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Pearl Women's Hospital & Yash-IVF

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1277 Renaissance, 1st Floor (formerly Indira Maternity Home), Jangali Maharaj Road, Next to McDonalds, Deccan Gymkhana, Pune ? 411004 Pune
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Pearl Women's Hospital & Yash-IVF Gynaecologist Clinic 1277 Renaissance, 1st Floor (formerly Indira Maternity Home), Jangali Maharaj Road, Next to McDonalds, Deccan Gymkhana, Pune ? 411004 Pune
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Pearl Women's Hospital & Yash-IVF is known for housing experienced Gynaecologists. Dr. Chaitanya Ganapule, a well-reputed Gynaecologist, practices in Pune. Visit this medical health centre for Gynaecologists recommended by 78 patients.

Timings

MON-SAT
07:00 PM - 09:00 PM 02:00 PM - 04:30 PM

Location

1277 Renaissance, 1st Floor (formerly Indira Maternity Home), Jangali Maharaj Road, Next to McDonalds, Deccan Gymkhana, Pune ? 411004
Deccan Pune, Maharashtra - 411004
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Doctor in Pearl Women's Hospital & Yash-IVF

Dr. Chaitanya Ganapule

Advanced Infertility
Gynaecologist
49 Years experience
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What You Need To Know About INVO - In-vitro Fertilisation?

M.Sc, MD, MBBS
IVF Specialist, Delhi
What You Need To Know About INVO - In-vitro Fertilisation?

INVO (intravaginal culture of oocytes), also called IVC (Intravaginal culture) is an abetted procedure of reproduction where early embryo development and oocyte fertilization are carried out inside a gas penetrable, air-free plastic tool or device that is placed into the maternal vaginal chamber for incubation. It is a device that helps the future mothers to participate in the evolution and growth of their own embryos present inside their body. The device is composed of an inner cavity with a protective outer rigid shell and a rotating valve.

It can be used for IVF (In Vitro Fertilization) cycles; whether with the mother's own eggs or any donor's eggs. It provides the same successful results as conventional treatments. It works in a very simple way:- when the requisite samples to produce embryos have been acquired or when the eggs have been impregnated in the laboratory, they together with culture medium are placed into the INVOcell device and then the device is inserted into the vagina of the mother and there it is kept for two to three days (for 72 hours culture period). Throughout this time, the mother can lead a practically normal life but she needs to elude taking bath, having intercourse or flying during those days on which she is wearing it.

When fertilisation takes place, it will be the mother's own heat which will supply the best conditions for the proper development of the embryos. Once they are set and ready, the doctor will remove the INVO from the mother's vagina to recover the embryos. The embryos are then evaluated under the microscope to choose the healthiest-looking ones to transfer them into the uterus. Within the uterus they will be embedded in order to begin developing.

Advantages of INVO are:

  1. It is one of the most cost-effective assisted conception treatments.
  2. In this method, the embryo incubation is more natural.
  3. Since in this whole process embryo incubation in the laboratory isn’t required, the possibility of stumbling at the laboratory is diminished.
  4. In this method, the couple experiencing the treatment is involved more.
  5. This method has similar efficacy as the IVF treatments.

Disadvantages of INVO are:

  • Since the device has to remain for three days in the mother's vagina, it causes some discomfort.
  • The patient has to spend much time in the assisted reproduction clinic and visit it more often.

The studies suggest that it could be a usable alternative choice for assisted reproduction.

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भांग कैसे बनती है - Bhang Kaise Banti Hai!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
भांग कैसे बनती है  - Bhang Kaise Banti Hai!

होली का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आता है वैसे ही हमारे मन में रंगों के साथ साथ भांग का घोटा और भांग से बने पकवान का स्वाद लेने के लिए मन में लालच आ जाता है. भांग हमारे देश में खास कर उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है. भांग के बिना होली मानो अधूरी सी लगती है. इसका उपयोग आम तौर पर खाने में, भांग की गोली और भांग की ठंडाई के रूप में किया जाता है. भांग का घोटा पी कर होली में नाचने का मजा ही कुछ और होता है . तो आज ही लेख में हम भांग कैसे बनती है, भांग का घोटा क्या होता है और भांग का नशा उतरने की दवा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं तो आइए जानते हैं कि भांग कैसे बनती है और भांग का नशा उतारने की दवा क्या है साथ ही साथ भांग का घोटा बनाने की विधि क्या है?

