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Hiv Aids Information in hindi - एचआईवी एड्स की जानकारी

Written and reviewed by
Dt. Radhika 93% (473 ratings)
MBBS, M.Sc - Dietitics / Nutrition
Dietitian/Nutritionist,  •  10 years experience
Hiv Aids Information in hindi -  एचआईवी एड्स की जानकारी

एड्स नाम अपने आपमें भयावह और दर्दनाक एहसास दिला देता है। बीमारियाँ वैसे तो बदनाम होती ही हैं पर एड्स को बिमारी नहीं बल्कि कई जानलेवा बीमारियों का जरिया कहना गलत नहीं होगा। यह एक ऐसी बीमारी है जिससे पीड़ित व्यक्ति जीने की उम्मीद खोकर मरने की राह देखने लगता है। इसलिए हम सभी को एड्स के बारे में पूरी जानकारी होनी ही चाहिए।

दरसल एड्स एचआईवी वायरस के कारण होने वाली एक बीमारी है। यह तब होता है जब व्यक्ति का इम्यून सिस्टम इंफेक्शन से लड़ने में कमज़ोर पड़ जाता है। और तब विकसित होता है, जब एचआईवी इंफेक्शन बहुत अधिक बढ़ जाता है। एड्स एचआईवी इंफेक्शन का अंतिम चरण होता है। जब शरीर स्वयं की रक्षा नहीं कर पाता और शरीर में कई प्रकार की बीमारियाँ, संक्रमण हो जाते हैं एचआईवी शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता पर आक्रमण करता है। जिसका काम शरीर को संक्रामक बीमारियों, जो कि जीवाणु और विषाणु से होती हैं से बचाना होता है। एच.आई.वी. रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर हमला करता है। ये पदार्थ मानव को जीवाणु और विषाणु जनित बीमारियों से बचाते हैं और शरीर की रक्षा करते हैं। जब एच.आई.वी. द्वारा आक्रमण करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षय होने लगती है तो इस सुरक्षा कवच के बिना एड्स पीड़ित लोग भयानक बीमारियों क्षय रोग और कैंसर आदि से पीड़ित हो जाते हैं। और शरीर को कई अवसरवादी संक्रमण यानि आम सर्दी जुकाम, फुफ्फुस प्रदाह इत्यादि घेर लेते हैं। जब क्षय और कर्क रोग शरीर को घेर लेते हैं तो उनका इलाज करना कठिन हो जाता है और मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। 

अभी तक एचआईवी या एड्स के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। हालाँकि सही उपचार और सहयोग से एचआईवी से ग्रसित व्यक्ति लम्बा और स्वस्थ जीवन जी सकता है। और ऐसा करने के लिए आवश्यक है, कि उचित उपचार लिया जाए और किसी भी संभावित दुष्परिणाम से निपटा जाए। 
  
एड्स कैसे फैलता है
अगर एक सामान्य व्यक्ति एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के वीर्य, योनि स्राव अथवा रक्त के संपर्क में आता है, तो उसे एड्स हो सकता है। आमतौर पर लोग एच.आई.वी. पॉजिटिव होने को एड्स समझ लेते हैं, जो कि गलत है। बल्कि एचआईवी पॉजिटिव होने के 8-10 साल के अंदर जब संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है तब उसे घातक रोग घेर लेते हैं और इस स्थिति को एड्स कहते हैं। 

एड्स होने के 4 अहम वजह 
(1) पीड़ित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध स्थापित करने 
(2) दूषित रक्त से।
(3) संक्रमित सुई के उपयोग 
(4) एड्स संक्रमित माँ से उसके होने वाली संतान को। 
 
एड्स के लक्षण 
एच.आई.वी से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक एड्स के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। लंबे समय तक (3, 6 महीने या अधिक) एच.आई.वी. का भी औषधिक परीक्षण से पता नहीं लग पाता। अधिकतर एड्स के मरीजों को सर्दी, जुकाम या विषाणु बुखार हो जाता है पर इससे एड्स होने का पता नहीं लगाया जा सकता। एच.आई.वी. वायरस का संक्रमण होने के बाद उसका शरीर में धीरे धीरे फैलना शुरू होता है। जब वायरस का संक्रमण शरीर में ज्यादा बढ़ जाता है, उस समय बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। एड्स के लक्षण दिखने में आठ से दस साल का समय भी लग सकता है। ऐसे व्यक्ति को, जिसके शरीर में एच.आई.वी. वायरस हों पर एड्स के लक्षण प्रकट न हुए हों, उसे एचआईवी पॉसिटिव कहा जाता है। पर ध्यान रहे ऐसे व्यक्ति भी एड्स फैला सकते हैं। 

