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Ayurvedic Teatment Of Hepatitis C - हेपेटाइटिस सी का आयुर्वेदिक उपचार

Written and reviewed by
Dr. Sanjeev Kumar Singh 90% (193 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri  •  10 years experience
Ayurvedic Teatment Of Hepatitis C - हेपेटाइटिस सी का आयुर्वेदिक उपचार

वायरस से होने वाले संक्रमणों में से एक संक्रमण है हेपेटाइटिस सी. इस संक्रमण में वायरस जिगर पर हमला करता है और सूजन पैदा करता है. हेपेटाइटिस सी की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसमें वायरस से संक्रमित अधिकांश लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. वास्तव में, अधिकांश लोगों को पता ही नहीं होता कि वे हेपेटाइटिस सी से संक्रमित है, जब तक कि उनके जिगर को कोई क्षति ना हो. यह सालों बाद मेडिकल परीक्षण के दौरान पता चलता है. हेपेटाइटिस एक संक्रामक रोग है, जो कि लीवर से संबंधित है. हेपेटाइटिस सी कई हेपेटाइटिस वायरस में से एक है और यह आमतौर पर इन वायरसों में से सबसे अधिक गंभीर माना जाता है. हेपेटाइटिस सी दूषित खून से संपर्क के माध्यम से पारित होता है. सबसे ज्यादा अवैध ड्रग के उपयोग के दौरान साझा की गई सुइयों के माध्यम से., इससे बचने के लिए कई घरेलू उपाय हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हेपेटाइटिस सी के आयुर्वेदिक उपचार के बारें में विस्तारपूर्वक जानें ताकि इस सम्बंध में लोगों में जागरूकता फ़ैल सके.
आंवला है लाभकारी
आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है जो लीवर को हर तरह से फायदा पहुंचाता है. इसमें पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट हमारे शरीर से टोक्सिन को हटाने में मदद करते हैं, और लीवर हमारे शरीर की वह जगह है जहाँ सबसे अधिक मात्रा में टोक्सिन पाया जाता है. आंवला के प्रयोग से इम्यूनिटी बढ़े और पाचन शक्ति मजबूत हो. ऐसे में कच्चे आंवले को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर इसे सलाद में मिलाकर खा सकते हैं या आप इसे पीस कर दही में मिलाकर रायता भी बना सकते हैं. इसके अलावा जूस व चटनी के रूप मे भी खा सकते है.
मुलेठी पाउडर और शहद की सहायता से
मुलेठी पाउडर और शहद के इस्तेमाल से हेपेटाइटिस सी की बीमारी को दूर किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल आयर्वेद में बहुत पहले से ही नान एल्कोहल फैटी लीवर सम्बंधित बीमारियों के उपचार के लिए होता आ रहा है. आपको बता दें कि मुलेठी पाउडर हमारे लिवर को बहुत फायदा पंहुचाती है. एक बड़ा चम्मच मुलेठी पाउडर में दो चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन खाएं. हेपेटाइटिस के उपचार में यह भी बेहद फायदेमंद है. इसके साथ ही लिकोरिस की जड़ को पानी में उबालकर उसकी चाय भी बनाई जा सकती है.
हल्दी का इस्तेमाल लाभ पहुंचाता है
हल्दी को एक बेहद शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट माना जाता है. इसके साथ ही इसका एंटीवायरल एक्शन हेपेटाइटिस सी के वायरस को बढ़ने से रोकता है. हल्दी को इस्तेमाल करने का सबसे आसान और अच्छा उपाय है कि इसे खाना बनाते वक्त मसालों के साथ मिलाकर खाएं या दूध में चुटकीभर हल्दी मिलाकर रोज पिएं. इससे आपको निश्चित रूप से काफी लाभ मिलेगा.
काली गाजर व ग्रीन टी
काली गाजर के भी बहुत फायदे हैं. विटामिन से भरपूर काली गाजर से खून की कमी पूरी होती है तथा रक्त संचार सुधरता है. हेपेटाइटिस में भी गाजर को सलाद के रूप में खाने से बहुत फायदे होते हैं. हरी चाय में एंटीऑक्सीडेंट के गुण भरी मात्रा में पाए जाते है. जिससे लीवर की सफाई में मदद होती है तथा लीवर अच्छे से काम करता है. हेपेटाइटिस के उपचार और बचाव के लिए ग्रीन टी को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. 
लहसुन भी है मददगार
लहसुन शरीर से विषाक्त पदार्थो को साफ़ करने में मदद करता है. लहसुन में भारी मात्रा में सेलेनियम पाया जाता है, जो की लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है और रक्त को साफ करता है. ऐसे में रोजाना सुबह खाली पेट लहसुन की एक से दो कली चबाएं. साथ ही खाना बनाने में भी लहसुन का प्रयोग मसाले के रूप में जरूर करें.

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