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Meenakshi Clinic

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By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have place......more
By combining excellent care with a state-of-the-art facility we strive to provide you with quality health care. We thank you for your interest in our services and the trust you have placed in us.
More about Meenakshi Clinic
Meenakshi Clinic is known for housing experienced General Physicians. Dr. Thangavelu M B, a well-reputed General Physician, practices in Chennai. Visit this medical health centre for General Physicians recommended by 109 patients.

Timings

MON-SAT
11:00 AM - 02:00 PM 06:00 PM - 10:00 PM

Location

#28 , Valluvar Street, Chennai
Chennai, Tamil Nadu
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Doctor in Meenakshi Clinic

Dr. Thangavelu M B

General Physician
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हेपेटाइटिस बी का आयुर्वेदिक इलाज - Hepatitis B Ka Ayurvedic Ilaj!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
हेपेटाइटिस बी का आयुर्वेदिक इलाज - Hepatitis B Ka Ayurvedic Ilaj!

हेपेटाइटिस बी एक वायरस है जो लिवर को संक्रमित करता है. ज्यादातर लोग इससे ग्रसित होने पर कुछ सामय बाद ही बेहतर महसूस करने लगते जिसे एक्यूट हेपेटाइटिस बी कहा जाता है. लेकिन कभी-कभी इन्फेक्शन लंबे समय तक भी रह सकता है जिसे क्रोनिक हेपेटाइटिस बी कहा जाता है. यह आपको लम्बे समय में लीवर को नुकसान पहुंचाता है. वायरस से संक्रमित शिशुओं और छोटे बच्चों को क्रोनिक हेपेटाइटिस होने का ज्यादा खतरा रहता है. कभी-कभार ऐसा भी होता है की आप हेपेटाइटिस बी से पीड़ित हो और आपको इस बीमारी का अनुभव तक नहीं होता. ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा संभव है कि इसके लक्षण दिखाई ना दें. यदि इसके लक्षण नज़र आते भी हैं तो वह फ्लू के लक्षण जैसे प्रतीत होते हैं. लेकिन इस स्थिति में भी आप इससे अपने आस-पास के लोगों को संक्रमित कर सकते हैं.

क्या है हेपेटाइटिस बी की बिमारी?
पीलिया या हेपेटाइटिस एक सामान्य लीवर डिसऑर्डर हैं, जो कई असामान्य चिकित्सा कारणों की वजह से से हो सकते हैं. पीलिया होने पर किसी व्यक्ति को सिर दर्द, लो-ग्रेड फीवर, मतली और उल्टी, भूख कम लगना, त्वचा में खुजली और थकान आदि लक्षण होते हैं. त्वचा और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है. इसमें मल पीला और मूत्र गाढ़ा हो जाता है. हालांकि ऐसे में कुछ घरेलू उपचार आपकी काफी मदद कर सकते हैं. आइए इस लेख के माध्यम से हेपेटाइटिस बी के इलाज के लिए कुछ घरेलू उपचारों के बारे में जानें.

1. मूली का रस व पत्ते
मूली के हरे पत्ते पीलिया में फायदेमंद होते है. मूली के रस में बहुत प्रभावी गुण होते है कि यह खून और लीवर से अत्‍यधिक बिलिरूबीन को निकाल देने में सक्षम होते है. पीलिया या हेपेटाइटिस में रोगी को दिन में 2 से 3 गिलास मूली का रस जरुर पीना चाहिये. इसके साथ ही पत्ते पीसकर उनका रस निकालकर और छानकर पीएं.

2. टमाटर का रस
टमाटर का रस पीलिया में बहुत फायदेमंद होता है. इसमें विटामिन सी पाया जाता है, जिस वजह से यह लाइकोपीन में समृद्ध होता होता है. इसके रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीएं.

3. आंवला
आवंले विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है. आप आमले को कच्‍चा या फिर सुखा कर भी खा सकते हैं. इसके अलावा जूस के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. इससे आपको संक्रमण से बहुत राहत मिल सकती है.

4. नींबू या पाइनएप्‍पल का जूस
नींबू का रस पीने से पेट साफ होता है. इसे रोज खाली पेट सुबह पीना पीलिया में लाभदायक होता है. इसके अवाला पाइनएप्‍पल भी लाभदायक होता है. पाइनएप्‍पल अंदर से पेट के सिस्‍टम को साफ रखता है.

5. नीम
नीम में कई प्रकार के वायरल विरोधी घटक पाए जाते हैं, जिस वजह से यह हेपेटाइटिस के इलाज में उपयोगी होता है. यह लिवर में उत्पन्न टॉक्सिक पदार्थों को नष्ट करने में भी सक्षम होता है. इसकी पत्तियों के साथ में शहद मिलाकर सुबह-सुबह पियें.

