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थायराइड क्या है - Thyroid Kya Hai?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
थायराइड क्या है - Thyroid Kya Hai?
हाइपरथायरायडिज्म हमारे शरीर की एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारे बॉडी में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन आवश्यकता से अधिक करने लगती है. थायरॉयड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो आपकी गर्दन के आगे वाले हिस्से में स्थित होती है. यह ग्रंथि टेट्रायोडोथायरोनिन (टी4) और ट्रीओडोथायरोनिन (टी3) बनाती है, जो दो प्राइमरी हार्मोन हैं. यह हार्मोन आपकी सेल्स को एनर्जी इस्तेमाल करने में कंट्रोल करते हैं. थायरॉयड ग्रंथि इन हार्मोनों के रिलीज के माध्यम से आपके मेटाबोलिक को कंट्रोल करती है. थायरॉयड में तब वृद्धि होता है जब थायरॉयड ग्रंथि टी4, टी3 या दोनों हार्मोन का उत्पादन ज्यादा होती है. हाइपरथायरायडिज्म आपके शरीर की मेटाबोलिक में तेजी ला सकता है, जिससे अचानक वजन घटना, तेज़ या अनियमित हार्ट रेट, पसीना आना और घबराहट या इर्रिटेशन हो सकते हैं. हाइपरथायरायडिज्म का सबसे सामान्य कारण ग्रेव्स डिजीज, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक सामान्य है. आइए इस लेख के माध्यम से हम थायराइड के बारे में विस्तारपूर्वक जानें ताकि इस विषय में हमारी जानकारी बढ़ सके.

थायराइड बढ़ने के कारण-
थायराइड कई कारणों से बढ़ सकता है. ग्रेव्स डिजीज, हाइपरथायरायडिज्म का सबसे सामान्य कारण है. यह एंटी बॉडीज को थायरॉयड को बहुत ज्यादा हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है. ग्रेव्स डिजीज पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा सामान्य होती है. यह एक जेनेटिक बीमारी है, यदि आपके रिश्तेदारों को यह बीमारी है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

हाइपरथायरायडिज्म के अन्य कारण हैं -
1. अधिक आयोडीन (टी4 और टी 3 में एक मेजर एलेमेंट्स).
2. थायरायडाइटिस या थायरॉयड की सूजन, जो टी4 और टी3 का ग्लैंड से बाहर निकलने का कारण बनती है.
3. टेस्टेस के फोड़े.
4. थायराइड या पिट्यूटरी ग्लैंड के छोटे फोड़े.
5. डाइट या मेडिसिन के माध्यम से बड़ी मात्रा में ट्रीओडोथायरोनिन (टी 3)का सेवन करना.
6. थायरॉयड सिस्ट का ज्यादा कार्य करना (जहरीला एडिनोमा, विषाक्त बहुपक्षीय गोइटर, प्लम्मर रोग). हाइपरथायरायडिज्म का यह रूप तब होता है जब आपके थायरॉयड के एक या अधिक एडेनोमा बहुत ज्यादा टी4 का उत्पादन करते हैं.

थायराइड कम होने के कारण-
हाइपोथायरायडिज्म एक बहुत ही आम स्थिति है. इसकी कुल आबादी में लगभग 3% से 5% तक की जनसंख्या में हाइपोथायरायडिज्म के कई प्रकार देखे जाते हैं. हाइपोथायरायडिज्म पुरूषों से ज्याादा महिलाओं में प्रचलित है और इसका जोखिम उनकी ऐज के साथ बढ़ता रहता है. एडल्ट में होने वाले हाइपोथायरायडिज्म के कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

1. हाशिमोटो थायरोडिटिस- हाशिमोटो थायरोडिटिस सामान्य रूप से तब होता है जब थायरॉयड ग्रंथि बढ़ जाती है और थायरॉयड हार्मोन बनाने की क्षमता को कम कर देती है. हाशिमोटो थायरोडिटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसमें बॉडी की इम्यून सिस्टम अनउपयुक्त तरीके से थायरॉइड टिश्यू पर अटैक करती है. अंशिक रूप से इस स्थिति को जेनेटिक्स का आधार माना जाता है.

2. लिम्फोसाइटिक थायरोडिटिस- लिम्फोसाइटिक थायरोडिटिस, थायरॉयड ग्लैंड की सूजन को संकेतित करता है. जब सूजन एक विशेष प्रकार के वाइट ब्लड के कारण होती है तो उसको लिम्फोसाइटिक के नाम से जाना जाता है. इस स्थिति को लिम्फोसाइटिक थायरोडिटिस भी कहा जाता है.

