा और बाल भी घने होंगे. इसके अलावा आप मेथी के बीज के पानी को बालों को धोने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.

8. अरंडी का तेल
कोल्ड-प्रेस्ड अरंडी के तेल के चिपचिपे गुणों के कारण ये बालों के झड़ने की समस्या को कम करता है. इसके साथ ही इसमें विटामिन ई और फैटी एसिड मौजूद होने की वजह से ये बालों को बढ़ाने में भी मदद करता है. अरंडी के तेल का इस्तेमाल करने के लिए अरंडी के तेल और नारियल के तेल को एक साथ बराबर मात्रा में मिलाकर गर्म कर लें. अब इस मिश्रण को जड़ों और बालों में लगाकर हल्के हल्के मसाज करें. फिर अपने बालों को कोम्ब करें जिससे तेल अच्छे से पूरे बालों तक पहुंच सके और इससे उलझे बाल भी सुलझेंगे. अब अपने बालों को गर्म पानी में डुबोई तौलिए से ढक लें. इससे आपके बालों को नमी मिलती रहगी. अब इसे एक घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें और फिर हमेशा की तरह बालों को शैम्पू कर लें.

9. एलो वेरा जेल
घने बालों के लिए अन्य प्रभावी घरेलू उपाय है एलो वेरा. एलो वेरा में मॉइस्चराइज़िंग के गुण मौजूद होते हैं. ये जड़ों के PH स्तर को भी सुधारता है. एलो वेरा का इस्तेमाल करने के लिए एक या दो एलो वेरा जेल की पत्तियों से जेल निकाल लें और उसे फिर अपनी जड़ों में रगड़ें. फिर बालों को धोने से पहले इसे आधे घंटे के लिए लगा हुआ छोड़ दें. फिर अपने बालों को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. इसके अलावा आप दो चम्मच नारियल के दूध को एलो वेरा जेल में मिला दें. फिर इसे अपनी जड़ों में लगाएं. बालों को धोने से पहले इसे अपने बालों में एक या आधा घंटे तक लगाकर रखें और फिर बालों को शैम्पू से धो लें. इस मिश्रण को आप हफ्ते में एक या दो बार ज़रूर लगाएं.

10. मेहँदी
मेहँदी की पत्तियां आपके बालों को प्राकृतिक रंग देने में मदद करेंगी और बालों को कोमल और घना बनाएंगी साथ ही टूटने से भी बचाएंगी. मेहँदी का इस्तेमाल करने के लिए मेहँदी की पत्तियों का पेस्ट बनाकर उसे दो घंटे के लिए ऐसे ही रखा हुआ छोड़ दें और फिर उस पेस्ट को अपने बालों में लगाकर बालों को शावर कैप से ढक लें. जब मेहँदी सूख जाए तो बालों को पानी से धो लें. धोने के बाद बालों में सरसो का तेल लगालें. फिर कुछ घंटे बाद अपने बालों को शैम्पू से धो लें. इसके अलावा आप मेहँदी पाउडर में पानी के साथ साथ दही और पानी की जगह ग्रीन टी को डाल सकते हैं. अब पेस्ट को अच्छे से चलाने के बाद रातभर इसे ऐसे ही रखा हुआ छोड़ दें. फिर अगले दिन इस मिश्रण में एक अंडा और दो चम्मच नींबू मिलाएं. अच्छे से मिलाने के बाद इस मिश्रण को अपने बालों में लगाकर सूखने तक का इंतज़ार करें. अंत में बालों को पानी से धो लें और ऊपर बताई गयी प्रक्रिया की तरह अपने बालों में तेल और शैम्पू का इस्तेमाल करें. ध्यान रहे बालों में मेहँदी लगाने से पहले अपने हाथों को कवर कर लें या किसी ब्रश का इस्तेमाल करें.

11. अलसी का उपयोग
अलसी ओमेगा -3 फैटी एसिड और प्रोटीन से समृद्ध होती है. अलसी प्राकृतिक रूप से घने बालों को बढ़ावा देने में भी मदद करती है. अलसी का इस्तेमाल करने के लिए एक चौथाई कप अलसी को पानी में भिगोकर रख दें. सुबह को अब अलसी को निकाल लें और दो कप पानी में उसे तेज़ आंच पर गर्म कर लें. जब मिश्रण जेल की तरह लगने लगे तो गैस को बंद कर दें और जेल को छान लें. आप इसमें अपना पसंद का तेल भी मिला सकते हैं. फिर इस मिश्रण को ठंडा होने के लिए रख दें. ठंडा होने के बाद बालों में इसे जेल की तरह लगाएं. अलसी जेल उन बालों के लिए बेहद फायदेमंद है जिनके बाल घुंघराले या रूखे होते हैं.

