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Shatavari Ke Uses

Dr. Sangeeta P 92% (433 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Sexologist, Sindhudurg  •  10 years experience
Shatavari Ke Uses

शतावरी खाने के फायदे

By speaking tree
सौ रोगों को हरने वाली शतावरी

आज हम आपको एक झाड़ीनुमा लता के बारे में बताते है, जिसमें फूल मंजरियों में एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और फल मटर के समान पकने पर लाल रंग के होते हैं.नाम है"शतावरी. I
आपने विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में इसके प्रयोग को अवश्य ही जाना होगा.अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं, इसके प्रयोग को! आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार, शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीरको रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है. I इसे शुक्रजनन,शीतल,मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है I महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक (चिर यौवन को बरकार रखने वाला) माना है. I आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं i

अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग क़ी जानकारी देंगे.जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा!

- यदि आप नींद न आने क़ी समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी क़ी जड़ को खीर के रूप में पका लें और थोड़ा गाय का घी डालें,इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पायेंगे!

-शतावरी क़ी ताज़ी जड़ को यवकूट करें,इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें,हो गया मालिश का तेल तैयार.इसे माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगायें और लाभ देखें i

-यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण - 1.5 ग्राम,वासा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली,मिश्री के साथ लें और लाभ देखें i

-प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने क़ी समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है!

-यदि पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है i

-यदि रोगी को मूत्र या मूत्रवह संस्थान से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है i

-शतावरी के पत्तियों का कल्क बनाकर घाव पर लगाने से भी घाव भर जाता है!

-यदि रोगी स्वप्न दोष से पीड़ित हो तो शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम,मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर.पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह,प्री -मेच्युर -इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष) में लाभ मिलता है i

-गाँव के लोग इसकी जड़ का प्रयोग गाय या भैंसों को खिलाते हैं, तो उनकी दूध न आने क़ी समस्या में लाभ मिलता पाया गया है.अतः इसके ऐसे ही प्रभाव प्रसूता स्त्रियों में भी देखे गए हैं i

-शतावरी के जड के चूर्ण को पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में दूध से नियमित से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है!

-वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का प्रयोग या इनके क्वाथ का सेवन ज्वर (बुखार) से मुक्ति प्रदान करता है. I

-शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन,दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारीयों में लाभ मिलता है. I

. शतावरी हिमतिक्ता स्वादीगुर्वीरसायनीसुस्निग्ध शुक्रलाबल्यास्तन्य मेदोस ग्निपुष्टिदा! चक्षु स्यागत पित्रास्य,गुल्मातिसारशोथजित.उदधृत किया है.तो शतावरी एक बुद्धिवर्धक,अग्निवर्धक,शुक्र दौर्बल्य को दूर करनेवाली स्तन्यजनक औषधि है!

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