आइलिड सर्जरी क्या है?
आइलिड सर्जरी आंखों से संबंधित सर्जरी है। इसके जरिए आंख की पलकों पर मौजूद अतिरिक्त स्किन, फैट और मांसपेशियों को हटाया जाता है। इसे ब्लेफेरोप्लास्टी कहते हैं। दरअसल उम्र के साथ आंखों के आसपास फैट जमा होने के कारण हमारी पलकें झुकने लगती हैं। इससे हमारी दृष्टि भी पहले की तुलना में कमजोर होने लगती है। इसे ड्रूप आई कहते हैं।
आइलिड सर्जरी के दौरान सर्जन आंख के आसपास मौजूद त्वचा, मांसपेशियों और चर्बी को भी हटा देते हैं। यह चर्बी आपकी आंखों के आस-पास के क्षेत्र को ढीला कर देती है। यह एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है।
आइलिड सर्जरी के प्रकार - eyelid surgery ke prakar
ऊपरी पलक से अतिरिक्त त्वचा की चर्बी को हटाने के लिए यह सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी के बाद आंखें पहले की तुलना में बेहतर और ज्यादा यंग दिखने लगती हैं। इससे ऊपरी पलकों के आसपास की बारीक रेखाएं और झुर्रियां भी कम हो जाती हैं। इससे मरीज को देखने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती।
इस प्रक्रिया के जरिए ऊपरी पलक के लटके हुए भाग को ठीक किया जाता है। दरअसल पलक के ऊपरी भाग के लटकने के कारण मरीज को देखने में परेशानी होने लगती है। इसके जरिए सर्जन लेवेटर मसल को टाइट कर देते हैं, जिससे पलकें आसानी से ऊपर उठने लगती हैं और मरीज को देखने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती।
इसके जरिए निचली पलक की अतिरिक्त त्वचा और आंखों के नीचे की चर्बी को को हटाया जाता है। जिससे आंखों में पहले की तुलना में ज्यादा खिंचाव महसूस होने लगता है।
इस प्रक्रिया में पलक को सहारा देने वाले टेंडॉन्स को टाइट किया जाता है और लटकती हुई निचली पलक को ठीक किया जाता है।
बढ़ती उम्र के साथ चेहरे के हाव-भाव में बदलाव आने लगता है। आंखों के आसपास त्वचा की सिकुड़न के कारण आंखें बड़ी और चेहरा भद्दा दिखने लगता है। आंखों से जुड़े इन्हीं बदलावों को ठीक करने के लिए आईब्रो लिफ्ट किया जाता है। इस सर्जरी में आईब्रो को ऊपर उठाया जाता है जिससे चेहरा पहले की तुलना में बेहतर दिखने लगता है। आईब्रो का नीचे लटकना आनुवंशिक कारणों से भी होता है।
आइलिड सर्जरी कराने के फायदे - eyelid surgery karne ke fayde
उम्र बढ़ने के साथ हमारी आंखों के आसपास की स्किन ढीली होने लगती है। इससे हमारे देखने की क्षमता प्रभावित होती है। आंखों के पास इस प्रकार के उभार या अतिरिक्त जमा हुए फैट को हटाने के लिए ब्लेफेरोप्लास्टी सर्जरी बेहद आसान उपाय है। इस सर्जरी के फायदे नीचे दिए जा रहे हैं।
- आंखें पहले की तरह यंग और खिंची हुई दिखने लगती हैं।
- आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- इससे हमारी दृष्टि पहले की अपेक्षा बेहतर हो जाती है।
- इससे माथे की झुर्रियां कम हो जाती हैं।
- इससे आंखें एकदम साफ हो जाती हैं।
- माइग्रेन की समस्या कम हो जाती है।
आंखों के आसपास और पलकों पर जमी अतिरिक्त त्वचा या फैट को हटाने के लिए ब्लेफेरोप्लास्टी सर्जरी की जाती है। यह उम्रदराज लोगों में होने वाले दृष्टिदोष को दूर करने लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है। आइलिड सर्जरी कराने के निम्न कारण हो सकते हैं:
- ऊपरी और निचली पलकों पर जमा अतिरिक्त त्वचा या फैट को हटाने के लिए।
