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Vighanharta Sai Hospital And Laboratory

Gynaecologist Clinic

C/O Vighanharta SAI Hospital Laboratory, Sukh Samruddhi Nagar, Alandi Road, Dighi,Landmark:Parande Nagar, Pune Pune
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Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well....more
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More about Vighanharta Sai Hospital And Laboratory
Vighanharta Sai Hospital And Laboratory is known for housing experienced Gynaecologists. Dr. Akash, a well-reputed Gynaecologist, practices in Pune. Visit this medical health centre for Gynaecologists recommended by 82 patients.

Timings

MON-SUN
09:00 AM - 01:00 PM 05:00 PM - 09:00 PM

Location

C/O Vighanharta SAI Hospital Laboratory, Sukh Samruddhi Nagar, Alandi Road, Dighi,Landmark:Parande Nagar, Pune
Vighanharta Sai Hospital Pune, Maharashtra
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Doctor in Vighanharta Sai Hospital And Laboratory

Dr. Akash

Gynaecologist
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गुलकंद से होने वाले फायदे - Gulkand Se Hone Waale Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
गुलकंद से होने वाले फायदे - Gulkand Se Hone Waale Fayde!

गुलकंद अपने बेहतरीन स्वाद के कारण ज़्यादातर लोगों की पसंद है. जाहीर है आपमें से भी कई लोगों ने इसे खाया ही होगा. कई लोगों का आटो ये फेवरेट भी होगा. स्वाद में अच्छा लगने वाला गुलकंद आपको कई औषधीय पोशाक तत्वों से भी भर देता है. इसके इसी गुण के कारण इसका इस्तेमाल कई आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है. इसका इस्तेमाल कई भारतीय व्यंजनों में भी खूब किया जाता है. आपको बता दें कि गुलकंद, गुलाब की पत्तियों और शक्कर को मिलाकर बनाया जाता है. यह हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है इसलिए यह गर्मी से संबंधित कई समस्याएं जैसे सुस्ती, थकान खुजली आदि में इस्तेमाल किया जाता है. जिन भी लोगों को हथेली और पैरों में जलन की समस्या है वे भी इसे खाकर अपनी समस्या को दूर कर सकते हैं. गुलकंद हमारे स्वास्थ्य से लेकर हमारे सौन्दर्य तक की समस्या को दूर करता है. आइए गुलकंद के फ़ायदों पर एक नजर डालते हैं.

1. प्रेगनेंसी के दौरान

आयुर्वेद के अनुसार, प्रेगनेंसी में गुलकंद के सेवन को सुरक्षित माना गया है. यह प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए दिया जाता है. गुलकंद मल को पतला कर देता है और इसमें मौजूद शुगर इंटेस्टाइन में पानी की मात्रा बनाए रखता है, जो कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाता है.

2. मुंह के अल्सर्स में
गुलकंद शरीर को शीतिलता प्रदान करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें शीतल गुण होते है. यह मुंह के छाले के लिए बहुत फायदेमंद है. यह मुंह के छालों के प्रभाव को कम करता है और साथ में यह छालों के कारण मुंह के जलन और दर्द को कम करने में मदद करता है.

3. त्वचा के लिए
हर दिन गुलकंद खाने से त्वचा में नमी बनी रहती है और त्वचा बेजान नहीं दिखती है. यदि आप पानी कम पीते है जिसके कारण आपकी त्वचा बेजान हो रही है तो गुलकंद बहुत फायदेमंद हो सकता है. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण इससे मुँहासे जैसी समस्याओं से भी छुटकारा पाया जा सकता है. यह रक्त को साफ करता है, जिससे हमारी त्वचा का रंग भी सुधरता है और त्वचा की कई समस्याओं में फायदा
मिलता है.

4. सनबर्न में
गुलकंद में शीतल गुण होते है इसलिए इसका नियमित रूप से सेवन सनबर्न की समस्या से निजात दिलाता है. यह आपके बॉडी में अतिरिक्त गर्मी के प्रभाव को कम कर देता है.