3. थायरॉयड खंडन- जिन रोगियों का हाइपोथायरॉइड स्थिति का ट्रीटमेंट हो चुका है और उन्होनें रेडियोएक्टिव आयोडीन थैरेपी ली है और उपचार के बाद उनके थायरॉइड टिश्यू ने काम करना कम कर दिया है या बंद कर दिया है तो इस तरह कि संभावनाएं इस बात पर निर्भर करती है कि रोगी ने आयोडीन कि कितनी मात्रा को प्राप्त किया था या मरीज कि थायरॉइड ग्रंथि का साइज़ और उसकी गतिविधियां कैसी थी. रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट के 6 महीने के बाद भी अगर थायरॉयड ग्रंथि कोई जरुरी गतिविधि नहीं दे रही है तो आमतौर पर यह मान लिया जाता है कि थायरॉयड ग्रंथि अब सही ढंग से काम नहीं कर पा रही है. इसका परिणाम हाइपोथायरायडिज्म ही निकलता है. ठीक उसी प्रकार सर्जरी की मदद से थायरॉइड ग्रंथि को हाइपोथायरायडिज्म का अनुसरण करते हुऐ हटा दिया जाता है.

4. पिट्यूटरी या हाइपोथेलैमस डिजीज- जब किसी कारण से पिट्यूटरी ग्रंथि या हाइपोथैलेमस, थायरॉयड को संकेत देने में सक्षम नहीं होते हैं और थायरॉयड हार्मोन को उत्पादित करने का निर्देश दे देते हैं. इसके परिणास्वरूप टी4 और टी3 का लेवल कम होने लगता है भले ही थायरॉयड ग्रंथि सामान्य हो. अगर यह प्रभाव पिट्यूटरी डिजीज के कारण होता है तो इस स्थिति को 'सेकेंडरी हाइपोथायरायडिज्म' कहा जाता है और अगर यही प्रभाव हाइपोथैलेमस डिजीज के कारण हो तो इसे टेर्टिअरी हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है.

5. पिट्यूटरी जख्म - जब दिमाग की सर्जरी या किसी कारण से उस हिस्से में ब्लड की आपूर्ती में कमी हो जाए तो उसका परिणाम पिट्यूटरी जख्म के रूप में होता है. पिट्यूटरी जख्म के इस मामले में टीएसएच लेवल जो पिट्यूटरी ग्लैंड के माध्यम से जारी किया जाता है वह कम हो जाता है और टीएसएच में ब्लड लेवल भी काफी कम हो जाता है. इसके परिणामस्वरूप हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है, क्योंकि थायरॉयड ग्लैंड अब पिट्यूटरी टीएसएच द्वारा उत्तेजित नहीं की जाती है.

6. दवाएं- एक ऑवर-एक्टिव थॉयरॉयड के ट्रीटमेंट के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाएं ही वास्तव में 'हाइपोथायरायडिज्म' का कारण बनती हैं. ये दवाइयां जिनमें मेथिमाजॉल या टैपाजॉल और प्रोपिलथ्योरॉसिल शामिल हैं. साइकिएट्रिक दवाइयां लिथियम को थायरॉयड के कार्य को बदलने के लिए भी जाना जाता है जो 'हाइपोथायरायडिज्म' का कारण बनते हैं. विशेषतौर पर कुछ दवाओं में अधिक मात्रा में आयोडीन होता है, जिनमें ऐमियोडेरोन, पोटाशियम आयोडाइड और ल्यूगो सोल्यूशन शामिल हैं, जिनके कारण से थायरॉयड के फंक्शन में बदलाव आ सकते हैं. जिसका परिणाम ब्लड में थायरॉयड हार्मोन का लेवल कम होने लगता है.

7. आयोडीन में अत्यधिक कमी- दुनिया के उन हिस्सों में जहां डाइट में आयोडीन की कमी देखि गयी है वहां पर 5% से 15% तक की आबादी को गंभीर आयोडीन की कमी वाले रोग देखने को मिलता है. जैसे ज़ैरे, इक्वाडोर, भारत, और चिली आदि शामिल हैं. आयोडीन में गंभीर कमी के रोग दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में भी देखने को मिल जाते हैं, जैसे- एंडीज और हिमालयी क्षेत्रो में. इस कमी को दूर करने के लिए नमक में और रोटी में आयोडीन की वृद्धि कर दी जाती है. अमेरीका जैसे देशों में आयोडीन की कमी बहुत ही कम देखी जाती है.