6. अर्जुन की छाल
अर्जुन के पेड़ की छाल, हार्ट और यूरिन सिस्टम को अच्छा बनाने के लिए माने जाती है. हालांकि, इसमें मौजूद एल्कलॉइड लिवर में कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को विनियमित करने की क्षमता भी रखता है. और यह गुण इसे हैपेटाइटिस के खिलाफ एक मूल्यवान दवा बनाता है.

7. हल्दी
देश के कुछ भागों में, लोगों को यह ग़लतफ़हमी है कि, क्योंकि हल्दी का रंग पीला होता है, पीलिया के रोगी को इसाक सेवन नहीं करना चाहिए. हालांकि यह एक कमाल का एंटी-इन्फ्लेमेट्री, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव वाली तथा बढ़े हुए यकृत नलिकाओं को हटाने वाली होती है. हल्दी हैपेटाइटिस के खिलाफ सबसे प्रभावी उपायों में से एक है.

ह्रदय रोग से बचाव - Hriday Rog Se Bachaw!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
ह्रदय रोग से बचाव - Hriday Rog Se Bachaw!

हृदय हमारे जीवन का आधार है. इसलिए जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो हम उसके हृदय की धड़कन चेक करते हैं. यदि दिल धड़क रहा है तो व्यक्ति जीवित है लेकिन जब धड़कन बंद तो समझिए कि व्यक्ति की मृत्यु हो गई. इसलिए दिल की धड़कनों का खयाल विशेष तौर पर रखना चाहिए क्योंकि उसी से हम जिंदा हैं. जरा सी भी अव्यवस्थित जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही आप के नाजुक दिल के लिए खतरा पैदा कर सकती है. बदलती जीवन शैली ने हमारे दिल के लिए खतरा बढ़ा दिया है. जीवनशैली व खानपान में बदलाव ने लोगों को हृदय संबंधी रोगों के करीब पहुंचा दिया है. हृदय रोग किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकते हैं. ये रोग ऐसे होते हैं जिनका इलाज बहुत मुश्किल होता है. इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम शुरू से ही अपने हृदय की खास देखभाल करें और उसे स्वस्थ रखें. हृदय को स्वस्थ रखने के लिए हमें अपने रोजमर्रा के जीवन में ही थोड़े बदलाव लाने की जरुरत होती है. अपने खानपान व जीवनशैली की आदतों में कुछ नई बातों को शामिल करने और कुछ खराब आदतों को निकाल देने से हमारे हृदय को फायदा होता है. आइये इस लेख के माध्यम से ये जानें कि हृदय रोगों से बचाव कैसे करें?

टहलना है हृदय के स्वास्थ्य के जरूरी-
रोज आधे घंटे तक जरूर टहलें. टहलने की रफ्तार इतनी होनी चाहिए कि जिससे सीने में दर्द न हो और आप हांफने भी न लगें. यह आपके अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है. आप सुबह, शाम या फिर रात को खाने के बाद किसी भी वक्त टहल सकते हैं.

व्यायाम करना है दिल के लिए फायदेमंद-
रोज 15 मिनट तक ध्यान और हल्के योग व्यायाम रोज करें. यह आपके तनाव तथा रक्त दबाव को कम करेगा. आपको सक्रिय रखेगा और आपके हृदय रोग को नियंत्रित करने में मददगार होगा. व्यायाम करने से न सिर्फ आपका हृदय बल्कि संपूर्ण शरीर चुस्त-दुरुस्त महसूस करने लगेगा.

तनाव मुक्त रहें-
आजकल की जीवनशैली का एक हिस्सा तनाव बन गया है. दफ्तर हो या परिवार, इंसान किसी न किसी वजह से तनाव में घिरा रहता है. लेकिन, तनाव आपके हृदय के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं. इसलिए तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें. इससे आपको हृदय रोग को रोकने में मदद मिलेगी, क्योंकि तनाव हृदय की बीमारियों की मुख्य वजह है.

कोलेस्ट्रॉल को रखें नियंत्रित-
अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल को 130 एमजी/ डीएल तक बनाए रखें. कोलेस्ट्रॉल के मुख्य स्रोत जीव उत्पाद हैं, इनसे जितना अधिक हो, बचने की कोशिश करनी चाहिए. यदि आपके यकृत यानी लीवर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल का निर्माण हो रहा हो तब आपको कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है.

वजन सामान्य रखें-
हृदय को स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी है कि शरीर के वजन को सामान्य रखें. आपका बॉडी मास इंडेक्स 25 से नीचे रहना चाहिए. इसकी गणना आप अपने किलोग्राम वजन को मीटर में अपने कद के स्क्वेयर के साथ घटाकर कर सकते हैं. तेल के परहेज और निम्न रेशे वाले अनाजों तथा उच्च किस्म के सलादों के सेवन द्वारा आप अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं.

