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काला पीलिया के लक्षण, उपचार - Kaala Peeliya Ke Lakshan!

Written and reviewed by
Dr. Sanjeev Kumar Singh 90% (193 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri  •  10 years experience
काला पीलिया के लक्षण, उपचार - Kaala Peeliya Ke Lakshan!

काला पीलिया एक आम यकृत विकार हैं, जो कि कई असामान्य चिकित्सा कारणों की वजह से से हो सकते हैं. काला पीलिया होने पर किसी व्यक्ति को सिर दर्द, लो-ग्रेड बुखार, मतली और उल्टी, भूख कम लगना, त्वचा में खुजली और थकान आदि लक्षण होते हैं. त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है. इसमें मल पीला और मूत्र गाड़ा हो जाता है. हालांकि ऐसे में कुछ घरेलू उपचार आपकी काफी मदद कर सकते हैं. तो चलिये जानें काला पीलिया या हेपेटाइटिस बी के इलाज के लिए कुछ घरेलू उपचार.

काला पीलिया का लक्षण-
* काला पीलिया के पीड़ितों के तमाम लक्षणों में बुखार, कमजोरी, थकान, भूख की कमी, वजन में कमी, मतली, हल्के रंग का मल, पेटदर्द, कब्ज, सिरदर्द, गहरे रंग का मूत्र, शरीर में जलन और कुछ मामलों में खुजली भी शामिल है.
* आप एक हेल्थी जीवन चाहते हैं तो अपने लिवर का ख्याल रखें और शराब आदि के सेवन से दूर रहें. साथ ही हेल्थी डाइट फॉलों करें और काला पीलिया के लिए जीवनशैली में परिवर्तन करें. काला पीलिया और अन्य लिवर विकारों से छुटकारा पाने के लिए आयुर्वेदिक उपचार की मदद ली जा सकती है.

काला पीलिया के आयुर्वेदिक उपचार-
काला पीलिया के आयुर्वेदिक उपचार के लिए आपको कई जड़ी-बूटियों और अन्य चीजों का सहारा लेना होगा. ये सभी आमतौर पर उपलब्ध होते हैं इसलिए इन्हें प्राप्त करना बेहद आसान है. तो आइए इसके बारे में जानें.

1. मूली का रस व पत्ते
मूली के हरे पत्ते काला पीलिया में लाभदायक होते है. यही नहीं मूली के रस में भी इतनी ताकत होती है कि यह खून और लीवर से अत्‍यधिक बिलिरूबीन को निकाल सके. काला पीलिया या हेपेटाइटिस में रोगी को दिन में 2 से 3 गिलास मूली का रस जरुर पीना चाहिये. या फिर इसके पत्ते पीसकर उनका रस निकालकर व छानकर पीएं.

2. टमाटर का रस
टमाटर का रस, काला पीलिया में बेहद लाभदायक होता है. इसमें विटामिन सी पाया जाता है और यह लाइकोपीन जैसें एंटीऑक्‍सीडेंट में पूर्ण होता है. इसके रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर सेवन करने पर काफी लाभ देखने को मिलता है.

3. आंवला
आवंले में भी विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. कमालकी बात तो यह है कि, आप आमले को कच्‍चा या फिर सुखा कर खा सकते हैं. इसके अलावा जूस के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है.

4. नींबू या पाइनएप्‍पल का जूस
नींबू के रस को पानी में निचोड़ कर पीने से पेट साफ होता है. इसे रोज खाली पेट सुबह पीना काला पीलिया में सही होता है. इसके अवाला पाइनएप्‍पल भी लाभदायक होता है. पाइनएप्‍पल अंदर से पेट के सिस्‍टम को साफ रखता है.

5. नीम
नीम में कई प्रकार के वायरल विरोधी घटक पाए जाते हैं, जिस वजह से यह हेपेटाइटिस के इलाज में उपयोगी होता है. यह जिगर में उत्पन्न विषाक्त पदार्थों को नष्ट करने में भी सक्षण होता है. इसकी पत्तयों के सर में शहद मिलाकर सुबह-सुबह पियें.

6. अर्जुन की छाल
अर्जुन के पेड़ की छाल, बहुत से लाभों के लिए जानी जाती है. यह दिल और मूत्र प्रणाली को अच्छा बनाने में सहायक होती है. इसमें मौजूद एल्कलॉइड जिगर में कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को विनियमित करने की क्षमता भी रखता है. जो इसे हैपेटाइटिस के खिलाफ एक मूल्यवान दवा बनाता है.

7. हल्दी
देश के कुछ भागों में, ऐसी भ्रातियां प्रचलित है कि हल्दी का रंग पीला होता है, इसलिए काला पीलिया के रोगी को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. हालांकि, यह एक कमाल का एंटी-इन्फ्लेमेट्री, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव वाली तथा बढ़े हुए लिवर नलिकाओं को हटाने वाली होती है. हल्दी हैपेटाइटिस के खिलाफ सबसे प्रभावी उपायों में से एक है.
 

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