I am anjali (female, 34 years old). I did thyroid health checkup last week, and below are my thyroid test results: tri-iodothyronine (t3, total): 1.6 ng/ml thyroxine (t4, total): 2.90 μg/dl tsh: 100.00 μiu/ml please advise me the treatment plan (tablets etc)

MD - Homeopathy, BHMS
Homeopath, Vadodara
Hello Lybrate-user, Treatment for conditions like thyroid cannot be continued without consultation. Whatever the treatment you like consult a specialist and take proper treatment. You can consult me at Lybrate for homoeopathic treatment. Till then start thyroidinium 6x thrice.
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थायराइड के प्रकार- Thyroid Ke Prakar!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
थायराइड के प्रकार- Thyroid Ke Prakar!
हाइपरथायरायडिज्म हमारे शरीर की एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारे शरीर में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन आवश्यकता से अधिक करने लगती है. थायरॉयड एक छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि होती है जो आपकी गर्दन के आगे वाले हिस्से में स्थित होती है. थायरॉयड ग्रंथि इन हार्मोनों के रिलीज के माध्यम से आपके चयापचय को नियंत्रित करती है. आइए इस लेख के माध्यम से हम थायराइड के प्रकारों के बारे में जानें ताकि इस विषय में हमारी जानकारी बढ़ सके.

थायराइड के प्रकार-
थायराइड नामक बीमारी के दो प्रकार होते हैं, जो निम्नलिखित है:
1. हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड कम होना)
2. हाइपरथायराइडिज्म (थायराइड बढ़ना)

हाइपोथायरायडिज्म के स्टेज
1. उप-क्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म - इस स्टेज में उप-क्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म में TSH का लेवल 3 से 5.5 mlU/L तक बढ़ जाता है. अगर थायरोक्सिन का लेवल सामान्य लेवल के अंदर हो तो यह संदर्भ उप-क्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म की तरफ संकेत करते हैं.

2. हल्के हाइपोथायरायडिज्म - टीएसएच (TSH) के लेवल को 5.5 से 10 mlU/L तक बढ़ाया जा सकता है और थायरोक्सिन का लेवल कम किया जा सकता है, इससे अधिकांश मरीजों का टी4 लेवल सामान्य स्तर पर आ जाता है. टी3 का लेवल आगे नहीं गिरता है जब तक बीमारी गंभीर रूप से विकसित ना हो इसका कारण ये है कि TSH के लेवल का बढ़ना थायरॉयड को अधिक टी3 जारी करने के लिए उत्तेजित करने लगता है. इसके बेहतर परिणाम तब दिखते हैं जब टी3 का लेवल गिरने लगता है. हल्के हाइपोथायरायडिज्म आमतौर पर ऑटोइम्यून थायरायराइटिस के कारण होते हैं, जिनके लक्षण थकान, वजन बढ़ना, तरल अवरोधन आदि के रूप में देखने को मिलते हैं.

3. मध्यम हाइपोथायरायडिज्म - किसी व्यक्ति को मध्यम हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब उसके टीएसएच का स्तर 10 से 20 mlU/L की सीमा के भीतर हो और जब उनका टी3 और टी4 निम्न स्तर में हो. हल्के और मध्यम हाइपोथायरायडिज्म महिलाओं में जल्दी होने की संभावना रहती है. महिलाओं के मामले में यह बहुत जरूरी होता है कि हाइपोथायरायडिज्म कि जांच करके इसको ठीक किया जाए, क्योंकि इससे महिलाओं में गर्भपात और भ्रूण मृत्यू जैसे जोखिम बढ़ जाते हैं.

4. मैक्सिडेमा कोमा - अगर हाइपोथायरायडिज्म का समय पर ट्रीटमेंट ना किया जाए तो वह बढ़ कर मैक्सिडेमा कोमा का रूप ले सकता है. मैक्सिडेमा कोमा एक बहुत ही गंभीर स्थिति होती है, थायरॉयड हार्मोन का बहुत ही कम उत्पादन इसकी विशेषता होती है. इस स्थिति में शरीर तनाव, ठंडा मौसम और सर्जरी आदि स्थितियों का सामना करने में सक्षम नहीं होता है. मरीज इस स्थिति में सामान्य महसूस नहीं करता एवं उसे शारीरिक कमजोरी, उलझन, शरीर में सुजन इत्यादि की स्थिति का सामना करना पड़ता है.