Vulvodynia - Know Forms Of It!

MBBS, MD - Obstetrtics & Gynaecology, DNB (Obstetrics and Gynecology)
Gynaecologist, Pune
Vulvodynia - Know Forms Of It!

Vulvodynia refers to chronic pain in the vulva, a condition suffered by most women. Triggered generally by an unidentifiable cause, the pain was not considered as a real pain syndrome until of late. The ambiguity of the condition is such that many who do suffer from it fail to realize its complications.

There are primarily two types of Vulvodynia:

1. Generalized Vulvodynia: This is when the pain is all over the vulva, however, different parts may pain at different times. It may be a constant pain or may occur occasionally.

2. Vulvar vestibulitis syndrome: The pain is in the vestibule area or the entrance of the vagina is known as vulvar vestibulitis syndrome. This kind of pain mostly exhibits a burning sensation and is triggered even by a slight touch. During intercourse the pain manifolds to extreme severity.

Although the cause of Vulvodynia is not known, doctors suspect the following reasons to be the contributing factors:

1. Nerve injury
2. Heredity
3. Yeast infections
4. Sexual abuse in the past
5. Muscle Spasm
6. Hormonal changes

Symptoms

1. Burning sensations
2. Aching or soreness
3. Itching

Treatment

Nowell versed cure is available for Vulvodynia, although certain self-care treatments can bring relief. Among the many, you need to figure out which method suits you best and choose accordingly. To discern the best method, you might have to try various different combinations. At the same time, it is extremely important to educate yourself about Vulvodynia and have a thorough knowledge about what it is all about.  It is advisable that you maintain a record of the treatments which according to you suit you the most in order to avoid confusion. Some of the methods are given below:

1.  Avoid products which might act as potential irritants near the vulva.
2. Do not put much pressure on the vulva. Avoid activities which might exert direct pressure on it.
3. Whenever it pains, try to soothe the area by soaking it in lukewarm water or applying ice on it.
4. Use medications like lidocaine to relieve pain.
5. Certain exercises might also help relax the area.
6. Biofeedback also helps relax the vaginal muscles and bring some relief.

School Refusal - How Should Parents Administer It?

MBBS, MD - Psychiatry
Psychiatrist, Delhi
School Refusal - How Should Parents Administer It?

Blessed are the parents whose children enjoy going to schools. Some parents have to sweat it out to convince and cajole their kids into going to schools. Every morning brings in a new struggle. You will often come across kids who hate going to schools. From complaining of a headache to stomach aches, they will try everything under the sun to give the school a miss. With time, however, things get under control, much to the parent's relief.

The situation gets dicey when children continue to panic, get stressed out at the mere thought of going to school (for a longer duration of time). With time, things get more and more complicated. A situation as critical as this is known as School Refusal Behavior. School refusal can affect children, adolescents, and even teenagers.

Factors that trigger school refusal behavior:
School refusal in children may be an amalgamation of many factors:

  1. In some children, the problem may be due to ADHD (Attention Deficit Hyperactivity Disorder). It is a common behavioral disorder that affects many children and even teenagers. In ADHD, children find it a herculean task to concentrate or to pay attention in class. Needless to say, this affects a child's overall performance in class. The fear of getting rebuked and punished (by teachers) may trigger school refusal in such children.
  2. Many parents set unrealistic goals for their children. They want their children to be the best. What they fail to realize is that in doing so, they end up suffocating the kids. In a few extreme cases, the pressure to excel in academics grips them with an unknown fear. They start avoiding classes. They get panic attacks at the mention of schools.
  3. There are some menaces which can make life miserable. Being bullied in school (by classmates or seniors) is one such issue. As time progresses, the situation may get so unbearable that the child at the receiving end starts showing signs of school refusal.
  4. Children with undiagnosed and untreated depression, stress, and anxiety may show signs of school refusal. Such kids prefer to stay within themselves. They don't enjoy social gatherings or interacting with people much.
  5. Some children want to be with their parents all the time. Going to school would mean being away from parents. Thus, they look for excuses to avoid schools.