भांग का घोटा क्या है-
भांग एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में जाने वाली जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है. भांग के पेड़ की लम्बाई 3 से 7 फीट की होती है. भांग आमतौर पर भांग के पेड़ की पत्तियों से लिया जाता है. इसका उपयोग विभिन्न प्रकार से की जाती है जैसे भांग की ठंडाई, भांग का घोटा और खाने में. भांग कैसे बनती है और ये कितने तरीके से इस्तेमाल किया जाता है इसके बारे में निम्न विस्तार से बताया गया है.

भांग का घोटा बनाने के विधि:-
भांग को घोटा बनाने के लिए हरे पत्तियों के पाउडर को दही और मट्ठे के साथ मिक्स कर के तैयार की जाती है. इसका सही तरह से मिश्रण करने के लिए हाथों से अच्छे तरह से मथा जाता है. यह बेहद स्वादिष्ट और ताज़ा होता है. इसके साथ ही कहीं-कहीं भांग के पकौड़े भी खाए जाते है.

भांग का घोटा के अलावा यह गोली और ठंडाई के रूप में भी इस्तेमाल की जाती है. भांग की गोलियां होली के दौरान व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है. भांग की गोलियां भांग को पानी के साथ मिक्स कर के बनाया जाता है. हालाँकि, इसके खाने के कई साइड इफेक्ट्स भी है. इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में और प्रतिदिन नहीं करना चाहिए. भारत में यह जगहों पर इसे बैन कर दिया गया है. 

भांग में शामिल होने वाली सामग्री- 

  • आधा लीटर पानी 
  • आधा कप चीनी 
  • एक कप दूध 
  • एक चमच बादाम
  • 10 से 15 भांग की गोलियां 
  • आधा चम्मच इलायची 

होली के दौरान भांग का अलग ही महत्व होता है लेकिन यदि भांग का सेवन सीमित मात्रा से ज्यादा कर लिया जाए, तो भांग का नशा बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है. तो आइए जानते है कि भांग का नशा कैसे उतारा जाता है और भांग का नशा उतारने की दवा क्या है.
1. भांग का नशा उतारने के लिए खट्टे पदार्थो का सेवन करें
यदि भांगा का नशा ज्यादा हो जाए तो जितना हो सकता है खट्टे पदार्थों का सेवन करें जैसे की नीम्बू का रस, दही, छाछ, इमली आदि. इससे नशा जल्दी उतर जाता है. 

2. भांग का नशा उतारने  के लिए घी का सेवन भी बहुत कारगर सिद्ध हो सकता है. यह नशे को बहुत हद्द तक कम कर सकती है. 

3. भांग का नशे उतारने के लिए भुने हुए चने या नारंगी का सेवन भी कर सकते है.

4. नारियल पानी भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह आपके बॉडी में मीनरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बढ़ाता है जिससे भांग का प्रभाव जल्दी कम हो जाता है और नशा उतर जाता है.

5. यदि आप भांग के नशे से बेहोश हो गए तो सरसों के तेल को थोड़ा गुनगुना कर, कान में डालने से बेहोशी दूर हो जाती है और व्यक्ति होश में आ जाता है.

6. अदरक भी भांग का नशा उतारने में सहायक हो सकती है.

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भांग पीने के साइड इफेक्ट - Bhang Pine Ke Side Effect!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
भांग पीने के साइड इफेक्ट - Bhang Pine Ke Side Effect!

वैसे तो भांग एक औषधि है, लेकिन इसका गलत उपयोग काफी बढ़ी मात्रा में किया जाता रहा है. ऐसे लोगों की संख्या काफी बड़ी है जो भांग का सेवन ज्यादा मात्रा में नशा करने के लिए करते है. जिसके चलते उन्हें ज्यादा भांग पीने के साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ता है. जबकि भारत के परिपेक्ष की बात करें, तो भांग का उपयोग होली के त्यौहार पर अधिक मात्रा में होता है. 