थायराइड बढ़ने (हाइपरथायरायडिज्म) के लक्षण-
टी 4, टी 3 या फिर दोनों हार्मोनों की ज़्यादा मात्रा अत्यधिक हाई मेटाबॉलिक का कारण हो सकती हैं. इसे हाइपरमेटाबॉलिक स्थिति कहा जाता है. इस अवस्था में, आपको हार्ट रेट में तेज़ी, हाई ब्लड प्रेशर और हाथों में झटकों का अनुभव हो सकता है. आपको पसीना ज्यादा आ सकता है और गर्मी के प्रति कम सहिष्णुता हो सकती है. हाइपरथायरायडिज्म इटेंस्टाइन की अधिक गतिशीलता, वजन घटना और महिलाओं में अनियमित मेस्ट्रूअल साइकिल उत्पन्न कर सकता है. थायरॉयड ग्रंथि अपने आप भी सूज कर गोइटर बन सकती है. आपकी आंखो में भी सूजन हो सकती हैं, जो एक्सोफ़थैल्मोस का एक लक्षण है और ग्रेव्स बीमारी से संबंधित है.

हाइपरथायरायडिज्म के अन्य लक्षण निम्नलिखित हैं -
1. भूख ज्यादा लग सकती है
2. एंग्जायटी
3. ध्यान केंद्रित करने में समस्या
4. कमजोरी
5. अनियमित हार्ट रेट
6. नींद आने में समस्या
7. कमज़ोर बाल
8. खुजली
9. बाल टूटना
10. उल्टी और मतली
11. पुरुषों में ब्रेस्ट का विकास

निम्नलिखित लक्षणों को शीघ्र ही उपचार की आवश्यकता होती है -
1. चक्कर आना
2. साँस लेने में परेशानी
3. बेहोशी
4. तेज या अनियमित हार्ट मूवमेंट

हाइपरथायरायडिज्म, आर्टरियल फिब्रिलेशन का कारण बन सकता है जो एक गंभीर एरिथमिया है, जिससे स्ट्रोक और हार्ट फेल भी हो सकती है.

थायराइड कम होने (हाइपोथायरायडिज्म) के लक्षण-
हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण और संकेत मूल रूप से थायरॉयड हार्मोन उत्पादन में होने वाली कमी और उसकी गंभीरता पर आधारित होते हैं. लेकिन आमतौर पर इस देखा जाए तो यह कई समस्या उत्पन्न कर सकता हैं जो हमारे अंदर बहुत सालों से विकसित होती हैं. सबसे पहलें आप हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में थकावट और वजन बढ़ने जैसी समस्याओं को अनुभव कर सकते हैं. मगर जब आपके मेटाबाॅलिक के काम करने की गति धीमी होने लगती है, तब आप इसके संकेत देख सकते हैं.

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण और संकेतों में निम्नलिखित शामिल है-
1. थकान
2. अधिक ठंड लगना
3. त्वचा सूखी पड़ना
4. वजन बढ़ना
5. चेहरे पर सूजन होना
6. आवाज बैठना
7. मसल्स में दुर्बलता
8. ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का लेवेल बढ़ना
9. मसल्स में दर्द, नाजुकता और जकड़न
10. जॉइंट में अकड़न और सूजन के साथ दर्द
11. असामान्य और अनियमित रूप से पीरियड
12. हेयर फॉल
13. हार्ट रेट धीमी होना
14. डिप्रेशन
15. याद्दाश्त कमज़ोर पड़ना

अगर हाइपोथायरायडिज्म का ट्रीटमेंट ना किया जाए तो उसके संकेत और लक्षण धीरे-धीरे और बढ़ने लगते हैं और थायरॉयड हार्मोन ज्यादा रिलीज़ होने लगते हैं, जिससे थायरॉइड बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है. इसके साथ-साथ आपको विस्मृत विकार हो सकते हैं, सोचने-समझने की क्षमता कम हो सकती है और आप डिप्रेशन का अनुभव भी हो सकता हैं.
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Prostate Cancer - Knowing The Importance Of PSMA PET Scan & Dota Scan!