Symptoms:
The symptoms characteristic of school refusal behavior include

  1. Irritability, inflexibility, and anger.
  2. Nausea, headache, stomach ache, vomiting.
  3. Diarrhea
  4. The affected child may show signs of separation anxiety.
  5. Sleep disturbance.
  6. Tantrums in the morning. 

Diagnosis and Treatment:

School refusal needs to be dealt with as early as possible since the longer the child stays away from school, the more difficult it will become for him/her to return to school.

  1. The Screen for Child Anxiety Related Emotional Disorders (SCARED).
  2. The Children's Manifest Anxiety Scale.
  3. The Child Behavior Checklist.

Parents, physician, and school authorities should together chalk out a plan to deal with the situation.

  1. Cognitive therapy can produce fruitful results.
  2. Any student subjected to bullying should bring it to the notice of their parents and teachers.
  3. Parents should not pressurize their child to overperform.
  4. Consult an expert physician if your child shows any signs of stress and anxiety.

4 Homeopathic Remedies To Manage Migraine!

BHMS
Homeopath, Meerut
4 Homeopathic Remedies To Manage Migraine!

A migraine is one of the worst forms of headaches. It can result in excruciating pain leading to temporary impairing of a person. The pain is often one-sided and can last up to days. The pain can be pulsating or throbbing. Apart from pain, some other symptoms of this disease are insensitivity to light, vomiting, nausea, light temperature etc. For extreme cases, a patient might face symptoms such as temporary blindness, tingling sensation on the hand or leg area, flashes of light etc. Some common triggers of a migraine include loud music, sunlight, mental stress, improper sleep etc. While lifestyle changes can bring temporary relief to migraine patient, homeopathy treatment aims at permanent relief from a migraine altogether. In this article, we will describe few homeopathic medicines that can do wonders for a migraine patient-

  1. Belladonna- This is one of the most effective medicines for a migraine. This medicine is appropriate to those whose pain is throbbing in nature and originates from the temporal region of the brain. The pain of this kind starts suddenly without any warning signs whatsoever. The pain worsens with exposure to sunlight, cold air, touch etc. Applying pressure to the region of pressure makes the patient feel better. The patient of this nature finds it difficult to sleep as the pain increases with supine posture. Belladonna can be the perfect medicine for patients suffering from these symptoms. Daily intake in the empty stomach can improve migraine pain by leaps and pounds.
  2. Sanguinaria- This homeopathic medicine is used especially for migraine patient who feels pain only on the right side of the head. For patients whose a migraine gets initiated at the back of the head, faces the pain once in every week, gets relief from sleeping and lying down etc, Sanguinaria is the best homeopathic medicine one can have. It is wise to consult a homeopathic doctor to decide the dosage, medicine intake timings etc.
  3. Spigelia- This is a homeopathic medicine that pays rich dividends to those migraine patients whose pain starts from the left side of the head and finally settles down in the eye region. The patient often feels that there is a tight rubber band that has been around the head. The pain is sharp and aggravates with touch. Applying ice further worsens it. Spigelia is one homeopathic medicine that can greatly extend relief to such kind of migraine patients and can even cure the condition with prolonged intake.
  4. Natrum Mur- This is one universal homeopathic medicine that can extend relief to those migraine patients who has a headache that is congestive in nature. Some typical symptoms include face redness, throbbing nature of the pain, increase of pain with exposure to heat, feeling relieved by uncovering the head etc.

Bleeding Disorders - What Causes It?

MBBS, MS - Obstetrics & Gynaecology, Fellowship in Minimal Access Surgery, Post Graduate Diploma in Sonography (Obstetric- Gynae), Fellowship In Assisted Reproductive Technology
Gynaecologist, Jaipur
Bleeding Disorders - What Causes It?

Excess bleeding or menorrhagia is a common kind of abnormal bleeding occurring at the time of menstruation. Menorrhagia causes more blood loss which leads to anaemia. Fatigue and breathlessness are common symptoms of anaemia.

