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Vinit Eye Clinic, Retina & Laser Centre

Ophthalmologist Clinic

301, Emperor Building, Above Allahabad Bank, Babhai Naka, L.T Road, Borivali(W), Mumbai Mumbai
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Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Ophthalmologist . We are dedicated to providing you with the personalized, quality health care that you d......more
Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Ophthalmologist . We are dedicated to providing you with the personalized, quality health care that you deserve.
More about Vinit Eye Clinic, Retina & Laser Centre
Vinit Eye Clinic, Retina & Laser Centre is known for housing experienced Ophthalmologists. Dr. Vinit M. Shah, a well-reputed Ophthalmologist, practices in Mumbai. Visit this medical health centre for Ophthalmologists recommended by 40 patients.

Timings

MON-SAT
05:00 PM - 09:00 PM
WED
09:00 AM - 12:00 PM

Location

301, Emperor Building, Above Allahabad Bank, Babhai Naka, L.T Road, Borivali(W), Mumbai
Mumbai Mumbai, Maharashtra - 400092
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Doctor in Vinit Eye Clinic, Retina & Laser Centre

Dr. Vinit M. Shah

M.B.B.S., M.D. Ophthalmology, Retina Specialization
Ophthalmologist
16 Years experience
400 at clinic
Available today
05:00 PM - 09:00 PM
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लेसिक लेजर का खर्च - Lasic Lazer Ka Kharch!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
लेसिक लेजर का खर्च - Lasic Lazer Ka Kharch!

जब आपकी दृष्टि कमजोर पड़ जाती है तो डॉक्टर आपको चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस निर्धारित करता है जो शायद हर किसी को पसंद नहीं आता है. ऐसे में हम दुसरे विकल्प की तरफ देखते है जिसमे हमें सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है. वर्तमान समय में लेजर तकनीक से होने वाली सर्जरी बहुत उन्नत हो गयी है. इसकी सहायता से बिना किसी ज्यादा जोखिम के आप दृष्टि के समस्या से निजात पा सकते हैं. इस लेख में आपको लेज़र तकनीक सर्जरी के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी. लेसिक लेजर या कॉर्नियोरिफ्रेक्टिव सर्जरी कॉन्टैक्ट लेंस हटाने के लिए दो तकनीक है. इससे जिन दोषों में चश्मा हटाया जा सकता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम लेसिक लेजर सर्जरी में होने वाले अनुमानित खर्च को जानें ताकि लोगों को इस संदर्भ परेशानी का सामना न करना पड़े.

लेसिक लेजर सर्जरी 3 प्रकार के होते है
* सिंपल लेसिक लेजर
* ई-लेसिक या इपि-लेसिक लेजर
* सी-लेसिक या कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर

1. सिंपल लेसिक लेजर सर्जरी: - इस सर्जिकल प्रक्रिया में आँखों में लोकल एनेस्थीसिया डाला जाता है. इसके बाद लेजर से फ्लैप बनाया जाता हैं. इसके कट निरंतर कॉर्नियो को री-शेप करता रहता है. इस पूरे प्रक्रिया में लगभग 20-25 मिनट लगते हैं.

2. ई-लेसिक या इपि-लेसिक लेजर सर्जरी: - यह तकनीक लगभग सिंपल लेसिक जैसा ही होता है. इसमें केवल एक ही फर्क होता है इसमें इस्तेमाल होने वाला मशीन ज्यादा एडवांस होता हैं.

3. सी-लेसिक: कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर सर्जरी: - यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है और इसके परिबाम बहुत बेहतर होते हैं. ओवर या अंडर करेक्शन नहीं होती और नतीजा सटीक होता है. मरीज को अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं होती. साइड इफेक्ट्स काफी कम होते हैं. महंगा प्रोसेस है यह. दोनों आंखों के ऑपरेशन पर 40 हजार तक खर्च आता है. कुछ अस्पताल इससे ज्यादा भी वसूल लेते हैं. आंख लाल होने, खुजली होने, एक की बजाय दो दिखने जैसी प्रॉब्लम आ सकती हैं, जो आसानी से ठीक हो जाती हैं.

