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Dr. Shailesh Nadkarni clinic

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Our medical care facility offers treatments from the best doctors in the field of Ayurveda.We like to think that we are an extraordinary practice that is all about you - your potential, your comfort, your health, and your individuality. You are important to us and we strive to help you in every and any way that we can.
More about Dr. Shailesh Nadkarni clinic
Dr. Shailesh Nadkarni clinic is known for housing experienced Ayurvedas. Dr. Shailesh Nadkarni, a well-reputed Ayurveda, practices in Mumbai. Visit this medical health centre for Ayurvedas recommended by 76 patients.

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MON, WED, FRI
07:30 PM - 09:00 PM

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4/1/107, Navjivan Society, Laminton Road, Mumbai Central, Mumbai
Mumbai Central Mumbai, Maharashtra - 400008
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High Blood Pressure Ke Prabhaw - हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
High Blood Pressure Ke Prabhaw - हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव!

वर्तमान समय में हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या बन कर उभरा है. इसके मरीज साल दर साल बढ़ रहे है. इस भागदौड़ से भरी जीवनशैली में, हम कई तरह के अनुचित आदतों को अपना लेते हैं जो हमारे शरीर पर प्रतिकूल या हानिकारक प्रभाव डालते है. इस भागदौड़ की ज़िंदगी में हम अनुचित खान-पान, एक्सरसाइज से दूर रहना, स्ट्रेस, पोषक तत्वों की कमी या फिर धूम्रपान और ड्रिंकिंग जैसे कई गलत आदतों में पड़ जाते हैं. यह सभी आदतें आपको हाई ब्लड प्रेशर की तरफ अग्रसर कर सकती है. भारत में होने वाली मौतों के लिए हाई ब्लड प्रेशर को चौथा कारण माना गया है. 

हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव बहुत गंभीर और जानलेवा हो सकता हैं. इस बिमारी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 90 % लोगों को हाई ब्लज प्रेशर के लक्षण का पता नहीं लगता है. इसी वजह से हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ के रूप  में भी जाना जाता है. जब धमनियों में ब्लड का प्रेशर बढ़ जाता है तो इस प्रेशर को हाई ब्लड प्रेशर कहते हैं. 

हमारे शरीर में ह्रदय धमनियों के माध्यम से ब्लड को पुरे शरीर में पंप करती है. जब हमारा दिल धड़कता है तो वास्तव में यह ब्लड को पूरी बॉडी में पंप कर रह होता है. हाई ब्लड प्रेशर का प्रभाव शरीर के कई अंगो पर पड़ता है. इसलिए हाई ब्लड प्रेशर से बचाव करना महत्वपूर्ण है. आइए हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव को जाने और इससे बचाव कैसे करें. 

हाई ब्लड प्रेशर के कारण 

हाई ब्लड प्रेशर का कोई निश्चित कारण नहीं है, लेकिन कुछ संभावित कारण है जिसके वजह से आप हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित हो सकते है. इसमें उम्र बढ़ना, अनुवांशिक, मोटापा, स्ट्रेस, धूम्रपान और ड्रिंकिंग, अनुचित जीवनशैली जैसे कारक शामिल है. 

हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव

हाई ब्लड प्रेशर के कारण शरीर के कई अंगो पर हनिकारक प्रभाव पड़ता है. जो निम्नलिखित है:

  1. आँखों पर प्रभाव- हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव से आपके देखने की क्षमता कम हो जाती है. इसके कारण आपकी दृष्टि धुंधली पड़ जाती है और रौशनी कम होने लगती है. इसलिए आपको नियमित रूप से आँखों को जांच करने की सलाह दी जाती है. 
  2. दिल का दौरा- जब धमनियों में ब्लड का प्रेशर अधिक हो जाता है तो परिणामस्वरूप ह्रदय को अधिक काम करना पड़ता है. इस अधिक प्रेशर के कारण दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. 
  3. किडनी फेल हो सकती है-  हमारे शरीर से टॉक्सिक पदार्थ को बाहर निकालने का काम किडनी का होता है. जब ब्लड प्रेशर हाई होता है तो किडनी पर दबाब भी बढ़ जाता जाता है और ब्लड वेसल्स संकीर्ण हो जाती है. इसके साथ ही किडनी में टॉक्सिक पदार्थो को फ़िल्टर करने वाली कोशिकाएं भी प्रभावित होती है. इन सभी कारणों से किडनी आपने काम को सुचारु रूप से नहीं करता है और ब्लड में टॉक्सिक जमा होना लगते हैं. इस कारण से किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है. 
  4. मस्तिष्क पर प्रभाव-  जब आपकी उम्र बढ़ने लगती है और आप हाई बीपी से ग्रसित होते है तो इसका आपके मस्तिष्क पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है. इसके कारण आपके याददाश्त कमज़ोर होने लग जाती है, जिसे डिमेंशिया भी कहा जाता है. इसके अलावा, मस्तिष्क में खून की आपूर्ति कम हो जाती है और मष्तिष्क की सोचने समझने की क्षमता भी प्रभावित होती है.  

हाई ब्लड प्रेशर से कैसे करें बचाव 

यदि आप हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित है या होने का खतरा है तो आप इस बिमारी से बचाव के लिए निम्नलिखित सुझाव का पालन कर सकते हैं:

स्वस्थ जीवनशैली: हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव से बचने के लिए सबसे पहले स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना चाहिए. स्वस्थ जीवनशैली में नियमित शारीरक गतिविधि करना और  ड्रिंकिंग, स्मोकिंग जैसी आदतों से दूर रहना शामिल हैं. अगर आपका वजन अधिक हो तो वजन कम करना चाहिए. 

उचित आहार- आपको स्वस्थ रखने के लिए उचित आहार का सेवन करना बहुत महत्वपूर्ण है. यह आपके हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी सहायक होता है. इसके लिए आपको चर्बी और हाई फैट वाले आहार से दूर रहना चाहिए. आपको अपने नमक का सेवन पर भी नियंत्रण करना चाहिए. आप अपने आहार में तरबूज, नारंगी, केला, सेब, आम , नाशपाती, पपीता  और अनानास को शामिल करना चाहिए. इसके अलावा सलाद के रूप में खीरा, गाजर, मूली, प्याज़ और टमाटर आदि को भी सेवन करना चाहिए. उचित आहार आपको हाई ब्लड  प्रेशर के प्रभाव से बचाव करता है. 
 
योग और एक्सरसाइज- योग और अभ्यास हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए बहुत सहायक होते है. यह ना आपको केवल स्वस्थ रखता है बल्कि वजन नियंत्रण और बेहतर रक्त परिसंचरण के लिए भी फायदेमंद होता है. आपको हर दिन नियमित रूप से आधे घंटे एक्सरसाइज करनी चाहिए. योग अभ्यास भी बहुत सहायक होते है. कई तरह के योगासन है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करतें है जिनमे धनुरासन, भुंजागसन, ताङासन, वज्रासन आदि. योग और एक्सरसाइज हाई ब्लड प्रेशर के प्रभाव को कंट्रोल करतें है.

High Blood Pressure Kya Hota Hai - हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
High Blood Pressure Kya Hota Hai - हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है?

एक समय था, जब हाई ब्लड प्रेशर को केवल शहरों तक ही सीमित माना जाता था. लेकिन बढ़ते आधुनिकरण और अनुचित जीवनशैली के कारण इस बीमारी ने गांव -देहात तक अपनी पकड़ बना ली है. हाई ब्लड प्रेशर एक बहुत ही जटिल समस्या है और इस बिमारी में आपको पता नहीं होता कि आप कब इससे ग्रसित हो सकते हैं. हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण बहुत ही अस्पष्ट होते है और इसी वजह से इसे साइलेंट किलर के रूप में भी जाना जाता है. एक अध्ययन के अनुसार, भारत की बात करें तो यहां 10 में से 3 व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है. भारत में हर वर्ष होने वाली मौत में हाई ब्लड प्रेशर को एक प्रमुख कारण माना गया है.

हाई ब्लड प्रेशर का इलाज संभव है. लेकिन हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है? ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती हैं. इसलिए, आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है और इसका पता कैसे लगाया जाता है. साथ ही हाई ब्लड प्रेशर के क्या उपचार होते हैं. 

हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है 

हाई ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंशन के नाम से भी जाना जाता है. जब ब्लड वेसल्स(नसों) में ब्लड का प्रेशर बढ़ जाता है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहते है. जब यह प्रेशर कम हो जाता है, तो इसे लो ब्लड प्रेशर के रूप में जाना जाता है. हमारे शरीर में हार्ट ब्लड वेसल्स के माध्यम से ब्लड को पूरे शरीर में पंप करता है. हमारे बॉडी में ब्लड को पंप करने के लिए एक निश्चित प्रेशर की जरुरत होती है. जब किसी कारण यह प्रेशर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है तो ब्लड वेसल्स पर अधिक दबाब पड़ता है और इस स्थिति को हाइपर टेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के रूप में जाना जाता है. ब्लड वेसल्स पर बढ़ते प्रेशर के कारण ह्रदय को ज्यादा काम करना पड़ता है. यह स्थिति बाद में हार्ट फेल या दिल के दौरे का कारण भी बन सकती है. इसलिए, हाइपरटेंशन को जानलेवा बिमारी माना गया है. 

हाई ब्लड प्रेशर का प्रकार 

हाई ब्लड प्रेशर दो प्रकार का होता है. सिस्टोलिक प्रेशर और डायस्टोलिक प्रेशर - इस प्रेशर को हाईएस्ट रीडिंग और लोएस्ट रीडिंग भी कहा जाता है. सामान्य स्थिति में एक व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 90 से 140 तक होता है.  यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 90 और 140 के स्तर से, कई दिनों तक ऊपर रहता है तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है. सिस्टोलिक रीडिंग 100 से 140 के बिच रहती है और डायस्टोलिक रीडिंग 60 से 90 के बीच में रहती है. इसके अलावा व्यक्ति का ब्लड प्रेशर इस बात पर भी निर्भर करता है कि मांशपेशियों में संकुचन हो रहा है या नहीं. 

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण 

आमतौर पर हाइपरटेंशन को मूक हत्यारा के रूप में जाना जाता है. इसलिए इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते है. जब तक कि इससे पीड़ित व्यक्ति को कोई गंभीर समस्या जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक आदि उत्पन्न नहीं होता है, तब तक वे इस बीमारी से अवगत नहीं हो पाते हैं. इसलिए आपको सामान्य स्थिति में भी ब्लड प्रेशर की नियमित चेक अप करवाना चाहिए. इसके साथ ही आपको हेल्थी लाइफस्टाइल और डॉक्टर से परामर्श भी लेना चाहिए. हालाँकि, हाई बीपी के कुछ लक्षण है जो लोगों द्वारा अनुभव किए जाते हैं, जिनमें चक्कर आना, दर्द, धुंधला दिखना, उल्टी, नाक से खून बहना या सीने में दर्द होना इत्यादि शामिल है. 

हाई ब्लड प्रेशर के कारण 

हाई ब्लड प्रेशर के निश्चित कारण का पता लगाना मुश्किल होता है. अधिकांश लोगों को पता नहीं होता है कि हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है, इसी कारण यह रोग और भी घातक हो जाता है. हालाँकि, इसके कुछ संभावित कारण है जिसमे हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ जाता है. हाई ब्लड प्रेशर के संभावित कारण निम्नलिखित हो सकते है:

  1. अनुवांशिकता- यदि आपके परिवार में किसी को भी हाई बीपी होता है, तो आप भी इस बीमारी के लिए प्रवण होते है.  इस स्थिति में आपको स्वस्थ जीवनशैली और उचित खानपान को अपनाना चाहिए. 
  2. उम्र - बढ़ती उम्र भी हाई बीपी के लिए एक प्रमुख कारण  है. उम्र बढ़ने के साथ हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी बढ़ जाता है. यह बिमारी महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में अधिक सामान्य हैं. हालाँकि, बुढ़ापे में महिलाओं और पुरुषों में हाई बीपी का खतरा सामान्य हो जाता है. 
  3. मोटापा - सामान्य से अधिक वजन रखने वाले लोगों के लिए हाई बीपी का खतरा ज्यादा होता  है. 
  4. स्मोकिंग और ड्रिंकिंग - अत्यधिक  स्मोकिंग के कारण ब्लड वेसल्स संकीर्ण हो जाता है जो बीपी हाई का कारण बन जाती है. दूसरी तरफ, अत्यधिक अल्कोहल सेवन के कारण ब्लड में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, इससे ह्रदय को क्षति होती है और हाई बीपी का कारण बनता है. 
  5. अनुचित आहार- यदि आप अधिक नमक या हाई फैट वाले आहार का सेवन करते है तो आप भी हाई बीपी के लिए जोखिम रखते है. 
  6. स्ट्रेस- कई स्टडीज के अनुसार मेन्टल स्ट्रेस को भी हाई बीपी के लिए जिम्मेदार माना गया है.  

