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खून की कमी - Khoon Ki Kami!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
खून की कमी - Khoon Ki Kami!
हमारे शरीर में लगभग 70 प्रतिशत पानी है. इस पानी का ज्यादातर हिस्सा हमारे शरीर में खून के रूप में उपस्थित है. रक्त ही हमारे शरीर में वो महत्वपूर्ण माध्यम है जो कई जरुरी पोषक तत्वों और कई अन्य चीजों को विभिन्न अंगों तक पहुँचाने का काम करता है. यदि खून न हो हो या खून की कमी हो जाए तो हमारे शरीर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होने लगेंगी. हिमोग्लोबिन, हमारे शरीर में मौजूद रक्त का सबसे महत्वपूर्ण भाग है. हमारे शरीर में कई खनिज पाए जाते हैं. आयरन उनमें से ही एक है.

आयरन का काम है हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करना. लाल रक्त कोशिकाएं हिमोग्लोबिन का निर्माण करती हैं. हिमोग्लोबिन हमारे शरीर में प्राण वायु ऑक्सिजन को फेफड़ों से लेकर हमारे खून में पहुंचाता है. फिर रक्त में संचरण करते हुए ऑक्सिजन शरीर के अन्य हिस्सों में जाता है. लेकिन जब हमारे शरीर में आयरन की कमी होती है तब लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में कमी आती है और इससे हिमोग्लोबिन में भी कमी आ जाती है. इस अवस्था में हमारे शरीर में ऑक्सिजन की भी कमी हो जाती है जिसे हम एनीमिया या खून की कमी कहते हैं. इसमें हमें थाकान और कमजोरी महसूस होने लगता है.

एनीमिया के लक्षण-

थकान होना
त्वचा का पीला पड़ना
आंखों के नीचे काले घेरे
चक्कर आना
सीने में दर्द
लगातार सिर में दर्द
तलवे और हथेलियों का ठंडा पड़ना
शरीर में तापमान की कमी

कौन होता है आसानी से इसका शिकार?
यदि ध्यान न रखा जाए तो प्राकृतिक कारणों से महिलाएं इसकी आसान शिकार बन जाती हैं. दरअसल पीरियड्स और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे परिवर्तन होते हैं जिनसे महिलाओं में एनीमिया जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. गर्भावस्था के दौरान शरीर को अधिक मात्रा में विटामिन, मिनरल व फाइबर आदि की आवश्यकता होती है. जबकि इस दौरान रक्त में लौह तत्वों की कमी होने से शारीरिक दुर्बलता बढ़ सकती है. जबकि पीरियड्स के दौरान खून ज्यादा निकल जाने के कारण भी एनीमिया की आशंका बढ़ जाती है. स्तनपान कराने वाली माताओं को भी एनीमिया होने का खतरा रहता है. लड़कियों में अक्सर डाइटिंग का क्रेज देखने को मिलता है. वजन कम करने के लिए डाइटिंग कर रही लड़कियां भी इसकी शिकार हो सकती हैं. कुछ अन्य कारणों से भी महिलाओं या पुरुषों में हो सकता है जैस पाइल्स या अल्सर के कारण भी एनीमिया हो सकता है. अब तो पर्यावरण में मौजूद हानिकारक तत्व भी एनीमिया का कारण बन रहे हैं.

बचने के उपाय-
एनीमिया अपने आप में कोई बिमारी नहीं है बल्कि इसके कारण कई अन्य बीमारियाँ हो सकतीं हैं. इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेना अत्यंत आवश्यक है. इसको ठीक होने में कम से कम छह महीने का समय लगता है. यदि आप एनीमिया से बचना चाहते हैं तो आपको मांस, अंडा, मछली, किशमिश, सूखी खुबानी, हरी बीन्स, पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे आयरन से परिपूर्ण आहार आदि का सेवन अवश्य करना चाहिए. आयरन युक्त आहार तभी प्रभावी है जब उसके साथ विटामिन सी का भी सेवन किया जाता है. विटामिन-सी के लिए अमरूद, आंवला और संतरे का जूस लें.

