कोलकाता में एसीएल टियर का इलाज
एसीएल टियर खेल खेलते समय घुटने की मोड़ने से होने वाली चोट है जो घुटने की महत्वपूर्ण संरचना ACL को नुकसान पहुंचाती है। यह चोट खेल जैसे फुटबॉल, बास्केटबॉल, हॉकी आदि में अधि...read more
कोलकाता में एसीएल टियर के लिए 194+ बेस्ट डॉक्टर
Dr. Amitava Narayan Mukherjee
Dr. Sanjay Bhattacharyya
Dr. Malay Kumar Mandal
Amrish Kumar Jha
Dr. Soumya Paik
Nawaz Sharif
Dr. Kaushik Chanda
Dr. Ronen Roy
Dr. Suresh Kumar Kejriwal
Dr. Sanjib Sengupta
कोलकाता में एसीएल टियर के लिए बेस्ट डॉक्टर
| डॉक्टर का नाम | अस्पताल की फीस | लायब्रेट रेटिंग |
|---|---|---|
| Amitava Narayan Mukherjee | ₹ 500 | NA |
| Sanjay Bhattacharyya | ₹ 700 | NA |
| Malay Kumar Mandal | ₹ 1,100 | NA |
| Amrish Kumar Jha | ₹ 600 | NA |
| Soumya Paik | ₹ 900 | NA |
| Nawaz Sharif | ₹ 400 | NA |
| Kaushik Chanda | ₹ 700 | NA |
| Ronen Roy | ₹ 1,320 | NA |
| Suresh Kumar Kejriwal | ₹ 500 | NA |
| Sanjib Sengupta | Free | NA |
कोलकाता में एसीएल टियर का इलाज पर रोगियों की प्रतिक्रिया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एसीएल टियर उपचार के लिए कौन सा डॉक्टर सबसे अच्छा होता है?
एक आर्थोपेडिक सर्जन ACL टियर के उपचार के लिए अच्छा डॉक्टर होता है। जब भी घुटने में चोट लगे, उसमे दर्द या सूजन आए तो आपको एक आर्थोपेडिक सर्जन के पास जाना चाहिए। आर्थोपेडिक सर्जन जोड़ो, हड्डियों, जोड़ों, स्नायुबंधन, कण्डरा और मांसपेशियों के निदान और उपचार में विशेषज्ञ होता है। उसके बाद घुटने की सर्जरी करने एम् महारत हासिल होती है। इसलिए ACL टियर के उपचार के लिए आर्थोपेडिक सर्जन के पास जाना चाहिए ।
कोलकाता में एसीएल टियर उपचार के लिए सबसे अच्छे डॉक्टर कैसे ढूंढें?
अगर आप कोलकाता में ACL टियर का उपचार कराने के लिए एक अच्छे सर्जन की खोज में हैं तोwww.lybrate.comआपकी मदद कर सकती है। इस वेबसाइट पर शहर के सभी घुटने की जोड़ संबंधी विकारों के विशेषज्ञों की लिस्ट होती है। यहां उनके अनुभव और शुल्क भी ब्यौरा दिया होता है। आप अपनी पसंद का सर्जन चुन सकते हैं और तो और आप अपना अपॉइंटमेंट भी बुक कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपने आस पास किसी अच्छे चिकित्सा संस्थान में भी जाकर अपने लिए सर्जन का चुनाव कर सकते हैं।
एसीएल टियर का मुख्य कारण क्या है?
घुटने में ACL एक महत्वपूर्ण लिगामेंट होता हैजो जांघ की हड्डी को शिनबोन से जोड़ने का काम करता है। यह घुटने को गतिशीलता देने के अलावा स्थिर रखने का काम करती है। कई बार चोट या उम्र के प्रभाव से ACL को क्षति पहुँचती है। इस क्षति के कारण घुटने में दर्द और सूजन रहता है और व्यक्ति अपनी दैनिक गतिविधियों को भी ठीक से नहीं कर पाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ACL टियर ज्यादा होता है। क्योंकि उनके बायोमैकेनिक्स उनके घुटनों पर अधिक तनाव डालते हैं। ACL चोटें बच्चों में भी आम हैं।
ACL चोटें के निम्न कारण हो सकते हैं:
एसीएल चोटें अक्सर खेल और फिटनेस गतिविधियों के दौरान ही लगती है।
- खेल और फिटनेस गतिविधियों के दौरान घुटने में होने वाले तनाव के कारण
- जल्दी से रुक जाना और दिशा बदलना
- कूदने के बाद धुरी या लैंडिंग के दौरान
- तेज दौड़ते हुए अचानक रुक जाना
- दुर्घटना के दौरान घुटने में चोट लगना
क्या एसीएल टियर गंभीर होता है?
घुटने का स्वास्थ्य अगर सही रहे तो व्यक्ति के दैनिक जीवन को सुगमता प्रदान करता है। अगर इसमें किसी प्रकार की चोट आ जाए तो दर्द, सूजन के साथ व्यक्ति की दिनचर्या भी प्रभावित होती है। अगर समय से इसका उपचार नहीं किया तो दर्द असहनीय हो सकता है। इसके कारण घुटने अस्थिर हो जाते हैं, चलने-फिरने उठने बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक ऐसी स्थिति आती है कि मरीज विस्तार से उठ भी नहीं सकता है।
कोलकाता में एसीएल टियर के उपचार का सबसे तेज़ तरीका क्या है?