हाई ब्लड का इलाज 

किसी भी बीमारी से बचने के लिए सबसे पहले उपचार, रोकथाम और बचाव है. आपको सबसे पहले यह जानने की जरुरत है कि हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है और आप इसे कैसे रोक सकते है. यदि आपको बताए गए कारणों जैसे मोटापे या स्ट्रेस की वजह से हाई ब्लड प्रेशर है तो आपको  मोटापा कम करना चाहिए. 

साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए. इसके अलावा शराब का सेवन भी प्रतिबंधित करना चाहिए. आप नियमित रूप से ब्लड प्रेशर का चेकअप करवाते रहें और कोई लक्षण दिखने पर शुरुआत से ही इलाज शुरू करें. आपको नमक की सेवन पर नियंत्रण रखना चाहिए. आप बीपी को कंट्रोल करने के लिए योग की भी मदद ले सकते हैं. कई योग है जो बीपी कंट्रोल करने में मदद करते है. 

इनमें से कुछ निम्न इस प्रकार है - भुजंगासन, धनुरासन, वज्रासन, ताडासन और धनुरासन बहुत उपयोगी है. यदि अनुवांशिक कारणों से हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित है तो आपको डॉक्टर के साथ हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है, इसके बारे में विस्तार से चर्चा करनी चाहिए और डॉक्टर द्वारा निर्धारित किए गए दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए.

Frequency Of Urination

MNAMS - Urology, MCh - Urology, DNB - General Surgery, MS - General Surgery, MBBS
Urologist, Delhi
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People may have a confusion about how many time should we go to the washroom? The right answer is 5-7 times a day. You should at least drink 8-10 glasses of water. But if you have any issue related to the kidney, you should seek help.

Know About PCOS

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, DNB - Obstetrics & Gynecology, DGO
IVF Specialist, Delhi
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Polycystic ovarian disease (PCOD) or syndrome (PCOS) is a condition where there are multiple cysts in the ovaries and as a result there are several symptoms in various body parts. One of the significant things to note is that there is a strong correlation between diet and PCOD/PCOS.

Polycystic Ovarian Syndrome

MBBS Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery, DNB - Obstetrics & Gynecology, DGO
IVF Specialist, Delhi
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The specific causes of PCOD are yet to be determined. In PCOS patients, the ovaries produce excess androgens or male sex hormones, which result in an imbalance in ovulation, acne breakout and development of excess body hair. Your body faces problems using insulin and develops insulin resistance.

147 people found this helpful

Know More About Melasma

MBBS, MD - Dermatology
Dermatologist, Delhi
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Melasma is a condition in which brown patches appear on the face. There are various treatment options which were used before like Creams, laser but there is a new advance treatment ie PRP (Platelet-rich plasma therapy)

292 people found this helpful

How Is Chakra Healing Related To Ayurveda?

Ayurveda, Gurgaon
How Is Chakra Healing Related To Ayurveda?

Everything in our universe radiates energy. From living organisms to natural wonders, all radiate energy. The human body is not any exception and radiates energy as well. The human body is a very specialized system and it radiates many types of energy depending on the part of the body and its function.

There are several channels for the continuous flow of energy in and out of our body and these channels are known as chakras. This is the energy which influences our lifestyle significantly and plays a powerful impact over our happiness, health and other aspects of our daily lives which we cannot afford to miss out on.

Chakras have been present in ayurveda for thousands of years. The approach to Chakras is more on the spiritual side of human body and mind. Ayurveda says that a person’s ailments can be healed when he or she can uplift their chakras. Chakras make energy flow in and out of the body and along with it they can also revive the affected areas of their body or combat other factors which may be causing an ailment.

