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Sudeekasha Health Care

Multi-speciality Clinic (General Surgeon & Orthopedist)

# 199, KHB 1st Stage, Kuvempunagar, Landmark : Kuvempunagar Complex, Mysore Mysore
2 Doctors · ₹150 - 200
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Sudeekasha Health Care Multi-speciality Clinic (General Surgeon & Orthopedist) # 199, KHB 1st Stage, Kuvempunagar, Landmark : Kuvempunagar Complex, Mysore Mysore
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Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well....more
Our entire team is dedicated to providing you with the personalized, gentle care that you deserve. All our staff is dedicated to your comfort and prompt attention as well.
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Sudeekasha Health Care is known for housing experienced General Surgeons. Dr. Ramalingeswara Reddy V, a well-reputed General Surgeon, practices in Mysore. Visit this medical health centre for General Surgeons recommended by 48 patients.

Timings

MON-SAT
06:00 PM - 09:00 PM

Location

# 199, KHB 1st Stage, Kuvempunagar, Landmark : Kuvempunagar Complex, Mysore
Kuvempu Nagar Mysore, Karnataka
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Doctors in Sudeekasha Health Care

Dr. Ramalingeswara Reddy V

MBBS, DNB ( General Surgery )
General Surgeon
14 Years experience
200 at clinic
Available today
06:00 PM - 09:00 PM

Dr. Sujana Theja . J. S

MBBS, MS - Orthopaedics
Orthopedist
13 Years experience
150 at clinic
Available today
07:00 PM - 09:00 PM
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Skin Disorders: Blemishes And Hyperpigmentation

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS), MBA
Ayurveda, Faridabad
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Facial blemishes can be painful on becoming inflamed. In case these are left untreated, they can get worse and cause discoloration of the skin. Hyperpigmentation can be caused by inflammation , sun damage or other skin injuries. There are a variety depigmenting treatments used for hyperpigmentation conditions, and responses to most are variable.

Safed Daag Treatment In Hindi - सफेद दाग में परहेज

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Safed Daag Treatment In Hindi - सफेद दाग में परहेज