Multi Speciality, Mumbai
Prostate Cancer - Knowing The Importance Of PSMA PET Scan & Dota Scan!
In recent years, there has been the emerging trend of resorting to customized treatment for different types of cancer. These treatments vary from individual to individual, depending on the severity of their condition. PSMA PET scan and DOTA scan are two such procedures used in the treatment of prostate cancer.

Before identifying the benefits of these scans, let us have a look at the risks of prostate cancer.

Prostate Cancer- What is it?

Prostate cancer shows up in the prostate gland of men, which produces the fluid that transfers and nourishes the sperm. It is a very commonly occurring condition in men and early treatment can cure it completely.

Symptoms of Prostate Cancer:

Prostate cancer starts showing its symptoms from the middle stages. One should seek medical help if he observes the following warning signs-

Pain while urinating
Bone pain
Reduction in force of urine
Erectile Dysfunction
Presence of blood in semen

With increasing age and obesity, there remains a high chance of developing prostate cancer.

What is PSMA PET scan?

It is an effective and reliable mode of diagnosis to identify the extent of prostate cancer. It is also known as Prostascint scan. This scan is recommended for patients in the early stage of cancer and to determine whether the disease has spread to the pelvic lymph nodes.

In this process, the patient is injected with an antibody and a radioactive material that can be detected by cameras. The doctor then sees a three-dimensional picture of the affected area on the monitor. The complete process takes three days to finish.

Benefits of PSMA PET scan:

Helps to determine the position and range of a tumour
Helps the doctor to plan effective methods of treatment to eradicate a tumour completely
Helps to predict the result of treatment up to a certain extent, unlike other imaging tests

What is DOTA scan?

It is a highly advanced scan used to detect the spread and sensitivity of tumours concerning prostate cancer. The molecules injected during the scan attaches itself to the neuroendocrine tumours known as carcinoids.

Benefits of DOTA scan:

Helps to detect the exact location of a tumour
Helps the doctor to plan for effective radioactive therapies
Helps to identify the exact stage of a cancerous tumour

Both PSMA and DOTA scans are the fruits of modern scientific research and go a long way in eradicating cancerous cells from the body. Early detection of the disease with these scans increases the chance of being cured of the disease.

I made myself blood test done and tsh level shoeing 9.plus.should I start thyroid medicine. Though haven't seen any doc yet. What should I do.

MD - Homeopathy, BHMS
Homeopath, Vadodara
No you should not. Start pranayama and exercise. And try to control it by that. If cannot then take homoeopathic treatment. It can cure it. You can consult me at Lybrate for proper guidance and treatment.
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Hi doctors, my thyroid level is 14.26. Please suggest me the dosage of thyroxine need to be taken. As of now I am taking thyroxine 12.5 mcg and current body weight is 81 kg. Request your assistance on the same. Thanks.

MD - Homeopathy, BHMS
Homeopath, Vadodara
Hi doctors, my thyroid level is 14.26. Please suggest me the dosage of thyroxine need to be taken. As of now I am tak...
You should take 25 mcg. And then take blood test after one month. Also reduce the weight. You can consult me at Lybrate for homoeopathic treatment if you want to cure it permanently.
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Thyroid Disorders - Know About It!

DM - Endocrinology, MD Medicine
Endocrinologist, Gurgaon
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A fairly common health disorder that is said to affect a substantial percentage of the total population is thyroid, but the worst part is that half the affected population is unaware of the condition they are suffering from. Thyroid, the master gland present in the neck is responsible for controlling our metabolism. Thus, if the thyroid is not running optimally, you will also not be able to function adequately.
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Hi, I am 25 years old male. Since 1 year I am taking thyronorm 100 mcg tablets daily. Today went to give blood samples and the report says tsh is 0.02 but actually it should be in between 0.35 to 5.50. So should I continue using 100 mcg dose or I need to decrease it? If yes, how much dose do I need to take from now?

MBBS, CCEBDM, Diploma in Diabetology, Diploma in Clinical Nutrition & Dietetics, Cetificate Course In Thyroid Disorders Management (CCMTD)
Endocrinologist, Dharwad
Hi, I am 25 years old male. Since 1 year I am taking thyronorm 100 mcg tablets daily. Today went to give blood sample...
Hello, Thanks for the query. Lower than normal level of TSH suggests that current dosage of Levothyroxine is a bit higher. That needs to be reduced by 12.5 mcg to 87.5 mcg per day. Then check TSH after 5 weeks of starting the new dosage, to see if TSH has increased towards the normal range. Thanks.
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