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Ebola Outbreak Strikes Back - Should You Be Wary?

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery
General Physician, Faridabad
Ebola Outbreak Strikes Back - Should You Be Wary?

The recent outbreak of Ebola in the Democratic Republic of Congo has hit the headlines worldwide. The outbreak in Central Africa is the second largest in history and the worst the country has ever seen. 811 people have reported symptoms of the deadly disease, and 750 have tested positive for the same. The first case of Ebola this week was confirmed in Goma. The World Health Organization (WHO) has considered the risk of transmission in the recent outbreak ‘very high’ at the regional and national levels. However, global risk remains low. 

What is Ebola all about?

Ebola is a rare, deadly virus that spreads through direct contact with an infected person’s bodily fluids. Humans can contract the virus from infected animals too. However, Ebola does not spread by breathing the same air as an infected person, by shaking hands with them, or sitting close to them. For the virus to transmit, a diseased person’s bodily fluids or blood needs to pass onto another individual through the nose, eyes, mouth, abrasions or cuts on the skin. 

A Brief History of the Deadly Virus

Ebola first emerged in Zaire and Sudan, in 1976. The first outbreak left over 284 people infected with a mortality rate of 53%. The second Ebola outbreak emerged a few months later from Zaire and Yambuku infecting 318 people with the highest mortality rate – 88%. Since the time, sporadic outbreaks have been seen in West and Central Africa. In 1989, infected monkeys imported from the Philippines introduced a strain of Ebola virus, known as Ebola-Reston, in Reston, Virginia. 

What causes Ebola?

Researchers are yet to find the actual cause of the Ebola virus. The disease is transmitted through direct contact with –

  • An infected person's blood or body fluids – stool, saliva, breast milk, urine, sweat or vomit

  • Contaminated objects, such as syringe and needles

  • Infected animals like primates and bats

How to tell if a person is infected with Ebola?

Symptoms of Ebola virus disease usually begin to show 8-10 days after an individual contract the virus. 

Symptoms include –

Remember, the virus cannot be transmitted to another person until these symptoms are revealed.

Is there any cure for Ebola?

Currently, there is no cure or vaccine for Ebola virus disease. However, upon encountering the above symptoms, you should consult a doctor immediately. The basic treatment involves going for blood transfusion and supportive care. 

How to Stay Safe?

You can stay safe or prevent yourself from contracting the virus by following these measures –

  • Drink fluids to avoid dehydration and balance electrolytes in your body

  • Monitor intake of salt

  • Keep your blood pressure under control

  • Treat any cuts and infections immediately

  • Avoid travelling to places where cases of outbreaks of the virus have been reported

Living with Ebola virus is certainly not easy. Even if the disease is cured, it may have lasting effects on the survivor.

इबोला वायरस क्या है - Ebola Virus Kya Hai!

Dr.Sanjeev Kumar Singh 92% (193ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
इबोला वायरस क्या है - Ebola Virus Kya Hai!

इबोला वायरस एक विषाणु है. इस रोग की पहचान सर्वप्रथम सन 1976 में इबोला नदी के पास स्थित एक गाँव में की गई थी. इसी कारण कागों की एक सहायक नदी इबोला के नाम पर इस वायरस का नाम भी इबोला रखा गया है. यह वर्तमान में एक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर चुका है. इस बीमारी में शरीर में नसों से खून बाहर आना शुरु हो जाता है, जिससे अंदरूनी रक्तस्त्राव प्रारंभ हो जाता है. यह एक अत्यंत घातक रोग है. इसमें 90% रोगियों की मृत्यु हो जाती है. इबोला एक ऐसा रोग है जो मरीज के संपर्क में आने से फैलता है. मरीज के पसीने, मरीज के खून या,श्वास से बचकर रहें. इसके चपेट में आकर टाइफाइड, कॉलरा, बुखार और मांसपेशियों में दर्द होता है, बाल झड़ने लगते हैं, नसों या मांशपेशियों में खून उतर आता है. इससे बचाव करने के लिए खुद को सतर्क रखना ही एक उपाय है. इबोला के मरीजों की 50 से 80 फीसदी मौत रिकॉर्ड की गई है. आइए इस लेख के माध्यम से हम इबोला वायरस के बारे में जानें ताकि इस विषय में लोगों में जागरूकता आए.

