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How To Stop Early Skin Aging?

Dermatologist, Delhi
How To Stop Early Skin Aging?

Aging of the skin is a natural process that affects all individuals with increasing age. It manifests itself in the form of skin wrinkling, sagging, discoloration and other visible effects. Such changes become more apparent as soon as one reaches late thirties or early forties but early onsets are now very common too, which can be caused by a number of factors.
Damage due to sun exposure is the primary cause of skin aging. It especially affects those who have lighter or fairer skin as the low melanin content in their skin makes it more prone to damage and aging.
Although skin aging cannot be entirely stopped or reversed, the process can be slowed down to prevent its early onset.

There are many ways of doing so through some simple lifestyle modifications such as the following:

1. Avoid sun exposure

This is the most basic way of reducing the rate of skin aging and slowing down the process. While going out in the day cannot always be avoided, it is important to keep the skin covered with clothing, hats and sunglasses.

2. Always wear sunscreen

This provides protection from the harmful rays of the sun (known as UVA and UVB). Making a habit of constantly applying sunscreen on all exposed parts of skin plays an important role in preventing skin aging. It is also necessary to use the right products, which should have an SPF rating or 30 or more.

3. Eat healthy

Having a nutritious balanced diet can make a tremendous positive impact on your skin. Consumption of food items that are rich in vitamins, minerals and other nutrients is essential. It is also important to drink lots of water and fluids to stay hydrated. Junk food and sugary drinks should be avoided as it negatively affects skin health.

4. Exercise regularly

Keeping fit through regular workouts and exercise improves the circulation of blood in the body and consequently, the supply of blood and oxygen to the skin. This keeps the skin healthy and young and prevents the early onset of wrinkling and aging.

There are several other ways of preventing skin aging such as not smoking, avoiding using too many products and cosmetics, getting enough sleep, and always keeping skin cleansed and moisturized. Following these simple ways can effectively make your skin look and feel younger and slow down the aging process.

भांग कैसे बनती है - Bhang Kaise Banti Hai!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
भांग कैसे बनती है  - Bhang Kaise Banti Hai!

होली का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आता है वैसे ही हमारे मन में रंगों के साथ साथ भांग का घोटा और भांग से बने पकवान का स्वाद लेने के लिए मन में लालच आ जाता है. भांग हमारे देश में खास कर उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है. भांग के बिना होली मानो अधूरी सी लगती है. इसका उपयोग आम तौर पर खाने में, भांग की गोली और भांग की ठंडाई के रूप में किया जाता है. भांग का घोटा पी कर होली में नाचने का मजा ही कुछ और होता है . तो आज ही लेख में हम भांग कैसे बनती है, भांग का घोटा क्या होता है और भांग का नशा उतरने की दवा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं तो आइए जानते हैं कि भांग कैसे बनती है और भांग का नशा उतारने की दवा क्या है साथ ही साथ भांग का घोटा बनाने की विधि क्या है?

भांग का घोटा क्या है-
भांग एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में जाने वाली जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है. भांग के पेड़ की लम्बाई 3 से 7 फीट की होती है. भांग आमतौर पर भांग के पेड़ की पत्तियों से लिया जाता है. इसका उपयोग विभिन्न प्रकार से की जाती है जैसे भांग की ठंडाई, भांग का घोटा और खाने में. भांग कैसे बनती है और ये कितने तरीके से इस्तेमाल किया जाता है इसके बारे में निम्न विस्तार से बताया गया है.

भांग का घोटा बनाने के विधि:-
भांग को घोटा बनाने के लिए हरे पत्तियों के पाउडर को दही और मट्ठे के साथ मिक्स कर के तैयार की जाती है. इसका सही तरह से मिश्रण करने के लिए हाथों से अच्छे तरह से मथा जाता है. यह बेहद स्वादिष्ट और ताज़ा होता है. इसके साथ ही कहीं-कहीं भांग के पकौड़े भी खाए जाते है.

भांग का घोटा के अलावा यह गोली और ठंडाई के रूप में भी इस्तेमाल की जाती है. भांग की गोलियां होली के दौरान व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती है. भांग की गोलियां भांग को पानी के साथ मिक्स कर के बनाया जाता है. हालाँकि, इसके खाने के कई साइड इफेक्ट्स भी है. इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में और प्रतिदिन नहीं करना चाहिए. भारत में यह जगहों पर इसे बैन कर दिया गया है. 

भांग में शामिल होने वाली सामग्री- 

  • आधा लीटर पानी 
  • आधा कप चीनी 
  • एक कप दूध 
  • एक चमच बादाम
  • 10 से 15 भांग की गोलियां 
  • आधा चम्मच इलायची 

होली के दौरान भांग का अलग ही महत्व होता है लेकिन यदि भांग का सेवन सीमित मात्रा से ज्यादा कर लिया जाए, तो भांग का नशा बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है. तो आइए जानते है कि भांग का नशा कैसे उतारा जाता है और भांग का नशा उतारने की दवा क्या है.
1. भांग का नशा उतारने के लिए खट्टे पदार्थो का सेवन करें
यदि भांगा का नशा ज्यादा हो जाए तो जितना हो सकता है खट्टे पदार्थों का सेवन करें जैसे की नीम्बू का रस, दही, छाछ, इमली आदि. इससे नशा जल्दी उतर जाता है. 

2. भांग का नशा उतारने  के लिए घी का सेवन भी बहुत कारगर सिद्ध हो सकता है. यह नशे को बहुत हद्द तक कम कर सकती है. 