जहाँ लोग भांग के पकौड़े और भांग की ठंडाई आदि बनाते है और इनका सेवन करने वाले लोगों को पता नही होता है कि भांग का नशा कितने दिन तक रहता है या भांग पीने के साइड इफेक्ट क्या होते है. लेकिन इस लेख में हम आपको बताएंगे भांग का नशा कितने दिन तक रहता है, तो आपको बता दें कि किसी भी नशे को उतारने के लिए नींबू का उपयोग सबसे बेहतर बताया गया है. 

नींबू का इस्तेमाल - इसके लिए आप नशे में लिप्त व्यक्ति को नींबू का रस चटा सकते है. इससे भांग का नशा थोड़ा कम हो जाता है.

दही का उपयोग - अगर आप भांग का नशा उतारना चाहते है, तो इसके लिए जरूरी है दही का उपयोग, लेकिन याद रहें कि भांग के नशे से ग्रसित व्यक्ति को किसी भी प्रकार के पेय में मीठा मिलाकर न दें क्योंकि किसी भी मीठी चीज़ का उपयोग करने पर भांग का नशा ज्यादा चढ़ जाता है.

इन सभी के अलावा भांग पीने के साइड इफेक्ट की बात करें तो इससें -

  • किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है. 
  • प्रेगनेंट महिलाओं की बात करें, तो उनके भूण पर बूरा असर पड़ता है.
  • बातें भूल जाना, ज्यादा भांग पीने के साइड इफेक्ट के कारण होता है.
  • इसके अलावा आँखों के लिए भी भांग को अच्छा नही माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद यौगिक आँख के अलावा कान और पेट की समस्या भी पैदा करते है.
  • कुछ लोगों में देखा गया है कि भांग पीने के बाद उन्हें चिंता, मतिभ्रम, भय और भ्रम आदि का सामना करना पड़ सकता है.
  • अगर छात्रों द्वारा इसका प्रयोग किया जाता है तो उन्हें पढ़ाई करने में परेशानी हो सकती है.
  • इन सभी के अलावा उल्टी, घबराहट, अधिक खाने की इच्छा या भूख न लगना, क्रोध बढ़ना, चिड़चिड़ापन आदि भांग पीने के साइड इफेक्ट है.
  • इन सभी के अलावा दिन में सपने देखना भांग पीने के साइड इफेक्ट में से एक है.

आम परिपेक्ष में देखा जाए तो होली के समय में लोग भांग के नशे में कई न की जाने वाली चीज़े भी करते है. जिसमें दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार न करना शामिल है. अगर बात करें, कि भांग का नशा कितने दिन तक रहता है तो यह आपके द्वारा ली गई भांग के सेवन पर करती है. इसके अधिक सेवन से शरीर में खून का दौरा तेज़ हो जाता है. जिसके चलते लोगों का उनके नर्वस सिस्टम पर कंट्रोल नही रहता है, जिसके चलते व्यक्ति या तो हंसता रहता है या वह रोने लगता है. काफी लोग मौज़ मस्ती के लिए भी ऐसे काम करते है.

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Bhaang Ka Nasha Utarne Ke Upay - भांग के प्रभाव और नशा उतारने के उपाय!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Bhaang Ka Nasha Utarne Ke Upay - भांग के प्रभाव और नशा उतारने के उपाय!

होली को रंगों का त्यौहार माना जाता है, इस पर्व के दौरान लोग रंग और गुलाल के साथ तो खेलते ही है साथ में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भी लुत्फ़ उठाते है. इन सब के बीच एक और ऐसी चीज है जिसके बिना होली का मजा अधुरा रह जाता है. यदि आपके मन में भांग और ठंडाई का नाम आया है तो बिल्कुल सही सोच रहे हैं. हम भांग की ही बात कर रहे हैं. होली का मौका हो और भांग और ठंडाई न पी जाए, तो यह बात हजम नहीं होती है.