With the help of chakra healing a person can be treated from possibly any kind of disease. There are seven points in our body along which our chakras exist and each point is associated with a different set of organs or systems. So how is the concept of chakras related to healing?

Chakras And Healing

Chakra healing is related to ayurveda because it is not only spiritual in nature but there are a lot that goes into this form of healing. Long term dietary techniques are used in chakra healing and this requires the person to consume pure foods which are beneficial for the body.

The threefold approach in ayurveda for treating ailments is also used in chakra healing. These are Sattvavajaya, Daivachikitsa, Yuvi vyapashraya. All of these approaches are very much beneficial and has helped the people to recover from different intensity of diseases over the years.

● Chakra healing is related to yoga as well because the various yoga asanas affect the chakras. There are specific asanas which can be practised to target a specific chakra.

● Chakra healing is strongly related to ayurveda because the techniques and treatments used in ayurvedic treatments affect the various chakras of our body which in turn heals the body.

Examples-

Let us have a look at some brilliant examples which will help you to understand how chakras can help you get relief from different diseases. For example, a person may be suffering from intestinal problems and then takes help of ayurvedic treatment to get rid of that problem. The ayurvedic treatment helps in overcoming the problem by making the Root chakra function properly.

So as you can see that chakras can play a significant role in influencing, improving and enhancing your lifestyle and health in a brilliant manner.

Hair Loss - Benefits Of PRP Therapy For It!

MBBS, Diploma in Venerology & Dermatology (DVD), DDV, MD - Dermatology , Venereology & Leprosy
Dermatologist, Pune
Hair Loss - Benefits Of PRP Therapy For It!

Are you suffering from the problems of excessive hair fall or hair loss? Are you turning bald at a young age? Hair loss can have different reasons and causes. Sometimes, it is a symptom of a major disease. At times, hair loss is just due to hormonal issues. Whatever be the cause, excessive loss of hair leaves bald patches on your scalp. At times, they are really embarrassing for the person suffering from such hair problems. Though there are surgical methods like hair transplant and hair re-growth serum, the newest technology and treatment that people are interested in is the PRP treatment.

What is PRP?
PRP is also known as Platelet Rich Plasma Therapy. After several experiments and research medical practitioners have started making use of this therapy to help you grow back the hair that you have lost. The process of this therapy is extremely simple. It uses your own platelet rich plasma. This plasma is injected onto your scalp with the help of a thin needle. The main purpose is that the plasma reacts with the growing factors of the blood and helps the hair to grow naturally. This can be seen as a very natural procedure as your own plasma is used for treating your hair loss issues. It is carefully conducted by experts after several tests on your scalp and plasma. It is undertaken by trained professionals and thus is seen as a successful way of getting your hair back.


Advantages of PRP:
There are several advantages of this therapy. Some of them are explained below:

 

  1. It is one of the very few non-surgical procedures. It is effective in most cases and has been successful in providing desired results. It is also a very simple treatment to undergo and thus many choose it compared to transplants.
  2. Your recovery period is not very long and thus, after about a week’s rest you can go about living your life normally.
  3. It is a very safe procedure. Several tests are conducted prior to the implementation of this therapy. If complications are bound to arise, your medical practitioner would definitely inform you.

Thus, if you are experiencing excessive hair loss and severe balding of the scalp, this is one treatment that you can opt for. The advantages have been clearly outlined for your benefit. Furthermore, it is recommended that you visit your dermatologist before settling for any kind of treatment. They would assess your scalp condition and causes of hair fall and guide you towards the right treatment for your problems.

How To Fight Hair Loss With Cosmetic Procedures?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS), MS- Ayurveda, PGDCD
Cosmetic Physician, Pune
How To Fight Hair Loss With Cosmetic Procedures?

Hair loss may happen due to a variety of reasons including hereditary issues as well as aging and skin or scalp problems. A poor diet and inappropriate lifestyle choices like excessive drinking and smoking can also lead to hair loss. Many people also experience hair loss due to hormonal changes. Also, hair loss may happen as a side effect of certain types of medication as well as surgery related to cancer, which includes chemotherapy. Yet, genetic reasons for hair loss remain the most common cause when it comes to both men and women. Cosmetic procedures can often be used to fix severe hair loss issues.

