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Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experience comfortable. Our staff is friendly, knowledgable and very helpful in addressing your health and fin......more
Our goal is to provide a compassionate professional environment to make your experience comfortable. Our staff is friendly, knowledgable and very helpful in addressing your health and financial concerns.
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Patankar Nursing Home is known for housing experienced Gynaecologists. Dr. Neela Patankar, a well-reputed Gynaecologist, practices in Pune. Visit this medical health centre for Gynaecologists recommended by 109 patients.

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Survey No 986/ A/1, Shukrawar Peth.Landmark:-Opposite Sarasbaug, Pune
Shukrawar peth Pune, Maharashtra
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यूरिन इन्फेक्शन ट्रीटमेंट इन हिंदी - Urine Infection Ayurvedic Treatment In Hindi!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
यूरिन इन्फेक्शन ट्रीटमेंट इन हिंदी - Urine Infection Ayurvedic Treatment In Hindi!

मूत्र संक्रमण महिलाओं और पुरुष दोनों में सामान्य रूप से होने वाली बीमारी है. हालांकि फिर भी महिलाओं में इसके होने की संभावना ज्यादा ही होती है. गुर्दा हमारे शरीर में सिर्फ मूत्र बनाने का ही काम नहीं करता वरन इसके अन्य कार्य भी हैं. जैसे- खून का शुद्धिकरण, शरीर में पानी का संतुलन, अम्ल और क्षार का संतुलन, खून के दबाव पर नियंत्रण, रक्त कणों के उत्पादन में सहयोग और हड्डियों को मजबूत करना इत्यादि. लेकिन हमारे यहाँ लोगों में इसके प्रति जागरूकता न होने के कारण लोगों में इस तरह की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं. आइए मूत्र संक्रमण के आयुर्वेदिक उपचारों पर एक नजर डालें ताकि इसे लेकर लोग कुछ जागरूक हो सकें.

क्या है मूत्र संक्रमण का कारण?

जैसा कि हर रोग के कुछ उचित कारण होते हैं. ठीक उसी प्रकार मूत्र विकारों के भी कई कारण हैं. इसका सबसे बड़ा कारण जीवाणु और कवक है. इनके कारण मूत्र पथ के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इस संक्रमण का असर देखने को मिलता है.

मूत्र विकार के लक्षण-
मूत्र संक्रमण के मुख्य लक्षणों में तीव्र गंध वाला पेशाब होना, पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द का अनुभव होना, कमज़ोरी महसूस होना, पेट में पीड़ा और शरीर में बुखार की हरारत आदि है. इसके अलावा हर समय मूत्र त्यागने की इच्छा बनी रहती है. मूत्र पथ में जलन बनी रहती है. मूत्राषय में सूजन आ जाती है. यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज़्यादा पाया जाता है. गर्भवती महिलाएं और शादी-शुदा औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग आमतौर पर अधिक पाया जाता है.

यूरिन इन्फेक्शन के आयुर्वेदिक उपचार-
पहला प्रयोग-

मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए आपको पहले प्रयोग के अंतर्गत केले की जड़ के 20 से 50 मि.ली. रस को 30 से 50 मि.ली. गौझरण नामक औषधि के साथ 100 मि.ली. पानी की मात्रा में मिलाकर सेवन करने से तथा जड़ को अच्छे से पीसकर उसका पेडू पर लेप लगाने से पेशाब खुलकर आता है.

दूसरा प्रयोग-
आधा से 2 ग्राम शुद्ध को शिलाजीत, कपूर और 1 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर लेने से या पाव तोला (3 ग्राम) कलमी शोरा उतनी ही मिश्री के साथ लेने से भी लाभ होता है.

तीसरा प्रयोग-
मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए एक भाग चावल को चौदह भाग पानी में पकाकर उन चावलों के मांड का सेवन करें क्योंकि इससे मूत्ररोग में लाभ होता है. इसके अलावा कमर तक गर्म पानी में बैठने से भी मूत्र की रूकावट दूर होती है.