- आंखों के आसपास वसायुक्त जमाव के कारण पलकों में आयी सूजन को हटाने के लिए।
- आंख के पास चर्बी के उभार और अतिरिक्त त्वचा को हटाने के लिए।
- डार्क सर्कल और अंडर आई बैग्स को हटाने के लिए।
- आंखों के नीचे की रेखाओं और आंखों की झुर्रियों को हटाने के लिए।
- माथे की झुर्रियां और क्रीज को हटाने के लिए।
- नाक की हड्डी पर मौजूद झुर्रियों को हटाने के लिए।
- आइब्रो के बीच में वर्टिकल क्रीज होने पर।
- आइब्रो के लटकने या ढीले होने पर।
- आइब्रो के एक साथ न होने पर।
आइलिड सर्जरी के लिए कई स्तर पर तैयारी की जरूरत होती है। तैयारी की प्रक्रिया आपके द्वारा की जा रही आइलिड सर्जरी के प्रकार और आपके स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। इसलिए सर्जरी से पहले आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए। सर्जरी से पहले आपको निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- डॉक्टर सर्जरी से पहले पेशेंट के लिए कुछ विशेष दवाएं दे सकते हैं। ऐसे में आपके द्वारा उपयोग की जा रही सभी प्रकार की दवाओं की जानकारी अपने डॉक्टर को जरूर देनी चाहिए।
- यदि आपको किसी दवा से एलर्जी है तो इसके बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताएं।
- सर्जरी से पहले खून को पतला करने वाली दवाएं लेना बंद कर दें। इससे खून का थक्का जमना मुश्किल हो जाता है।
- सर्जरी के लिए डॉक्टर पहले से आपको डाइट प्लान दे सकते हैं। इसे जरूर फॉलो करें। सर्जरी से पहले आपको तरल आहार लेने की आवश्यकता हो सकती है।
यह सर्जरी प्रक्रिया तीन स्टेजेस से गुजरती है। जिसमें शामिल हैं - प्रक्रिया से पहले, प्रक्रिया के दौरान, और प्रक्रिया के बाद। आइये समझते हैं -
- सर्जरी से पहले मरीज की शारीरिक जांच की जाती है।
- मरीज के हाथ में IV लगा दी जाती है। इसके जरिए उस दवाएं व अन्य तरल पदार्थ दिए जाते हैं।
- इसके बाद रोगी को जनरल या लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है, ताकि प्रक्रिया के दौरान दर्द का पता न चले।
- सर्जरी के दौरान ब्लड प्रेशर को जांचने के लिए एक कैथेटर (छोटी, लचीली ट्यूब) को आपके पैर, कमर, कलाई या कोहनी की धमनी में डाला जा सकता है।
- सर्जन सर्जिकल साइट को साफ और स्टेरलाइज करता है और संक्रमण को रोकने के लिए आपके IV के माध्यम से आपको एंटीबायोटिक्स दी जाती है।
- सर्जरी से पहले आपको एनस्थीसिया दिया जाता है। इसके बाद आपकी आईलिड को सुन्न करने के लिए इंजेक्शन लगाया जाता है।
- एनेस्थीसिया के साथ IV किट के माध्यम से आपको नींद की दवाई दी जाती है ताकि आप सर्जरी के दौरान नींद में ही रहें। यह दवा एक प्रकार से आपको कुछ देर के लिए बेहोश कर देती है। इसके अलावा पेशेंट को सर्जरी के दौरान ऑक्सीजन और श्वास देने के लिए एंडोट्रैचियल ट्यूब भी रखी जाती है।
- ऊपरी पलक पर सर्जरी करते समय सर्जन एक ब्लेड, लेजर, या सुई-टिप कॉटरी यूनिट के साथ सर्जरी वाली जगह पर कट लगाता है। इसके बाद यहां से अतिरिक्त चर्बी और स्किन के हिस्से को हटा दिया जाता है।
- निचले लिड पर सर्जन आपकी आंखों की प्राकृतिक क्रीज में या निचली पलक के अंदर एक कट लगाता है। इसके बाद अतिरिक्त चर्बी, मांसपेशियों और ढीली त्वचा को हटा देता है।
