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एंजियोग्राफी क्या होता है - Angiography in Hindi

Written and reviewed by
Dr.Sanjeev Kumar Singh 92% (193ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurvedic Doctor, Lakhimpur Kheri  •  11years experience
एंजियोग्राफी क्या होता है - Angiography in Hindi

एंजियोग्राफी, जिसे एंजियोग्राम के रूप में भी जाना जाता है, एक एक्स-रे परीक्षण है जो एक नस या धमनी के अंदर रक्त परिसंचरण की स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए एक कैमरे के साथ-साथ डाई का उपयोग करता है। यह प्रक्रिया छाती, पीठ, हाथ, सिर, पेट और पैरों की नसों या धमनियों के लिए की जा सकती है।

एंजियोग्राम में सबसे सामान्य पल्मोनरी एंजियोग्राम (छाती का), कोरोनरी एंजियोग्राम (दिल का), सेरेब्रल एंजियोग्राम (मस्तिष्क का), कैरोटिड एंजियोग्राम (गर्दन और सिर का), परिफेरल एंजियोग्राम (हाथ और पैरों का) और महाधमनी (महाधमनी) शामिल हैं।

एंजियोग्राम का उपयोग एन्यूरिज्म (रक्त वाहिकाओं के अदंर उभार) का पता लगाने के लिए किया जाता है। रक्त वाहिकाओं के किसी भी रुकावट या संकुचन जो उचित रक्त प्रवाह को प्रभावित करते हैं, इस प्रक्रिया से भी पता लगाया जा सकता है। इस तकनीक द्वारा कोरोनरी धमनी विकार होने की संभावना और इसकी स्थिति को निर्धारित किया जा सकता है।

कैसे होती है एंजियोग्राफी? - How Angiography Performed?

एंजियोग्राफ में रेडियोधर्मी तत्व या डाई का इस्तेमाल किया जाता है. इसके माध्यम से शरीर के रक्त वाहिनी नालिकाओं को एक्स रे द्वारा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. डिजिटल सबस्ट्रेक्शन एंजियोग्राफी एक नयी तकनीक है जो धमनियों की पृष्ठभूमि को गायब कर देता है जिससे इमेज ज्यादा स्पष्ट दिखने लगते हैं.

इस तकनीक का इस्तेमाल रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज की स्थिति में प्रयोग किया जाता है. इससे हृदय की धमनी में ब्लॉकेज या संकुचन की स्थिति की पता लगाया जा सकता है. इस स्थिति के पता लगने के बाद डॉक्टर द्वारा बीमारी से ग्रसित धमनियों को एंजियोप्लास्टी द्वारा खोल देता है. इस उपचार के बाद रोगी के हृदय की धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और उसे फ़ौरन राहत मिल जाता है. इसके अतिरिक्त, हृदयाघात की जोखिम भी कम हो जाती है.

एंजियोग्राफी के प्रकार - Types of Angiography in Hindi

एंजियोग्राफी के कई प्रकार होते है. इसके कुछ प्रकार निम्नलिखित हैं:

  1. सेरेब्रेल एंजियोग्राफीइसमें मस्तिष्क सम्बन्धी समस्याओं के बारे में पता लगाया जाता है.
  2. फ्लोरोसीन एंजियोग्राफीइसका प्रयोग आँखों के रेटिना से सम्बन्धित समस्याओं का उपचार करने के लिये किया जाता है.
  3. फेमोरल एंजियोग्राफीयह एंजियोग्राफी जाँघ में समस्या का पता लगाने के लिए किया जाता है
  4. इसके अलावा किडनी और कोरोनरी आदि की भी एंजियोग्राफी की जाती है.

एंजियोग्राफी की प्रक्रिया - Procedure of Angiography in Hindi

लोकल एनेस्थीसिया के माध्यम से बाँह या जाँघ को सुन्न किया जाता है, इसके बाद बांह या जाँघ के अंदर कैथेटर और तार डालकर उसकी धमनियों में आये अवरोधों को पता लगाया जाता है. इससे अवरोध की स्थिति का पता लगता है अवरोध कितना बड़ा और कहाँ स्थिति हैं. इस अवरोध को स्पष्ट रूप से देखने के लिए एक्सरे फिल्म बनाया जाता है और बेहतर इमेज के लिए डाई इस्तेमाल किया जाता है. एंजियोग्राफी के साथ ही सीधे मॉनीटर पर देखते हुए अवरोध को बैलून डालकर खोल भी दिया जाता है

इस प्रक्रिया में लगभग 6 से 12 लगते है और आपको टेस्ट करवाने से पहले डॉक्टर द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों को पालण करना पड़ता है. एक दूसरे प्रकार की एंजियोग्राफी भी होती है जिसे रेडियल एंजियोग्राफी कहते हैं. इसमें धमनी की एंजियोग्राफी बाँह के पास से की जाती है. इस तकनीक से न तो खून के रिसाव का डर रहता है और न ही रोगी को लम्बे समय के लिये लेटना ही पड़ता है. इस एंजियोग्राफी के बाद रोगी जल्द ही अपने घर जा सकता है और अपने पैरों पर चल भी सकता है. सामान्यत: इसे करने से पहले रोगी को सलाह दी जाती है कि वह सात-आठ घण्टे पूर्व कुछ न खाने के बाद ही एंजियोग्राफी करवाने के लिये हॉस्पिटल आये. एक्सरे किरणों के प्रभाव से बचाने के लिये गर्भवती महिलाओं को यह परीक्षण न कराने की हिदायत दी जाती है.

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