5. पेट के लिए
वर्तमान समय में पेट में गैस की समस्या बहुत आम हो गयी हैं. कई लोग पेट की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए खाली पेट एंटी एसिड दवा लेते हैं. गैस के कारण हमें कई प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे गले में छाले, पेट में मरोड़, अपच मुंह और गले में छाले आदि. यदि हम रोजाना भोजन के बाद गुलकंद का उपयोग करते है तो इन सभी परेशानी से छुटकारा मिल जाएगी. गर्मी के दिनों में कई लोग पेट में जलन और पेट दर्द जैसी समस्या से परेशान होते है ऐसे में उनके लिए इन सभी परेशानियों से निजात पाने के लिए गुलकंद बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. यह पेट में ठंडक प्रदान करता है. गुलकंद कब्ज जैसी समस्या से निजात दिलाने में उपयोगी है. इस में मौजूद गुण मल को पतला कर देता है और हमें मल त्यागने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती है साथ में यह बवासीर के सूजन को भी कम करता है.

6. आँखो की समस्या में
गुलकंद आँखो की रोशनी बढ़ाने के लिए फायदेमंद है. यह कंजंक्टिवाइटिस के लिए अच्छी औषधि है. इनसब के अलावा यह आँखो में जलन की समस्या को भी दूर करता है.

7. वजन कम करने में
गुलाब में ड्यूरेटिक और लैक्सेटिव गुण पाए जाते है जो मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करते हैं. जब मेटाबॉलिज्म तेज होता है तो शरीर में कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है जिससे वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. आर्युवेद में भी बहुत पहले से वजन कम करने के लिए गुलाब का इस्तेमाल किया जा रहा है. अगर आप अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं तो गुलाब की कुछ 20 पंखुडियों को एक गिलास पानी में डालकर उबाले. आपको पानी को तब तक उबालें जब तक पानी का रंग गहरा गुलाबी न लगने लगे. अब इसमें एक चुटकी इलायची पाउडर और एक चम्मच शहद मिलाएं. अब इस मिश्रण को छानकर दिन में दो बार लें. इसके सेवन से आपका वजन भी कम होता है और तनाव को दूर करने में मदद मिलती है. गुलकंद में गुलाब का अर्क होता है. इस का नियमित उपयोग भी आप के वजन को कम करता है.

अंकुरित गेहूं के फायदे - Ankurit Gehun Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अंकुरित गेहूं के फायदे - Ankurit Gehun Ke Fayde!

गेहूं का इस्तेमाल हम आटे के रूप में तो करते ही हैं लेकिन इसके साथ ही गेहूं को अंकुरित करके भी उपयोग में लाया जाता है. गेहूं को अंकुरित करने से इसके पोषक तत्वों को बढ़ाया या बदला जा सकता है. जाहीर है गेहूं को पूरे भारत सहित विश्व में भी किया जाता है. इससे कई सारी चीजें बनाई जाती हैं, जैसे की दलिया, कुकीज, रोटी, केक आदि. गेहूं को मैदा के मुकाबले ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक भी माना गया है. इसलिए गेहूं एक बहुत ही महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है. जिसे आसानी से पचाया भी जा सकता है. गेहूं में पाए जाने वाले पोषक तत्वों में फाइबर प्रोटीन कैल्शियम आदि प्रमुख हैं. अंकुरित गेहूं हमारे शरीर के उपापचय का स्तर बढ़ाने के साथ-साथ विषैले पदार्थों को निष्प्रभावी भी करता है. यदि आप रोजाना अंकुरित गेहूं का सेवन करेंगे तो आपके शरीर को विटामिन, मिनरल्‍स, फाइबर, फोलेट आदि मिलेंगे जो कि आपके त्‍वचा और बालों के लिये फायदेमंद है. इसे खाने से किडनी, ग्रंथियां, तंत्रिका तंत्र की मजबूती और रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में मदद मिलती है. आइए अंकुरित गेहूं के फ़ायदों पर एक नजर डालें.

1. अंकुरित गेहूं के फायदे वजन कम करने में
अंकुरित गेहूं के सेवन से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म रेट भी बढ़ता है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है. इससे शरीर की गंदगी बाहर निकलती है और रक्‍त शुद्ध होता है. अंकुरित भोजन शरीर का मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ता है. यह शरीर में बनने वाले विषैले तत्वों को बेअसर कर, रक्त को शुध्द करता है.