एड्स के कुछ शुरूआती लक्षण 

  • वजन का काफी हद तक काम हो जाना
  • लगातार खांसी आना 
  • बार-बार जुकाम होना
  • बुखार
  • सिरदर्द
  • थकान
  • शरीर पर निशान बनना (फंगल इन्फेक्शन के कारण)
  • हैजा
  • भोजन से मन हटना 
  • लसीकाओं में सूजन

ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए लक्षण अन्य सामान्य रोगों के भी हो सकते हैं। अतः एड्स की निश्चित रूप से पहचान केवल और केवल, औषधीय परीक्षण से ही की जा सकती है व की जानी चाहिये। एच.आई.वी. की उपस्थिति का पता लगाने हेतु मुख्यतः एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोएब्जॉर्बेंट एसेस यानि एलिसा टेस्ट करवाना चाहिए।
 
एड्स का उपचार
एड्स के उपचार में एंटी रेट्रोवाईरल थेरपी दवाईयों का उपयोग किया जाता है। इन दवाइयों का मुख्य उद्देश्य एच.आई.वी. के प्रभाव को काम करना, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और अवसरवादी रोगों को ठीक करना होता है। समय के साथ-साथ वैज्ञानिक एड्स की नई-नई दवाइयों की खोज कर रहे हैं। लेकिन सच कहा जाए तो एड्स से बचाव ही एड्स का सर्वोत्तम इलाज है।  
 
एड्स से बचाव 
एड्स से बचाव के लिए सामान्य व्यक्ति को एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति के वीर्य, योनि स्राव अथवा रक्त के संपर्क में आने से बचें। साथ ही साथ एड्स से बचाव के लिए बताई गई कुछ सावधानियां भी बरतें।

  • पीड़ित साथी या व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध न स्थापित करने से बचें और अगर करें भी तो सावधानीपूर्वक कंडोम का इस्तेमाल करें। लेकिन कई बार कंडोम इस्तेमाल करने में भी कंडोम के फटने का खतरा रहता है। इसलिए एक से अधिक व्यक्ति से यौन संबंध ना रखें।
  • खून को अच्छी तरह जांचकर ही चढ़ाएं। कई बार बिना जांच के खून मरीज को चढ़ा दिया जाता है जोकि खतरनाक है। इसलिए खून चढ़ाने से पहले पता करें कि कहीं खून एच.आई.वी. दूषित तो नहीं है। 
  • उपयोग की हुई सुईओं या इंजेक्शन का प्रयोग न करें क्योंकि ये एच.आई.वी. संक्रमित हो सकते हैं। 
  • दाढ़ी बनवाते समय हमेशा नाई से नया ब्लेड उपयोग करने के लिए कहें। 

एड्स की इन जानकारियों के साथ ही जरूरी हम एड्स के बारे में फैली हुई गलत्फहेमियों से वाकिफ रहें 
 
कई लोग समझते हैं कि एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ खाने, पीने, उठने, बैठने से एड्स हो जाता है। जो कि पूरी तरह गलत है। ऐसी भ्रांतियों से बचें। हकीक़त में रोजमर्रा के सामाजिक संपर्कों से एच.आई.वी. नहीं फैलता जैसे किः-

  • पीड़ित के साथ खाने-पीने से
  • बर्तनों कि साझीदारी से 
  • हाथ मिलाने या गले मिलने से 
  • एक ही टॉयलेट का प्रयोग करने से
  • मच्छर या अन्य कीड़ों के काटने से 
  • पशुओं के काटने से 
  • खांसी या छींकों से 
  • बताई गई बातों को समझकर सावधानी बरतें और पीड़ित व्यक्ति रेगुलर इलाज करवाएं।
     

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