3. भांग का नशे उतारने के लिए भुने हुए चने या नारंगी का सेवन भी कर सकते है.

4. नारियल पानी भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है. यह आपके बॉडी में मीनरल और इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा बढ़ाता है जिससे भांग का प्रभाव जल्दी कम हो जाता है और नशा उतर जाता है.

5. यदि आप भांग के नशे से बेहोश हो गए तो सरसों के तेल को थोड़ा गुनगुना कर, कान में डालने से बेहोशी दूर हो जाती है और व्यक्ति होश में आ जाता है.

6. अदरक भी भांग का नशा उतारने में सहायक हो सकती है.

भांग पीने के साइड इफेक्ट - Bhang Pine Ke Side Effect!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
भांग पीने के साइड इफेक्ट - Bhang Pine Ke Side Effect!

वैसे तो भांग एक औषधि है, लेकिन इसका गलत उपयोग काफी बढ़ी मात्रा में किया जाता रहा है. ऐसे लोगों की संख्या काफी बड़ी है जो भांग का सेवन ज्यादा मात्रा में नशा करने के लिए करते है. जिसके चलते उन्हें ज्यादा भांग पीने के साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ता है. जबकि भारत के परिपेक्ष की बात करें, तो भांग का उपयोग होली के त्यौहार पर अधिक मात्रा में होता है. 

जहाँ लोग भांग के पकौड़े और भांग की ठंडाई आदि बनाते है और इनका सेवन करने वाले लोगों को पता नही होता है कि भांग का नशा कितने दिन तक रहता है या भांग पीने के साइड इफेक्ट क्या होते है. लेकिन इस लेख में हम आपको बताएंगे भांग का नशा कितने दिन तक रहता है, तो आपको बता दें कि किसी भी नशे को उतारने के लिए नींबू का उपयोग सबसे बेहतर बताया गया है. 

नींबू का इस्तेमाल - इसके लिए आप नशे में लिप्त व्यक्ति को नींबू का रस चटा सकते है. इससे भांग का नशा थोड़ा कम हो जाता है.

दही का उपयोग - अगर आप भांग का नशा उतारना चाहते है, तो इसके लिए जरूरी है दही का उपयोग, लेकिन याद रहें कि भांग के नशे से ग्रसित व्यक्ति को किसी भी प्रकार के पेय में मीठा मिलाकर न दें क्योंकि किसी भी मीठी चीज़ का उपयोग करने पर भांग का नशा ज्यादा चढ़ जाता है.

इन सभी के अलावा भांग पीने के साइड इफेक्ट की बात करें तो इससें -

  • किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है. 
  • प्रेगनेंट महिलाओं की बात करें, तो उनके भूण पर बूरा असर पड़ता है.
  • बातें भूल जाना, ज्यादा भांग पीने के साइड इफेक्ट के कारण होता है.
  • इसके अलावा आँखों के लिए भी भांग को अच्छा नही माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद यौगिक आँख के अलावा कान और पेट की समस्या भी पैदा करते है.
  • कुछ लोगों में देखा गया है कि भांग पीने के बाद उन्हें चिंता, मतिभ्रम, भय और भ्रम आदि का सामना करना पड़ सकता है.
  • अगर छात्रों द्वारा इसका प्रयोग किया जाता है तो उन्हें पढ़ाई करने में परेशानी हो सकती है.
  • इन सभी के अलावा उल्टी, घबराहट, अधिक खाने की इच्छा या भूख न लगना, क्रोध बढ़ना, चिड़चिड़ापन आदि भांग पीने के साइड इफेक्ट है.
  • इन सभी के अलावा दिन में सपने देखना भांग पीने के साइड इफेक्ट में से एक है.

आम परिपेक्ष में देखा जाए तो होली के समय में लोग भांग के नशे में कई न की जाने वाली चीज़े भी करते है. जिसमें दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार न करना शामिल है. अगर बात करें, कि भांग का नशा कितने दिन तक रहता है तो यह आपके द्वारा ली गई भांग के सेवन पर करती है. इसके अधिक सेवन से शरीर में खून का दौरा तेज़ हो जाता है. जिसके चलते लोगों का उनके नर्वस सिस्टम पर कंट्रोल नही रहता है, जिसके चलते व्यक्ति या तो हंसता रहता है या वह रोने लगता है. काफी लोग मौज़ मस्ती के लिए भी ऐसे काम करते है.

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Bhaang Ka Nasha Utarne Ke Upay - भांग के प्रभाव और नशा उतारने के उपाय!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
Bhaang Ka Nasha Utarne Ke Upay - भांग के प्रभाव और नशा उतारने के उपाय!

होली को रंगों का त्यौहार माना जाता है, इस पर्व के दौरान लोग रंग और गुलाल के साथ तो खेलते ही है साथ में विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भी लुत्फ़ उठाते है. इन सब के बीच एक और ऐसी चीज है जिसके बिना होली का मजा अधुरा रह जाता है. यदि आपके मन में भांग और ठंडाई का नाम आया है तो बिल्कुल सही सोच रहे हैं. हम भांग की ही बात कर रहे हैं. होली का मौका हो और भांग और ठंडाई न पी जाए, तो यह बात हजम नहीं होती है.