2. पाचन संबंधी समस्याओं के निदान में
जिन लोगों को हर वक्‍त पाचन संबन्‍धी समस्‍या रहती है उनके लिये अं‍कुरित गेहूं अच्‍छा रहता है क्‍योंकि यह फाइबर से भरा होता है. यह अनाज पाचन तंत्र को सुदृढ बनाता है. अंकुरित खाने में एंटीआक्सीडेंट, विटामिन ए, बी, सी, ई पाया जाता है. इससे कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक मिलता है. रेशे से भरपूर अंकुरित अनाज पाचन तंत्र को सुदृढ बनाते हैं.

3. यौवन क्षमता को बढ़ाने में
अंकुर उगे हुए गेहूं में विटामिन-ई भरपूर मात्रा में होता है. शरीर की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-ई एक आवश्यक पोषक तत्व है.

4. बाल और त्वचा को चमकदार बनाने में
यही नहीं, इस तरह के गेहूं के सेवन से त्वचा और बाल भी चमकदार बने रहते हैं. किडनी, ग्रंथियों, तंत्रिका तंत्र की मजबूत तथा नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी इससे मदद मिलती है. अंकुरित गेहूं में मौजूद तत्व शरीर से अतिरिक्त वसा का भी शोषण कर लेते हैं.

5. कोशिकाओं के शुद्धिकरण में
अंकुरित गेहूं के दानों को चबाकर खाने से शरीर की कोशिकाएं शुध्द होती हैं और इससे नई कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद मिलती है. अंकुरित भोज्य पदार्थ में मौजूद विटामिन और प्रोटीन होते हैं तो शरीर को फिट रखते हैं और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है.

6. शरीर की शक्ति बढ़ाने में
अंकुरित मूंग, चना, मसूर, मूंगफली के दानें आदि शरीर की शक्ति बढ़ाते हैं. अंकुरित दालें थकान, प्रदूषण व बाहर के खाने से उत्पन्न होने वाले ऐसिड्स को बेअसर कर देतीं हैं और साथ ही ये ऊर्जा के स्तर को भी बढ़ा देती हैं.

7. हड्डी के इलाज में
गेहूं का इस्तेमाल हड्डी दर्द के इलाज के लिए कर सकते हैं. क्योंकि गेहूं में कैल्शियम की प्रचुरता होती है. और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करता है. इसलिए गेहूं का सेवन हड्डी दर्द के इलाज में उपयोगी साबित होता है.

8. कब्ज दूर करने में
कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए अंकुरित गेहूं का सेवन बहुत ही फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाया जाने वाला प्रचुर मात्रा में फाइबर हमारे पेट की विभिन्न समस्याओं से छुटकारा दिलाता है. जिसमें कब्ज भी है.

9. शुगर के उपचार में
गेहूं का उपयोग हम शुगर जैसी बीमारियों के उपचार में भी करते हैं. शुगर के मरीजों के लिए गेहूं एक अच्छा खाद्य पदार्थ माना जाता है. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करें तो आपको शुगर की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है.

10. कैंसर के उपचार में
गेहूं हमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचा सकता है. इसका कारण है, गेहूं में पाया जाने वाला विटामिन ए और फाइबर. विटामिन ए और फाइबर हमारे शरीर से कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है.

11. उच्च रक्तचाप के लिए
उच्च रक्तचाप आज आम बीमारी हो गई है. यदि आप उच्च रक्तचाप की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो आपको मैदा का त्याग करके गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए. इससे रक्तचाप को नियंत्रित रहने रखने में मदद मिलती है.

12. सांसों की बदबू दूर करने में
कई बार मुंह से अनावश्यक बदबू आनी शुरु हो जाती है. जिससे कि कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. यदि आप इससे बचना चाहते हैं तो आपको गेहूं का सेवन करना शुरू करना चाहिए.

13. थायराइड के उपचार में
गेहूं के उपयोग से हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड की बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. इसके लिए आपको अपने दिनचर्या के भोजन में गेहूं को शामिल करना चाहिए.