सफ़ेद दाग त्वचा की समस्या है जिसमें आपके त्वचा पर किसी भी जगह सफेद धब्बे उभरने लगते हैं. इसे ल्यूकोर्डमा या विटिलाइगो के नाम से भी जाना जाता है. इसमें शरीर के विभिन्न भागों की त्वचा पर सफेद दाग बनने लग जाते हैं. यह इसलिए होता है क्योंकि त्वचा में वर्णक (रंग) बनाने वाली कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं, इन कोशिकाओं को मेलेनोसाइट्स कहा जाता है. सफेद दाग रोग श्लेष्मा झिल्ली (मुंह और नाक के अंदर के ऊतक) और आंखों को भी प्रभावित करते हैं. सफेद दाग के संकेत और लक्षण में त्वचा का रंग खराब हो जाना, या सफेद हो जाना, शरीर के किसी भी भाग की त्वचा पर दाग पड़ जाना. ये सफेद दाग शरीर में सिर्फ एक भाग पर भी हो सकते हैं या कई भागों में अलग-अलग फैल सकते हैं. इसके ठोस कारण के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया, हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्व: प्रतिरक्षा प्रणाली की एक स्थिति होती है. उनके अनुसार सफेद दाग तब होते हैं, जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से त्वचा की कुछ कोशिकाओं को नष्ट कर देती है.
क्या है सफेद दाग का उपचार
सफेद दाग रोग में अनुवांशिकी घटक होते हैं, जो एक परीवार में एक व्यक्ति से दूसरों में भी फैल सकते हैं. सफेद दाग कई बार अन्य चिकित्सा स्थितियों से भी जुड़े होते हैं, जिसमें थायरॉयड रोग भी शामिल हैं. इस बात को निर्धारित नहीं किया जा सकता कि ये सफेद दाग एक ही जगह पर रहेंगे या अन्य भागों में भी फैल जाएंगे. सफेद दाग कोई दर्दनाक बीमारी या रोग नहीं है, और ना ही इसमें स्वास्थ्य से जुड़े कोई अन्य दुष्प्रभाव हैं. हालांकि, इसमें भावनात्मक और मनोवैज्ञानिकी परिणाम हो सकते हैं. कई चिकित्सा उपचार इसकी कठोरता को कम तो कर सकते हैं मगर इसका इलाज करना काफी कठिन है. सफेद दागों पर रोकथाम पाने के लिए कोई तरीका नहीं मिल पाया है. ऐसा कोई घरेलू नुस्खा भी नहीं है जिससे इसका उपचार या रोकथाम की जा सके, लेकिन प्रभावित त्वचा पर सन स्क्रीन का प्रयोग या डाई आदि का प्रयोग करके दिखावट में सुधार किया जा सकता है. 
भारत में सफेद दाग रोग की स्थिति
डर्मेटोलॉजिकल के प्रसार के मामले 9.25 प्रतिशत और विटिलाइगो के प्रसार के मामले 9.98 प्रतिशत थे. इनमें से स्थिर प्रकार के विटिलाइगो के मामले 65.21 प्रतिशत आंके गए और जिन लोगों के निचले होठ के नीचे दाग (म्यूकोसल विटिलाइगो) थे उनकी संख्या 75 प्रतिशत थी. शरीर के निचले भागों में सफेद दाग का होना विटिलाइगो की शुरूआत का सबसे सामान्य संकेत होता है. विटिलाइगो से ग्रसित लोगों में ज्याादतर लोग 40 साल की उम्र से पहले इस बीमारी से ग्रसित हो चुके जाते, और इनकी आधी संख्या के करीब लोग 20 साल की उम्र से पहले विटिलाइगो का शिकार बन जाते हैं.
सफेद दाग में परहेज़
सफ़ेद दाग की समस्या उत्पन होने पर या जब आपको पता चल जाता है कि आपको ये समस्या है तब आप कुछ सावधानियां बरतकर इसके प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं. इसमें आपको कुछ फलों का परहेज करना लाभकारी साबित होता है. इन फलों में संतरा, करौंदा, सीताफल, अमरूद, सूखा आलूबुखारा, काजू, तरबूज, खरबूज आदि. इन फलों से परहेज करके आप सफेद दाग को फैलने से रोकने में कुछ हद तक कामयाब हो सकते हैं.
इन सब्जियों का हबी करें परहेज
सफेद दाग में फलों के साथ-साथ कुछ सब्जियां का भी आपको इस्तेमाल कम या नहीं करना चाहिए. इन सब्जियों में बैंगन, लाल सोराल, अजमोद, पपीता, नींबू, टमाटर आदि. ऐसा करने से आप इसके प्रभाव को फैलने से रोक सकेंगे.
इसके अलावा आप इमली, लहसुन और दूध उप्तपाद जैसे: दूध दही या छेना छाछ गैर-शाकाहारी खाद्य पदार्थ जैसे: मछली लाल मीट बीफ (गांय का मांस) अन्य खाद्य पदार्थ जैसे: जंक फूड चॉकलेट कॉफी सोढ़ा बाइ कार्ब कार्बोनेटिड पेय पदार्थ चिकनी, तीखी और मसालेदार चीजें जैसे, अचार आदि से भी परहेज करें ताकि सफेद दाग की समस्या से प्रभावी ढंग से निपट सकें.

Ghutno Ke Dard Ka Ilaj - घुटने का दर्द उपाय

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Ghutno Ke Dard Ka Ilaj - घुटने का दर्द उपाय