इबोला वायरस के फैलने का कारण-

ये एक संक्रामक रोग है जो कि मुख्य रूप से पसीने और लार से फैलता है. लेकिन इसके अलावा भी इसके फैलने के कई कारण हैं. संक्रमित खून और मल के सीधे संपर्क में आने से भी यह फैलता है. इसके अतिरिक्त, यौन संबंध और इबोला से संक्रमित शव को ठीक तरह से व्यवस्थित न करने से भी यह रोग हो सकता है. जाहीर है कि संक्रामक रोगों को फैलने से रोकना भी इसके रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

इबोला वायरस के फैलने का लक्षण-
इसके लक्षण हैं- उल्टी-दस्त, बुखार, सिरदर्द, रक्तस्त्राव, आँखें लाल होना और गले में कफ़. अक्सर इसके लक्षण प्रकट होने में तीन सप्ताह तक का समय लग जाता है. इस रोग में रोगी की त्वचा गलने लगती है. यहाँ तक कि हाथ-पैर से लेकर पूरा शरीर गल जाता है. ऐसे रोगी से दूर रह कर ही इस रोग से बचा जा सकता है. इबोला एक क़िस्म की वायरल बीमारी है. इसके लक्षण हैं अचानक बुख़ार, कमज़ोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में ख़राश. ये लक्षण बीमारी की शुरुआत भर होते हैं. इसका अगला चरण है उल्टी होना, डायरिया और कुछ मामलों में अंदरूनी और बाहरी रक्तस्राव. इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए हुए उपरोक्त लक्षण दिखाई पड़ने पर आपको तुरंत किसी चिकित्सक या विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए ताकि समय रहते इसपर नियंत्रण किया जा सके.

उपचार-
अभी इस बीमारी का कोई ईलाज नहीं है. इसके लिए कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है. इसका कोई एंटी-वायरस भी नहीं है. इसके लिए टीका विकसित करने के प्रयास जारी हैं; हालांकि अभी तक ऐसा कोई टीका मौजूद नहीं है. तो ऐसे में इस बात पर बल दिया जाना चाहिए कि इसके लक्षणों के बारे में व्यापक प्रसार हो ताकि लोग समय रहते इसकी पहचान कर सकें और इसके लिए आवश्यक सभी सावधानियाँ अपना सकें.

संक्रमण-
मनुष्यों में इसका संक्रमण संक्रमित जानवरों, जैसे, चिंपैंजी, चमगादड़ और हिरण आदि के सीधे संपर्क में आने से होता है. एक दूसरे के बीच इसका संक्रमण संक्रमित रक्त, द्रव या अंगों के मार्फ़त होता है. यहां तक कि इबोला के शिकार व्यक्ति का अंतिम संस्कार भी ख़तरे से ख़ाली नहीं होता. शव को छूने से भी इसका संक्रमण हो सकता है. बिना सावधानी के इलाज करने वाले चिकित्सकों को भी इससे संक्रमित होने का भारी ख़तरा रहता है. संक्रमण के चरम तक पहुंचने में दो दिन से लेकर तीन सप्ताह तक का वक़्त लग सकता है और इसकी पहचान और भी मुश्किल है. इससे संक्रमित व्यक्ति के ठीक हो जाने के सात सप्ताह तक संक्रमण का ख़तरा बना रहता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़, उष्णकटिबंधीय बरसाती जंगलों वाले मध्य और पश्चिम अफ़्रीका के दूरदराज़ गांवों में यह बीमारी फैली. पूर्वी अफ़्रीका की ओर कांगो, युगांडा और सूडान में भी इसका प्रसार हो रहा है.