14. गुर्दे की पथरी में
किडनी स्टोन जिसे गुर्दे की पथरी भी कहा जाता है, के उपचार के लिए गेहूं का नियमित सेवन फायदेमंद साबित होता है. गेहूं में पाए जाने वाले तत्वों में किडनी स्टोन को गलाने की क्षमता होती है.

15. प्रोटीन के स्रोत और खून की कमी दूर कने में
गेहूं प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है. विशेष रूप से अंकुरित गेहूं. यदि आप नियमित रूप से अंकुरित गेहूं का सेवन करें तो आपके शरीर में प्रोटीन की कमी का सामना कभी नहीं करना होगा. कई लोगों को खून की कमी यानी कि एनीमिया हो जाती है. लेकिन गेहूं के सेवन से इसे दूर किया जा सकता है. क्योंकि गेहूं शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण में मदद पहुंचाता है.

16. हृदय विकारों से बचाने में
गेहूं के सेवन से हम हृदय से संबंधित तमाम विकारों से बच सकते हैं. यदि आप नियमित रूप से गेहूं का सेवन करते हैं. तो आपका दिल स्वस्थ और मजबूत रहेगा.

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Care Givers - The Support System One Needs!

PhD - Clinical Psychology, Diploma in Clinical and Community Psychology, MA - Clinical Psychology, BA - Psychology
Psychologist, Delhi
Care Givers - The Support System One Needs!

Family members are the primary caregivers of persons with mental illnesses. The family caregiver plays multiple roles in the care of persons with mental illness, including taking day-to-day care, supervising medications, taking the patient to the hospital and looking after the financial needs. 

The family caregiver also has to bear with the behavioral disturbances in the patient. Thus, the family caregiver experiences considerable stress and burden and needs help in coping with it. The caregivers develop different kinds of coping strategies to deal with the burden.

 An unhealthy coping style is likely to adversely affect the care giving function. Hence, it is important to take care of the needs of family caregivers. The caregivers caring for their patient with mental illness feel stressed, anxious and low since the illness tends to be chronic and demanding. In the long run, there may occur burnout and emotional exhaustion. The caregivers feel isolated from the society, both due to the restriction of their social and leisure activities, as well as the social discrimination and stigma attached to the mental illnesses. 

Most caregivers take up the caring role in the absence of any significant knowledge about the illness. The role and demands are incorporated within the regular family responsibilities. The caregivers develop different kinds of coping strategies to deal with the burden of caregiving. A lot of trial and error may be involved in coping. 

Coping mechanisms of the caregiver: It is important to understand caregivers’ coping mechanisms for tackling burden because it affects caregivers’ day-to-day functioning. The burden is a constant source of stress, and how the caregivers cope with it, affects the course of illness. The burden and the coping methods also influence the physical and mental health of the caregiver and hence their further efficacy as a caregiver.

The coping strategies can be broadly grouped into two groups: Emotion-focused and problem focused. ·    

 1. The emotion-focused strategies aim to diminish the negative emotional impact of the stressor, and include avoidance, denial, fatalism, or looking to religion. The emotion-focused coping has been reported to be associated with the perception of a higher burden 

2. The problem focused coping refers to direct actions, which individual undertakes to change the situation. These include problem-solving or seeking social support to resolve the stress of care giving. Problem-focused and fewer emotion-focused coping strategies lead to reduced perception of burden. Problem-solving coping has been reported to be associated with better functioning

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Being Feminine - A Gift!

MD - Obstetrtics & Gynaecology, MBBS
Gynaecologist, Gurgaon
Being Feminine - A Gift!

Every woman is given nature's gift of being feminine. However, the many roles of a woman take a toll on her health and body.
Pregnancy, childbirth, hormonal changes all create challenges for her to maintain her youthfulness. 
So whether it is a recurrent urinary and vaginal infection, vaginal looseness, unable to enjoy your sexual life or loss of control over urine and urine leakage, don't be shy or embarrassed.
O shot/ PRP treatments along with laser techniques are now available which can cure these issues quickly and discreetly. 
 