कितना खर्च-
लेसिक लेजर सर्जरी के दौरान पुतली (कॉर्निया) को पुन: नए सिरे से आकार दिया जाता है. इसके परिणामस्वरूप मरीज चश्मा पहने बगैर स्पष्ट देख सकता है. आज ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी की मदद से लेजर के द्वारा यह विधि क ी जाती है. इस कारण यह विधि सटीक और लगभग त्रुटि रहित है. आमतौर पर यह सर्जरी 15,000 से 90,000 रुपये में करायी जा सकती है, हालांकि इसकी कीमत लेसिक सर्जरी के तरीके पर निर्भर करती है. लेसिक सर्जरी से मरीज लगभग 1 दिन बाद या कुछ घंटों बाद ही मनचाहा परिणाम प्राप्त कर सकता है. यह प्रक्रिया बहुत जल्दी खत्म हो जाती है और इसमें किसी टांके व पट्टी का प्रयोग नहीं होता. इसके अतिरिक्त यह एक पीड़ाहीन विधि है. दोनों आंखों का खर्च औसतन 30-40 हजार रुपये आता है. हालांकि कुछ प्राइवेट अस्पताल इससे ज्यादा भी लेते हैं. सरकारी अस्पतालों में काफी कम खर्च में काम हो जाता है.

कहां होता है लेसिक लेजर-
लेसिक लेजर सर्जरी तमाम बड़े प्राइवेट अस्पतालों और कुछ बड़े क्लिनिकों में भी हो सकता है. in सब के अलावा बड़े सरकारी अस्पतालों जैसे एम्स पीजीआई जैसे अस्पतालों में भी हो सकता है. इन जगहों पर इलाज बेहतर तरीकों के साथ रेट भी कम लगते हैं लेकिन लंबी लाइन होने की वजह से वेटिंग अक्सर ज्यादा होती है

लेसिक आई सर्जरी - Lasik Eye Surgery!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
लेसिक आई सर्जरी - Lasik Eye Surgery!

जब आपकी दृष्टि कमजोर पड़ जाती है तो डॉक्टर आपको चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस निर्धारित करता है जो शायद हर किसी को पसंद नहीं आता है. ऐसे में हम दुसरे विकल्प की तरफ देखते है जिसमे हमें सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है. वर्तमान समय में लेजर तकनीक से होने वाली सर्जरी बहुत उन्नत हो गयी है. इसकी सहायता से बिना किसी ज्यादा जोखिम के आप दृष्टि के समस्या से निजात पा सकते हैं. इस लेख में आपको लेज़र तकनीक सर्जरी के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी. लेसिक लेजर या कॉर्नियोरिफ्रेक्टिव सर्जरी कॉन्टैक्ट लेंस हटाने के लिए दो तकनीक है. इससे जिन दोषों में चश्मा हटाया जा सकता है, वे निम्नलिखित हैं:

1. मायोपिया:
मायोपिया को निकट दूर दृष्टि भी कहा जाता है. इसमें किसी भी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के आगे बन जाता है, जिससे दूर का देखने में समस्या होती है. इसे ठीक करने के लिए माइनस यानी कॉनकेव लेंस की आवश्यकता पड़ती है.

2. हायपरमेट्रोपिया: हायपरमेट्रोपिया को दूरदृष्टि दोष के रूप में भी जाना जाता है. इस स्थिति में किसी भी चीज का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है, जिससे पास का देखने में समस्या होती है. इसे ठीक करने के लिए प्लस यानी कॉनवेक्स लेंस की जरूरत होती है.

3. एस्टिगमेटिज्म: इसमें आंख के पर्दे पर रोशनी की किरणें अलग-अलग जगह केंद्रित होती हैं, जिससे दूर या पास या दोनों तरफ की चीजें साफ नजर नहीं आतीं है.

कैसे करता है काम-
लेसिक लेजर की सहायता से कॉर्निया को इस तरह से बदल दिया जाता है की नजर दोष में जिस तरह के कांटेक्ट लेंस की जरुरत पड़ती है, वह उसी तरह से काम करने लग जाता है. इससे किसी भी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना पर बनने लगता है और बिना चश्मे लगाए सब कुछ साफ नज़र आने लगता है.