भारत के उत्तर प्रांत के राज्यों में होली के दिन भांग पीने की बहुत पुरानी प्रथा है. भांग पीने के कई भांग के बिना होली भले ही अधुरा रह जाता हो, लेकिन इससे भी ज्यादा परेशानी की बात तब हो सकती है जब भांग के प्रभाव ज्यादा हो जाता है और आपके रोज के दिनचर्या और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित होता है. इसलिए भांग का सेवन करें लेकिन इसका भी ख्याल रखें की भांग का नशा आपके दिनचर्या को प्रभावित ना करें.

हालाँकि, भांग में कई तरह के औषधीय गुण भी होते है जो आपको कई गंभीर बिमारियों में इलाज के रूप में उपयोग किया जाता है. भांग के प्रभाव से होने वाले फायदों में निम्न बीमारियां शामिल है:-

  1. ग्लूकोमा- भांग के सेवन से ग्लूकोमा के लक्षण ठीक होते है.
  2. कैंसर- भांग का उपयोग कई कैंसर को ठीक करने के लिए दवाओं में उपयोग किया जाता है. भांग कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता है.
  3. कान की समस्या- भांग के 8 से 10 बूँद रस को कान में डालने से कान की समस्या ठीक हो जाती है.
  4. अस्थमा- भांग को जला कर उसके धुंए को सूंघने से अस्थमा की समस्या से लाभ मिलता है.

ऐसे कई लोग हैं जिनको भांग हज़म नहीं होती, वे कई दिनों तक भांग के हैंगओवर से उबर नहीं पाते हैं. यह स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो सकती है की आपको हस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है. आमतौर पर भांग खाने पर नर्वस सिस्टम का नियंत्रण नहीं रहता है इसलिए लोग अपने किसी भी एक्टिविटी को कंट्रोल नहीं कर पाते. जब आपको भांग का हैंगओवर होता है तो आपको कई तरह के लक्षण अनुभव होंगे. जिसमे निम्नलिखित शामिल है:-

  1. असामान्य रूप से हंसना
  2. अचानक रोने लग जाना 
  3. बहुत ज्यादा नींद आना
  4. अत्यधिक भूख लगना
  5. बहुत अधिक भांग खाने से याद रखने में असमर्थता 
  6. भांग खाने के दौरान कई लोग आँख खोल कर सोते है, जो बहुत ही गंभीर स्थिति होती है.

भांग का नशा उतारने के उपाय में सबसे बेहतर घरेलू नुस्खे को अपनाना है. इसके लिए आप खटाई, दही, नींबू छाछ, या फिर इमली का इस्तेमाल कर सकते है. भांग का हैंगओवर आपके बॉडी में कमजोरी, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द की समस्या से दो चार होना पड़ सकता है.  इन समस्याओं से निजात पाने के घरेलू उपाय के साथ आयुर्वेदिक उपाय सबसे बेहतर तरीका है. 

भांग का हैंगओवर उतारने के घरेलू तरीके-

  1. भांग हैंगओवर लक्षण दिखने और नशा हो जाने पर उतारने के तरीके में  250 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक घी का सेवन करें. यह उपाय बहुत फायदेमंद साबित होते है.
  2. भांग का हैंगओवर उतारने के घरेलू तरीके लिए खटाई का सेवन भी एक कारगर तरीका है. इसके साथ आप कोई भी खट्टा पदार्थ जैसे निम्बू, दही, इमली का पानी भी ले सकते है.
  3. अगर कोई भांग हैंगओवर उतारने के लिए बेसुध पड़े व्यक्ति के कान में सरसों का तेल हल्का गुनगुना कर ले. एक दो बूँद तेल प्रभावित व्यक्ति के कान में डालें.
  4. सफेद मक्खन भी भांग का हैंगओवर उतारने के उपायों में काफी फायदेमंद साबित होता है. 
  5. भांग का सेवन किसे नहीं करना चाहिए 

बच्चों को भांग का सेवन नहीं करना चाहिए, यह उनके एकग्रता में कमी ला सकता है.

  1. जो लोग रोजाना काम पर जाते हैं उनके लिए भी भांग फायदेमंद नहीं है, क्योंकि यह उनके दिनचर्या के काम को प्रभावित कर सकता है. वह अपने काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं.
  2. गर्भवती महिलायों को भी भांग के सेवन से परहेज करना चाहिए, यह गर्भपात जैसी परिस्थिति का भी कारन बन सकती है.
  3. ऐसे लोग जो मानसिक समस्या से पीड़ित है, वे भी भांग के सेवन से दूर रहें. भांग के प्रभाव उनके लिए भी नुकसानदायक सिद्ध हो सकते है.

भांग के पकौड़े बनाने की विधि - Bhaang Ke Pakode Kaise Banaye!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
भांग के पकौड़े बनाने की विधि - Bhaang Ke Pakode Kaise Banaye!

भारतीय प्राचीन चिकित्सा प्रणाली जिसे आयुर्वेदिक चिकित्सा के नाम से भी जाना जाता है. इसमें लगभग हर पेड़ या फल के स्वास्थ लाभ बताए गए है, साथ ही अलग-अलग स्वास्थ स्थितियों के लिए उनका प्रयोग और रोगों का उपचार भी बताया गया है. अगर आज के परिपेक्ष को देखें, तो आयुर्वेद उपचार को लेकर लोगों में विशेषकर रूचि है, जिसके चलते उपचार के इस तरीके की ओर लोगों का रूझान बढ़ रहा है.