चौथा प्रयोग-
आप चाहें तो उबाले हुए दूध में मिश्री तथा थोड़ा घी डालकर पीने से जलन के साथ आती पेशाब की रूकावट दूर होती है. इसमें ध्यान रखने वाली बात ये है कि इसे बुखार में इस्तेमाल न करें.

पाँचवाँ प्रयोग-
इस प्रयोग के लिए आपको सबसे पहले तो 50-60 ग्राम करेले के पत्तों का रस लेना होगा उसके बाद उसमें चुटकी भर हींग मिलायेँ. इस मिश्रण को पीड़ित को देने से पेशाब आसानी से होता है और पेशाब की रूकावट की तकलीफ दूर होती है इसके अलावा आप चाहें तो उपलब्ध हने पर 100 ग्राम बकरी के कच्चे दूध में 1 लीटर पानी और शक्कर का मिश्रण बनाकर इसे पियें.

अन्य उपचार-

1. नींबू-

नींबू स्वाद में थोड़ा खट्टा तथा थोड़ा क्षारीय होता है. नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट कर देता है तथा मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ पहुँचाता है.

2. पालक-
पालक का रस 125 मिली, इसमें नारियल का पानी मिलाकर रोगी को पिलाने से पेशाब की जलन में तुरंत फ़ायदा प्राप्त होगा.

3. गाजर-
मूत्र की जलन में राहत प्राप्त करने के लिए दिन में दो बार आधा गिलास गाजर के रस में आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से फ़ायदा प्राप्त होता है.

4. खीरा ककड़ी-
मूत्र संक्रमण को दूर करने के लिए पीड़ित व्यक्ति को 200 मिली ककड़ी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस के साथ एक चम्मच शहद मिलाकर तीन घंटे के अंतराल पर दिया जाए तो रोगी को बहुत आराम मिलता है.

5. मूली के पत्तों का रस-
मूत्र संक्रमण जैसे विकारों में मरीज को मूली के पत्तों का 100 मिली रस आपको नियमित रूप से दिन में 3 बार सेवन कराना होगा. आपको बता दें कि ये एक बेहद प्रभावी और अचूक औषधि की तरह काम करता है. इसके अलावा आप तरल पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं.

6. मट्ठा-
आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाकर इसमें नींबू का रस 5 मिलि मिलाकर पी जाएं. इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट हो जाते है.

7. भिंडी-
ताज़ी भिंडी को बारीक़ काटकर दो गुने जल में उबाल लें फिर इसे छानकर यह काढ़ा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिलती है.

8. सौंफ-
सौंफ के पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद दिन में 3 बार इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से मूत्र संक्रमण में राहत मिलती है.

मूंगफली खाने के फायदे - Mungfali Khane Ke Fayde!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मूंगफली खाने के फायदे - Mungfali Khane Ke Fayde!

मूंगफली भारत में काफी चाव से कच्चा या भूनकर दोनों रूपों में खाई जाती है. इसके कई नाम हैं - हिंदी में 'मुंगफली', तेलुगू में 'पलेलेलू', तमिल में 'कडालाई', मलयालम में 'निलाक्कडाला', कन्नड़ में 'कदले कायी', गुजराती में सिंगानाना और मराठी में 'शेंगाडेन' इत्यादि. इसको मूल रूप से दक्षिण अमेरिका में उगाते हैं. इसका सेवन हमें कई तरह के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है. मूंगफली डायबिटीज, गैल्स्टोन का विकास, याददाश्त बढ़ाना, डिप्रेशन, वजन कम करना, त्वचा को स्वस्थ बनाना, पेट के कैंसर आदि समस्याओं को रोकने में मदद करती है. यानि कुल मिलाकर आप कह सकते हैं की मूंगफली सेहत का खजाना है. मूंगफली में प्रोटीन की मात्रा 25% से ज्यादा होती है. 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन पाया जाता है. साथ ही यह पाचन शक्ति बढ़ाने में भी उपयोगी है. 250 ग्राम भूनी मूंगफली की जितनी मात्रा में मिनरल और विटामिन पाए जाते हैं, वो 250 ग्राम मीट से भी नहीं मिलते हैं. इसके अलावा, मूंगफली का तेल खाने में उपयोग करने से आपके शरीर के कीटाणु कम होते हैं और आपके शरीर को अच्छा पोषण मिलता है. मूँगफली में पोषक तत्व, मिनरल, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं जो कि आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हम मूँगफली खाने के फ़ायदों को जानें ताकि इस विषय में लोगों की जानकारी बढ़ सके.