इन आहारों से होती है खून में वृद्धि-
कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका इस्तेमाल रक्तवर्धन के लिए किया जा सकता है. इनके इस्तेमाल से भी आप एनीमिया के जोखिम को कम कर सकते हैं.
1. चुकंदर - यह आयरन का अच्छा स्त्रोत है. इसको रोज खाने में सलाद या सब्जी के तौर पर शामिल करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती.

2. हरी पत्तेदार सब्जी - पालक, ब्रोकोली, पत्तागोभी, गोभी, शलजम और शकरकंद जैसी सब्जियां सेहत के लिए बहुत अच्छी होती हैं. वजन कम होने के साथ खून भी बढ़ता है. पेट भी ठीक रहता है.

3. सूखे मेवे - खजूर, बादाम और किशमिश का खूब प्रयोग करना चाहिए. इसमें आयरन की पर्याप्त मात्रा होती है.

4. फल - खजूर, तरबूज, सेब, अंगूर, किशमिश और अनार खाने से खून बढ़ता है. अनार खाना एनीमिया में काफी फायदा करता है. प्रतिदिन अनार का सेवन करें.
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Anemia - Causes, Symptoms & Treatment Of It!

Diploma In Gastroenterology, Diploma In Dermatology, BHMS
Homeopath, Hyderabad
Anemia - Causes, Symptoms & Treatment Of It!
What is anemia?

Anemia is due to lack of haemoglobin in the blood which is below the normal level or due to less than normal levels of red blood cells in blood.

The haemoglobin helps carry oxygen in blood. Lack of haemoglobin thus causes deficiency of life giving oxygen to vital organs. (1-4)

Types of anemia

There are various causes of anemia. It could be due to:

Decreased production of RBCs in blood
Increased blood loss OR
Excessive destruction of RBCs
Causes of anemia
Anemia most commonly occurs due to nutritional problems. This includes lack of iron in the diet.
Iron deficiency is the commonest form of anemia.
In the United States 7% of toddlers ages 1 to 2 years old and 9-16% of menstruating women suffer from iron deficiency.
The poorer nations 30-70% of the people have iron deficiency anemia.
Iron and anemia

Since iron is needed for the manufacture of haemoglobin in the body its deficiency can lead to anemia.
Iron is found in meat, dried fruit and some vegetables.
Lack of iron may be caused due to bleeding especially in stomach ulcers or within the intestines.
Women before menopause commonly suffer from iron deficiency anemia due to heavy periods and increased demands during pregnancy.
Vitamins and anemia

Certain vitamins like vitamin B12 and folic acid or folate are also essential in the normal production of RBCs in blood. Their lack in diet may lead to anemia.
Both vitamin B12 deficiency and folate deficiency are more common in older people, affecting around 1 in 10 people above the age of 75.
There is an inherited condition called Pernicious anemia where patients find it difficult to use the vitamin B 12 in diet for production of healthy RBCs. This is a rare condition and affects 1 in 10,000 people in northern Europe.
Other causes of anemia

Increased blood loss due to surgery or major trauma may lead to anemia.
Excessive destruction of RBCs may occur due to certain conditions called haemolytic anemias. These are often inherited and include Sickle cell anemia, Thalassemia etc. Anemia can also occur in severe infections, cancers and due to exposure to a drug or toxin.
For example, the RBCs are made in bone marrow. If there is cancer in the marrows a shortage of good red blood cells results. This is called aplastic anaemia and may also occur with blood cancers like leukaemia.
Symptoms

Anemia signs and symptoms vary depending on the cause of your anemia. They may include:

Fatigue
Weakness
Pale or yellowish skin
Irregular heartbeats
Shortness of breath
Dizziness or lightheadedness
Chest pain
Cold hands and feet
Headache
At first anemia can be so mild that it goes unnoticed. But symptoms worsen as anemia worsens.

Treatment of anemia

Treatment depends on the cause of the anaemia. If the anaemia is due to a lack of iron, eating iron-rich food or iron supplements may be given. If, however, the cause of anemia is deeper like internal bleeding or cancers, the cause should be explored before treatment. When the anaemia is more severe, a blood transfusion may be prescribed.

hemoglobin deficiency, pain in body hemoglobin level 8 to 9 is there a permanent cure for this.