तेज़ी से प्रसार-
पू्र्व की ओर बीमारी का प्रसार असामान्य है क्योंकि यह यह पश्चिम की ओर ही केंद्रित था और अब शहरी इलाक़ों को भी अपनी चपेट में ले रहा है. इस बीमारी की शुरुआत गिनी के दूर दराज़ वाले इलाक़े ज़ेरेकोर में हुई थी. बीमारी का प्रकोप देखते हुए स्वयंसेवी संस्था मेडिसिंस सैंस फ्रंटियर्स ने इसे 'अभूतपूर्व' बताया है. डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुसार, इबोला से पीड़ित रोगियों के शारीरिक द्रव और उनसे सीधे संपर्क से बचना चाहिए. साथ ही साझा तौलिये के इस्तेमाल से बचना चाहिए क्योंकि यह सार्वजनिक स्थलों पर संक्रमित हो सकता है. डब्ल्यूएचओ ने मुताबिक़ इलाज करने वालों को दस्ताने और मास्क पहनने चाहिए और समय-समय पर हाथ धोते रहना चाहिए.

चेतावनी-
चमगादड़, बंदर आदि से दूर रहना चाहिए और जंगली जानवरों का मांस खाने से बचना चाहिए. लाइबेरिया की राजधानी मोनरोविया में मौजूद बीबीसी संवाददाता ने बताया कि वहां सुपरमार्केट और मॉल आदि में कर्मचारी दस्ताने पहन रहे हैं. सेनेगल ने गिनी से लगती अपनी सीमा बंद कर दी है. यहां के गायक यूसुओ एन'डूर अपना एक संगीत कार्यक्रम रद्द कर चुके हैं. उनका कहना था कि एक बंद जगह में हज़ारों लोगों को इकट्ठा करना इस समय ठीक नहीं है. अभी तक इस बीमारी का इलाज नहीं खोजा जा सका है लेकिन नई दवाओं का प्रयोग चल रहा है.

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इबोला वायरस - Ebola Virus!

Dr.Sanjeev Kumar Singh 92% (193ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
इबोला वायरस - Ebola Virus!

इबोला एक वायरस है. यह एक जानलेवा बिमारी है और लगभग 90% इबोला रोगियों की मृत्यु हो जाती है. इस रोग को सबसे पहले 1976 में इबोला नदी के समीप एक गाँव में देखा गया था. इसी कारण कागों की एक सहायक नदी इबोला के नाम पर इस वायरस का नाम भी इबोला रखा गया है. इस बीमारी के कारण बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होता और है और शरीर के अंग काम करना छोड़ देते है. यह एक जानलेवा रोग है. यह रोग संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से होता है. यह रोगी के खून, पसीने या संक्रमित सुई के संपर्क में आने से होता है. यह बीमारी टाइफाइड, कॉलरा, बुखार और मांसपेशियों में दर्द का कारण बनता है. इसलिए है. इबोला के मरीजों की 50 से 80 फीसदी मौत रिकॉर्ड की गई है. आइए इस लेख के माध्यम से हम इबोला वायरस से संबन्धित विभिन्न पहलुओं को जानें.

इबोला वायरस के फैलने का कारण
इबोला वायरस संक्रमित जानवर या मृत जानवरों के रक्त, मूत्र, मल या अंगों या तरल पदार्थ के संपर्क में आने से होता है. ऐसा माना जाता है की इबोला वायरस इंसानों में, जंगलों में रहने वाले चिम्पांजी, गोरिल्ला, फ्रूट बैट, और बंदरों से होता है. इसके अतिरिक्त, यौन संबंध और इबोला से संक्रमित शव को ठीक तरह से व्यवस्थित न करने से भी यह रोग हो सकता है. यह संक्रामक रोग है.

इबोला वायरस के फैलने का लक्षण
इसके लक्षण हैं- सिरदर्द, उल्टी-दस्त, बुखार, ब्लीडिंग, आँखें लाल होना, जोड़ों मांशपेशियों में दर्द और गले में कफ़. अक्सर इसके लक्षण का अनुभव होने में तीन सप्ताह तक का समय लग जाता है.