भारत के उत्तर प्रांत के राज्यों में होली के दिन भांग पीने की बहुत पुरानी प्रथा है. भांग पीने के कई भांग के बिना होली भले ही अधुरा रह जाता हो, लेकिन इससे भी ज्यादा परेशानी की बात तब हो सकती है जब भांग के प्रभाव ज्यादा हो जाता है और आपके रोज के दिनचर्या और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित होता है. इसलिए भांग का सेवन करें लेकिन इसका भी ख्याल रखें की भांग का नशा आपके दिनचर्या को प्रभावित ना करें.

हालाँकि, भांग में कई तरह के औषधीय गुण भी होते है जो आपको कई गंभीर बिमारियों में इलाज के रूप में उपयोग किया जाता है. भांग के प्रभाव से होने वाले फायदों में निम्न बीमारियां शामिल है:-

  1. ग्लूकोमा- भांग के सेवन से ग्लूकोमा के लक्षण ठीक होते है.
  2. कैंसर- भांग का उपयोग कई कैंसर को ठीक करने के लिए दवाओं में उपयोग किया जाता है. भांग कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता है.
  3. कान की समस्या- भांग के 8 से 10 बूँद रस को कान में डालने से कान की समस्या ठीक हो जाती है.
  4. अस्थमा- भांग को जला कर उसके धुंए को सूंघने से अस्थमा की समस्या से लाभ मिलता है.

ऐसे कई लोग हैं जिनको भांग हज़म नहीं होती, वे कई दिनों तक भांग के हैंगओवर से उबर नहीं पाते हैं. यह स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो सकती है की आपको हस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है. आमतौर पर भांग खाने पर नर्वस सिस्टम का नियंत्रण नहीं रहता है इसलिए लोग अपने किसी भी एक्टिविटी को कंट्रोल नहीं कर पाते. जब आपको भांग का हैंगओवर होता है तो आपको कई तरह के लक्षण अनुभव होंगे. जिसमे निम्नलिखित शामिल है:-

  1. असामान्य रूप से हंसना
  2. अचानक रोने लग जाना 
  3. बहुत ज्यादा नींद आना
  4. अत्यधिक भूख लगना
  5. बहुत अधिक भांग खाने से याद रखने में असमर्थता 
  6. भांग खाने के दौरान कई लोग आँख खोल कर सोते है, जो बहुत ही गंभीर स्थिति होती है.

भांग का नशा उतारने के उपाय में सबसे बेहतर घरेलू नुस्खे को अपनाना है. इसके लिए आप खटाई, दही, नींबू छाछ, या फिर इमली का इस्तेमाल कर सकते है. भांग का हैंगओवर आपके बॉडी में कमजोरी, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द की समस्या से दो चार होना पड़ सकता है.  इन समस्याओं से निजात पाने के घरेलू उपाय के साथ आयुर्वेदिक उपाय सबसे बेहतर तरीका है. 

भांग का हैंगओवर उतारने के घरेलू तरीके-

  1. भांग हैंगओवर लक्षण दिखने और नशा हो जाने पर उतारने के तरीके में  250 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक घी का सेवन करें. यह उपाय बहुत फायदेमंद साबित होते है.
  2. भांग का हैंगओवर उतारने के घरेलू तरीके लिए खटाई का सेवन भी एक कारगर तरीका है. इसके साथ आप कोई भी खट्टा पदार्थ जैसे निम्बू, दही, इमली का पानी भी ले सकते है.
  3. अगर कोई भांग हैंगओवर उतारने के लिए बेसुध पड़े व्यक्ति के कान में सरसों का तेल हल्का गुनगुना कर ले. एक दो बूँद तेल प्रभावित व्यक्ति के कान में डालें.
  4. सफेद मक्खन भी भांग का हैंगओवर उतारने के उपायों में काफी फायदेमंद साबित होता है. 
  5. भांग का सेवन किसे नहीं करना चाहिए 

बच्चों को भांग का सेवन नहीं करना चाहिए, यह उनके एकग्रता में कमी ला सकता है.