General Physician, Chennai
hemoglobin deficiency, pain in body hemoglobin level 8 to 9 is there a permanent cure for this.
Hemoglobin is less means anemia we have to investigate what is the reason for your anemic condition under go through examination for anemia if you know the reason we can treat.
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Hi, My test report says "alert! predominantly macrocytic normochromic with macroovalocytes" what is this about? My age 39.

BHMS, Fellowship Course in Homeopathic Dermatology
Homeopath, Hyderabad
Hi, My test report says "alert! predominantly macrocytic normochromic with macroovalocytes" what is this about? My ag...
Hi Mr. Lybrate-User, Macrocytic means unusually larger sized rbc, and macroovalocytes are large oval shaped rbc, deficiency in vit b12 or folate are the common causes for these abnormality in the report.
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सिकल सेल के बचाव - Sickle Cell Ke Bachaw!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
सिकल सेल के बचाव - Sickle Cell Ke Bachaw!
सिकल सेल रोग असामान्य जीन से उत्पन्न एक आनुवांशिक रोग है जो माता-पिता से प्राप्त होते हैं. शरीर के रक्त मे लाल रक्त कण का आकार सामान्यतः उभयातल डिस्क के तरह होता है जो रक्तवाहिकाओं में आसानी से गमन करते हैं. पर सिकल सेल की स्थिति में ये लाल रक्त कण उभयातल डिस्क के तरह न होकर अर्धचंद्राकार हंसिया (सिकल) के तरह हो जाता है. जिससे रक्तवाहिकाओं में इसका संचरण सही ढंग से नहीं हो पाता है. जिससे शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त पहुँचने में अवरुद्ध होता है. ये असामान्य लाल रक्त कण जो हंसिया या सिकल के तरह होता है इसे ही सिकल सेल कहते है तथा जब इस स्थिति से शरीर में रोग हो जाती है तो उसे सिकल सेल रोग कहते हैं. ये सिकल सेल कठोर व चिपचिपा होता है. इसका आकार हंसिया (सिकल) के तरह होने के कारण रक्त प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है जिस कारण दर्द होता है और विभिन्न अंग तो क्षति भी पहुँचती है. सामान्य लाल रक्त कण की आयु 120 दिन होती है. जबकि सिकल सेल लाल रक्त कण की आयु 10 से 20 दिन होती है. इस प्रकार सिकल सेल के जल्द नष्ट हो जाने व इसके श्हरीर के विभिन्न भाग में पहुँचने में दिक्कत होने से शरीर में खून की कमी एनीमिया रोग हो जाती है.

क्या है सिकल सेल?
सिकल सेल की बीमारी खान-पान, छुआछूत या अन्य तरह से होने वाले बीमारी न होकर यह एक जेनेटिक बीमारी है जो जीन में हुये परिवर्तन के कारण होती है. चिकित्सा इतिहास के अध्ययन से पता चलता है कि हजारों वर्ष पूर्व कुछ स्थानों पर हमारे हिमोग्लोबीन के जीन्स में परिवर्तन हुये जिस कारण लाल रक्त कण का आकार गोलाकार से बदलकर अर्द्ध चंद्राकार हँसिये (सिकल) के रूप में हो गया. यह परिवर्तन उन क्षेत्रों में ज्यादा हुआ जहाँ मलेरिया बहुतायत में पाया जाता था. परिणामस्वरूप यह रोग अविकसित आदिवासी दुरूह क्षेत्र के जनजातियों में ज्यादा पाया गया. यह बीमारी अफ्रीका, बहरीन, तुर्की, ग्रीस, सऊदी, अरेबिया के साथ-साथ भारत में बहुतायत में पाया जाता है. महत्वपूर्ण बात है कि विश्व में समस्त सिकल सेल मरीजों में से आधे से ज्यादा भारत में हैं.

यदि बच्चे को माता व पिता दोनों से सिकल सेल के जीन मिले हों तो बच्चे सिकल सेल का रोगी होता है. पर यदि बच्चे को माता या पिता में से किसी एक से ही सिकल सेल के जीन मिले हों तो इन बच्चे में रोग के कोई लक्षण दिखाई नहीं पड़ते हैं व उन्हें कोई इलाज की जरूरत नहीं होती है.

