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Causes and Prevention of Air Pollution in Hindi - वायु प्रदूषण के कारण एवं बचाव

Dr. Sanjeev Kumar Singh 89% (192 ratings)
Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri  •  9 years experience
Causes and Prevention of Air Pollution in Hindi - वायु प्रदूषण के कारण एवं बचाव

इस धरती पर समस्त प्राणियों के जीवन का आधार ही वायु है. लेकिन आज हमने वायु को विभिन्न कारणों से हद से ज्यादा प्रदूषित कर दिया है. इसके परिणाम स्वरूप आज वायु प्रदुषण हमारे लिए खतरा बन गया है. हमारे वायुमण्डल में मौजूद वायु का होना हमारे लिए अति आवश्यक है. इसलिए वायुरहित स्थान पर मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है क्योंकि मानव वायु के बिना 5-6 मिनट से अधिक जिन्दा नहीं रह सकता है. आपको बता दें कि हम मनुष्य दिन भर में औसतन 20 हजार बार श्वास लेते हैं. यानी श्वसन के दौरान हम मानव 35 पौण्ड वायु का प्रयोग करते हैं. आइए हम वायु प्रदुषण के कारणों और इससे बचने के उपायों को समझें ताकि इससे होने वाली समस्या से बचा जा सके.

वायु प्रदूषण के कारण

1. बढ़ती हुई जनसँख्या
जाहिर है आज हमारी जनसंख्या में तीव्रता से वृद्धि हो रही है. बढ़ती हुई जनसँख्या के कारण लोगों ने प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग किया है. ऐसा हमेशा से नहीं था, ये तब से शुरू हुआ जब से औद्योगीकरण की शुरुवात हुई है. तभी से बड़े-बड़े उद्योगों के कारण शहर बंजर बनते जा रहे हैं. शहरों की बदतर होती स्थति का एक कारण इन शहरों की दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही जनसंख्या भी है. इसके कारण शहरों व नगरों में आवास-समस्या भी उत्पन्न होने लगी है. आवास की समस्या से परेशान लोगों ने बेतरतीब बस्तियों का निर्माण किया जिससे वहाँ पर जल-निकासी, नालियों आदि की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई. इन्हीं गन्दी बस्तियों ने आगे चलकर वायुप्रदूषण को बढ़ावा दिया.
2. बढ़ते हुए उद्योग
उद्योगों से निकलने वाला धुआँ और कृषि में रासायनों के अंधाधुंध उपयोग से भी वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. इसके अलावा कारखानों में होने वाली भयंकर दुर्घटनाओं की भी भूमिका होती है. भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने की दुर्घटना भी इसी तरह की गत वर्षों की बड़ी दुर्घटना थी. इसमें एक ही समय हजारों व्यक्तियों को असमय मौत का शिकार बनना पड़ा था. ज़िंदा बचे लोग विकंलाग और विकृत हो गए.
3. संचार के साधन
आज बढ़ती आबादी के कारण संचार के विभिन्न साधनों में वृद्धि बहुत अधिक हो रही है. इन साधनों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से इंजनों, बसों, वायुयानों, स्कूटरों आदि की संख्या बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. ये सभी वाहन अपने धुएं से वायुमण्डल में लगातार असन्तुलन पैदा करने का काम कर रहे हैं.
4. वनों की अंधाधुंध कटाई
हम सभी मनुष्यों ने अपनी सुख-सुविधा के लिए वनों की अंधाधुंध कटाई की है जिससे वायु प्रदूषण बढ़ा है. जाहिर है वृक्ष वायुमण्डल के प्रदूषण को निरन्तर कम करने का काम करते हैं. पौधे हमारे लिए हानिकारक गैस कार्बन डाई आक्साइड को अपने भोजन के लिए ग्रहण करके जीवनदायिनी गैस आक्सीजन प्रदान करते हैं.
5. परमाणु परिक्षण
हमने आपसी वैमनष्य को इस कदर बढ़ाया कि देशों के बीच लड़ाइयाँ क लगने लगी और हथियारों का होड़ लग गया. इस वजह से लोगों ने परमाणु बम जैसे बेहद घातक और प्रदुषण फैलाने वाला हथियार मिल गया.

वायु प्रदूषण से बचने के उपाय

1. वनों की हो रही अन्धाधुन्ध अनियंत्रित कटाई को रोका जाना चाहिए. इस कार्य में सरकार के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाएँ व प्रत्येक मानव को चाहिए कि वनों को नष्ट होने से रोके व वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग ले.
2. शहरी करण की प्रक्रिया को रोकने के लिए गाँवों व कस्बों में ही रोजगार व कुटीर उद्योगों व अन्य सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए.
3. कारखानों को शहरी क्षेत्र से दूर स्थापित करना चाहिए, साथ ही ऐसी तकनीक उपयोग में लाने के लिए बाध्य करना चाहिए जिससे कि धुएँ का अधिकतर भाग अवशोषित हो और अवशिष्ट पदार्थ व गैसें अधिक मात्रा में वायु में न मिल पायें.
4. जनसंख्या शिक्षा की उचित व्यवस्था की जाए ताकि जनसंख्या वृद्धि को बढ़ने से रोका जाए.
5. वाहनों में ईंधन से निकलने वाले धुएँ को ऐसे समायोजित, करना होगा जिससे की कम-से-कम धुआँ बाहर निकले.
6. ऐसे ईंधन के उपयोग की सलाह दी जाए जिसके उपयोग करने से उसका पूर्ण आक्सीकरण हो जाय व धुआँ कम-से-कम निकले.
7. निर्धूम चूल्हे व सौर ऊर्जा की तकनीकि को प्रोत्साहित करइसे और ज्यादा उन्नत एवं सुलभ बनाना चाहिए.
8. शहरों-नगरों में अवशिष्ट पदार्थों के निष्कासन हेतु सीवरेज को सभी जगह बढ़ावा देना चाहिए.
9. इन सभी चीजों को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल करके बच्चों में इसके प्रति चेतना एवं जागृत फैलाई जानी चाहिए.
10. इसकी जानकारी व इससे होने वाली हानियों के प्रति मानव समाज को सचेत करने हेतु प्रचार माध्यम जैसे दूरदर्शन, रेडियो पत्र-पत्रिकाओं आदि के माध्यम से प्रचार करना चाहिए.
 

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