घुटनों में दर्द कमजोर हड्डी के कारण या उम्र बढ़ने की वजह से भी महसूस हो सकता है. अन्य सामान्य कारण जैसे फ्रैक्चर, लिगामेंट में चोट, मेनिसकस में चोट, गठिया की वजह से घुंटने की हड्डियों का अकड़ जाना और एक जगह से दूसरी जगह खिसक जाना, ल्यूपस और अन्य पुरानी बीमारियों के कारण घुटनों में दर्द हो सकता है. आइए घुटनों में होने वाले दर्द को दूर करने के उपाय जानें.
नींबू है उपयोगी
नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड यूरिक एसिड क्रिस्टल के लिए एक द्रावक की तरह काम करता है जो कि कुछ प्रकार के गठिया का कारण होता है. इसका इस्तेमाल करने के लिए एक या दो नींबू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. कॉटन के कपडे में इन टुकड़ों को बाँधकर तिल के तेल में डुबायें और इस कपडे को प्रभावित क्षेत्रों पर दस मिनट तक लगाकर रखें.
ठंडे बैग का इस्तेमाल
घुटने में दर्द होते समय ठंडे बैग का इस्तेमाल करें इससे आपकी सूजन और दर्द दूर होंगे. इससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाएंगी, प्रभावित क्षेत्रों पर रक्त का प्रवाह कम होगा और इससे सूजन को भी दूर करने में मदद मिलेगी. मुट्ठीभर बर्फ लें और उसे किसी तौलिये या कपडे में लपेटकर रख दें. 10 से 20 मिनट के लिए प्रभावित क्षेत्रों पर तौलिए या कपडे को लगाएं.
सरसों का तेल
आयुर्वेद के अनुसार, गर्म सरसों के तेल से मसाज करने से सूजन दूर होगी, रक्त रिसंचरण में सुधार होगा दर्द दूर होगा. दो चम्मच सरसों के तेल को गर्म कर लें. अब उसमें लहसुन की फांकों को डालें और तब तक गर्म करने जब तक लहसुन भूरा न हो जाये. अब तेल को छान लें और ठंडा होने के लिए रख दें. अब इस गुनगुने गर्म तेल से अपने घुटनों पर मसाज करें.
नीलगिरि का तेल
नीलगिरी के तेल में एनाल्जेसिक या दर्द निवारण गुण होते हैं जोघुटनों के दर्द से रहता दिलाने में मदद करते हैं. इस तेल का ठंडा एहसास गठिया के दर्द में आराम पहुंचाएगा. पांच से सात बूंद नीलगिरी तेल और पुदीने की तेल की बूँदें एक साथ मिला लें. फिर उसमें दो चम्मच जैतून का तेल मिलाएं. इस मिश्रण को सूरज से दूर रखे और किसी अँधेरे वाली जगह पर ढक कर रख दें.
सेब का सिरका
सेब साइडर सिरका जोड़ों में चिकनाई लाता है जिससे दर्द दूर होता है और गतिशीलता को बढ़ावा मिलता है. दो चम्मच सेब के सिरके को दो कप पानी में मिलाएं. इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने के बाद पी लें. जब तक दर्द चला नहीं जाता इस मिश्रण को रोज़ाना पियें. इसके अलावा दो कप सेब के सिरके को बाल्टी भर गर्म पानी के मिलाएं. अब इसमें अपने प्रभावित क्षेत्रों को आधे घंटे के लिए डालें रखें. अब इस मिश्रण को घुटनों पर मसाज की तरह इस्तेमाल करें.
हल्दी है लाभदायक
हल्दी में करक्यूमिन मौजूद होता है जिसमें सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. ये गुण दर्द को कम करने में मदद करते हैं. हल्दी हीउमाटोइड आर्थराइटिस को कम करता है जो कि घुटने के दर्द का मुख्य कारण है. हल्दी का इस्तेमाल करने के लिए एक कप पानी में एक या आधा चम्मच अदरक और हल्दी को मिलाकर इसे दस मिनट के लिए इसे ही उबालें. अब इस मिश्रण को छानकर इसमें हल्दी को मिलाकर इसे पूरे दिन में दो बार ज़रूर पियें. एक ग्लास दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं. अब इसे शहद के साथ मिक्स करें और पूरे दिन में एक बार ज़रूर पियें.
मेथी का बीज
मेथी के बीज में सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो घुटने के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं. इसके अलावा मेथी के बीज प्राकृतिक रूप से गर्म होने के कारण गठिया के मरीजों के लिए बेहद लाभदायक होते हैं. इसके लिए रातभर एक चम्मच मेथी के बीज को भिगोकर रख दें. सुबह पानी को निकाल लें और उन बीजों को चबाएं. इस प्रक्रिया को पूरे दिन में एक या दो हफ्ते तक करें.
लाल मिर्च का करें उपयोग
लाल मिर्च में कैप्साइसिन मौजूद होता है जो दर्द निवारक की तरह काम करता है. कैप्साइसिन के प्राकृतिक एनाल्जेसिक या दर्द से राहत देने के गुण गर्माहट पैदा करते हैं और घुटनों के दर्द को दूर करते हैं. आधे कप गर्म जैतून के तेल में दो चम्मच लाल मिर्च मिलाकर इस पेस्ट को प्रभावित क्षेत्रों पर एक हफ्ते तक रोज़ाना पूरे दिन में दो बार ज़रूर लगाएं. इसके अलावा आप एक चौथाई या एक चम्मच लाल मिर्च को एक कप सेब के सिरके में मिलाएं. अब एक कपडा लें और उसे इस मिश्रण में भिगोएं और प्रभावित क्षेत्रों पर बीस मिनट तक लगाकर रखें.
अदरक
अदरक में सूजनरोधी गुण मौजूद होते हैं. अदरक घुटनों की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है. इसके लिए ताज़ा अदरक को सबसे पहले काट लें और उसे फिर क्रश कर लें. अब इन्हें एक कप पानी में क्रश कर लें और दस मिनट के लिए उबलने को रख दें. अब इस मिश्रण को छान लें और इसमें बराबर मात्रा में शहद और नींबू का जूस मिलाएं.
सेंधा नमक
सेंधा नमक में मैग्नीशियम सल्फेट प्राकृतिक तरीकों से मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है जिससे ऊतकों से अधिक तरल पदार्थों को निकालने में मदद मिलती है. गर्म पानी के टब या बाल्टी में एक या आधा कप सेंधा नमक मिलाएं. अब अपने घुटनों को गुनगुने पानी में 15 मिनट के लिए डालें रखें. ह्रदय से सम्बंधित समस्यायों वाले और हाई बीपी और शुगर वाले व्यक्ति इसके इस्तेमाल में सावधाने बरतें.