त्वचा के लिए बेहतर-

मूंगफली में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सोरायसिस और एक्जिमा जैसे त्वचा रोगों का निदान करते हैं. मूंगफली में मौजूद फैटी एसिड भी सूजन और स्किन की रेडनेस को कम करता है. मूंगफली में मौजूद फाइबर टॉक्सिक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए जरुरी है. शरीर के अंदर टॉक्सिक पदार्थ त्वचा पर मौजूद अतिरिक्त तेल का कारण होते हैं. मूंगफली का नित्य रूप से भोजन के रूप में सेवन एक स्वस्थ त्वचा देने में मदद करता है. मैग्नीशियम से भरपूर मूंगफली हमारे तंत्रिका तंत्र, मसल्स और ब्लड वेसल्स को शिथिल करके त्वचा के लिए बेहतर ब्लड फ्लो प्रदान करती है. जिससे आपको एक युवा और स्वस्थ त्वचा मिलती है. मूंगफली में पाए जाने वाला बीटा कैरोटीन एक एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

बढ़ाए प्रजनन शक्ति-
मूंगफली महिलाओं में प्रजनन शक्ति को बेहतर बनाती है. मूंगफली में फोलिक एसिड होता है. फोलिक एसिड, गर्भावस्था के दौरान, भ्रूण में 70% तक गंभीर न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के जोखिम को कम कर देती है.

बालों को स्वस्थ रखने में-
मूँगफली में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो बालों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फायदेमंद हैं. इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड का अधिक लेवल शामिल है जो सिर की त्वचा को मजबूत और बालों के विकास को वृद्धि करने के लिए मदद करता है. मूंगफली एल आर्जिनाइन का बहुत अच्छा स्रोत है, यह एक अमीनो एसिड है जो पुरुषों में गंजेपन के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है और स्वस्थ बालों के विकास को प्रोत्साहित करता है.

अल्जाइमर रोग के लिए-
किसी भी प्रकार से मूंगफली का सेवन करना अल्जाइमर जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकता है. इनमें रेसवेरट्रोल नामक एक यौगिक होता है जो मृत्यु कोशिकाओं को कम करने, डीएनए की रक्षा करने और अल्जाइमर रोगियों में तंत्रिका संबंधी क्षति को रोकने के लिए फायदेमंद है. उबाली हुई या भुनी हुई मूंगफली ज्यादा लाभदायक होती है क्यूंकि ये रेसवेरट्रोल के स्तर को बढ़ा देती हैं. अध्ययनों से पता चला है कि नियासिन में समृद्ध खाद्य पदार्थ जैसे की मूंगफली, अल्जाइमर रोग के खतरे को 70% तक कम कर सकते हैं.

ब्लड शुगर को संतुलित करने में-
मूंगफली में मौजूद मैंगनीज ब्लड में कैल्शियम के अवशोषण, फैट और कार्बोहाइड्रेट चयापचय और शर्करा के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है. रोज खाना खाने के बाद 50 ग्राम मूंगफली खाने से आपकी बॉडी का ब्लड रेशो इनक्रीज हो सकता है. मैंगनीज, फैट और कार्बोहाइड्रेट के चयापचय को बढ़ाता है, जिसकी मदद से यह मांसपेशियों और लिवर की कोशिकाओं में ग्लूकोज प्रवेश करता है, और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. एक अध्ययन के अनुसार, मूंगफली का सेवन मधुमेह के जोखिम को 21% तक कम कर सकता है.