रेशेदार भोजन करें-
स्वस्थ हृदय के लिए रेशेदार भोजन का सेवन करें. भोजन में अधिक सलाद, सब्जियों तथा फलों का प्रयोग करें. ये आपके भोजन में रेशे और एंटी ऑक्सीडेंट्स के स्रोत हैं और एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक होते हैं. इससे आपकी पाचन क्षमता भी अच्छी बनी रहती है.

शुगर पर रखें नजर-
यदि आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो शुगर को नियंत्रण में रखें. आपका फास्टिंग ब्लड शुगर 100 एमजी/ डीएल से नीचे होना चाहिए और खाने के दो घंटे बाद उसे 140 एमजी/ डीएल से नीचे होना चाहिए. व्यायाम, वजन में कमी, भोजन में अधिक रेशा लेकर तथा मीठे भोज्य पदार्थों से बचते हुए डायबिटीज को खतरनाक न बनने दें. यदि जरूरत परे तो हल्की दवाओं का सेवन करना चाहिए.

रक्त चाप को अनदेखा न करें-
अपने रक्त चाप को 120/80 एमएमएचजी के आसपास रखें. रक्त चाप विशेष रूप से 130/ 90 से ऊपर आपके ब्लॉकेज (अवरोध) को दुगनी रफ्तार से बढ़ाएगा. इसको कम करने के लिए खाने में नमक का कम इस्तेमाल करें और जरुरत पड़े तो हल्की दवाएं लेकर भी रक्त चाप को कम किया जा सकता है.

हृदय गति रुकना - Hriday Gati Rukna!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
हृदय गति रुकना - Hriday Gati Rukna!

हृदय की गति रुकना एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है. इसे ही कार्डियक अरेस्ट भी कहा जाता है. देखा जाए तो दिल के दौरे से मिलते जुलते ऐसे ही दो-तीन बीमारियाँ और हैं जिन्हें लेकर लोगों में अक्सर कन्फ़्यूजन होता है. लोग हृदय संबंधी समस्या होने पर हार्ट अटैक और कार्डिक अरेस्ट (अचानक हृदय गति रुकना) शब्द का इस्तेमाल एक ही रूप में करते हैं, लेकिन ये समानार्थक शब्द नहीं है. इन दोनों बीमारियों के कारण भिन्न होते हैं. दिल का दौरा (हार्ट अटैक) तब होता है जब हृदय में पहुंचने वाला रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है. वहीं दूसरी ओर हृदय गति रुकना तब होता है, जब हृदय विद्युतीय प्रक्रिया में अचानक समस्या आ जाती है और हृदय अचानक धड़कना बंद कर देता है. सरल शब्दों में समझा जाएं तो हार्ट अटैक का सीधा संबंध रक्त प्रवाह से है, जबकि हृदय गति रुकना का संबंध हृदय को गति देने वाली विद्युतीय तरंगों में आई समस्या से होता है. हृदय गति रुकना को हृदय गति रुकना भी कहा जाता है. आइए इस लेख के माध्यम से हम हृदय की गति रुकने के कारणों और इससे जुड़ी अन्य बातों को जानें.

कार्डियक अरेस्ट को लेकर दूर करें संदेह-
कार्डियक अरेस्ट बिना किसी पूर्व लक्षण के अचानक हो जाता है. यह समस्या हृदय को गति देने वाली विद्युतीय तरंगों में आई खराबी के कारण उत्पन्न होती है. इसके कारण हृदय की दर अनियमित हो जाती है. हृदय की धड़कनों व पम्पिंग क्रिया में बाधा आने के कारण हृदय मस्तिष्क, फेफड़ों और अन्य अंगों को रक्त नहीं पहुंचा पाता है. इसके बाद व्यक्ति को बेहोशी आने लगती है और कुछ समय के बाद नसों में रक्त बहना बंद हो जाता है. इस समस्या में व्यक्ति का तुरंत इलाज न हो पाने की स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है.

यह दोनों समस्याएं कैसे एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं?
यह दोनों ही समस्याएं हृदय से संबंध रखती हैं और यह दोनों हृदय रोग है. अचानक होने लाने वाला हृदय गति रुकना हार्ट अटैक के बाद होता है या हार्ट अटैक के ठीक होने की प्रक्रिया में हो सकता है. इससे कहा जा सकता है कि हार्ट अटैक के बाद हृदय गति रुकना होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. ऐसा जरूरी नहीं है कि हार्ट अटैक की समस्या होने पर हृदय गति रुकना होता ही हो, परंतु हृदय गति रुकना के कई मामलों में हार्ट अटैक का होना एक मुख्य वजह के रूप में देखा जाता है. हृदय से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हृदय की धड़कनों को भी बाधित कर सकती है और हृदय गति रुकना की वजह बन सकती है. इन समस्याओं में हृदय की मांसपेशियों का अकड़ना (कार्डियोम्योपैथी), दिल की विफलता, अनियमित दिल की धड़कन, वेंट्रिकुलर फैब्रिलेशन और क्यूटी सिंड्रोम शामिल हैं.