लेसिक सर्जरी के प्रकार-
लेसिक लेजर 3 प्रकार का होता है.
* सिंपल लेसिक लेजर
* ई-लेसिक या इपि-लेसिक लेजर
* सी-लेसिक या कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर

सिंपल लेसिक लेजर-
इस प्रक्रिया में आँखों में लोकल एनेस्थीसिया इंजेक्ट किया जाता है. इसके बाद लेजर से आँखों में फ्लैप बनाते हैं. और कट निरंतर कॉर्नियो के आकार को दोबारा आकार देता है. इस पूरे प्रक्रिया में लगभग 20-25 मिनट लगते हैं.

फायदे-
1. इस सर्जरी की मदद से आँखों से चश्मा उतर जाता है और दृष्टि स्पष्ट हो जाती है.
2. इस सर्जरी में खर्च भी बहुत कम हो जाता है. इस सर्जरी को करने में दोनों आंखों के लिए लगभग 20 हजार रुपये खर्च आता है.

नुकसान-
1. हालाँकि, इस सर्जरी का इस्तेमाल ज्यादा नहीं होता है. अब इससे बेहतर तकनीक भी मौजूद हैं.
2. इस सर्जरी के बाद काफी समस्याओं का शंका बना रहता है.


2. ई-लेसिक या इपिलेसिक लेजर
यह प्रक्रिया तकरीबन सिंपल लेसिक के जैसा ही होता है. इसमें मूल अंतर मशीन का होता है. इसमें ज्यादा उन्नत मशीन इस्तेमाल की जाती हैं.

फायदे-
1. यह अच्छे परिणाम देते हैं और ज्यादातर मामलों में सफलता मिलती है.
2. मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते है.
3. जोखिम कम होती हैं.


नुकसान
1. सिंपल लेसिक के तुलना में थोडा महंगा होता है. इन दोनों आंखों के ऑपरेशन पर लगभग 35-40 हजार रुपये तक खर्च आता है.
2. छोटी-मोटी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि आंख लाल होना, चौंध लगना इत्यादि.
3. कभी-कभार आंख में फूलने जैसी समस्या भी आ सकता है.


3. सी-लेसिक: कस्टमाइज्ड लेसिक लेजर
यह एक बहुत ही आसान प्रक्रिया है और परिणाम बहुत बेहतर होते हैं. इसमें ओवर या अंडर करेक्शन नहीं होती और नतीजा सटीक होता है. इस प्रक्रिया के दौरान ज्यादा समय नहीं लगता है, जिसमे मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है. और इसके साइड इफेक्ट्स काफी कम होते हैं.

नुकसान
1. यह एक महंगी प्रक्रिया है. इसमें दोनों आंखों के ऑपरेशन पर करीब 40 हजार तक खर्च हो सकता है. कुछ अस्पताल इससे ज्यादा पैसे भी ले सकते हैं.
2. इसके साइड इफेक्ट्स में आंख लाल होने, खुजली, डबल विज़न जैसी समस्या आ सकती हैं, लेकिन यह आसानी से ठीक हो जाती हैं.

कुछ और खासियतें
1. आज कल कांटेक्ट लेंस या चश्मा हटाने के लिए ज्यादातर इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है. सिंपल लेसिक सर्जरी मरीज को पहले से बने एक प्रोग्राम के जरिए आंख का ऑपरेशन किया जाता है, जबकि सी-लेसिक सर्जरी में आपकी आंख के साइज के हिसाब से पूरा प्रोग्राम बनाया जाता है.

2. सर्जन का अनुभव, काबिलियत, लेसिक लेजर से पहले और बाद की देखभाल की गुणवत्ता लेसिक लेजर सर्जरी के नतीजे के लिए काफी महत्वपूर्ण होती है.

3. चश्मे का नंबर अगर 1 से लेकर 8 डायप्टर है तो लेसिक लेजर ज्यादा उपयोगी होता है.