कैंसर के जोखिम को करे कम-
मूंगफली में पॉलिफीनॉलिक नामक एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा मौजूद होती है. पी-कौमरिक एसिड में पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने की क्षमता होती है. मूँगफली विशेष रूप से महिलाओं में पेट के कैंसर को कम कर सकती है. 2 चम्मच मूंगफली के मक्खन का कम से कम सप्ताह में दो बार सेवन करने से महिलाओं और पुरुषों में पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं. यह महिलाओं के लिए मूंगफली के सबसे अच्छे लाभों में से एक है.

सर्दी जुकाम में उपयोगी-
मूंगफली, आमतौर पर सबको होने वाली सर्दी जुकाम के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है. इसलिए यदि आप सर्दियों के मौसम में मूंगफली का सेवन करेंगे तो आपके शरीर में गर्मी रहेगी. यह खाँसी में उपयोगी होने के साथ ही आपके फेफड़े को भी मजबूत करने का काम करती है.

खराब कोलेस्ट्रॉल के लिए-
मूंगफली में पाए जाने वाले मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करते हैं. इसलिए खराब कोलेस्ट्राल को खत्म करने के लिहाज से भी मूँगफली का सेवन किया जा सकता है.

वजन कम करने के लिए-
मूँगफली वजन कम करने के लिए भी बहुत उपयोगी है. मूंगफली में प्रोटीन और फाइबर होते हैं. ये दोनों पोषक तत्व भूख को कम करने में प्रभावित हैं. इसलिए भोजन के बीच में कुछ मूंगफली खाने से आपकी भूक कम हो सकती है जिससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है.

डिप्रेशन को करे दूर-
शरीर में सेरोटोनिन का कम स्तर डिप्रेशन जैसी समस्या उत्पन्न कर सकता है. मूंगफली में मौजूद ट्रिप्टोफेन केमिकल को निकालने में मदद करता है. इस प्रकार यह आपको डिप्रेशन से लड़ने में मदद करता है. मूंगफली के स्वास्थ्य लाभ आप कई प्रकार से उठा सकते हैं. खतरनाक बीमारियों को दूर रखने और स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक सप्ताह दो बड़े चम्मच मूंगफली के मक्खन का सेवन करें.

Mental Health And Illness

MBBS, DNB - Psychiatry
Psychiatrist, Delhi
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The first question when you greet somebody is 'how are you' and this often refers to our state of well-being. While most answers would be great, awesome or good, we usually think of how we are doing physically. While some of us may talk about physical conditions (say things like feverish, have a cold, etc.), not many would think of talking about mental health conditions. However, mental health is very important for overall well-being.

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Know The Myths About Laparoscopic Surgery

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, MS Surgical
General Surgeon, Delhi
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There are many kinds of conditions and symptoms that require different kinds of surgery for treatment as well as diagnostic management. One such procedure is called laparoscopy or laparoscopic surgery. This is a surgical diagnostic management procedure that is known to be a low-risk process with minimal invasion and suitable for various types of ailments.

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Hi, I am 40 years female. I have a problem mild hepatomegaly with fatty changes. Haemorrhagic follicle in left ovary. What is our suggestion for this I am some pain in left side of abdomen.

M.D. HERBAL
Alternative Medicine Specialist, Dehradun
Hi, I am 40 years female. I have a problem mild hepatomegaly with fatty changes. Haemorrhagic follicle in left ovary....
Over weight case, don't advise medicine, take sky fruit, cow urine caps. Org wheat grass powder, nigella cap, drink 30 ml virgin coconut oil, may contact for any assistance.

Almond Oil: Health Benefits You Must Be Aware Of!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Jaipur
Almond Oil: Health Benefits You Must Be Aware Of!

Do you have vague memories of your childhood where your mother used to run behind you with a glass of milk and a few almonds soaked in it? You might have cribbed about them, but all this while you might not have been aware that you were running away from one of the most powerful house of essential minerals. Such is the health benefits of almonds that it has its own fan following across the globe. It is a boon and a blessing for your well-being. Let us have an overview of it.