सिकल सेल रोग से बचाव-
सिकल सेल का रोग एक बहुत ही गंभीर बीमारी है. और इसकी रोकथाम जरूरी है. पर इसके इतनी बड़ी समस्या होने के बावजूद भी इस मामले में खामोशी होने का वजह है कि लोग इसे आनुवांशिक रोग मानकर इसलिए इसपर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि उनका मानना होता है कि आनुवांशिक रोग का कोई इलाज नहीं है. यह सत्य है कि आनुवांशिक रोग को जड़ से नष्ट करने का कोई उपाय नहीं है पर रोकथाम द्वारा इसे बढ़ने से रोका जा सकता है. शादी से पहले सिकल कुंडली मिला ली जाये तो 70 प्रतिशत तक इस रोग को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए शादी से पहले लड़का व लड़की दोनों का रक्त जाँच कर यह देख लेना चाहिए कि इनमें सिकल सेल के जीन तो नहीं है. यदि दोनों में सिकल सेल पाये जाते हैं या दोनों सिकल सेल रोगी हैं तो उन्हें शादी नहीं करनी चाहिए. इस प्रकार ऐसे लोगों को आपस में शादी न करके सिकलग्रस्त बच्चे की उत्पत्ति रोकी जा सकती है.

सिकल कुंडली का मिलान करके ही शादी करने के लिए सामाजिक संगठन को आगे आना चाहिए. क्योंकि जनजागृति ही सिकल सेल रोग से बचने का एकमात्र उपाय है. साइप्रस व बहरीन जैसे देशों में शादी से पहले सिकल की जाँच हेतु खून जाँच अनिवार्य कर दिया गया है. इस प्रकार के व्यवस्था से वहाँ सिकलग्रस्त बच्चे के जन्म में काफी कमी आयी है.

सिकल रोग ग्रस्त बच्चे में खून की कमी होती है जिस कारण बच्चे कमजोर होते हैं व इन्हें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे बच्चों का टीकाकरण व अन्य जरूरी दवाएँ देकर उन्हें दीर्घायु बनाया जा सकता है. सिकल रोग के कारण होने वाले प्रभाव व विकारों का उचित इलाज से सिकल रोगी को लंबा जीवन मिल सकता है. जमैका जैसे देशों में सिकल रोगियों का उचित इलाज व पुनर्वास की सुविधा है जिस कारण वहाँ सिकल ग्रस्त लोग भी लंबे जीवन जी रहे हैं. पर भारत में व्यवस्था के अभाव में सिकल ग्रस्त लोगों की आयु कम है.

HI, I done cbc test today the report esr value is 25 for me in 1 hr but the normal range is 15. Is there any problem of this report.

MBBS
General Physician, Jaipur
HI, I done cbc test today the report esr value is 25 for me in 1 hr but the normal range is 15. Is there any problem ...
Yes. It is inflammatory response of the body. Please consult with me on my private chat window for full details.
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हीमोग्लोबिन का स्तर - Hemoglobin Ka Star!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
हीमोग्लोबिन का स्तर - Hemoglobin Ka Star!
शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होना सेहत के लिए हानिकारक होता है, लेकिन हीमोग्लोबिन की अधिकता भी उतनी ही नुकसानदेह होती है. मतलब लोहा शरीर के लिए आवश्यक तो है, लेकिन संतुलित मात्रा में. एक स्वस्थ शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा 20 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए, इससे अधिक होने पर शरीर में हीमोक्रोमेटिक रोग के लक्षण पनपने लगते हैं. हीमोग्लोबिन का मुख्य कार्य खून के प्रमुख घटक, लाल रक्त कणों का निर्माण करना करना है. इतना ही नहीं, हीमोग्लोबिन के निर्माण का कार्य भी लोहा करता है, जो शरीर के अंग-प्रत्यंगों को सुडौल बनाकर, शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम हीमोग्लोबिन के स्तर के बारे में जानकारी प्राप्त करें.

