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तुतलाने का इलाज - Tutlane Ka Ilaj!

Written and reviewed by
Dr. Sanjeev Kumar Singh 90% (193 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri  •  10 years experience
तुतलाने का इलाज - Tutlane Ka Ilaj!

वैसे हकलाने या तुतलाने की समस्या बेहद सामान्य है लेकिन ज्यादातर मामलों में इसका इलाज संभव है. एक्सपर्ट्स का मानना है की 80-90 फीसदी हकलाने और तुतलाने के मामलों को उचित उपचार की मदद से ठीक किया जा सकता है. यह एक ऐसी समस्या है जिससे बच्चे और बड़ों, दोनों में आत्मविश्वास कम होने लगता है. वे लोगों से खुल कर बात करने से परहेज करने लगते हैं. इससे वह अपने मन की बात खुल कर नहीं साझा कर पाते हैं. इसलिए समझदारी यही होता है की इसका इलाज बचपन में ही करा लिया जाए. सामान्य तौर पर बच्चा 3 से 4 साल की उम्र तक साफ बोलने लगता है. अगर ऐसा ना हो तो बच्चों के डॉक्टर को दिखाएं. अगर इलाज जल्दी शुरू किया जाए तो सुधार की संभावना ज्यादा होती है.

ये हैं घरेलू नुस्खे-
• आप हर दिन हरे या सूखे आंवले के चूर्ण का इस्तेमाल करना भी लाभदायक हो सकता है.
• एक चम्मच मक्खन के साथ रोजाना 5-6 बादाम खाएं.
• एक चम्मच मक्खन में एक चुटकी काली मिर्च खाएं.
• 10 बादाम, 10 काली मिर्च, मिश्री के कुछ दानों को एक साथ पीस कर 10 दिन खाएं.
• दालचीनी के तेल की मालिश जीभ पर करने से मोटी जबान में फायदा होता है.
• सोने से पहले 2 छुहारे खाएं और दो घंटे तक पानी न पिएं.

योग भी है मददगार-
इसमें आपको योग भी फायदा पहुंचा सकता है. इसकी शुरुआत जीभ की एक्सरसाइज से करें. यह एक खास तरह एक्सरसाइज हैं: आप जीभ को जितना मुमकिन हो, बाहर निकालना (एक बार ठोड़ी की तरफ, दूसरी बार नाक की तरफ), जीभ को मुंह के अंदर दबाना, जीभ को मोड़कर तालू से लगाना आदि.

सांस लेना सीखें-
हकलाने वाले लोगों की एक बड़ी समस्या, यह जानना होती है कि पढ़ते और बोलते समय सांस कब ली जाए. हकलाहट कम करने के सबसे बढ़िया तरीकों में से एक है सांसों को रेग्युलेट करना है. सांस लेने की एक्सरसाइज करने से आवाज वापस पाने में बहुत सहायता मिल सकती है. जब आप बोलें और अगर हकलाएं, तो सांस लेना याद रखें. जो लोग हकलाते हैं, वे अक्सर हकलाहट शुरू होते ही सांस लेना भूल जाते हैं. रुकें और खुद को सांस लेने के लिए कुछ समय दें. कल्पना करें कि आप पानी में डुबकी लगाने जा रहे हैं और आपको डुबकी लगाने से पहले गहरी सांसें लेना जरूरी है. इससे सांस को नियमित करने में मदद मिलती है.

रिद्मिक तरीके से बोलें-
रिद्मिक तरीके से बोलना काफी फायदेमंद साबित होता है. मसलन मे---- रा---- ना---- म--- यानी शब्दों को लंबा खींचकर बोलें. इससे हकलाने की समस्या में काफी राहत होती है.

1. धीरे बोलें-
बहुत तेज बोलने की बजाए धीरे-धीरे बोलने की आदत डालें. बोलने में स्पीड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश न करें. आपका मकसद तेज बोलना नहीं, अपनी बात को ऐसे कहना होना चाहिए कि उसे समझा जा सके. जल्दी-जल्दी बोलने से हकलाहट बढ़ जाती है. इससे बचने के लिए धीरे-धीरे और रिलैक्स होकर बोलें. बोलने से पहले मन में सोच लें कि आप क्या बोलना चाहते हैं. फिर बोलें.

2. बोलकर पढ़ें-
किसी किताब या अखबार को बोल-बोल कर पढ़ें. इस दौरान आप जो बोल रहे हैं, उस पर ध्यान दें. शुरू में तो यह मुश्किल लगेगा, लेकिन धीरे-धीरे आसान लगने लगेगा. कोशिश करें कि हाथ में लिए हुए कागज में, सही जगहों पर रुक कर सांस लेने के लिए, निशान लगा लिया जाए. इससे आप और बेहतर तरीके से बोल पाएंगे. अगर ऐसा करने का अवसर न मिले तो हर पंक्चुएशन पर, रुक कर सांस ले ली जाए.