Health benefits Of almond oil

The health benefits are not just limited to the nuts. Almond oil too can supply a massive amount of benefits when included in our diet regularly. Though a bit expensive, a regular intake can keep many of the complications at bay. Here’s why:

  1. Controls heart ailments: Almond oil is enriched with monounsaturated fatty acids. They boost the health of your heart and can curb cardiovascular diseases. A regular intake can reduce the chance of a stroke by a large margin.
  2. Regulates blood pressure and controls cholesterol level: Almond oil regulates blood pressure and can help in maintaining the cholesterol levels of your body. In many countries, almond oil is slowly changing the culinary landscape and the way we use the food ingredients.
  3. Strengthens nervous system: Almond oil is a great source of Omega-3 fatty acids and also contains a robust measure of potassium. They nourish your nervous system and directly boost your memory. You can mix a few drops of almond oil to a glass of milk before you hit the bed for the best results.
  4. Helps in bone development: Almonds are a great source of vitamin D, calcium and potassium. Needless to say, this can be very beneficial for strengthening your bones. Simply massage few drops of almond oil to your bones and joints and in many cases, you can get rid of arthritis.
  5. Relieves stress and painAlmond oil also has therapeutic properties, and can help in easing the pain and stress from strained muscles. You can heat a few tablespoons of almond oil and can directly massage into the affected area once it becomes warm. Doing this regularly can increase the strength of your muscles and can be a great muscle relaxant too.
  6. Can promote the health of nails: Brittle nails are one of the common problems that everyone faces. Almond oil can take care of this trouble easily. For healthy and strong nails, massage them with a few drops of almond oil daily. They have a strong presence of potassium and zinc and they, in turn, hydrate your nails and keep them strong and healthy.
  7. It controls heart diseases. 
  8. It reduces the chances of stroke. 
  9. It regulates the blood pressure. 
  10. It gives strength to the nervous system. 
  11. It will help in bone development.
  12. It promotes the growth of nails.
  13. It promotes the health of nails.
  14. It increases the memory power.
  15. It gives strengths to brain tissue.

Apart from the abovementioned benefits, Almonds are useful in a number of ways, they improve your memory power, improves hair growth, is good for your brain tissues. Almonds are a powerhouse in their own right, therefore, you must eat them. 

Endometriosis - 5 Things You Should Know About It!

MBBS, MD - Obstetrtics & Gynaecology, Diploma In Reproductive Medicine
Gynaecologist, Nagpur
Endometriosis - 5 Things You Should Know About It!

Endometriosis is a common gynecological disorder where the tissue lining of the uterus grows outside the uterine cavity. Endometriosis is caused most commonly by menstrual blood flowing back in the Fallopian tubes, instead of leaving the body. This endometrial tissue may then leak into the abdomen through a surgical scar or cut in the uterine lining, leading to endometriosis.

Here are five things you should know about this condition:

It is hard to diagnose
The first roadblock to diagnosing endometriosis is that though it is a very common condition, there is a lack of knowledge about it. The classic symptoms include heavy periods, painful bowel movements and urination, depressionfatigue and pain all over the body. The only way to correctly diagnose endometriosis is through a laparoscopy or keyhole surgery.

Endometriosis is not equal to infertility
One of the myths surrounding endometriosis is that it causes infertility, however, this is not true. When treated properly, endometriosis does not affect your fertility, and it is still safe for you to have children. At the same time,you should also know that being pregnant does not cure the condition.

It can reduce your sex drive
One of the symptoms of endometriosis is chronic pain all over the body. This, coupled with fatigue and depression can reduce your sex drive drastically. Additionally, the act of intercourse itself also becomes painful for women suffering from endometriosis. This pain can be managed witEndometriosis is a common gynecological disorder where the tissue lining of the uterus grows outside the uterine cavity. Endometriosis is caused most commonly by menstrual blood flowing back in the Fallopian tubes, instead of leavh the use of pain relievers, or by experimenting with positions, which is most comfortable for you.

Some women have a higher risk of endometriosis

The exact cause that triggers the endometriosis is still unknown. However, certain factors are said to raise the risk of endometriosis, such as:

1, Genetics: Endometriosis may be passed genetically from generation to generation.

2. Pelvic infections: Scarring of the uterine walls via infections or surgeries can give the menstrual blood that falls back to the Fallopian tubes a way out of the uterine cavity, and hence, lead to endometriosis.