4. आज-कल लेसिक लेजर सर्जरी से -10 से -12 डायप्टर तक के मायोपिया, +4 से +5 डायप्टर तक के हायपरमेट्रोपिया और 5 डायप्टर तक के एस्टिग्मेटिज्म का इलाज किया जाता है.

कैसे करते हैं ऑपरेशन-
इस ऑपरेशन में बहुत कम समय लगता है, इसे करने में ज्यादा से ज्यादा 10 से 15 मिनट तक का समय लग सकता है. इस सर्जरी के दौरान मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरुरत नहीं होती है. ऑपरेशन की शुरुआत करने से पहले डॉक्टर आँखों को अच्छे से चेक करते हैं. इसके बाद ही सर्जरी करने का निर्णय लिया जाता है. जब ऑपरेशन करने का निर्णय लिया जाता है तो शुरू होने से पहले आँखों को आई-ड्रॉप के द्वारा सुन्न (एनेस्थिसिया) किया जाता है. फिर मरीज को कमर के बल लेटकर आंख पर पड़ रही एक टिमटिमाती लाइट को देखते रहने को कहा जाता है. अब एक विषेशरूप से तैयार किए गए यंत्र माइक्रोकिरेटोम की सहायता से आंख के कॉर्निया पर कट लगाकर आंख की झिल्ली को उठा देते हैं. हालांकि अब भी इस झिल्ली का एक हिस्सा आंख से जुड़ा ही रहता है. अब ऑलरेडी तैयार एक कंप्यूटर प्रोग्राम के द्वारा इस झिल्ली के नीचे लेजर बीम डालते हैं. लेजर बीम कितनी देर तक डालते रहना है इसे चिकित्सक जांच के दौरान ही पता कर लेते हैं. लेजर बीम पड़ने के बाद झिल्ली को वापस कॉर्निया पर लगा दिया जाता है और ऑपरेशन पूरा हो जाता है. यह झिल्ली एक-दो दिन में खुद ही कॉर्निया के साथ जुड़ जाती है और आंख नॉर्मल हो जाती है. मरीज उसी दिन अपने घर जा सकता है. कुछ लोग ऑपरेशन के ठीक बाद रोशनी लौटने का अनुभव कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर में सही विजन आने में एक या दिन का समय लग जाता है.

सर्जरी के बाद-
1. ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिन तक आराम करना होता है और उसके बाद मरीज नॉर्मल तरीके से काम पर लौट सकता है.
2. लेसिक लेजर सर्जरी के बाद मरीज को बहुत कम दर्द महसूस होता है और किसी टांके या पट्टी की जरूरत नहीं होती.
3. आंख की पूरी रोशनी बहुत जल्दी (2-3 दिन में) लौट आती है और चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस के बिना भी मरीज को साफ दिखने लगता है.
4. स्विमिंग, मेकअप आदि से कुछ हफ्ते परहेज करना होता है.
5. करीब 90 फीसदी लोगों में यह सर्जरी पूरी तरह कामयाब होती है. बाकी लोगों में 0.25 से लेकर 0.5 नंबर तक के चश्मे की जरूरत पड़ सकती है.
6. जो बदलाव कॉर्निया में किया गया है, वह स्थायी है इसलिए नंबर बढ़ने या चश्मा दोबारा लगने की भी कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन कुछ और वजहों, मसलन डायबीटीज या उम्र बढ़ने के साथ चश्मा लग जाए, तो अलग बात है.

कौन करा सकता है-
1. जिनकी उम्र 20 साल से ज्यादा हो. इसके बाद किसी भी उम्र में करा सकते हैं.
2. चश्मे/कॉन्टैक्ट लेंस का नंबर पिछले कम-से-कम एक साल से बदला न हो.
3. मरीज का कॉर्निया ठीक हो. उसका डायमीटर सही हो. उसमें इन्फेक्शन या फूला/माड़ा न हो.
4. लेसिक सर्जरी से कम-से-कम तीन हफ्ते पहले लेंस पहनना बंद कर देना चाहिए.