3. शीशे के सामने बोलें-
शीशे के सामने खड़े होकर बोलने की प्रैक्टिस करें. शीशे के सामने खड़े हो जाएं और सोचें कि शीशे में दिखने वाला शख्स कोई और है. फिर किसी भी विषय पर बात शुरू करें, मसलन आपका दिन कैसा रहा, आप क्या खाएंगे आदि. आप पाएंगे कि आपकी हकलाहट गायब हो रही है. यह सच है कि शीशे के सामने बात करना किसी से आमने-सामने बात करने से अलग है लेकिन इस तरह प्रैक्टिस करने से आत्मविश्वास बढ़ता है. जब आप किसी से बात करने की तैयारी करें, तो याद रखें कि आपने शीशे के सामने कितनी अच्छी तरह से बोला था. यह आपका आत्मविश्वास बढ़ाएगा. रोजाना खुद से 30 मिनट बातें करने की कोशिश करें.

4. मन को शांत करें-
बोलने से पहले खुद को तैयार करें. गहरी सांस लें, शरीर को रिलैक्स करें और हकलाहट के बारे में बिल्कुल न सोचें. छोटी-छोटी बातों पर परेशान न हों. सोचें कि गलतियां तो सभी से होती हैं. बस, उन्हें सुधारने की जरूरत है. कहने से पहले, अपने शब्दों को याद कर लें. बातों के बीच-बीच में ठहराव लाएं, ताकि जब आप बोलें, तो अपने शब्दों को बीच-बीच में सोच भी सकें. बातें शुरू करने से पहले ही बहुत आगे की न सोचें. अपनी बात को साफ कर दें.

5. पहले से सोचें नहीं-
कई बार लोग किसी से मिलना है तो 'क्या बोलना है' इसकी तैयारी करने लगते हैं लेकिन इससे हकलाहट बढ़ती है. ज्यादातर वक्त आप जैसा बोलते हैं, वैसे ही बोलें. जरूरत से ज्यादा ध्यान न दें कि आप क्या बोलना चाहते हैं और कैसे बोलना है. ऐसा करेंगे तो आपकी घबराहट बढ़ जाएगी और उसके साथ हकलाहट भी.

6. प्रैक्टिस करें-
आप कोई विषय लेकर उस पर बोलने की प्रैक्टिस करें. जब आपके पास शब्द होंगे तो आप बेहतर बोल पाएंगे. इस तरह बोलने की प्रैक्टिस को रुटीन बना लें. नियमित रूप से प्रैक्टिस करने से आपको नए शब्द मिलेंगे और बोलने में रवानगी भी बढ़ेगी.

7. खुद को तैयार करें-
बोलने से कुछ सेकंड पहले अपने होंठ फड़फड़ाएं. सिंगर गाने से पहले इसी तरह से वार्म-अप करते हैं. जो शब्द आप बोलने जा रहे हैं, उसका चित्र अपनी कल्पना में लाएं. अगर आप शब्दों की कल्पना कर सकते हैं, तो वे आपके हो जाते हैं और फिर उन्हें बोलने में आपको दिक्कत नहीं होती. अगर आप उनकी कल्पना नहीं कर सकते, तब वे आपके हो ही नहीं सकते. इसके अलावा, अगर आपको कोई प्रेज़ेंटेशन देना हो तो उसकी तैयारी तो कर ही लें, प्रैक्टिस भी कर लें.

8. बॉडी लैंग्वेज का सहारा लें-
हमारे बोलने में हाव-भाव की अहम भूमिका होती है. जब आप बोलें, तो शब्दों के साथ, हाथ चलाएं, कभी-कभी कंधे और भौहें आदि भी. इससे आप अपने शब्दों को अच्छी तरह समझा पाएंगे. हालांकि यह बहुत ज्यादा नहीं होना चाहिए वरना खराब लगेगा. अगर आप भाषण दे रहे हों, तो किसी की भी ओर सीधे न देखें. लोगों के सिरों के ऊपर देखें या कमरे में पीछे किसी बिंदु पर. इस तरह आप नर्वस नहीं होंगे और हकलाने का चेन रिएक्शन शुरू नहीं होगा. फिर आप बेहतर ढंग से अपनी बात रख पाएंगे.

9. पॉजिटिव सोचें-
निराशावादी नहीं, आशावादी बनें. कभी-कभी हकलाने का डर हकलाहट का कारण बन जाता है. खुद को बताएं कि आप ठीक हो जाएंगे. इससे आपको होने वाली किसी भी परेशानी से निपटने में मदद मिलेगी. जब आप सोचते हैं कि आप हकलाएंगे, तब आप उसके होने की संभावना को बढ़ा देते हैं. दिमाग को रिलैक्स करें. खुद से यह न कहें कि यह जीने और मरने का सवाल है. हकलाहट से चिढ़ तो होती है, लेकिन यह दूसरों के लिए उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी आपके लिए.

10. सपोर्ट ग्रुप जॉइन करें-
कोई सपोर्ट ग्रुप जैसे कि आदि भी जॉइन कर सकते हैं. दुनिया भर में हकलाहट के लिए सैकड़ों सपोर्ट ग्रुप हैं. इस तरह के सपोर्ट ग्रुप में शामिल होने का फायदा यह है कि कई तरह की नई जानकारियां मिलती हैं. साथ ही, अपने जैसे लोगों का साथ मिलने से कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है.

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