इरोसिव एसोफैगिटिस - Eosinophilia Treatment In Hindi!
इरोसिव एसोफैगिटिस या गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी) एक पाचन संबंधी समस्या है. इरोसिव एसोफैगिटिस की समस्या तब उत्पन्न होती है जब किसी कारण से पेट में उत्पन्न एसिड या कभी-कभी पेट में मौजूद तत्व आपकी भोजन नली में पुनः वापस आ जाते हैं. इस प्रकार हुए प्रतिवाह (रिफ्लक्स) के फलस्वरूप आपकी भोजन नली की अंदरूनी सतह में जलन का अनुभव होने लगता है और इरोसिव एसोफैगिटिस (एसिड भाटा नामक रोग) की संभावना प्रबल हो जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम इरोसिव एसोफैगिटिस नामक बीमारी के बारे में विस्तारपूर्वक जानें ताकि इस विषय में लोगों के जानकारी बढ़ाई जा सके.
इरोसिव एसोफैगिटिस के संकेत और लक्षण
एसिड भाटा रोग के संकेत और लक्षणों में निम्नलिखित शामिल है:
- सीने में जलन, जो कभी-कभी आपके गले में भी होने लगती है.
- इसके साथ ही साथ आपके मुंह का स्वाद खट्टा हो जाता है.
- छाती में दर्द
- निगलने में कठिनाई (डिस्फागिया)
- सूखी खांसी
- आवाज का बैठना या गले में खराश
- भोजन या खट्टे तरल का उलटी के साथ बाहर आ जाना (एसिड भाटा)
- गले में गांठ महसूस होना इत्यादि.
इरोसिव एसोफैगिटिस होने का कारण
इरोसिव एसोफैगिटिस अक्सर एसिड प्रतिवाह (रिफ्लक्स) के कारण होता है – पेट के एसिड या पित्त का भोजन नली में वापस आना. जब आप भोजन को निगलते हैं, तो लोअर एसोफिजिअल स्फिंक्टर – भोजन नली के निचले हिस्से के आसपास मांसपेशी का एक गोलाकार बैंड – शिथिल हो जाता है और भोजन व तरल पदार्थ आपके पेट में आसानी से चले जाते हैं. उसके बाद ये दुबारा बंद हो जाता है. हालांकि, अगर यह स्फिंक्टर असामान्य रूप से शिथिल हो जाता है या कमजोर हो जाता है, तो पेट में उत्पन्न एसिड आपकी भोजन नली में वापस आ सकता है, जिसके कारण आपके सीने में अकसर जलन होती है. कभी-कभी यह आपके दैनिक जीवन को बाधित कर सकता है. एसिड के लगातार भोजन नली में वापस आने से इसकी अंदरूनी सतह में जलन हो सकती है, जिससे यह सूज भी सकती है (एसिफैगिटिस). समय के साथ यह सूजन भोजन नली की अंदरूनी सतह को क्षतिग्रस्त कर सकती है, जिससे रक्तस्राव, भोजन नली का संकीर्ण होना या बेरेट्स इसोफेगस (कैंसर की एक पूर्व स्थिति) जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं.
कब होता है इरोसिव एसोफैगिटिस का निदान?
एसिड भाटा और सीने में जलन दोनों ही आम पाचन की स्थिति होती हैं, जिन्हें कई लोग समय-समय पर अनुभव करते हैं. जब इस प्रकार के संकेत और लक्षण हर हफ्ते में कम से कम दो बार होने लगें या आपके रोजमर्रा के जीवन में बाधा उत्पन्न करने लगें या जब आपके चिकित्सक आपकी भोजन नली में होने वाली क्षति का निरीक्षण करते हैं, तो आपके इरोसिव एसोफैगिटिस रोग का निदान किया जा सकता है. अधिकांश लोग इरोसिव एसोफैगिटिस का निदान अपनी जीवन शैली में परिवर्तन करके और ओवर-द-काउंटर दवाओं (बिना डॉक्टर के पर्चे से मिलने वाली दवाएं) के साथ कर सकते हैं. लेकिन इरोसिव एसोफैगिटिस से ग्रसित कुछ लोगों में इसके लक्षणों को कम करने के लिए ज़्यादा प्रभावशाली दवाओं या सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है.
इरोसिव एसोफैगिटिस से कैसे करें बचाव
इरोसिव एसोफैगिटिस को रोकने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है – इसके लक्षणों को बढ़ाने वाले खाद्य और पेय पदार्थों से बचना. इसे आप कई और तरीकें से भी कर सकते हैं. आप भोजन को छोटी-छोटी मात्रा में विभाजित कर दें. धूम्रपान करना हमेशा के लिए छोड़ दें. अपने बेड के पायों के नीचे कुछ ईंटें रख दें. यह 4 इंच से 6 इंच तक ऊँचा होना चाहिए. भोजन करने के बाद 2 से 3 घंटे तक सोने से बचने की कोशिश करें. यदि दिन में सोना चाहते हैं तो सोने के लिए कुर्सी का इस्तेमाल करें. और ज्यादा टाइट कपड़े या बेल्ट न पहनें. यदि आपका वजन ज़्यादा है या आप मोटापे से ग्रस्त हैं, तो व्यायाम और आहार में परिवर्तन के द्वारा वजन कम करने का प्रयास करें. इसके अलावा, अपने डॉक्टर से भी पूछें कि क्या कोई दवा आपके सीने की जलन या एसिड भाटा रोग के अन्य लक्षणों को बढ़ा सकती है? इसकी जानकारी रखें. संयमित खान-पान से आप न सिर्फ इस बीमारी से बल्कि इसके साथ ही कई अन्य बीमारियों से भी बच सकेंगे.