कौन नहीं करा सकता-
1. किसी की उम्र 18 साल से ज्यादा है लेकिन उसका नंबर स्थायी नहीं हुआ है, तो उसकी सर्जरी नहीं की जाती.
2. जिन लोगों का कॉर्निया पतला (450 मिमी से कम) है, उन्हें ऑपरेशन नहीं कराना चाहिए.
3. गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन नहीं किया जाता.
विकल्प: चश्मा/कॉन्टैक्ट लेंस ऐसे लोगों के लिए ऑप्शन हैं.

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Eye Checkup - Why It Is Necessary?

MD - Ophthalmology, MBBS
Ophthalmologist, Navi Mumbai
Eye Checkup - Why It Is Necessary?

Sight is one of our most important senses. To ensure that your vision is not compromised, regular eye examinations are essential. This is regardless of age and overall health because the only way to diagnose conditions in the eye in the early stages is with a comprehensive eye exam. By arresting them in the early stages, many eye disorders can be easily controlled and treated.

During a routine eye examination, the doctor will look into a number of aspects of your eye's health. An eye examination can also indicate serious health issues like diabetes, macular degeneration and glaucoma. Some of the conditions an eye doctor looks for during an eye exam are:

Refractive error
If you already have a prescription this will be checked. In other cases, the strength of the eye muscles is checked for near sightedness, far sightedness and astigmatism which can be corrected with lasik surgery, spectacles or lenses. The earlier a refractive error is corrected, the lower are its chances of increasing. When it comes to children, they often do not realize signs of vision deterioration and hence, an eye examination becomes essential.

Amblyopia
This is a condition where one eye has a much higher refractive error than the other or where the eyes are misaligned. If this is not treated in time, amblyopia can stunt vision in the affected eye and result in blindness.

Strabismus
Crossed or turned eyes are termed as cases of strabismus. This is caused by the misalignment of the eyes and can cause problems with depth perception. This can lead to amblyopia and eventual blindness if not treated in time.

Focusing and communicative problems between the eyes
An eye examination can also determine problems with focusing on objects. With children this can be a sign of underdeveloped focusing skills while in adults it can be a symptom of presbyopia or age related diminished focusing ability. Your doctor will also check how well your eyes work together. If they do not work in tandem, it can cause headaches, eye strains and problems with reading.

Diseases
By looking at the blood vessels and retina of the eyes, doctors can detect signs of high blood pressure, cholesterol etc. Leaks in the blood vessels or bleeding in the eyes can also be a sign of diabetes or swelling of the macula.

Age related conditions
As with the rest of the body, the eye tissues and muscles also degenerate with time. Cataract is one of the most common age related issues that affect the eyes.

My 25 days old baby is having redness in one eye since the last 6 days. His eye seems to discharge a yellow puss and sticks after that I just clean it with warm water but it don't seem to heal what's the solution?

MD - Homeopathy, BHMS
Homeopath, Vadodara
My 25 days old baby is having redness in one eye since the last 6 days.
His eye seems to discharge a yellow puss and ...
Give homoeopathic medicine pulsatilla 200 one dose. And you will also need the treatment. You can consult me at Lybrate for proper treatment.

Long Sightedness - Is Your Child Suffering From It?

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MS - Ophthalmology, DNB Ophtalmology
Ophthalmologist, Navi Mumbai
Long Sightedness - Is Your Child Suffering From It?

Between myopia or short-sightedness and hypermetropia or farsightedness, the latter is less common. However, this does not make it any less important. Farsightedness or long sightedness refers to a refractive error in the eye lens that creates problems focusing on objects nearby. This is because the light entering the eye does not converge on the retina but does so behind the retina.

Long-sightedness can be caused by a number of factors. Some of these are:

Structural problems with the eye: Some people are born with structural problems. This is one of the leading causes of long-sightedness. These structural conditions include:

  1. A cornea that is not steep enough
  2. A short eyeball
  3. A flattened lense
  4. A thicker than normal lense

Age: Long sightedness rarely affects children. This is a condition that becomes noticeable after the age of 40 in most cases. With age the lenses in the eyes become stiffer and do not curve normally. This is known as presbyopia.