  1. जो लोग रोजाना काम पर जाते हैं उनके लिए भी भांग फायदेमंद नहीं है, क्योंकि यह उनके दिनचर्या के काम को प्रभावित कर सकता है. वह अपने काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं.
  2. गर्भवती महिलायों को भी भांग के सेवन से परहेज करना चाहिए, यह गर्भपात जैसी परिस्थिति का भी कारन बन सकती है.
  3. ऐसे लोग जो मानसिक समस्या से पीड़ित है, वे भी भांग के सेवन से दूर रहें. भांग के प्रभाव उनके लिए भी नुकसानदायक सिद्ध हो सकते है.

भांग के पकौड़े बनाने की विधि - Bhaang Ke Pakode Kaise Banaye!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
भांग के पकौड़े बनाने की विधि - Bhaang Ke Pakode Kaise Banaye!

भारतीय प्राचीन चिकित्सा प्रणाली जिसे आयुर्वेदिक चिकित्सा के नाम से भी जाना जाता है. इसमें लगभग हर पेड़ या फल के स्वास्थ लाभ बताए गए है, साथ ही अलग-अलग स्वास्थ स्थितियों के लिए उनका प्रयोग और रोगों का उपचार भी बताया गया है. अगर आज के परिपेक्ष को देखें, तो आयुर्वेद उपचार को लेकर लोगों में विशेषकर रूचि है, जिसके चलते उपचार के इस तरीके की ओर लोगों का रूझान बढ़ रहा है.

लगभग हर भारतीय रसोई में प्रयोग की जाने वाली हल्दी, अजवाइन, धनीया, अदरक, नींबू आदि फलों के आयुर्वेद में कई लाभ बताए गए है. उन्हीं में से एक बेहतरीन स्वास्थ लाभ प्रदान करने वाली एक तरह की खाद्य प्रदार्थ, भांग होती है, जो प्राकृतिक होती है. इसके पेड़ और पत्ते आदि होते है, जिन्हें पीसकर कई तरह के खाद्य आदि प्रदार्थोंं में इसे उपयोग किया जाता है. विशेषकर भांग का प्रयोग होली के समय ज्यादा होता है. होली जैसे खुशी के त्यौहार पर कई लोग भांग के पकौड़े आदि जैसे पकवान तैयार करते है.

जबकि भांग के फायदे और नुकसान दोनों ही होते है. भांग के फायदे की बात करें तो इसका उपयोग सिरदर्द में किया जाता है. इसके लिए जरूरी है कि रोगी भांग के पत्तों को सूंघें.अगर बात करें मलेरिया जैसे रोग कि तो इसमें भी भांग बहुत उपयोगी सिद्ध होती है. इसके लिए भांग के एक ग्राम पाउडर में 2 ग्राम गुड़ मिला लें और उसकी 4 गोलियां बना लें. मलेरिया में बुखार आने से पहले इन्हीं में से एक गोली का सेवन करने से काफी राहत मिलती है.  

इसके अलावा भांग के फायदे की बात करें तो आँखों की समस्याओं में भी भांग काफी राहत प्रदान करती है. ग्लूकोमा जिसे मोतियाबिंद के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें आँख की नसें कमज़ोर हो जाती है. ग्लूकोमा जैसी स्थिति में भांग काफी लाभ प्रदान करती है. इससे आँखों की नस मजबूत होती है. 

इसके अलावा भांग के पत्ते का रस माथे पर लगाने से रूसी की समस्या से छुटकारा मिल जाता है. इसके अलावा भांग की ठंडाई के सेवन से मूत्र की जलन मिट जाती है. इसके अलावा भांग के पाउडर और गुड़ मिलाकर सेवन करने से पेट साफ रहता है. इन सभी के अलावा कान का दर्द जैसी स्थितियों में भी आप भांग के पेस्ट को आग में पिघलाकर कान में डाल सकते है, जिससे कान में कीड़े जैसी समस्या दूर रहती है. 

