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कान का पर्दा फटना - Kaan Ka Parda Phatna!

Written and reviewed by
Dr. Sanjeev Kumar Singh 92% (193 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri  •  10 years experience
कान का पर्दा फटना - Kaan Ka Parda Phatna!

कान का पर्दे फटना या कान के पर्दे में छेद हो जाना, किसी भी पीड़ित के लिए बहुत ही गंभीर स्थिति हो सकती है. इसका होना अचानक से बिजली गिर जाना हो सकता है. इसके हो जाने कान में बहुत तेज़ दर्द का अनुभव हो सकता है. जबकि कुछ मामलों में देखा गया हैं कि इससे पीड़ित व्यक्ति को किसी भी तरह के लक्षण का कोई अनुभव नहीं होता है. इसे साइंटिफिक भाषा में टिम्पेनिक मेम्ब्रेन कहा जाता है.

कान का पर्दा फट जाने से मिडल कान का इन्फेक्शन और सुनने में परेशानी हो सकती है. अगर स्थिति गंभीर हो तो हो सकता है कि सर्जरी आदि की ज़रूरत भी हो सकती है. इंसान के कान का पर्दा दो जरूरी भागों से फंक्शन करता है जो साउंड वेव को सेंस करता है और वाइब्रेशन को धमनी के ज़रिए दिमाग तक पहुँचाती है. साथ ही मिडल कान को इन्फेक्शन और पानी आदि से भी बचाता है. वहीँ कान का पर्दे फट जाने से इन्फेक्शन मिडिल कान तक पहुँच जाता है. जिस कारण कान में इन्फेक्शन हो जाता है.

कान का पर्दा फटने के कई कारण हो सकते है. जैसे अत्यधिक दबाव के कारण भी कान का पर्दा फट सकता है. जिस कारण अचानक दर्द आदि हो सकता है. जिसके बाद कान से मवाद या कहे पस आदि डिस्चार्ज हो सकता है.

इसके अलावा बहुत बार देखा जाता है कि पिन आदि से कान साफ़ करने के चक्कर में भी कान के पर्दे को क्षति पहुँच जाती है. अगर बात करें बच्चे की तो बहुत बार देखा जाता है कि बच्चे अपने कान में कुछ भी डाल लेते है. जिस कारण से उनके कान के पर्दे को नुकसान पहुँच जाता है.

कुछ कान के पर्दे में छेद होने की स्थिति को बैरोट्रामा कहा जाता है. इसका कारण होता है कान के अंदर और बाहर समान दबाव को न होना. इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है, एयरोप्लेन में सफर करना है. जब अल्टीटुड बदलता है तो कान में दबाव पड़ता है, जिस कारण कान में तेज़ दर्द आदि होता है. आजकल प्लेन में केबिन क्रू अंदर का दबाव बदलता है जिससे ऐसा नहीं होता है. ऐसी ही स्थिति स्कूबा डाइवर के साथ होती है.

इसके अलावा देखा जाता है कि बहुत से लोगों को सिर में चोट आदि लग जाती है. जिस कारण उनके सुनने की क्षमता प्रभावित होती है. साथ ही मानव कान की शोर सुनने की एक क्षमता होती है. उस क्षमता से तेज़ शोर सुनने से भी कान के पर्दे पर दुष्प्रभाव पड़ता है. जिस कारण कान का पर्दा फट सकता है.

कान का पर्दा फटने से पीड़ित व्यक्ति को कान में तेज़ और धीमा दर्द होता रहता है. साथ ही हो सकता है कि उसके कान में कोई शोर चलता रहें. इसके अलावा सुनने की क्षति, सिरदर्द, मतली, उल्टी या कान के पर्दे का टीयर आदि हो सकता है.

अगर इलाज की बात करें तो कान के फटे पर्दे का कोई स्पष्ट इलाज नही होता है. ऐसा होने पर डॉक्टर से परामर्श बहुत जरूरी है. हो सकता है कि डॉक्टर आपको कुछ एंटीबायोटिक दवा आदि दें, जिससे आपका इंफेक्शन आदि कम हो सके. गंभीर मामलों में देखा गया है कि चिकित्सक आपको सर्जरी की सलाह दे सकता है. जिसके बाद इसके ठीक होने तक आपको तैराकी या स्कूबा डाइविंग आदि से दूर रहना पड़ेगा. साथ ही डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करना पड़ेगा.

In case you have a concern or query you can always consult a specialist & get answers to your questions!
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