- ऊपरी पलक के पुतली के पास लटकने की स्थिति में सर्जन ब्लीफेरोप्लास्टी कर सकता है। इसे पटोसिस नामक प्रक्रिया के साथ जोड़ा जाता है। पटोसिस को पलक को ऊपर उठाने के साथ-साथ अतिरिक्त पलक की त्वचा को हटाने के लिए डिजाइन किया गया है।
- सर्जरी के बाद आपको रिकवरी रूम में शिफ्ट किया जाता है। यहां पर आपकी निगरानी की जाती है।
- सर्जरी के बाद की किसी भी प्रकार की असुविधा को कम करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। सर्जरी के कारण किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए ओरल एंटीबायोटिक्स और घाव की देखभाल के निर्देश दिए जाते हैं।
- मरीज के किसी भी प्रकार के दर्द या परेशानी को भी देखा जाता है। आपको पूरी तरह से रिकवर होने में 10-14 दिन का समय लग सकता है।
आइलिड सर्जरी की जटिलताएं - eyelid surgery ki jatiltayein
- सर्जरी के बाद धुंधला दिखना
- अत्यधिक धूप के संपर्क में आने से संक्रमण होने का खतरा
- आंखों में सूखापन रहना
- आंख के आसपास खुजली होना
- आंखें बंद करने और खोलने में परेशानी होना
- मांसपेशियों को नुकसान पहुंचना
- सर्जरी के बाद शरीर में किसी प्रकार के निशान का रह जाना
- हेमेटोमा (त्वचा के नीचे रक्त का संचय जिसे हटाने की आवश्यकता हो सकती है)
आइलिड सर्जरी की लागत - eyelid surgery ki laagat
भारत में आइलिड सर्जरी की लागत 80,000 से 2,00,000 रुपए के बीच हो सकती है। हालांकि बहुत सी चीजें सर्जरी की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। इसमें अस्पताल या क्लिनिक का ब्रांड नेम, डॉक्टर की फीस, प्रवेश शुल्क, सर्जरी का प्रकार, सर्जरी के बाद होने वाली परेशानियां आदि शामिल हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल के रूम का किराया भी सर्जरी के खर्च को बढ़ा सकता है।
प्रमुख भारतीय शहरों में आइलिड सर्जरी की लागत हो सकती है:
आइलिड सर्जरी के नुकसान - eyelid surgery ke nuksaan
सर्जरी से जुड़े दुष्प्रभावों में प्रतिकूल एनेस्थेटिक प्रतिक्रियाएं, ब्लड लॉस, रक्त के थक्के और संक्रमण शामिल हैं। आइलिड सर्जरी के कुछ सामान्य दुष्प्रभाव यहां दिए गए हैं।
- पलकों में सूजन रहना, पलकों का सुन्न होना, पलकों को रात में बंद करने में मुश्किल होना
- देखने में चिड़चिड़ी, सेंसिटिव या पानी वाली आंखें - यह कुछ सप्ताह तक रह सकती हैं
- एक प्रकार की चोट जो काली आंख की तरह दिखती है
- सर्जरी वाली जगह पर निशान बनना
- सूर्य या अन्य तेज रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
- दृष्टि में अस्थायी या स्थायी परिवर्तन
- गंभीर स्थिति में अंधेपन की संभावना, यह बेहद दुर्लभ स्थिति है
निष्कर्ष - Conclusion
ब्लेफेरोप्लास्टी आंखों से जुड़ी सर्जरी है। इस सर्जरी का उपयोग मुख्य रूप से उम्र बढ़ने के सामान्य लक्षणों के इलाज के लिए किया जाता है। आंखों के आसपास जमा होने वाली अतिरिक्त त्वचा या चर्बी यदि गंभीर रूप से बढ़ रही है तो इसके लिए सर्जरी कराना आवश्यक हो जाता है। जबकि कुछ मामलों में त्वचा से संबंधित इस प्रकार के उभार अपने आप ही खत्म हो जाते हैं। सर्जरी के बाद आपकी आंखें फिर से यंग हो जाती हैं। इससे आपकी दृष्टि भी पहले से बेहतर होती है। सर्जरी के दौरान आए घाव या कट 10-15 दिन में अपने आप भर जाते हैं। सर्जरी के बाद पेशेंट को धूप और तेज रोशनी में न जाने की सलाह दी जाती है।