Genetics: As with myopia, hypermetropia is also triggered by genetic faults. If someone in your family suffers from this then chances are that you will too. However, the specific genes that transfer this condition from one generation to the next have not been discovered as yet.

Underlying conditions: Long-sightedness is also triggered by underlying conditions such as diabetes, underdevelopment of a baby's eye during pregnancy(read more about diabetes and pregnancy), orbital tumours and problems with the blood vessels in the retina.

Not being able to read a book clearly is one of the most common symptoms of long-sightedness. Some of its other symptoms are:

  1. Needing to squint to focus on objects
  2. Headaches
  3. Pain or burning in the eyes
  4. Fatigue caused by reading, writing or working on a computer
  5. Red and watery eyes

Long-sightedness can be correctly diagnosed only with a thorough eye examination. Hence it is essential to schedule one regularly. This becomes more important as a person gets older. If left untreated, it can lead to double vision which in turn can trigger two possible eye problems.

StrabismusThis is a condition where the eyes get misaligned and hence do not work in tandem. People suffering from this condition find their eyes focusing on two independent objects instead of seeing the same thing.

Amblyopia: Double vision can make one eye more dominant than the other. This makes the muscles of one eye degenerate at higher rate than the other making it lazy. This is known as amblyopia.

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HI, I am 20 year old I have eye sight of -1.75 I am not interested in keeping spectacle so I need laser treatment is it is possible. if possible what is cost, advantages, disadvantages.

BHMS
Homeopath, Noida
HI, I am 20 year old I have eye sight of -1.75 I am not interested in keeping spectacle so I need laser treatment is ...
Yes it is possible to remove spects with the help of laser. Cost varies from city to city, also which procedure do you undergo. There are 3-4 procedures. U can choose one. All procedures have pros n cons. Cost varies from 30k to 125 k.
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Hello doctor. Mere dono ankho ki power -3.5 h. Jab bhi jata hu dikhane to bhadta hi h.janki mai regular chasme ka use krta hu. please suggest doctor jisse meri ankho ki roshni normal ho jaye. Diet plan or any vitamin which help me. please suggest.

Doctrate In Dietetics, Ph. D - Psychology
Dietitian/Nutritionist, Delhi
Hello doctor. Mere dono ankho ki power -3.5 h. Jab bhi jata hu dikhane to bhadta hi h.janki mai regular chasme ka use...
You can start with healthy food. You can include vitamin a and c rich food such as carrot, spinach,orange ,tomato etc. You can also include protein rich food, like wise animal protein and dairy products. That will help yopu to boost up your metabolic rate also to enhance your vision. For more specification, you can check your body constitution (vaat/ pit/kapha) and start the exact diet pattern, that will give you more specific results.
2 people found this helpful

I am 75 year old male suffering from cold, feverish, watery eyes, and nose. I have taken one crocin 650 only. What should I do now.

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Sexologist, Jaipur
I am 75 year old male suffering from cold, feverish, watery eyes, and nose. I have taken one crocin 650 only. What sh...
Have mahasudarshan kadha 4tsf with equal amount of water twice a day after light meals. Tribhuvankirti ras two tb twice a day empty stomach.

What Is Corneal Abrasion And How Can We Treat It?

DNB - Ophtalmology, Diploma In Ophthalmology, MBBS
Ophthalmologist, Bangalore
What Is Corneal Abrasion And How Can We Treat It?

Your eyes are one of the most important parts of your body. They are delicate and essential. But, there are instances of it getting injured. Corneal abrasion or scratched eye is one of the most common injuries related to the eye. It causes discomfort to the eyes. It also leads to reddening of the eye and makes it hypersensitive to light. Corneal abrasions are caused due to loss of corneal cell in the upper region of the cornea. The top or upper layer is known as corneal epithelium.

Cornea is the front part of the eye. It’s task is to help in focusing of light and enables us to see objects. A good and healthy cornea is needed and a must for having good eyesight. Thus, it is always advisable to visit an ophthalmologist immediately after you notice a corneal abrasion or meet with an accident that has led to corneal injury.

