मंकीपॉक्स धीरे-धीरे पूरे भारत में अपना पैर पसार रहा है और दिल्ली वायरल ज़ूनोसिस यानी पशुजन्य रोग के मामले की रिपोर्ट करने वाला नवीनतम राज्य बन गया है। कुल मिलाकर, यह देश का चौथा मामला है, बाकी सभी मामले केरल से सामने आए हैं।
अजीब बात यह है कि दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी का कोई विदेश यात्रा का इतिहास नहीं हैं और इसके विपरीत बाकी मामले केरल से है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 34 वर्षीय व्यक्ति ने पिछले महीने अपने दोस्त के साथ हिमाचल की यात्रा की थी और वापस लौटने के बाद उन्हें बुखार हो गया। उन्होंने शुरू में यह सोचकर लक्षणों को नजरअंदाज किया कि यह मौसम में बदलाव के कारण हो रहा है।
जब एक सप्ताह से अधिक समय तक बुखार कम नहीं हुआ और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर त्वचा के घाव विकसित होने लगे, तो उन्होंने डॉक्टर को दिखाया, जिसके बाद उन्हें लोक नायक अस्पताल में रेफर कर दिया, जो कि मंकीपॉक्स के संदिग्ध और पुष्ट मामलों को आइसोलेट करने और प्रबंधित करने का आधिकारिक केंद्र है।
दिल्ली के मरीज के संपर्क में आए किसी भी व्यक्ति में लक्षण दिखे तो उन्हें खुद को आइसोलेट करने के लिए कहा गया है। उनके अन्य संपर्कों को भी उनके लक्षणों की बारीकी से निगरानी करने और उन्हें भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रखने की सलाह दी गई है।
जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है, मंकीपॉक्स एक वायरल ज़ूनोसिस है, जिसका मतलब है कि यह वायरस जानवरों से इंसानों को संक्रमित करता है। मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक के लक्षणों से काफी मिलते-जुलते हैं लेकिन रिसर्च के अनुसार यह कम गंभीर होता है।
मंकीपॉक्स वायरस के दो अलग-अलग आनुवंशिक समूह हैं - मध्य अफ्रीकी और पश्चिम अफ्रीकी। इन दोनों के बीच, मध्य अफ्रीकन क्लैड, जिसे कांगो बेसिन के नाम से भी जाना जाता है, अधिक गंभीर लक्षण पैदा करता है और तुलनात्मक रूप से अधिक संचरित होता है।
मंकीपॉक्स को आमतौर पर किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती है और यह दो से चार सप्ताह में ठीक हो सकता है। एक समय के साथ, सामान्य लोगों में मृत्यु दर शून्य से 11 प्रतिशत के बीच रही है। छोटे बच्चों में वायरस के कारण मृत्यु का खतरा अधिक होता है।
हाल ही में, जब मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया है, तो मृत्यु दर तीन से छह प्रतिशत देखी गई है।
बुखार, चकत्ते और सिरदर्द मंकीपॉक्स के सबसे स्पष्ट लक्षण हैं। ये लक्षण आम तौर पर 3 सप्ताह तक चलते हैं। इसके और भी लक्षण हैं जैसे- गले में खराश, लिम्फ नोड्स में सूजन और खांसी जिससे मंकीपॉक्स का पता चलता है।
बुखार आने के एक से तीन दिनों में रोगी के त्वचा पर घाव होने लगते हैं, जो दो से चार सप्ताह तक रहते हैं। ये घाव अक्सर तब तक दर्दनाक होते हैं जब तक कि उपचार प्रक्रिया शुरू नहीं हो जाता है।
मंकीपॉक्स सांस की बड़ी बूंदों यानी रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जब एक स्वस्थ व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ ज्यादा देर तक रहता है, तो वह वायरस से संक्रमित होने के लिए अतिसंवेदनशील हो जाता है। यह शरीर के तरल पदार्थों के आदान-प्रदान या घाव, सामग्री के संपर्क में आने से भी इस वायरस का प्रसार संभव है।
संक्रमित व्यक्ति के कपड़ों को छूने या उनके संपर्क में आने से भी वायरस का संक्रमण हो सकता है।