3. Short Menstrual cycles: Women with menstrual cycles that are shorter than 27 days, or those who have periods that last longer than 7 days are more susceptible to endometriosis than others. However, myths that suggest delaying pregnancy as one of the causes of endometriosis are false.

There is no known cure
The treatment for endometriosis addresses its various symptoms as there is no known cure for the disease itself. Even a hysterectomy will not cure this disease unless it includes the removal of your ovaries as well. Over the counter pain medication may help deal with the muscle aches, while hormonal treatments that slow down the production of estrogen can help with the painful menses. Light exercises such as walking and swimming can also help deal with the discomfort of endometriosis.

Menopause And Homeopathy

BHMS, MD - Homeopathy
Homeopath, Navi Mumbai
Menopause And Homeopathy

The disruption of the normal female cycles of menstruation and ovulation after the age of 45 and the loss of her ability to conceive naturally is known as menopause. The associated symptoms of menopause are heat flushes, insomnia, weight gain, depression, nausea and fatigue. While hormone replacement therapy is the most common procedure to provide relief from menopausal symptoms, natural homeopathic remedies can also be used for the same. These remedies are completely safe as opposed to hormone replacement therapy which has a number of side effects.

The following homeopathic medicines and remedies can be used to treat menopause:

1. A balanced diet which provides you with optimal nutrition can be helpful in treating menopausal symptoms. When you get enough vitamins and minerals, the physical discomfort caused by the symptoms can be reduced greatly.
2. Phosphorus can help with migraines, extreme sweating, numb hands, fast pulse, memory problems and dry and itchy skin. Foods high in phosphorus content are meat, fish, cheese, nuts and seeds of pumpkins, sunflowers etc.
3. Excessive deposition of fat can interfere with the hormonal cycles and cause imbalances in the level of estrogen and progesterone. So, regular yoga and exercise can be helpful.
4. Amylenum nitrosum can provide relief from profuse sweating, shortness of breath and palpitations.
5. Phytoestrogen or dietary estrogen is a compound found in foods such as soybeans, oats, barley, carrots, fenugreek, rice etc. Phytoestrogen can provide natural relief from menopausal symptoms.
6. Aurum metallicum is used to get the tissues and organs to function normally again and control feelings of anxiety and claustrophobia.
7. Aconitum napellus (wolf's bane) is a flowering plant and its extracts can reduce panic attacks, heat flushes, over excitability and depressive symptoms.
8. Argentum nitricum is a nitrate compound of silver which is used to control excessive bleeding in the pre-menstrual stages.
9. Belladonna (deadly nightshade) is beneficial for a large number of symptoms such as headaches, fatigue, insomnia, frequent urination, osteoporosis, abnormal weight gain and other nervous disorders.
10. Bryonia alba, a flowering plant, is used as a remedy for vaginal infections, rashes and vaginal dryness that are common during menopause.
11. Natrum muriaticum, in small amounts, helps to reduce stress. Stress can cause problems in thyroid function, cognitive functioning, digestive system functioning and it can elevate blood pressure levels rapidly.
12. Nux vomica (strychnine) is a common homeopathic medicine for nausea, vomiting and indigestion. These problems are seen frequently in menopausal women, especially after meals at night.


 

 

Abnormal Vaginal Bleeding - Can It Be Cancer?

M.D.
Gynaecologist, Mathura
Abnormal Vaginal Bleeding - Can It Be Cancer?

Vaginal bleeding is something that most women experience between their periods when they are not due for a menstrual cycle. It is considered as an abnormal occurrence when you bleed before you are expecting your menstrual period, or after you are done with your monthly cycle. It is usually characterised by bouts of spotting where a thick brown reddish discharge may be experienced. Also, this kind of bleeding is considered abnormal if it occurs during pregnancy or menopause.

Here are a few causes of abnormal vaginal bleeding:

-  Hormones: An imbalance in the hormones like the estrogen and progesterone can lead to abnormal vaginal bleeding. These are the hormones that help in regulation of the monthly menstrual cycles. An imbalance can occur due to side effects caused by birth control pills that may not suit the individual, a contraceptive patch, or even contraceptive implants and injections. Further, an intrauterine device may also be the cause for this kind of bleeding. The hormonal balance can also get affected due to internal ailments like a dysfunctional thyroid gland and ovaries.