What Are The Factor That Causes Corneal Abrasions?

There are a number of ways that can result in corneal abrasion. It should be kept in mind that anything that comes in direct contact with the eye can lead to corneal injury. It is a painful scratch on the clear part of the eye or cornea.countless ways to get a corneal abrasion. Objects ranging from tree branches, paper, make up tools, finger, pet, debris in the workplace to sports toll, anything can cause an injury to the eye.

Most of the corneal abrasions are n’t caused due to traumatic incidents that are noticeable. Your cornea might get affected by sand, dust and any other tiny object. The chance of corneal abrasion increases with dry eyes. The problem gets worse at the time of waking up from sleep. If your eyes are dry, it will get hurt as the lids can tear and dislodge a part of the cornea. It is a myth that contact lenses protect your eyes. They can also be the cause behind corneal abrasion.

Symptoms Of Scratched Cornea:

It is important to know that the cornea is one of the most sensitive parts of our body. Any injury in the cornea can be really painful. Other symptoms may include redness, tearing, headache, blurry vision, etc.

Treatments For Corneal Abrasion:

The treatment depends upon the severity of the injury. Minor injuries can be cured with the help of non-preserved lubricating drops. It fastens the natural healing process. These are also treated with the use of antibiotic drops. The healing may take some two to three days times.

Treatment for a corneal abrasion depends on the severity of the wound and the cause. Minor abrasions sometimes can be treated with non-preserved lubricating drops to keep your eye moist and comfortable while your eye's natural healing process takes place. In critical cases, an antibiotic ointment might be asked to use for a longer period.

Eye Examination - Why To Not Miss It?

MBBS
Ophthalmologist, Kolkata
Eye Examination - Why To Not Miss It?

Sight is one of our most important senses. To ensure that your vision is not compromised, regular eye examinations are essential. This is regardless of age and overall health because the only way to diagnose conditions in the eye in the early stages is with a comprehensive eye exam. By arresting them in the early stages, many eye disorders can be easily controlled and treated.

During a routine eye examination, the doctor will look into a number of aspects of your eye's health. An eye examination can also indicate serious health issues like diabetes, macular degeneration and glaucoma. Every person above the age of 40 should go for routine checkups to nullify the chances of issues like glaucoma, presbyopia, difficult near vision, etc. These checkups are really mandatory for people who feel sleepy after some work or have a headache while reading.

Some of the conditions an eye doctor looks for during an eye exam are:

Refractive error
If you already have a prescription this will be checked. In other cases, the strength of the eye muscles is checked for nearsightedness, farsightedness and astigmatism which can be corrected with Lasik surgery, spectacles or lenses. The earlier a refractive error is corrected, the lower are its chances of increasing. When it comes to children, they often do not realize signs of vision deterioration and hence, an eye examination becomes essential.

Amblyopia
This is a condition where one eye has a much higher refractive error than the other or where the eyes are misaligned. If this is not treated in time, amblyopia can stunt vision in the affected eye and result in blindness.

Strabismus
Crossed or turned eyes are termed as cases of strabismus. This is caused by the misalignment of the eyes and can cause problems with depth perception. This can lead to amblyopia and eventual blindness if not treated in time.

Focusing and communicative problems between the eyes
An eye examination can also determine problems with focusing on objects. With children, this can be a sign of underdeveloped focusing skills while in adults it can be a symptom of presbyopia or age-related diminished focusing ability. Your doctor will also check how well your eyes work together. If they do not work in tandem, it can cause headaches, eye strains and problems with reading.

Diseases
By looking at the blood vessels and retina of the eyes, doctors can detect signs of high blood pressure, cholesterol etc. Leaks in the blood vessels or bleeding in the eyes can also be a sign of diabetes or swelling of the macula.

Age-related conditions
As with the rest of the body, the eye tissues and muscles also degenerate with time. Cataract is one of the most common age-related issues that affect the eyes.

Color vision problem: 
Detecting this problem is very necesssary, esspecially in case of children. Every student must go for regular eye checkups to avoid such problems and eventually opt for the desired professsional career.

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