Symptoms of excess bleeding

A few of the common symptoms of excessive bleeding are: 

  1. Discharge of large blood clots is a sign of heavy bleeding 
  2. Bleeding during the night which causes disruption in sleep as one has to wake up several times in the night to change the sanitary napkin 
  3. Menstruation lasts longer than usual or more than 5 to 7 days. 
  4. Any menses requiring an excess change of pads than usual 

Causes of excess bleeding 

  1. Imbalance of hormones: During adolescence and when nearing menopause, the female body undergoes some imbalance in oestrogen and progesterone hormones. At these points of time, heavy bleeding is common among women. But it’s abnormal. So get it evaluated. 
  2. Abortion / Ectopic pregnancy: Conception occurs in mid-cycle and so by the time a menses start, one could be a pregnant too. So excess bleeding occurring at menses could be also due to an abortion or miscarriage. Unlike the usual course of pregnancy, if the fertilised egg gets stuck in the fallopian tubes and develops there, It results in Ectopic pregnancy. Excess bleeding can be a sign of ectopic pregnancy too.
  3. Fibroids: Growth of fleshy solid tumours in the wall of uterus namely Fibroids can lead to excess bleeding. 
  4. Cancer: Cervical, ovarian and uterine cancers are rare causes of heavy bleeding, but it is possible. So early detection of these conditions is better for treatment. 
  5. Adenomyosis: This is common in middle-aged women who have given birth to more than two children. In this case, the glands that appear in the lining of the uterus become deeply embedded in the muscle of the uterus wall. These women with adenomyotic uterus have severe dysmenorrhea ( pain during menses ) and excess bleeding. 
  6. Intrauterine device: IUD used for birth causes more bleeding during menstruation. In some the bleeding reduces over time, but if in excess one must get evaluated. 
  7. Pelvic inflammatory disease: PID is an infection that occurs in the uterus, other reproductive organs and the fallopian tubes. Inflamed reproductive organs bleed more and hence cause menorrhagia. 
  8. Other diseases and disorders: Diseases like that of liver, kidneys and thyroids can cause excess bleeding. Disorders in blood levels or platelets can also be a cause. 

Treatment for excess bleeding 

Several treatments are available to treat heavy bleeding during menstruation. Choosing the right one mainly depends on the reasons that cause heavy bleeding.

Non-surgical treatments: 

  1. Hormonal therapy: This therapy is used as a treatment to stabilise the lining of the uterus (endometrium) and thus regulate the menstrual bleeding. 
  2. Non-hormonal medication: A tranexamic acid is a non-hormonal medication prescribed by the doctor that promotes clotting of the blood.
  3. Nonsteroidal drugs: Nonsteroidal medications that are anti-inflammatory like Ibuprofen, mefenamic acid helps to reduce blood loss. 

Surgical Treatments 

  1. Hysteroscopy: A long and thin scope can be inserted into the uterus through the cervix and the vagina. The doctor observes the lining of the uterus, remove the excess lining or the endometrial polyps that cause bleeding. 
  2. Dilation and curettage: In this procedure, the mouth of the uterus (cervix) to be dilated and the lining of the uterus is scraped off to make it shed all at once and stop bleeding. 
  3. Hysterectomy: This involves removing the uterus. It is mainly done for uterus having adenomyosis, fibroids, or cancers, or when the patient does not respond to medical therapies. 
  4. Ablation: Ablation or endometrial resection allows removal of the lining of the uterus. But it may be a temporary measure as the lining recurs. 

To conclude, proper diagnosis, choosing the right treatment for excess bleeding at menses needs to be done urgently as it affects the overall health of the women suffering from it.

Diverticulitis - Is Surgery Really Required?

MBBS, MRCs, MS- General Surgery, MCH -Gi surgery
Gastroenterologist, Kochi
Diverticulitis - Is Surgery Really Required?

With more than 1 million cases reported every year in India, the condition is one of the most significant causes of hospital admissions and outpatient visits. A few otherwise common conditions may sometimes become acute, causing intense trauma, and one such is diverticulitis.

Although most people affected with diverticulitis can be treated by medical procedures, some of them would require surgical intervention. It is only required when medical treatment is not amenable, or the disease does not respond to medical therapy. But it should be noted that Acute diverticulitis with free perforation is a fatal condition which requires emergency surgery.