अगर आमतौर पर बात करें तो भांग के पकौड़े और भांग की ठंडाई सिर्फ होली जैसे त्यौहार पर ही ज्यादा प्रचलित होती दिखती है. सही मात्रा में सेवन करने पर इसके कई स्वास्थ लाभ होते है. भांग के पकौड़े की बात करें, तो भारत में होली के त्यौहार के समय भांग का प्रयोग काफी लंबे समय से किया जा रहा है. साथ ही भांग की ठंडाई और भांग के पकौड़े का भी सेवन किया जाता है. लेकिन बहुत से लोगों को यह पता नही होता कि भांग के पकौड़े कैसे बनाए ? तो आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे भांग के पकौड़े बनाने की विधि, जो इस प्रकार -

भांग के पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले आपके पास जरूरी सामग्री होनी चाहिए. जिसमें 

  • चने की आटा
  • हल्दी
  • लाल मिर्च पाउडर
  • कूकिंग ऑयल
  • आलू जिन्हें आपको गोल काटना होगा
  • प्याज़ को गोल काटे
  • थोड़ा भांग की पत्ती का पेस्ट
  • नमक
  • आमचुर

भांग के पकौड़े तैयार करने के लिए सबसे पहले -
सभी चीज़ों को मिलाकर मिश्रण बना लें और इसका पेस्ट तैयार कर लें.
अब पेस्ट में आलू और प्याज़ के कटे हुए पीस मिक्स कर लें. 
कढ़ाई में तेल को गर्म कर लें और पेस्ट को उसमें डालकर भूरा होनी तक फ्राई करें.

भांग के पकौड़े बनाने की विधि में कुल 40 मिनट तक का समय लगता है.

मासिक धर्म में देरी के कारण - Masik Dharm Mein Deri Ke Karan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मासिक धर्म में देरी के कारण - Masik Dharm Mein Deri Ke Karan!

महिलाओं मासिक धर्म संबंधी अनियमितता एक सामान्य समस्या है. कई बार पीरियड नहीं आने या बंद होने के कुछ और भी कारण होते हैं, लेकिन महिलाओं को इस बात का डर बैठ जाता है कि कहीं फिर से प्रेग्नेंसी तो नहीं आ गयी. यह डर महिलाओं में तनाव को बढ़ाता है. माहावारी के दौरान महिलाओं में डिप्रेशन, पेट दर्द होना सामान्य है. इस प्रक्रिया में अच्छा व बुरा संकेत होना भी प्राकृतिक प्रक्रिया है. माहवारी अचानक बंद होने पर महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है. यह कई अन्य कारणों से भी हो सकता है. शरीर में किसी भी प्रक्रिया का आनियामित रूप से चलना या उसका ठीक से काम नहीं करने के कई कारण हो सकते हैं. मासिक धर्म तो एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसका शरीर पर कई तरह का असर देखने को मिलता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम मासिक धर्म के रुकने को विस्तारपूर्वक समझें.

मासिक धर्म रुकने के विषय में क्या कहते हैं जानकार?
जानकारों का कहना है कि कारण जाने बगैर महिलाओं को तनाव नहीं लेना चाहिए. मासिक धर्म या मासिक धर्म महिलाओं में सामान्य प्रक्रिया है, इसके बंद होने के अन्य कारणों के बारे में सामान्यत: महिलाओं को जानकारी नहीं होती है. कम समय में वजन बढ़ा या घटा हो. शरीर में मलेरिया, टाइफाईड या जोन्डेस हुआ हों, तब मासिक धर्म बंद हो सकते हैं अथवा देरी से हो सकते हैं. इसके अलावा कोई बड़ा ऑपरेशन हुआ हो तो मासिक धर्म बंद हो सकते हैं. पिछले दो महीने में अगर वजन कम हो गया हो या 5-6 किलो बढ़ गया हो. कम समय में वजन में ज्यादा उतार-चढ़ाव से भी मासिक धर्म बंद हो सकते हैं. मानसिक तनाव या किसी की मृत्यु हो गयी या तलाक या किसी से बिछड़ने का तनाव भी इस समस्या को पैदा करता है. शादी के बाद ससुराल की चिंता या एन्जाइटी होने पर भी मासिक धर्म बंद हो सकते हैं.