Some benefits of this are:
1. Improved pelvic/gynecological health
2. Better immunity against vaginal and urinary tract infections
3. Vaginal tightening
4. Better control over urine
5. Improved aesthetics and looks of your private parts
6. Better experience during lovemaking

So girls, go ahead and talk to your gynecologist about these unspoken issues and reclaim your confidence.

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What Is Emotional Quotient (EQ)?

Ph. D - Psychology
Psychologist, Delhi
What Is Emotional Quotient (EQ)?

Emotional Intelligence means using emotions and thinking together – it’s about balance. In layman’s words, it means being smarter with feelingsEmotional Quotient (EQ) means knowing and managing your own emotions and recognizes and manages other people’s emotions and motivates yourself too. It helps to manage relationships so that a person can achieve personal and professional goals through the use of other people.

EQ mainly represents personal and social competence.

Personal Competence: It means knowing your emotions means Self-awareness about how you feel. It helps to access your emotional state. It has three aspects which includes

  • Self-Assessment-means awareness about your positive and negatives, strengths and weaknesses.
  • Self Confidence- to be positive and secure and assured whatever situation you are.
  • Self-Management- to understand and control your emotions so that they don’t control you i.e. self-control which means maintaining positivism in the face of the problematic. The people who excel in it can bounce back far more quickly from life’s setbacks and disappointments.

Social Competence: It means how well you manage your relationship with others, including their emotions. It has two concepts.

  • Social Awareness-means understanding the emotions of those people around you and empathizes with others and aware about what is affecting them.
  • Social Management- by using the awareness of owns emotions and others to build a healthy relationship. It’s a way to communicatepersuade and lead others, whilst being direct and lowest without alienating People who excel in these skills do well at anything that relies on interacting smoothly with others.

The Four Fundamental Aspects of Emotional Intelligence are:-

  • Recognizing emotions
  • Understanding emotions
  • Regulating emotions
  • Using emotions

Emotional Quotient (EQ) is more important than Intelligence Quotient (IQ). It is more important for personal and professional success. The research found that IQ had little relation to success at work and in the rest of their lives. Once you are established in some particular work or job/ life, success is more likely to depend on your ability to persist in the face of difficulty and to get along well with others. It can be remedied to a great extent.  It represents a habit and response that can be improved with the right effort.

 

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Shirodhara For Good Health!

Bachelor of Ayurveda, Medicine & Surgery (BAMS)
Ayurveda, Nashik
Shirodhara For Good Health!

Shirodhara
It is otherwise called Shiro pariseka.
Well developed by physicians of Maharashtra.
By selecting different liquid media, we can use it for many diseases.
For example
For vata- Oil.
For pita- Milk, ghee and coconut water.
For Kapha- Buttermilk, cow's urine and dhanyamlam (a fermented liquid preparation of cereals).
Dhara can be done on head or all over the body or locally.

General indications
- Insanity.
- Chronic sinusitis.
- Cerebrovascular diseases.
- Diseases of head, neck, ears, nose, throat and nervous system.
- Epilepsy
- Psoriasis.
- Migraine headache
- Mental disorder
- Hair fall
- Improve hair health 

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Importance Of Drinking Water!

BSc-Food & Applied Nutrition, Msc in Clinical Dietetics & Food Service Management
Dietitian/Nutritionist, Bhubaneswar
Importance Of Drinking Water!

Water intake is an important part of having a healthy lifestyle. But not many of us give importance to it as we do to our diet. But do we know that water makes up for around 60-70% of the body weight? However, the amount of water contained in different body cells varies. Muscle cells comprise of 70-75% water whereas fat cells contain 10-15%water. It plays an important role in transportation of nutrients and oxygen to all cells, helps heart pump blood efficiently, controls blood viscosity, circulation and thereby the blood pressure, protects organs and tissues and helps in saliva production. Apart from these listed below are some more important health benefits of water.

Sir, A week ago me and my girlfriend were rubbing our genitals. My erect penis did touch her vagina. And I did some fingering. From 2 days she is having breast pain and nausea. Is she pregnant. Do the symptoms of pregnancy show up this much quickly. She is just 18. Her periods are delayed still.