लगभग हर भारतीय रसोई में प्रयोग की जाने वाली हल्दी, अजवाइन, धनीया, अदरक, नींबू आदि फलों के आयुर्वेद में कई लाभ बताए गए है. उन्हीं में से एक बेहतरीन स्वास्थ लाभ प्रदान करने वाली एक तरह की खाद्य प्रदार्थ, भांग होती है, जो प्राकृतिक होती है. इसके पेड़ और पत्ते आदि होते है, जिन्हें पीसकर कई तरह के खाद्य आदि प्रदार्थोंं में इसे उपयोग किया जाता है. विशेषकर भांग का प्रयोग होली के समय ज्यादा होता है. होली जैसे खुशी के त्यौहार पर कई लोग भांग के पकौड़े आदि जैसे पकवान तैयार करते है.

जबकि भांग के फायदे और नुकसान दोनों ही होते है. भांग के फायदे की बात करें तो इसका उपयोग सिरदर्द में किया जाता है. इसके लिए जरूरी है कि रोगी भांग के पत्तों को सूंघें.अगर बात करें मलेरिया जैसे रोग कि तो इसमें भी भांग बहुत उपयोगी सिद्ध होती है. इसके लिए भांग के एक ग्राम पाउडर में 2 ग्राम गुड़ मिला लें और उसकी 4 गोलियां बना लें. मलेरिया में बुखार आने से पहले इन्हीं में से एक गोली का सेवन करने से काफी राहत मिलती है.  

इसके अलावा भांग के फायदे की बात करें तो आँखों की समस्याओं में भी भांग काफी राहत प्रदान करती है. ग्लूकोमा जिसे मोतियाबिंद के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें आँख की नसें कमज़ोर हो जाती है. ग्लूकोमा जैसी स्थिति में भांग काफी लाभ प्रदान करती है. इससे आँखों की नस मजबूत होती है. 

इसके अलावा भांग के पत्ते का रस माथे पर लगाने से रूसी की समस्या से छुटकारा मिल जाता है. इसके अलावा भांग की ठंडाई के सेवन से मूत्र की जलन मिट जाती है. इसके अलावा भांग के पाउडर और गुड़ मिलाकर सेवन करने से पेट साफ रहता है. इन सभी के अलावा कान का दर्द जैसी स्थितियों में भी आप भांग के पेस्ट को आग में पिघलाकर कान में डाल सकते है, जिससे कान में कीड़े जैसी समस्या दूर रहती है. 

अगर आमतौर पर बात करें तो भांग के पकौड़े और भांग की ठंडाई सिर्फ होली जैसे त्यौहार पर ही ज्यादा प्रचलित होती दिखती है. सही मात्रा में सेवन करने पर इसके कई स्वास्थ लाभ होते है. भांग के पकौड़े की बात करें, तो भारत में होली के त्यौहार के समय भांग का प्रयोग काफी लंबे समय से किया जा रहा है. साथ ही भांग की ठंडाई और भांग के पकौड़े का भी सेवन किया जाता है. लेकिन बहुत से लोगों को यह पता नही होता कि भांग के पकौड़े कैसे बनाए ? तो आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे भांग के पकौड़े बनाने की विधि, जो इस प्रकार -

भांग के पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले आपके पास जरूरी सामग्री होनी चाहिए. जिसमें 

  • चने की आटा
  • हल्दी
  • लाल मिर्च पाउडर
  • कूकिंग ऑयल
  • आलू जिन्हें आपको गोल काटना होगा
  • प्याज़ को गोल काटे
  • थोड़ा भांग की पत्ती का पेस्ट
  • नमक
  • आमचुर

भांग के पकौड़े तैयार करने के लिए सबसे पहले -
सभी चीज़ों को मिलाकर मिश्रण बना लें और इसका पेस्ट तैयार कर लें.
अब पेस्ट में आलू और प्याज़ के कटे हुए पीस मिक्स कर लें. 
कढ़ाई में तेल को गर्म कर लें और पेस्ट को उसमें डालकर भूरा होनी तक फ्राई करें.

भांग के पकौड़े बनाने की विधि में कुल 40 मिनट तक का समय लगता है.

मानसिक तनाव के लक्षण - Mansik Tanaw Ke Lakshan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मानसिक तनाव के लक्षण - Mansik Tanaw Ke Lakshan!

मानसिक तनाव आज के भागदौड़ से भरे जीवन की एक कड़वी सच्चाई है. इस रोग की सबसे हैरान करने वाली बात है इससे इनकार करना या इसे लेकर जागरूकता की घोर कमी. दरअसल हमारे यहाँ ऐसी मानसिकता निर्मित हो गई है कि मानसिक बिमारी को हम शर्मिंदगी से जोड़ कर देखते हैं. जबकि इस चक्कर में न जाने कितना नुकसान हो जाता है. कई लोग तो इसके लक्षणों को भी नहीं जानते हैं जिससे कि इसकी पहचान करके इसका इलाज करा सकें. आइए इस लेख के माध्यम से हम मानसिक तनाव के लक्षणों पर एक नजर डालें.

याद्दाश्त संबंधी-

लक्षणों में भूलना, सीमित सामाजिक मेलमिलाप और सोचने की कमज़ोर क्षमता शामिल हैं, जिससे रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित होते हैं. याददाश्त जाना, समय के साथ दिमाग का कम काम करना, ठीक से बोलने और समझने में परेशानी, बातें बनाना, भटकाव, शाम के समय भ्रम की स्थिति, सामान्य चीज़ें न पहचान पाना, या सुध-बुध खोना.

