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Dr. Ritesh Mahajan 88% (2830 ratings)
CCP, MBA, Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Karnal  •  11 years experience
हमारे अपने स्वदेशी शास्त्र आयुर्वेद में शरीर को निरोगी रखने के लिए वसंत ऋतु में पंचकर्म विधि से वमन करवाने को बहुत महत्व दिया गया है.
प्र. वमन क्या है?
उ. शरीर में इकट्ठे हुए दोषों को पहले स्नेहन और स्वेदन से कोष्ठ में लाकर, उल्टी के द्वारा बाहर निकालने की प्रक्रिया को वमन कहते हैं.
प्र. वमन के क्या फायदे हैं?
उ. वमन करने से शरीर में जमा हुआ कफ निकलने से एलर्जी, अस्थमा, नज़ला-जुकाम, पुरानी खाँसी, माइग्रेन, एसिडिटी, भूख ना लगना, थायरॉइड, भारीपन, डाइयबिटीस, कोलेस्टरॉल, त्वचा के रोग, गठिया, डिप्रेशन, सुस्ती जैसी बीमारियों में बहुत लाभ मिलता है. यदि किसी को यह रोग नही है, तो कफ निकल जाने से, इन रोगों की होने की संभावना भी नही रहती.
प्र. वमन कब करवाना चाहिए?
उ. रोग की अवस्था के अनुसार तो वमन कभी भी करवाया जा सकता है. लेकिन स्वास्थ्य की दृष्टि से वसंत ऋतु में वमन करना बहुत महत्वपूर्ण है. वसंत ऋतु में प्राकृतिक रूप से कफ बढ़ता है. ऐसे में यदि पहले की कफ का शोधन कर लिया जाए, तो रोग नही होते.
प्र. क्या वमन केवल रोगी के लिए ही है?
उ. नही, ऐसा बिल्कुल नही है. यदि स्वस्थ व्यक्ति वमन करवाता है, तो उसे कफ जनित रोग नही होते. इसलिए रोगी से भी ज़्यादा स्वस्थ व्यक्ति को इसकी ज़रूरत है.
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