BHMS
Homeopath, Noida
No, pregnancy symptoms don’t appear so fast. She will experience symptoms a week after missing her periods. Tell her to do UPT. Urine Pregnancy test should be done 10 days after missing your period. For example if your date was 10th, then do the test on 20th. Before that it can give false negative or false positive test.

Why Should You Get A Flu Short On Time?

MBBS, MD - Internal Medicine
General Physician, Jaipur
Why Should You Get A Flu Short On Time?

There are a variety of reasons why a person can fall sick. A good number of these illnesses cannot be prevented though a person may take general precautions. Having said that, in the case of influenza, it can be prevented to a large extent and it does not seem all that smart to avoid taking easy precautions when one has an option, right?

Every year, thousands of people die from influenza, which is so unfortunate because an annual shot can reduce that number by almost 60 percent. So what exactly makes a flu shot or vaccine work? As a result of the vaccine, after about two weeks or so, antibodies begin to develop in the body. These antibodies help fight off infection, specifically the kind that is targeted by the vaccine. It is important to get vaccinated for this flu on an annual basis.

Choosing the right flu shot
Considering the great number of options there are when it comes to flu vaccines, which are the ones to be injected? It is a good idea to get the opinion of a doctor to see which one to choose. This is because the choice is dependent on a variety of factors, which a medical professional would be able to assess appropriately. Note that it is important not to use the nasal spray version of the vaccine as the medical authorities have recently found that it is not as effective a method as it once was.


When should you get it?
Flu season does vary across the world, but in the US, it starts in about October and goes on till May. During this time, the flu viruses are a lot more active. When one gets a flu shot, it is this period that one needs to look out for. So, it is better to get vaccinated in late September or the start of October, so that there is minimal unprotected exposure to the viruses.

Who is it for?
It is to be kept in mind that every individual who is older than six months should be vaccinated. While it is said that getting a vaccine shot year after year reduces its effectiveness, it is still important to do so. This is because each year, the shot is altered to reflect the biggest virus threats in that year. There might be few side effects of the flu vaccine such as redness in the injected area, soreness or swelling. However, as long as one gets a flu shot in time, it is almost a given that there will be almost no time spent ‘down with the flu’.

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How Can You Look Your Best This Wedding Season?

Diploma In Diet & Nutrition
Dietitian/Nutritionist, Jaipur
How Can You Look Your Best This Wedding Season?

Maintaining a healthy diet is of prime importance during a wedding season. Slightest of negligence can lead to unaccounted fat, leading to cardiovascular and other diseases. While working out can help to stay away from putting on the extra pounds, a healthy diet goes a long way in ensuring that the body functions at the optimum level.

Here is a list of important tips that will help to follow a healthy diet and refrain from putting on extra weight:

  1. Stay away from unnecessary fat: Most wedding parties have numerous food options. The high fat items such as dairy product, oily dishes should be eschewed in order to ensure that the body is not overstuffed with unnecessary fat that is difficult to get rid of.
  2. Look at the portion size: Another good way of maintaining a healthy diet is to pick and choose the right dishes and go for small portion size rather than going all out for the one dish one likes. There is no harm in trying multiple dishes, but the same should be done in small portion sizes.
  3. Planning for the day: One critical aspect of eating healthy is to eat throughout the day. On the day of a wedding, there are many people who tend to save the stomach for the party meal or drink. This is a very bad approach as far as eating healthy is concerned. A good way to plan the day is to eat light throughout the day. Salad, for instance, comes as a relief during the wedding session.
  4. Making a routine: Sticking to a diet chart helps a great deal in maintaining a healthy diet. The diet chart should comprise of multiple options. For instance, one need not stick to an oatmeal for breakfast every morning. Variety will help to break the monotony and encourage a person to stick to the diet routine.
  5. Calorie count: In continuation of the diet chart, keeping a rough count of the calorie consumed on a daily basis also helps to stick to a healthy diet. Calorie count is a good way of keeping track of what one is eating and how much impact it will have in the longer run. Since wedding parties tend to possess a lot of food items, a rough calorie count will help an individual to balance the calorie count in the next few days.
  6. Refrain from too much drinking: Staying away from alcohol can be difficult in wedding parties, but their consumption increases the urge to eat more. It, therefore, makes sense to not consume more than a couple of drinks in any wedding party.
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