भावनात्मक कमजोरी-
उदासी या दिलचस्पी खोने की सतत भावना जैसी गंभीर अवसाद की विशेषताएं कई व्यावहारिक और शारीरिक लक्षणों की ओर ले जा सकती हैं. इनमें नींद, भूख, ऊर्जा स्तर, एकाग्रता, दैनिक व्यवहार, या आत्मसम्मान में परिवर्तन शामिल हो सकते हैं. अवसाद आत्महत्या के विचार के साथ भी जुड़ा हो सकता है.

ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता-
लक्षणों में किसी बात में कम ध्यान दे पाना और अति-सक्रियता शामिल हैं. व्यवहार संबंधी: अतिसक्रियता, अत्यधिक संवेदनशीलता, आक्रामकता, खुद पर नियंत्रण में कमी, चिड़चिड़ापन, बिना सोचे-समझे जल्दबाज़ी में काम करना, बेचैनी से शरीर हिलाना-डुलाना, या शब्दों या क्रियाओं को लगातार दोहराना.

जुनूनी बाध्यकारी विकार-
ओसीडी अक्‍सर कीटाणुओं के डर या चीज़ों को रखने के एक ख़ास तरीके जैसे विषयों पर केंद्रित होता है. लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होते हैं और जीवन भर बदलते रहते हैं. लगातार कुछ करने से खुद को रोक न पाना, किसी काम को करने के अपने तरीके से हटकर काम ना कर पाना, खुद के शब्दों को बेमतलब दोहराना, गतिविधियों को दोहराना, चीज़ें जमा करने से खुद को रोक न पाना, बिना सोचे-समझे जल्दबाज़ी में काम करना, व्याकुलता, शब्दों या क्रियाओं को लगातार दोहराना, सामाजिक अलगाव, या ज़रूरत से ज़्यादा सतर्कता बरतना.

द्विध्रुवी विकार-
उन्मादी होने पर रोगी में अत्यधिक ऊर्जा, नींद की ज़रूरत महसूस न होने, वास्तविकता से नाता न रखने जैसे लक्षण होते हैं. अवसाद से घिरने पर रोगी में ऊर्जा की कमी, खुद को प्रेरित न कर पाना और दैनिक गतिविधियों में रुचि न होने जैसे लक्षण मिल सकते हैं. मिज़ाज बदलते रहने की ये प्रक्रिया एक बार में कई दिनों से लेकर महीनों तक चलती है और इसमें आत्महत्या करने जैसे विचार भी आ सकते हैं.

अलग-अलग लोगों में लक्षणों की सीमा और गंभीरता बहुत ज़्यादा अलग हो सकती हैं. आम लक्षणों में शामिल हैं बातचीत करने में कठिनाई, सामाजिक रूप से जुड़ने में कठिनाई, जुनूनी दिलचस्पियां और बार-बार दोहराने का व्यवहार. अनुपयुक्त सामाजिक संपर्क, आंखों से आंखें कम मिलाना, खुद को नुकसान पहुंचाना, गतिविधियों को दोहराना, बिना सोचे-समझे जल्दबाज़ी में काम करना, लगातार कुछ करने से खुद को रोक न पाना, या शब्दों या क्रियाओं को लगातार दोहराना.

सच्चाई से परे दिखाई देने वाले विचार या अनुभव-
स्किज़ोफ्रेनिया के लक्षणों में सच्चाई से परे दिखाई देने वाले विचार या अनुभव होना, अव्यवस्थित बोलना या व्यवहार करना, और दैनिक गतिविधियों में कम भाग लेना शामिल हैं. ध्यान केंद्रित करने और बातें याद रखने में कठिनाई भी मौजूद हो सकती है. बेतरतीब व्यवहार, सामाजिक अलगाव, अत्यधिक संवेदनशीलता, आक्रामकता, खुद को नुकसान पहुंचाना, खुद पर नियंत्रण में कमी, गतिविधियों को दोहराना, दुश्मनी, लगातार कुछ करने से खुद को रोक न पाना, या व्याकुलता.

लक्षणों में मामूली घटना के लिए भी बहुत ज़्यादा तनाव होना, चिंता करना छोड़ न पाना और बेचैनी शामिल हैं. थकान, पसीना आना, या बेचैनी. चिड़चिड़ापन या ज़रूरत से ज़्यादा सतर्कता बरतना. अनचाहे खयाल या विचारों का बहुत जल्दी-जल्दी आना या बदलना. चिंता सताना, अत्यधिक चिंता, कमजोर एकाग्रता, धकधकी, निकट भविष्य में विनाश की आशंका, नींद न आना,
भय, मतली, या विकंप.

बुरे सपने या पुरानी यादों की अनुभूति-
लक्षणों में बुरे सपने या पुरानी यादों की अनुभूति, आघात में वापस ले जाने वाली स्थितियों से दूर रहने की कोशिश, उत्तेजित होने पर ज़रुरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया, चिंता या फ़िर खराब मूड शामिल हो सकते हैं. चिड़चिड़ापन, व्याकुलता, खुद का विनाश करने वाला व्यवहार, दुश्मनी, सामाजिक अलगाव, या ज़रूरत से ज़्यादा सतर्कता बरतना. पहले हुई किसी घटना को अचानक, बिना इच्छा के, फिर से अनुभव करना, गंभीर रूप से चिंता करना, डर, या संदेह. गतिविधियों में रुचि न होना या आनंद न आना, अकेलापन, या अपराधबोध. अनिद्रा या बुरे सपने, अनचाहे विचार या संवेगात्मक अनासक्‍ति.