Gastritis & Homeopathy

B.Sc, BHMS
Homeopath, Lucknow
Gastritis & Homeopathy

Gastritis & Homeopathy
Gastritis is not a solitary disease; it’s an umbrella term, encompassing different conditions, with inflammation of the stomach. Inflammation relates to the response of the body to any kind of irritation, or injury. For e.g., if you scratch your arm with your sharp object, the skin in that area turns red, swollen, warm and tender. This response is called inflammation. When the lining of the stomach is subject to any kind of irritation, or injury, it responds in like manner. Such a response could be acute, or short-term distress . However, in a large number of cases, it tends to run a chronic, or long-term, course with many ups and downs, represented by flagrant symptoms.
A host of factors trigger gastric trouble — right from medical conditions and certain medicines to lifestyle indiscretion. This may include infection, triggered by Helicobacter Pylori, a bacterial incursion, aside from certain parasites, certain drugs [pain-killers; aspirin], stress, excessive alcohol use, and certain foods and so on hemopathy, the safe and effective treatment for gastritis.

Homeopathic treatment is safe and effective for gastritis. It soothes your tummy distress, pain and other annoying symptoms, associated with the given problem, including IBS, peptic and duodenal ulcers. Managing, controlling and correcting the progress and response are important steps your professional homeopathic doctor will take to treat you at the clinic.
This applies to cases where the disorder has progressed to ulcers in the stomach, or duodenum. In such cases, your homeopathic doctor will employ appropriate homeopathic medicines for gastritis alongside lifestyle and dietetic changes — to heal as well as prevent their recurrence.


Most important: professional homeopathic treatment provides improved therapeutic outcomes, while dealing with stress, one of the major triggers for gastritis. 
•    Increase your fluid intake — drink plenty of water, fruit and vegetable juice, derived from carrot, spinach, beet and cucumber
•    Drink two cups of green tea [without milk and sugar], 20 minutes before meal-time to improve digestion
•    Avoid eating cabbage and broccoli; they could trigger gas problems
•    Avoid alcohol, colas, tea, coffee, hot and spicy food, and drugs such as aspirin; they may irritate your stomach lining and cause gastritis
•    Eat small and frequent meals
•    Quit smoking
•    Take effective steps to control your stresses by way of yoga, meditation and other relaxation techniques, such as imagery
•    Follow-up with your homeopathic doctor on a regular basis.

I am eighteen years old and I have been suffering from chronic fissures since two years. I consulted the doctor near our locality and he advised me to use laxyalo tablet. I have been consuming this tablet for one year and was improved a little. Can I use this tablet for few more months or else suggest me some other remedies please.

MS - General Surgery, Fellowship in Minimal Access Surgery(FMAS) & Reproductive Medicine, Diploma in Advanced Laparoscopic surgery, Training in Laparoscopy
General Surgeon, Srinagar
Hello. Chronic anal fissures of such a long duration require surgery. Still symptomatic improvement can be achieved by treatment. Do following for one month. Avoid red meat n spices. Syp duphalac 3tsf with water. Sitz baths with saline water thrice a day apply cremagel 2% cream locally tid. Get back to me after 2 weeks.
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From almost 45 days I am suffering from back neck pain. I did not have any injury or pain at any other joints.