हीमोग्लोबिन के स्तर से तात्पर्य-
हड्डियों के अंदरूनी भाग में पाया जाने वाला गूदा या अस्थिमज्जा, रक्त कणों की जननी है. यानी अस्थिमज्जा में ही हर तरह के रक्त कण बनते हैं, जिनमें लाल रक्त कणों की भरमार होती है. एक क्यूबिक मिलीलीटर रक्त में लगभग 50 लाख लाल रक्त कण होते हैं. एक बूंद खून को सूक्ष्मदर्शी से देखने पर रक्त के लाल कण गोल-गोल तश्तरियों की तरह नजर आते हैं, जो किनारे पर मोटे और बीच में पतले दिखते हैं. इन लाल रक्त कणों के अंदर हीमोग्लोबिन भरा होता है. लाल रक्त कणों की प्रत्येक तश्तरी के अंदर 30-35 प्रतिशत भाग हीमोग्लोबिन का होता है. अस्थिमज्जा में ही विटामिन बी-6 यानी पाइरिडॉक्सिन की उपस्थिति में लोहा, ग्लाइलिन नामक एमिनो एसिड से संयोग कर 'हीम' नामक यौगिक बनाता है, जो ग्लोबिन नामक प्रोटीन से मिलकर हीमोग्लोबिन बनता है. इससे स्पष्ट है कि हीमोग्लोबिन, रक्त का मुख्य प्रोटीन तत्व है. हीमोग्लोबिन की समुचित मात्रा पुरुष व महिला में क्रमशः 15 ग्राम और 13.6 ग्राम प्रति एक सौ ग्राम मिलीलीटर रक्त में होती है.

हीमोग्लोबिन का स्तर-
ह्यूमन बॉडी के कुल वजन का 0.004 प्रतिशत भाग आयरन होता है. इसकी कुल मात्रा बॉडी के वजन के अनुसार 3 से 5 ग्राम होती है. इसका 70 प्रतिशत भाग ब्लड में लाल कणों के अंदर मौजूद हीमोग्लोबिन में, 4 प्रतिशत भाग मांसपेशियों के प्रोटीन मायोग्लोबिन में, 25 प्रतिशत भाग लीवर में, बोन मेरो, प्लीहा और किडनी में संचित भंडार के रूप में तथा शेष 1 प्रतिशत भाग ब्लड प्लाज्मा के तरल अंश और कोशिकाओं के एंजाइम्स में रहता है. आक्सीकृत हीमोग्लोबिन की ऑक्सीकरण स्थिति निश्चित करना कठिन है, क्योंकि प्रायौगिक मापन से आक्सीहीमोग्लोबिन (एचबी-ओटू) डायामैग्नेटिक होती है (कोई अयुगल इलेक्ट्रान नहीं होते), फिर भी आक्सीजन और आयरन दोनों में लो एनर्जी वाली इलेक्ट्रान संरचनाएं पैरामैग्नेटिक होती हैं (यानी इस यौगिक में कम से कम एक अयुगल इलेक्ट्रान होता है).

She is anaemic. Her mpv is 10.5, pcv 34.4, mch 25.9, rdw 15.4, absolute basophil count is 0 as per the last cbc report. Is it something serious. please clarify because we are worried. Is it a symptom of early sign of cancer or is it a infection or immune disorder. What should we do n which doctor we should seek. Recently doctor suggested her to get a dose of 1 unit blood as she got faint.

MD - Homeopathy, BHMS
Homeopath, Vadodara
She is anaemic. Her mpv is 10.5, pcv 34.4, mch 25.9, rdw 15.4, absolute basophil count is 0 as per the last cbc repor...
Hello Lybrate-User, First of all the most important reading is hb which you have not given. And most of the test you mention does not help to diagnose cancer. It can help to identify deficiencies of iron or vitamin b12. Better consult with proper details for further guidance and homoeopathic treatment.
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I'm a 30 years old unmarried woman. My hb is just 5.6 and my doctor suggested having manoll health tonic for a month. Do I need to take some iron supplements too?

DM - Clinical Haematology, MD - General Medicine, MBBS
Hematologist, Durgapur
I'm a 30 years old unmarried woman. My hb is just 5.6 and my doctor suggested having manoll health tonic for a month....
Hb 5.6 is too low, and you definitely need some treatment other than tonic. Though iron deficiency is the most common cause for anemia, but there are other important and serious causes of anemia including thalssemia and hemolytic anemia, which must be ruled out by clinical examination and proper blood tests. So before taking iron tablets, you must consult with hematologist at once for proper diagnosis and rapid treatment according to the test results. Hope it will clarify your doubts. Thanks.
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