अवसाद का आयुर्वेदिक इलाज - Awsad Ka Ayurvedic Ilaj!

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Ayurveda, Lakhimpur Kheri
अवसाद का आयुर्वेदिक इलाज - Awsad Ka Ayurvedic Ilaj!

अवसाद को आप डिप्रेशन, तनाव या चिंता में डूबा रहना भी कह सकते हैं. दुर्भाग्य से इस बीमारी के शुरुआत में या तो हमें पता नहीं चल पाता है या फिर हम इस तरफ ध्यान नहीं दे पाते हैं. यदि हम डिप्रेशन के लक्षण की बात करें तो इसमें अनिद्रा, उदासी, वजन का अत्यधिक कम या ज्यादा होना, आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करना एकाग्रता में कमी इसका प्रमुख लक्षण है. आइए इस बिमारी के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानें.
अवसाद की स्थिति और नींद का महत्व-

1. नींद की कमी बिमारी का घर-

यदि आप सोने में कोताही करते हैं या पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो आप कई बीमारियों को आमंत्रित कर रहे हैं. कहते हैं न कि चैन से सोना है तो जाग जाइए. जब आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो आपको कई बीमारियाँ जैसे कि याद्दाश्त कमजोर होना, उच्च रक्त चाप, आँखों में सुजन, कमजोरी, थकान, मोटापा, तनाव आदि अपना शिकार बना सकती हैं. इसलिए बेहतर यही है कि आप भरपूर नींद लेने को गंभीरता से लें और पर्याप्त नींद लें.

2. बच्चों में नींद की कमी का असर और डिप्रेशन-
किशोरों या बच्चों की मानसिकता पर पर्याप्त नींद न लेने का दुष्प्रभाव उनके आत्मविश्वास पर पड़ता है. अक्सर ऐसा देखा गया है कि आठ घंटे से कम नींद लेने वाले किशोर नशे या स्मोकिंग की चपेट में होते हैं. कई बच्चे इसके दुष्प्रभाव से डिप्रेशन में भी चले जाते हैं. ऐसा होने पर कई बार बच्चे उग्र भी हो जाते हैं. एक शोध में यह पाया गया कि प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की नींद लेने वाले 4.5 घंटे से कम सोने वालों की तुलना में लम्बी उम्र जीते हैं. तो बच्चों को भी पर्याप्त सुलाएं.

3. नींद और वजन का संबंध-
शोधकर्ताओं के अनुसार कम सोने वाले लोगों का वजन पर्याप्त नींद लेने वालों से ज्यादा होता है. ये भी पाया गया है कि पांच घंटे की नींद लेने वाले लोगों में भूख बढ़ाने वाला हार्मोन 15 फीसदी अधिक बनता है. लेकिन आठ घंटे की नींद लेने वाले लोगों में यह हार्मोन जरूरत के अनुसार ही बनता है. जाहिर है इससे आप मोटापे के शिकार होते हैं और डिप्रेशन की तरफ बढ़ चलते हैं.

4. डिप्रेशन, नींद और सेहत-
ये तो आपने भी महसूस किया ही होगा कि जब आप गहरी नींद से सोकर उठते हैं तो आपको एक ताजगी का एहसास होता है. और पर्याप्त नींद न लेने पर दिमाग भन्नाया रहता है. दरअसल पर्याप्त नींद लेने पर हमारे शारीर में रोगों से लड़ने वाली कोशिकाएं भी ठीक तरीके से काम करती हैं. जिससे कि आप कई अनावश्यक बीमारियों से तो बचते ही हैं साथ में आपकी कार्यक्षमता में भी बढ़ोतरी होती है.

आयुर्वेदिक उपचार-

1. काजू-

डिप्रेशन को ठीक करने में तंत्रिकातंत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. इसमें विटामिन बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और ये विटामिन ही तंत्रिका तंत्र को ठीक रखता है. इसके साथ ही काजू आपके शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ाकर आपको सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. काजू ये ये सभी गुण आपको डिप्रेशन से दूर रखेंगे.

2. अंडे-
प्रोटीन के भण्डार अंडा में डीएचए भी पाया जाता है. आपको बता दें कि डीएचए पचास फीसदी डिप्रेशन को ठीक कर सकता है. अंडा न सिर्फ डिप्रेशन को ठीक करेगा बल्कि आपको निरोग रखने में भी मदद करता है.

3. सेब-
सेब के फायदे तो सबने ही सुन रखे होंगे. तमाम पौष्टिक गुणों से भरपूर सेब आपके मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखता है. इसमें पाया जाने वाले विटामिन बी, फास्फोरस और पोटैशियम मिलकर ग्लूटामिक एसिड का निर्माण करते हैं. ये एसिड मानसिक स्वस्थ्य ठीक रखता है.

4. आयरन युक्त भोजन-
हमारे शरीर में आयरन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है. लेकिन कई लोगों में आयरन की कमी होती है खासकरके लड़कियों में. तो ऐसे में इसका सबसे अच्छा तरीका है कि आपको आयरनयुक्त भोजन करना चाहिए. इससे आपमें आयरन लेवल तो ठीक रहता ही है, साथ में आपका मूड भी ठीक रहता है. इस तरह आप डिप्रेशन से बच जाते हैं. आयरन के लिए सबसे अच्छा स्त्रोत पालक है.