BPTh/BPT
Physiotherapist, Bangalore
From almost 45 days I am suffering from back neck pain.
I did not have any injury or pain at any other joints.
It's known as postural neck ache ,start physiotherapy asap, maintain proper sitting and sleeping posture will help.
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I am suffering from herpes simplex type 1 (below eye on left cheek) it always occurs at same mentioned place and leaves scar behind. Moreover it happens very often .is it incurable disease? What should I do to avoid it? M very stressed pls help me!

MD-Ayurveda, Bachelor of Ayurveda, Medicine & Surgery (BAMS)
Sexologist, Haldwani
I am suffering from herpes simplex type 1 (below eye on left cheek) it always occurs at same mentioned place and leav...
Hello- HSV 1 is completely curable by ayurvedic treatment. The common cause of Herpes is through skin-to-skin contact, which transmits HSV-1. In case the first episode of herpes occurs during pregnancy, there are possibilities of passing on the virus to unborn baby. From an Ayurvedic perspective, when our immune systems are weak, that is when the body does not receive enough food, exercise or sleep, and are exposed to environmental toxins or chronic stress, the body experiences imbalance of doshas. Impurity of Pitta, along with blood, is considered the main causative factor for the condition. This impurity of blood, which can also be caused due to poor digestion, wrong eating habits, leads to appearance of leasions in the skin. Hence as for Ayurvedic treatment, the first step is to balance the doshas. This is achieved through dietary modifications, and adding herbs and dietary supplements to balance the doshas that lead to this disease. The herbal preparations detoxify blood and lymph, expel the toxins and vitiated doshas from lymph and blood, and hence the underlying tissues get rejuvenated.
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I have back pain in waist. I am preparing physical for police. When I running every morning pain in my leg muscles below knee. Therefore I stop my running exercise. I have also urinal problem its take more time for urinal and pressure is slow. Is this a problem of sperm. What can I do please help I test my urine but it is normal.

MS- Orthopedics, Fellowship in arthroplasty & reconstructive surgery, Fellowship in Arthroplasty and Reconstructive Orthopaedic Surgery, Fellowship in arthroscopy & sports medicine
Orthopedist, Bangalore
I have back pain in waist. I am preparing physical for police. When I running every morning pain in my leg muscles be...
Your back pain seems to be coming from spine and radiating to legs. For your age if pain is limiting to walk more than 100 mtrs then it should be investigated. It may require mri ls spine to rule out disc prolapses in lower lumbar spine. Sometimes the urinary symptoms can be due to disc prolapse. Mri can clear these doubts.
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Swelling in ankle after plaster cast removal. Is it OK or may have some problems.

MS- Orthopedics, Fellowship in arthroplasty & reconstructive surgery, Fellowship in Arthroplasty and Reconstructive Orthopaedic Surgery, Fellowship in arthroscopy & sports medicine
Orthopedist, Bangalore
Swelling in ankle after plaster cast removal. Is it OK or may have some problems.
Yes, if it was put for sprain or fracture or after surgery. It is normal to have some swelling. Strict limb elevation with pillow, chairs or stool and compression bandage around ankle and foot and keeping ankle in warm water will help reduce it. However if the injury was severely damaged bone etc then swelling may remain the same. If swelling is too severe so as to cause pain on moving your toes with redness or warmth then you should consult your doctor.
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I'm an unmarried male aged about 40- Experiencing pain around the waist at the left half of the back for few days. What could be the cause?

MS- Orthopedics, Fellowship in arthroplasty & reconstructive surgery, Fellowship in Arthroplasty and Reconstructive Orthopaedic Surgery, Fellowship in arthroscopy & sports medicine
Orthopedist, Bangalore
I'm an unmarried male aged about 40- Experiencing pain around the waist at the left half of the back for few days. Wh...
There are lot of causes of back pain may be orthopedic or non orthopedic related. One sided low back and waist pain can be due to muscle strain and also can be due to renal or uretric colic also commonly. If pain is sharp and dos not change with back position its mostly calculi [ stones] orelse it could be a very commom problem ls strain. Needs rest and later low back exercise along with some pain killers.
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