थायराइड भी है एक कारण-
थाइराइड की समस्या बढ़ जाये या ओबेसिटी जैसी समस्या होने पर भी महिलाओं में पीरियड् बंद हो सकता है. इसके अलावा पोलिस्सिटिक ओवेरियन सिंड्रोम के कारण भी मासिक धर्म देरी से आते हैं. यह समस्या महिलाओं में ज्यादा दिखाई देती है. यह समस्या होने पर चेहरे व छाती पर बाल उगने लगते हैं. इसमें वजन बढ़ता जाता है. अगर महिला शादीशुदा है और बच्‍चा चाहती है तो उसे प्रेग्नेंसी में समस्या हो सकती है. कोई भी क्रोनिक समस्या हो जैसे लंबे समय तक लीवर या किडनी की समस्या हो. अपच या लूजमोशन की समस्या हो, तब भी मासिक धर्म देरी से आ सकते हैं.

गर्भनिरोधक गोलियों का लगातार सेवन-
गर्भ निरोधक गोलियों के लगातार सेवन से या एक साल से ज्यादा तक ये गोलियां लेने से दो तीन महीने तक मासिक धर्म बंद या एकदम हल्के हो सकते हैं. यह प्रक्रिया धीरे-धीरे सामान्य हो जायेगी. गर्भधारण करने में भी कोई समस्या नहीं आयेगी. प्री-मेच्योर मैनोपोज महिलाओं में कभी-कभी 40 साल की उम्र में भी आ जाता है. ऐसी स्थिति में अंडाकोश में अंडा बनना बंद हो जाता है. तब इसको प्री-मेच्योर ओवेरियन फेलियोर कहते हैं. इसमें मासिक धर्म बंद होने के साथ-साथ मैनोपोज के लक्षण भी दिखाई देंगे, जैसे बहुत तेज गर्मी लगना. पसीने अआना, वैजाइना में सूखापन लगना. यह संकेत बहुत कॉमन नहीं हैं. सही स्थिति की जानकारी डॉक्टर ही बता सकता है. इसके लिए हारमोन टेस्ट भी कराया जा सकता है. किसी अनुभवी/ स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही वास्तविक समस्या समझी जा सकती है. महिलाएं सही कारण जानें बगैर स्ट्रेस न लें.

We have had an unprotected sex on 7 february, her date for period was 10 of feb and till now she hasn't got her periods, what must be the first step to get over it?

MBBS
Sexologist, Panchkula
We have had an unprotected sex on 7 february, her date for period was 10 of feb and till now she hasn't got her perio...
You had unprotected sex but now periods did not come. I advise you to do urine routine examination test on first morning sample of urine to confirm pregnancy.
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Hi, Me and my partner have regular sex every month. I got married 5 months before but I am not conceived why? if I have the problem but after sex 2 weeks later. I got symptoms like frequent urination, lower back pain, lower abdominal pain, breast tenderness, a darling of nipple etc.

MBBS
Sexologist, Panchkula
Hi, Me and my partner have regular sex every month. I got married 5 months before but I am not conceived why? if I ha...
You are not getting conceived. I advise you to do semen analysis test of your husband, after avoiding sex for 4 days and tell me report for better guidance and natural, safe and permanent treatment.

Can I get pregnant while on deviry 10 mg twice a day for 5 days from 21 days of my cycle?

MS - Obstetrics and Gynaecology, DCN -Diploma in Clinical Nutrition, MBBS
Gynaecologist, Noida
Can I get pregnant while on deviry 10 mg twice a day for 5 days from 21 days of my cycle?
Dear Ritu hi Normally Deviry is a progestin which is used for gynae problems not pregnacy.It is used to regulate you menstrual cycle. It will not help you in getting pregnant but in case you are already pregnant ,you will not have periods when you stop taking the medication

I am a known case of pcos on dronis 30 mg regularly. My 21 day pack had finished three days ago and I had unprotected intercourse last night with my husband. Can you tell me if there are chances of me getting pregnant? Should I take an emergency contraceptive pill?

MS - Obstetrics and Gynaecology, DCN -Diploma in Clinical Nutrition, MBBS
Gynaecologist, Noida
I am a known case of pcos on dronis 30 mg regularly. My 21 day pack had finished three days ago and I had unprotected...
Dear Sohani hello No, there is no need to take any emergency contraceptive. If you have taken dronis as advise and not missed you're drug in 21 day period you are already protected . Hopefully this answers your question. Have a pleasant day ..
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