Medical science has thoroughly evolved the understanding of the natural history and pathophysiology of Diverticulitis. Moreover, non-surgical management and improvements in diagnostic methods have also led to crucial alterations in the treatment recommendations. The present practice guidelines are tailored to the needs of individual patients considering their risk factors, persistent symptoms, and individual preferences.

Who requires surgery in the management of diverticulitis?

Patients suffering from complicated acute diverticulitis with pneumoperitoneum or extraluminal abscess are more likely to require urgent operation compared to patients with colonic inflammation. Such patients are also more prone to experience complications as well as perforation even after no-operative management.

Doctors recommend undergoing surgery if you are suffering from recurrent attacks of diverticulitis. Also, people under the age of 40 years or people with an impaired immune system who experience repeated attacks should also undergo surgery at the earliest. Moreover, people with an abnormal opening or fistula forming in between the colon and adjacent organ which could include the uterus, bladder or vagina also need urgent surgical treatment.

The surgery for diverticulitis may also be recommended to fend off certain complications. For instance, if the diverticulum has been infected and ruptured into the abdominal cavity forming a pocket of infection, then surgery is used for draining the abscess. Besides, surgery is done to cure an infection that has spread into the abdominal cavity, blockage of colon, narrow spot in the colon and infection that has spread through the blood to other parts of the body.

What are the surgery choices for diverticulitis?

It is estimated that less than 6 people out of 100 people affected by the diverticulitis need surgical intervention. Surgical treatment involves removal of the diseased portion of the large intestine and reconnecting the remaining parts. Sometimes, more than one surgery is required to correct the disorder in case the condition is very severe.

When multiple surgeries are required, the affected person usually requires a colostomy during the time span between the surgeries. It is generally left at the discretion of the surgeon to decide whether a patient requires single or multiple surgeries.

So, if you have this problem, thoroughly discuss your options with your doctor to decide on the course of action to pave the path towards a complete cure.

Enlarged Prostate - Have Homeopathy For It!

BHMS
Homeopath, Alwar
Enlarged Prostate - Have Homeopathy For It!

Enlarged prostate is a disorder which occurs more likely in elderly males. It is basically the enlargement of the prostate gland and is also known as Benign Prostatic Hypertrophy. The prostate enlargement impinges itself on the urethra and causes increased urination and other urinary problems. An enlarged prostate is usually treated by surgical methods and there is a common belief that there is no other treatment for enlarged prostate other than surgery.

However, homeopathy is a field of medicine which can be used for the treatment of an enlarged prostate gland. Homeopathic medicines are organic and completely natural, and aim at treating the underlying cause of an enlarged prostate, instead of just curing the symptoms.

Here are some primary homeopathic medicines, which are used for enlarged prostate treatment, along with the symptoms when they are used.

  1. Baryta Carb: This homeopathic medicine is an effective cure for prostate gland enlargement, especially in aged people. Frequent urination is the first symptom of this type of prostate enlargement. An affected patient will develop an urge to urinate every now and then and there is a burning sensation in the urethra during urination. Degrading changes are noticed in the vascular, cardiac and cerebral system. Memory loss and decreased libido are observed. The patient cannot tolerate cold, and perspiration in the feet occurs.
  2. Digitalis: Digitalis is an ideal homeopathic remedy for enlarged prostate in people with heart problems accompanied by frequent urinary symptoms. This type of prostate enlargement is common in older men. The pulse rate may become irregular or abnormal and oedema is observed in internal and external parts. Swelling of sexual organs is also noticed.
  3. Staphysagria: This homeopathic medicine is used in cases of an enlarged prostate gland along with dysuria. There is pain during urination and the patient feels pressure on the urinary bladder, and urination seems to be incomplete. Burning in the urethra while urinating is observed, and the sensation lasts even after urination.
  4. Conium: Conium is another efficient homeopathic medicine for curing prostate gland enlargement accompanied by frequent urination. This condition may arise due to an injury or a blow. Induration and hardening of the gland are caused, and it feels like a stone. There is great trouble in urination, and it seems incomplete.
  5. Sabal Serrulata: This is a popular homeopathic medicine for an enlarged prostate gland and is considered to be one of the best medicines for this disorder. Symptoms include irritation in urinary organs and increased urge for urination at night.

Homeopathy is considered to be an ideal treatment for an enlarged prostate gland for people who want to avoid surgery. With no side effects, homeopathy works naturally and gives great results.

View All Feed