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सर्वाइकल एक्सरसाइज - Cervical Exercises!

Written and reviewed by
Dr. Sanjeev Kumar Singh 92% (193 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri  •  10 years experience
सर्वाइकल एक्सरसाइज - Cervical Exercises!

आज का वक्त बहुत बदल गया है. हर किसी को हर चीज़ अच्छी चाहिए जैसे अच्छी तनख्वाह, अच्छा घर, लक्सरी लाइफ आदि. यह सब पाने की होड़ में लोग संघर्ष में लगे है. उन्नति हासिल करने के लिए दिन रात मेहनत में लगे है. इस लगातार किये जाने वाली मेहनत से हमें हर चीज़ तो बेहतर मिल रही है लेकिन यह हमारे स्वास्थ्य पर मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तौर पर गलत असर डाल रही है. हमारी इच्छाओं के चलते हम स्वयं को ज़रूरत से ज़्यादा तनावग्रस्त कर लेते हैं व शरीर को दिन रात काम करने वाली एक मशीन समझ लेते है. इस कड़ी मेहनत के चलते अति सामान्य रोग जो हम सभी को प्रभावित करता है, वह है गर्दन का दर्द. गर्दन का दर्द को चिकित्सा शब्दावली में ‘सर्विकालजिया’ कहा जाता हैं. यह दर्द लंबे अंतराल तक निरंतर एक ही मुद्रा में बैठे रहने, या पूरी रात ठीक से न सोने और कम व्यायाम करने के कारण होता है. कंप्यूटर पर काम करने वालो को यह समस्या बहुत ज्यादा होती है. इन लोगो को गर्दन और कंधे दोनों में दर्द होता रहता है.
मॉडर्न साइंस में सर्वाइकल स्पौण्डिलाइटिस का उपचार फिजियोथेरेपी और पेनकिलर टैबलेट हैं. इन तरीको से शीघ्र राहत तो मिल जाता है, लेकिन यह केवल अस्थायी राहत है. यदि इस समस्या का कोई स्थाई समाधान है तो वो है योग. योग इस बीमारी को जड़ से ठीक कर देता है. किन्तु एकदम से कठिन योग का अभ्यास करना सही नहीं है. कठिन योग करने से पहले कुछ आसान योग करने चाहिए. दरहसल हल्के फुल्के योग करने से धीरे-धीरे शरीर में लचक आ जाती है और कठिन योग के लिए शरीर तैयार हो जाता है. योग का एक सामान्य नियम यहीं है कि योग शुरू करते समय कुछ हलके फुल्के आसन करने चाहिए. इन हलके फुल्के आसनो से शरीर में उर्जा का संचार होता है और हमारा शरीर भी कठिन योगों के लिए तैयार होता है. यदि हम हल्के फुल्के आसन की जगह सीधे कठिन आसन शुरू करते है तो किसी प्रकार की परेशानियां भी आ सकती हैं.

* ग्रीवा संचालन
ग्रीवा संचालन आसन के अभ्यास से गर्दन से सम्बन्धित कई परेशानियों में लाभ मिलता है. जो लोगों को लम्बे समय तक गर्दन को एक ही स्थिति में रखकर काम करना होता है, उन्हें यह आसन जरूर करना चाहिए. इस आसन को आराम की मुद्रा में बैठकर किया जाता है. इस योग के दौरान गर्दन के मूवमेंट के अनुसार श्वास प्रश्वास करना चाहिए. इस योग क्रिया में श्वसन पर भी नियंत्रण करने का अभ्यास किया जा सकता है. ग्रीवा संचालन का नियमित अभ्यास करने से चेहरे पर कांति आती है और गर्दन सुडौल होती है. यह तनाव कम करता है और साथ ही शरीर के ऊपरी हिस्से को आराम और सुकून देता है. शारारिक तनाव के अलावा यह मानसिक तनाव भी कम करता है. योग में बल की जरूरत नहीं होती है इसलिए ग्रीवा संचालन के दौरान गर्दन को अनावश्य रूप से तानना नहीं चाहिए.

* बालासन योग मुद्रा
बालासन योग मुद्रा का अभ्यास करने से गर्दन और पीठ के दर्द से निजाद मिलती है. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले फर्श पर घुटने के बल बैठ जाएँ. इसके पश्चात सिर को ज़मीन से लगाएं. फिर अपने हाथों को सिर से लगाकर आगे की ओर सीधा रखें और आपकी हथेलिया जमीं से छूती हुई होना चाहिए. अब अपने हिप्स को ऐड़ियों की ओर ले जाते हुए बहार की और सांस छोड़े. इस अवस्था में कम से 15 सेकेण्ड से 1 मिनट तक रहें. यह आसन का अभ्यास आपके कूल्हों, जांघों और पिंडलियों को लचीला भी बनाता है. यह आपके मन को शांत भी करता है.

* मत्स्यासन – फिश पोज़
मत्स्यासन करने के लिए सर्वप्रथम किसी समतल जगह पर चादर बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं. अब अपनी कुहनियों के सहारे सर तथा धड़ के भाग को जमीन पर रखें. अब इस स्थिति में पीठ का ऊपरी हिस्सा तथा गर्दन जमीन से ऊपर की और उठाए. हाथों को सीधा कर पेट पर रख लें. इस स्थिति में जितनी देर आसानी से रुक सकते हैं रुकें. फिर वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं.

* विपरीत कर्णी आसन
विपरीत कर्णी आसन आपको हल्के-फुल्के पीठ दर्द से आराम देता है. इस आसन में दीवार के सहारे पैर उपर करते है. सबसे पहले तो अपनी पीठ के बल लेट जाएँ और अपने टाँगों को दीवार का सहारा देते हुए पैरों को छत की ओर उठा लें. अपनी बाहों को फैला कर शरीर के दोनों तरफ ज़मीन पर रख दें और आपकी हथेली आकाश की तरफ मोड़ कर खुली हुई होना चाहिए. कुछ सेकण्ड्स इस मुद्रा में रहे और गहरी लंबी श्वास लें और छोड़ें. यह योग क्रिया आपकी गर्दन के पिछले हिस्से को मालिश जैसा फायदा देता है और थकान को दूर कर पैरों की ऐंठन को दूर करता

* शवासन
इस आसन को सबसे बाद में करना चाहिए. यह आसन करने में सबसे सरल है. इसमें शरीर को ज़मीन पर स्थिर अवस्था में रखना है. सबसे पहले तो ज़मीन पर सीधे लेट जायें और हाथों को शरीर के दोनों ओर रख लें, पैरों को थोड़ा सा खोल दें. इस स्तिथि में आपकी हथेलिया आकाश की तरफ होनी चाहिए. मांसपेशियों तथा खुद को विश्राम देने के लिए शरीर को इस स्थिति में कम से कम 5 मिनट तक रखे.
 

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