5. इलायची-
आप खुद को तरोताजा रखने के लिए इलायची का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आपको बस इतना करना है कि इलायची के पिसे हुए बीज को पानी के साथ उबाल कर या चाय के साथ लें. इससे आपका मूड फ्रेश हो जाएगा.

मासिक धर्म में देरी के कारण - Masik Dharm Mein Deri Ke Karan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मासिक धर्म में देरी के कारण - Masik Dharm Mein Deri Ke Karan!

महिलाओं मासिक धर्म संबंधी अनियमितता एक सामान्य समस्या है. कई बार पीरियड नहीं आने या बंद होने के कुछ और भी कारण होते हैं, लेकिन महिलाओं को इस बात का डर बैठ जाता है कि कहीं फिर से प्रेग्नेंसी तो नहीं आ गयी. यह डर महिलाओं में तनाव को बढ़ाता है. माहावारी के दौरान महिलाओं में डिप्रेशन, पेट दर्द होना सामान्य है. इस प्रक्रिया में अच्छा व बुरा संकेत होना भी प्राकृतिक प्रक्रिया है. माहवारी अचानक बंद होने पर महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है. यह कई अन्य कारणों से भी हो सकता है. शरीर में किसी भी प्रक्रिया का आनियामित रूप से चलना या उसका ठीक से काम नहीं करने के कई कारण हो सकते हैं. मासिक धर्म तो एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जिसका शरीर पर कई तरह का असर देखने को मिलता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम मासिक धर्म के रुकने को विस्तारपूर्वक समझें.

मासिक धर्म रुकने के विषय में क्या कहते हैं जानकार?
जानकारों का कहना है कि कारण जाने बगैर महिलाओं को तनाव नहीं लेना चाहिए. मासिक धर्म या मासिक धर्म महिलाओं में सामान्य प्रक्रिया है, इसके बंद होने के अन्य कारणों के बारे में सामान्यत: महिलाओं को जानकारी नहीं होती है. कम समय में वजन बढ़ा या घटा हो. शरीर में मलेरिया, टाइफाईड या जोन्डेस हुआ हों, तब मासिक धर्म बंद हो सकते हैं अथवा देरी से हो सकते हैं. इसके अलावा कोई बड़ा ऑपरेशन हुआ हो तो मासिक धर्म बंद हो सकते हैं. पिछले दो महीने में अगर वजन कम हो गया हो या 5-6 किलो बढ़ गया हो. कम समय में वजन में ज्यादा उतार-चढ़ाव से भी मासिक धर्म बंद हो सकते हैं. मानसिक तनाव या किसी की मृत्यु हो गयी या तलाक या किसी से बिछड़ने का तनाव भी इस समस्या को पैदा करता है. शादी के बाद ससुराल की चिंता या एन्जाइटी होने पर भी मासिक धर्म बंद हो सकते हैं.

थायराइड भी है एक कारण-
थाइराइड की समस्या बढ़ जाये या ओबेसिटी जैसी समस्या होने पर भी महिलाओं में पीरियड् बंद हो सकता है. इसके अलावा पोलिस्सिटिक ओवेरियन सिंड्रोम के कारण भी मासिक धर्म देरी से आते हैं. यह समस्या महिलाओं में ज्यादा दिखाई देती है. यह समस्या होने पर चेहरे व छाती पर बाल उगने लगते हैं. इसमें वजन बढ़ता जाता है. अगर महिला शादीशुदा है और बच्‍चा चाहती है तो उसे प्रेग्नेंसी में समस्या हो सकती है. कोई भी क्रोनिक समस्या हो जैसे लंबे समय तक लीवर या किडनी की समस्या हो. अपच या लूजमोशन की समस्या हो, तब भी मासिक धर्म देरी से आ सकते हैं.

गर्भनिरोधक गोलियों का लगातार सेवन-
गर्भ निरोधक गोलियों के लगातार सेवन से या एक साल से ज्यादा तक ये गोलियां लेने से दो तीन महीने तक मासिक धर्म बंद या एकदम हल्के हो सकते हैं. यह प्रक्रिया धीरे-धीरे सामान्य हो जायेगी. गर्भधारण करने में भी कोई समस्या नहीं आयेगी. प्री-मेच्योर मैनोपोज महिलाओं में कभी-कभी 40 साल की उम्र में भी आ जाता है. ऐसी स्थिति में अंडाकोश में अंडा बनना बंद हो जाता है. तब इसको प्री-मेच्योर ओवेरियन फेलियोर कहते हैं. इसमें मासिक धर्म बंद होने के साथ-साथ मैनोपोज के लक्षण भी दिखाई देंगे, जैसे बहुत तेज गर्मी लगना. पसीने अआना, वैजाइना में सूखापन लगना. यह संकेत बहुत कॉमन नहीं हैं. सही स्थिति की जानकारी डॉक्टर ही बता सकता है. इसके लिए हारमोन टेस्ट भी कराया जा सकता है. किसी अनुभवी/ स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही वास्तविक समस्या समझी जा सकती है. महिलाएं सही कारण जानें बगैर स्ट्रेस न लें.

मखाने के फायदे और नुकसान - Makhane Ke Fayde Aur Nuksan!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
मखाने के फायदे और नुकसान - Makhane Ke Fayde Aur Nuksan!