चूंकि यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैलता है, इसलिए यह छोटे स्तनधारियों जैसे चूहे, गिलहरियों और नॉन-ह्यूमन प्राइमेट जैसे वानर या बंदरों के काटने या खरोंच से भी फैल सकता है। संक्रमित जानवर के बुशमीट के सेवन से भी इसका प्रसार संभव है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने हाल ही में यह घोषणा की है कि मंकीपॉक्स अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। दुनिया को अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने कहा कि यह वायरस मुख्य रूप से उन पुरुषों को संक्रमित कर रहा है जो पुरुषों के साथ यौन संबंध रखते हैं और जिनके कई सेक्स पार्टनर्स हैं। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इस प्रकोप को सही समूहों में सही रणनीतियों के साथ नियंत्रित किया जा सकता है।
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पिछले गुरुवार को प्रकाशित एक रिसर्च में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि 528 पुष्ट मामलों में से कुल 95 प्रतिशत मामले सेक्स के माध्यम से फैले हैं और कुल 98 प्रतिशत संक्रमित लोग समलैंगिक यानी गे या बाईसेक्सुअल हैं।
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने मंकीपॉक्स को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं। आईए जानते हैं:-
सीडीसी अनुशंसा करता है, यदि आपको संदेह है कि आपको मंकीपॉक्स हुआ है, तो आपको तुरंत अपने आप को आईसोलेट कर लेना चाहिए। आपको अपने परिवार, दोस्तों या पालतू जानवरों के संपर्क में बिल्कुल भी नहीं आना चाहिए।
सीडीसी उन लोगों को वैक्सीन लेने की सलाह देती है जो मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या संक्रमण के हाई रिस्क पर हैं। मंकीपॉक्स वैक्सीन किसे लेना चाहिए, इस पर दिशानिर्देश यहां दिए गए हैं -
दुर्भाग्य से, वैज्ञानिकों को मंकीपॉक्स के विशिष्ट उपचार का पता लगाना अभी बाकी है। इसलिए, बीमारी को ठीक करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने आप को एक कमरे में आईसोलेट कर लें और लोगों और पालतू जानवरों के साथ संपर्क से बचें।
हालांकि, यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (US FDA) ने चेचक के इलाज के लिए वर्ष 2018 में Tpoxx (tecovirimat) को मंजूरी दी थी, जो कि लगभग मंकीपॉक्स की तरह ही होता है।
अब, सीडीसी ने मंकीपॉक्स के खिलाफ जांच दवा के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली एंटीवायरल दवा को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि Tpoxx का निर्माण अमेरिकी फार्मास्युटिकल कंपनी एसआईजीए टेक्नोलॉजी द्वारा किया जाता है।
मनुष्यों में मंकीपॉक्स का पहला मामला 1970 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में दर्ज किया गया था। ज्यादातर मामले कांगो बेसिन के ग्रामीण और वर्षावन क्षेत्रों से सामने आए हैं। अधिकांश इंसानो के मामले मध्य और पश्चिम अफ्रीका में दर्ज किए गए हैं।
1970 से अब तक 11 अफ्रीकी देशों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं। यह वायरस पहली बार 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका में अफ्रीका के बाहर दर्ज किया गया था, जिसने कुल 70 लोगों को संक्रमित किया।
इजराइल, यूनाइटेड किंगडम और सिंगापुर जैसे देशों में अलग-अलग समय पर मंकीपॉक्स के मामले रिपोर्ट किए गए है।
मई 2022 में मंकीपॉक्स कई गैर-स्थानिक देशों में फैल गया। दुनिया भर के कुल 75 देशों में अब तक इस वायरस के 16,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वैश्विक स्तर पर मंकीपॉक्स के प्रकोप के कारण मरने वालों की संख्या पांच तक पहुंच गई है।