रोग में शरीर को क्षति
इस रोग में रोगी की त्वचा के साथ हाथ-पैर से लेकर पूरा शरीर तक गलने लग जाता है. ऐसे स्थिति में बचाव के लिए संक्रमित रोगी से दूर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है रोगी से दूर रह कर ही इस रोग से बचा जा सकता है.
इबोला एक क़िस्म की वायरल बीमारी है. इसके लक्षण हैं अचानक बुख़ार, कमज़ोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में ख़राश.
ये लक्षण बीमारी की शुरुआत भर होते हैं. इसका अगला चरण है उल्टी होना, डायरिया और कुछ मामलों में अंदरूनी और बाहरी रक्तस्राव.

उपचार
यह एक बहुत ही जटिल और घातक बिमारी है. यह लाइलाज बीमारी है और इसके लिए कोई दवा या एंटी-वायरस उपलब्ध नहीं है. हालांकि, इसके लिए टीका विकसित करने के कोशिश जारी हैं.

संक्रमण
इबोला वायरस चिंपैंजी, चमगादड़ और हिरण आदि जैसे संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने से होता है. यह संक्रमण संक्रमित रक्त, तरल या अंगों के माध्यम से होता है. इबोला के शिकार व्यक्ति का शव से भी संक्रमण से हो सकता है. यदि डॉक्टर प्रयाप्त सावधानी नहीं बरतते है तो वे भी संक्रमित हो सकते है. इस संक्रमण को गंभीर स्तर तक पहुंचने में लगभग दो दिन से लेकर तीन सप्ताह तक का समय लग सकता है. इसकी पहचान करना और भी जटिल है. इससे संक्रमित व्यक्ति के ठीक हो जाने के सात सप्ताह तक संक्रमण का ख़तरा बना रहता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़,ट्रॉपिकल बरसाती जंगलों वाले मध्य और पश्चिम अफ़्रीका के गावों में फैली थी. पूर्वी अफ़्रीका की ओर कांगो, युगांडा और सूडान में भी इसका संचार हो रहा है.
डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी दिशा निर्देश के अनुसार, इबोला से पीड़ित रोगियों के शारीरिक द्रव और सीधे संपर्क से बचना चाहिए. इसके अलावा तौलिये साझा करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे सार्वजनिक स्थलों पर संक्रमित हो सकता है. डब्ल्यूएचओ ने मुताबिक़ इलाज करने वालें डॉक्टर को दस्ताने और मास्क पहनने चाहिए और समय-समय पर हाथ धोते रहना चाहिए.

चेतावनी
चमगादड़, बंदर आदि जानवरों से दूर रहना चाहिए और जंगली जानवरों के मीट के मीट खाने से बचना चाहिए. अभी तक इस बीमारी का इलाज नहीं खोजा जा सका है लेकिन नई दवाओं का प्रयोग चल रहा है.

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What are the symptoms of ebola viruses tell me the symptoms about this is it dangerous or not.

Dr.Lalit Kumar Tripathy 91% (20491ratings)
MBBS
General Physician, Cuttack
What are the symptoms of ebola viruses tell me the symptoms about this is it dangerous or not.
1. Ebola virus is transmitted from infected monkey, pigs, bats etc to human beings through the infected animal’s body fluid like blood, faeces and urine etc. The disease is mostly prevalent in African countries. It is a contagious disease and death occurs due to severe bleeding, multiple organ failure, Jaundice, delirium, shock, coma seizure etc 2. The early symptoms of the disease are fever, severe headache, body ache, sore throat, joint and muscle pain, chills, weakness 3. The symptoms gradually become more severe with a) Nausea, vomiting, stomach pain, Diarrhea (may be bloody diarrhea) c) Red eyes, raised rash, lymphadenopathy d) Cough, chest pain, severe weight loss e) There is bleeding usually from eyes, ear, nose, rectum f) in terminal stage there is internal bleeding and death occurs due multiple organ failure Prevention- avoid contact with wild animal/infected people/ wear protective clothings like glove, mask, wash yor hand. Treatment- symptomatic withfluid/oxygen/blood transfusion. Diagnosis – serological by Elisatest (demonstration of IgG/IgM antibody, RT PCr (reverse Transcriptase/real time PCR for Viral load.
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