कोलकाता में एसीएल टियर का सबसे तेज तरीका आर्थोस्कोपी सर्जरी है।मरीज के ACL टियर की गंभीरता पर इसका उपचार निर्भर करता है। अगर घुटने की चोट कम गंभीर है तो सर्जरी भौतिक उपचार किया जाता है। लेकिन अगर चोट ज्यादा गंभीर है तो सर्जरी करनी पड़ती है। घुटने की सर्जरी के लिएअर्थोस्कोपी सर्जरी प्रक्रिया सफल और प्रभावी होती है।
कोलकाता में एसीएल टियर उपचार के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
जब घुटने में गंभीर चोट लगने के बाद उसमे दर्द और सूजन हो और वह बढ़ता ही जा रहा हो। दर्द नाशक दवाएं और सिकाई असफल हो जाए। दैनिक गतिविधियों में बाधा पहुंचने लगे, तो तुरंत आपको एक अनुभवी आर्थोपेडिक सर्जन से संपर्क करना चाहिए।
अगर मैं एसीएल टियर से पीड़ित हूं तो मुझे अपने डॉक्टर से क्या सवाल पूछना चाहिए?
एसीएल टियर से पीड़ित मरीज को सर्जन से निम्न सवाल पूछने चाहिए:
- क्या इसका उपचार नॉन सर्जिकल तरीके से हो सकता है?
- तत्काल दर्द से राहत के लिए क्या करें?
- अगर सर्जरी करनी पड़ी तो लागत कितनी आ सकती है?
- सर्जरी के बाद रिकवर करने में कितना समय लग सकता है?
- सर्जरी में कोई रिस्क तो नहीं?
- अगर सर्जरी न कराया जाए तो क्या हो सकता है?
क्या एसीएल टियर सर्जरी दर्दनाक होता है?
एसीएल सर्जरी दर्द से राहत के लिए की जाती है। लेकिन ACL के मरम्मत करना एक सर्जिकल प्रक्रिया है इसलिए इसमें दर्द होना एक आम समस्या है। सर्जरी के बाद घुटने में दर्द होता है। जिसे कम करने के लिए सर्जन दर्द नाशक दवाएं देते हैं। लेकिन कभी कभी यह दर्द असहनीय हो सकता है।
क्या एसीएल टियर सर्जरी सुरक्षित होता है?
एसीएल टियर सर्जरी एक सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया मानी जाती है। इस सर्जरी के कई लाभ होते हैं, जैसे- घुटने के स्थिर होना, दर्द कम होना, सूजन ख़त्म होना, मरीज का दैनिक गतिविधियों में वापस लौटना आदि। लेकिन जैसा कि यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है तो इसके कुछ रिस्क फैक्टर भी हैं। जो दुर्लभ होते हैं, जैसे- दर्द, संक्रमण, रक्त के थक्के बनना, जोड़ का अपनी जगह से हट जाना आदि। कई बार ACL सर्जरी असफल हो जाती है, जिसके कारण दोबारा सर्जरी करनी पड़ती है।
क्या लेजर एसीएल टियर उपचार स्थायी है?
एसीएल टियर के इलाज में लेजर प्रक्रिया ज्यादा उपयोगी नहीं मानी जाती है।इसे कम गंभीर एसीएल के उपचार में दर्द और सूजन कम करने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।लेकिन अगर लिगामेंट्स ज्यादा क्षतिग्रस्त हो तो उसके लिए आर्थोस्कोपी सर्जरी ही उपयोगी होती है।
कोलकाता में एसीएल टियर के उपचार की लागत क्या है?
कोलकाता मेंएसीएल टियर सर्जरी की लागत विभिन्न कारकों पर निर्भर कर सकती है, जैसे एसीएल टियर की गंभीरता, सरजन का चुनाव, अस्पताल का स्थान, मरीज की जरुरत आदि। अगर कोलकाता में एसीएल टियर सर्जरी की अनुमानित लागत की बात करें तो 70,000 रु. से लेकर 2,00,000रुपए तक हो सकती है।
अगर एसीएल टियर का उपचार न कराया जाए तो क्या होता है?
एसीएल टियर घुटने में चोट लगने के कारण होता है। चोट के कारण घुटने एक अंदर के लिगामेंट फट जाते हैं, जिसके कारण मरीज को कई परेशानियां होती हैं। जैसे दर्द, सूजन, चलने-फिरने, उठने-बैठने जैसी सामान्य गतिविधियां भी नहीं कर पाता। अगर समय से उपचार न किया जाय तो यहस्थितिबिगड़ सकती है और मरीज विकलांग भी हो सकता है।
ACL टियर सर्जरी के रिकवरी करने में कितना समय लगता है?
सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी धीरे-धीरे होती है।हालांकि रिकवरी का समय हर मरीज के लिए अलग अलग हो सकता है। पहले एक महीने में मरीज बैसाखी द्वारा चल सकता है।वैसे उसे अपनी सामान्य गतिविधियों में वापस लौटने में आठ से नौ महीने का समय लग सकता है, हालांकि कुछ लोग छह महीने में ठीक हो सकते हैं।