Here is a list of cosmetic procedures available for the same:

  1. Hair Transplant: This procedure is also known as hair grafting and is often used to treat male pattern balding. This is an outpatient and relatively uncomplicated procedure that can be conducted at the clinic of a dermatologist surgeon. The process consists of the application of micro grafts where one or two hair can be contained in each graft. Strip grafts containing 30 to 40 strands of hair can also be applied in such a procedure. The doctor will usually administer local anaesthesia into the scalp so as to ensure that the patient feels minimum discomfort during the procedure.
  2. Scalp Reduction: In this procedure, the dermatologist surgeon will usually remove the skin which is not bearing hair any longer. The rest of the skin that is capable of growing hair will then be stretched across the scalp so that the bald area can be eliminated. This stretching action is done by loosening the skin of the surrounding area once the non-hair-bearing skin has been removed. In this method too, the doctor will first administer local anaesthesia.
  3. Flap Surgery: In this kind of surgery, the doctor will remove a section of the bald area and replace it with a flap of skin that is capable of sprouting hair. This hair bearing skin flap is positioned properly before being stitched into place during the surgery. While this is a challenging procedure, one will see immediate results as the remaining skin is still connected to the original blood supply that will promote hair growth for the flap as well.
  4. Laser Assisted Grafting: While there are many kinds of hair grafting techniques, laser assisted grafting is one of the most commonly used ones in today's day and age. Before the surgery, the doctor will prepare the area by trimming the donor area. This will allow easy application of and access to the grafts. Site holes will be closed with stitches which will in turn, be concealed with the hair that surrounds the area.

Dental Flossing - How Good Is It?

BDS, MDS - Periodontology and Oral Implantology
Dentist, Bangalore
Dental Flossing - How Good Is It?

Poor dental habits often invariably lead to complicated dental issues and hence expensive treatments. And to maintain the general good health of your teeth, brushing is not enough. It is very important to regularly floss too.

Difference between brushing and flossing:

For those who consider brushing and flossing to be similar, here is where the difference lies. While you brush your teeth, it's only the surface that gets cleaned. But the dirt that gets accumulated between the gaps of your teeth can only be cleaned by using a thin nylon thread, and that process is known as flossing. Avoiding flossing can lead to cavities and decay, and also gum diseases at times.

Benefits of Flossing:

1. Reduces the risk of heart diseases:
Periodontal diseases, that is, diseases of the teeth, gums and mouth, can lead to heart diseases. Thus maintaining oral health can reduce the risk of any major ailments manifold. It can also help you to avoid the risk of diabetes and high body mass index.

2. Cleaner breath:
Flossing cleans the dirt between the teeth that gets accumulated when we eat. The accumulated food, if not taken out, starts decaying and creates bacteria and results in bad breath, leaving a bad impression.

3. Cleaner and glossier teeth:
Flossing regularly keeps your teeth clean and white. It also makes your teeth gleam, making your smile more attractive.

4. Keeps you healthy while you are pregnant:
During pregnancy, some women suffer from enamel wear and gum diseases. Thus, flossing regularly even while you are pregnant can help you maintain your dental health.

Types of dental floss:

1. Waxed and unwaxed dental floss:
Waxed dental floss is much smoother than the unwaxed version, and as a result, moves more easily between the teeth. On the other hand, unwaxed dental floss can be a little rough to use in the beginning.

2. Teflon Floss:
Made of Teflon, this type of floss is extremely easy to navigate between the teeth and rarely gets stuck between teeth.

3. Thread Floss:
This one works just like the other flosses, but is simply made of a different material, that is, nylon.

4. Tape Floss:
As compared to the other type of flosses, this particular floss is a little thick and is suitable for people who have wider gaps between their teeth.

You can also stick to flossing aids for maintaining proper dental hygiene. They are usually perfect for people who find the conventional forms difficult to adapt to. However, such aids maybe more expensive than regular flosses.

You can also use a tooth pick or an interdental brush in case you wish to avoid flossing. Just make sure that the dirt comes out, no matter which method you take up! Keep Smiling!

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