मखाना हमारे यहाँ एक जाना पहचान खाद्य पदार्थ है. ये भी उन खाद्य पदार्थों में से है जिनका हमारे यहाँ औषधीय और धार्मिक महत्त्व दोनों है. प्राचीन काल से ही इसका दोनों इस्तेमाल हमारे यहाँ प्रचलन में रहा है. इसका इस्तेमाल व्रत व धार्मिक पर्वों में किया जाता है. स्वाद में अच्छा लगने के साथ-साथ ये बहुत पौष्टिक और कई स्वास्थ्यववर्धक तत्वों से भरपूर होता है. पौष्टिकता के मामले में तो इसे बादाम और अखरोट से भी बेहतर समझा जाता है. इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस उच्च मात्रा में मौजूद होते हैं जबकि संतृप्त वसा, सोडियम और कोलेस्ट्रॉल जैसे तत्व भी थोड़ी मात्रा मेंपाए जाते हैं. इसके अलावा ये प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, लोहा और जिंक का भी एक अच्छा स्रोत है. आइए मखाने के फायदे और नुकसान पर एक नजर डालते हैं.

1. उच्च रक्तचाप में-

उच्चरक्तचाप में मखाना काफी उपयोगी साबित होता है क्योंकि इसमें पोटेशियम अच्छी-खासी मात्रा पाई जाती है. जाहिर है पोटेशियम रक्त प्रवाह को संचालित कर रक्त दवाब को कम करता है. इसके अलावा ये सोडियम पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है.

2. गर्भावस्था में-
गर्भवती महिलाओं के लिए मखाना एक बेहतरीन खाद्य विकल्प के रूप में है. इसके सेवन से माँ और शिशु दोनों को ही स्वस्थ रखने में मदद मिलती है. गर्भावस्था के बाद आने वाली कमज़ोरी को भगाने को दूर करने के लिए भी इसका सेवन किया जाता है.

3. दस्त में-
दस्त से परेशान व्यक्ति भी इसके सेवन से अपनी परेशानी दूर कर सकते है. इसके सेवन से दस्त में तो लाभ मिलेगा ही आपकी भूख भी बढ़ाएगा. क्योंकि ये एक क्षुधावर्धक भी है.

4. वज़न कम करने में-
अपने तमाम पौष्टिक पदार्थों की वजह से मखाना अपने अन्दर कई विशेषताएं समेटे हुए है. इन्हीं विशेषताओं में से एक है कि ये ऊर्जा का स्त्रोत होने के साथ ही हमारे शरीर में वसा की मात्रा में कमी लातें हैं और स्वस्थ वज़न का अनुरक्षण करते हैं.

5. सेहत के लिए-
पोषक और स्वास्थ्यवर्धक तत्वों से युक्त होने के कारण मखाने का उपयोग हम अपने सेहत को बेहतर बनाने के लिए भी कर सकते हैं. इसके सेवन से थकावट मिटने के साथ ही हमारा शरीर को ऊर्जा से भर जाता है.

6. कब्ज में-
कब्ज से पीड़ित व्यक्ति भी मखाने के सेवन से राहत महसूस करता है. दरअसल इसमें मौजूद फाइबर पाचन में सहायक होने के साथ ही कब्ज जैसी समस्याओं को भी दूर करता है.

7. झुर्रियों से छुटकारा में-
मखाने में पाए जाने वाले विटामिन्स और एंटीऑक्सिडेंट्स हमारे त्वचा के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होते हैं. ये सभी त्वचा को स्वस्थ करने के साथ ही त्वचा से झुर्रियों को भी ख़त्म करने का कम करते हैं जिससे कि आपकी ढलती उम्र के लक्षणों को भी छिपाने में मदद मिलती है.

8. मधुमेह के लिए-
शुगर जैसी बीमारी में मखाना अपने गुणों के कारण काफी उपयोगी साबित होता है. मखाने के नियमित सेवन से हमारे शरीर में रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित होता है. जिससे शुगर के मरीजों को काफी लाभ मिलता है.

9. यौन रोगों में-
मखाने के सेवन से वीर्यपात एवं शीघ्रपतन जैसे यौन रोगों में भी लाभ मिलता है. दरअसल ये एक कामोद्दीपक के रूप में कार्य करने के कारण सेक्स की इच्छा को बढ़ावा देता है. मखाना महिलाओं में भी यौन विकारों से मुक्ति दिलाकर बांझपन को दूर कर सकता है.

10. अनिद्रा में-
यह निद्रा संबंधित रोगों का एक प्रभावी उपचार उपलब्ध कराता है. यह तनाव को दूर करने के साथ ही शांतिपूर्ण निद्रा दिलाने में सहायक सिद्ध होता है. इसमें प्रशान्ति के गुण पाए जाने के कारण ये बेचैनी व घबराहट को भी कम करने में लाभदायक है.

मखाने के नुकसान-
* कब्ज में इसका ज़्यादा इस्तेमाल करने से आपका कब्ज खराब हो सकता है.
* कोई भी परेशानी आने पर तुरंत चिकित्सक का परामर्श लें.

Kya high bp ki dawa lifetime leni padti hai, ya kuchh time baad doctor ki help se band ho jata hai.

General Physician, Jaipur
Kya high bp ki dawa lifetime leni padti hai, ya kuchh time baad doctor ki help se band ho jata hai.
Yes its mostly for lifetime. But need to check regularly. Please consult with me on my private chat window for full details.
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