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Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

Dr. Sanjeev Kumar Singh 87% (192 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri  •  9 years experience
Urinary Diseases Symptoms, Treatment - मूत्र रोग के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

मूत्र से संबंधित बीमारी महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है. गुर्दा हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता वरन इसके अन्य कार्य भी हैं. जैसे- खून का शुद्धिकरण, शरीर में पानी का संतुलन, अम्ल और क्षार का संतुलन, खून के दबाव पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए मूत्र रो के कारण, लक्षण और घरेलु उपचार को समझने का प्रयास करें.

क्या है मूत्र रोग का कारण?
जैसा कि हर रोग के कुछ उचित कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार मूत्र विकारों के भी कई कारण हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु और कवक है. इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है.

मूत्र विकार के लक्षण
मूत्र रोग के मुख्य लक्षणों में तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत आदि है. इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक पाया जाता है.

मूत्र रोग के उपचार

आयुर्वेदिक उपचार

1. पहला प्रयोग
यदि आप केले की जड़ के 20 से 50 मि.ली. रस को 30 से 50 मि.ली. गौझरण के साथ 100 मि.ली.पानी मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ पीसकर उसका पेडू पर लेप करने से पेशाब खुलकर आता है.
2. दूसरा प्रयोग
आधा से 2 ग्राम शुद्ध को शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.
3. तीसरा प्रयोग
मूत्र रोग को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.
4. चौथा प्रयोग
आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.
5. पाँचवाँ प्रयोग
इस तरीके में 50-60 ग्राम करेले के पत्तों के रस को चुटकी भर हींग मिलाकर देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है अथवा 100 ग्राम बकरी का कच्चा दूध 1 लीटर पानी और शक्कर मिलाकर पियें.

अन्य घरेलू उपचार
1. खीरा ककड़ी

यदि रोगी को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के अंतर पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.
2. मूली के पत्तों का रस
मूत्र विकार में रोगी को मूली के पत्तों का 100 मिली रस दिन में 3 बार सेवन कराएं. यह एक रामबाण औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.
3. नींबू
नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.
4. पालक
पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.
5. गाजर
मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.
6. मट्ठा
आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.
7. भिंडी
ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.
8. सौंफ
सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से मूत्र रोग में राहत मिलती है.
 

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