-  Pregnancy and Delivery: Some amount of spotting is considered normal in the first trimester of one's pregnancy. Yet, severe bleeding and persistent spotting must be reported to the gynaecologist immediately. Women also bleed for a while after the delivery of the baby, in the post-partum period. This may also happen when an abortion takes place as the uterus may not have come back to its original size and due to remaining foetal tissues within. Complications during the pregnancy like an ectopic pregnancy or a miscarriage can also lead to such kind of bleeding. An ectopic pregnancy is one where the egg gets implanted in the fallopian tube instead of entering and implanting itself in the uterus.

-  Fibroids: Uterine fibroids are usually considered as non-malignant and non-cancerous growths within the uterus. These are common in many women who have gone through child birth. These fibroids can also cause some amount of bleeding and spotting.

-  Infections: When there is an infection in the reproductive organs like the ovaries and uterus of the patient, there may be some amount of bleeding. An infection in this area can also cause inflammation, which is one of the primary causes of abnormal bleeding. This can also occur due to a sexually transmitted disease or STD, as well as painful intercourse and sexual abuse which can lead to scarring as well.

-  Cancer: One of the least common causes includes cervical, ovarian and other forms of cancer. 

Stress and diabetes can also cause abnormal vaginal bleeding in rare cases. It is best to see a doctor as soon as such bleeding takes place.
 

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Polycystic Ovarian Disease - All You Should Know!

Gynaecologist, Delhi
Polycystic Ovarian Disease - All You Should Know!

Polycystic Ovarian Disease results from the disorder more commonly known as PCOS or Polycystic Ovary Syndrome. A syndrome is starkly different from a disease, for the former entails a set of symptoms usually occurring in concurrence, while the latter means a particular biological condition with an identifiable reason behind it. 

A syndrome solicits your concern and forethought in order to eliminate or at least control the chances of an underlying disease. Trigger to a syndrome is undetectable and hence fighting it efficiently is fairly problematic. It is rare to find adolescent girls without hormonal problems.
 
Hormonal imbalances are just too common to be a novel topic any further. Polycystic Ovary Syndrome is faced due to imbalances in hormone secretions. It refers to the development of multiple cysts in your ovary. This condition usually affects women falling within the age group of 15 to 50. Eight among ten women, at a given point of time, are reported with PCOS. Symptoms of PCOS, when neglected, can lead to Polycystic Ovarian Disease. If you have been facing similar health issues, it is advisable to undergo a check- up and get diagnosed at the earliest possible. 

Symptoms of Polycystic Ovarian Disease

  1. A receding hairline or increased hair fall can lead to thinning of scalp hair. Such a sign should not be taken lightly as it could be indicative of Polycystic Ovarian Disease.
  2. Extremely painful menstruation, irregular periods or prolonged periods with heavy bleeding might be reason enough for worrying.  
  3. Development of acne could be another sign. Acne is common to girls attaining puberty, but an unprecedented growth should be a matter of concern. 
  4. Patchy skin, pigmentation and discoloration of the skin are the other symptoms.
  5. PCOS may also result in continual depression and anxiety.
  6. Obesity is the most commonly noticed symptom. People suffering from Polycystic Ovarian Disease have lower metabolism and thus, reducing weight is an ordeal. 
  7. Many women tend to grow thick facial hair or chest hair. Such a condition discourages the person to go out in public. It leads to social ostracizing which further bears severe effects on one's mental health.
  8. PCOS mostly affects women belonging to the childbearing age. As a result of this syndrome, females stop ovulating. Conception becomes extremely difficult as the syndrome may lead to infertility.

Polycystic Ovarian Disease can result in Type 2 diabetes or even cardiovascular problems. If not diagnosed and treated at an early stage, it might lead to ovarian cancer. There is hardly any preventive measure to counter the chances of such a syndrome, but certain alterations in your diet under the guidance of a dietician and regular exercising can improve your health.

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