अचानक हृदय गति रुकना होने पर ये करें-
हृदय गति रुकना के कुछ ही मिनटों में इलाज प्रदान करने से इसको ठीक किया जा सकता है. इसके लिए आप सबसे पहले अस्पताल कॉल कर एंबुलेंस व अपातकाल चिकित्सा को बुलाएं. जब तक अपातकालीन इलाज शुरू नहीं होता तब तक आप मरीज को डिफब्रिलेटर (हृदय पर विद्युतिय झटके देने वाली मशीन) से प्राथमिक इलाज करते रहें. इसके अलावा हृदय गति रुकना मरीज को तुरंत कार्डियोपल्मोनरी रिसासिटेशन (हृदय धड़कन रूकने पर मरीज को दी जाने वाली चिकित्सीय प्रक्रिया) देनी चाहिए.

हार्ट अटैक (हृदयघात) क्या होता है?
हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां जब अवरुद्ध होकर हृदय के एक भाग तक ऑक्सीजन युक्त रक्त को जाने से रोक देती है, तो इस स्थिति को हार्ट अटैक कहा जाता है. यदि इस अवरुद्ध धमनी को जल्दी से नहीं खोला जाता है, तो इस धमनी की वजह से हृदय पर प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है. लंबे समय तक इस समस्या का उपचार न करने से हृदय की क्षति में बढ़ोतरी हो जाती है. हार्ट अटैक के लक्षण तत्काल और तीव्र हो सकते हैं. कई बार इस समस्या के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और लंबे समय तक उपचार न होने पर यह हार्ट अटैक का कारण बन जाते हैं. आपको बता दें कि अचानक होने वाले हृदय गति रुकना के विपरीत हार्ट अटैक में दिल की धड़कने बंद नहीं होती हैं.

एड़ी की हड्डी का बढ़ना - Adi Ki Haddi Ka Badhna!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Lakhimpur Kheri
एड़ी की हड्डी का बढ़ना - Adi Ki Haddi Ka Badhna!

हमारे पैर में कुल 26 हड्डियां होती है जिसमे सबसे बड़ी एड़ी की हड्डी (कैलकेनियस) होती है. इंसान की एड़ी की हड्डी को स्वाभाविक रूप से पुरे शरीर का वजन उठाने और संतुलन बनाए रखने के लिए किया जाता है. जब हम चलते है या दौड़ते है तो शरीर पर पड़ने वाले वजन को एड़ी के माध्यम से ही झेला जाता है. हमारे शरीर में एड़ी का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है, यदि किसी कारणवश एड़ी में कोई चोट या कोई समस्या उत्पन्न हो जाती है तो इसका प्रभाव आपके पूरे शारीरक गतिविधि पर पड़ सकता है. ऐसी ही एक समस्या है एड़ी की हड्डी का बढ़ना जिसमे एड़ी और पंजे के बीच के हिस्से में कैल्शियम जमा हो जाता है जिसके कारण एड़ी में हड्डी जैसा उभार आ जाता है. एड़ी की हड्डी बढ़ने से एड़ी में दर्द,सूजन और जलन जैसे लक्षण हो सकते है. इस समस्या का निदान करने के लिए डॉक्टर एक्स-रे और शरीरिक परिक्षण की मदद लेते है. इस लेख में हम एड़ी के हड्डी के बढ़ने के कारणों और उसके निदानों पर प्रकाश डालेगें.

एड़ी के हड्डी बढ़ने के लक्षण:
आमतौर पर एड़ी की हड्डी बढ़ने के कोई लक्षण नहीं होता है. इसके कुछ सामान्य लक्षण है जो निम्नलिखित है:
1. सुबह उठने पर आपके एड़ी में तेज दर्द होता है.
2. एड़ी के आगे के हिस्से में सूजन और जलन होता है.
3. एड़ी में गर्मी का अनुभव हो सकता है.
4. एड़ी के निचले हिस्से में हड्डी जैसा उभार दिखता है.

एड़ी में हड्डी बढ़ने का कारण:
एड़ी की हड्डी बनने का मुख्य कारण “प्लैंटर फेशिया” होता है, जो एड़ी और पंजे के बीच के हिस्से को सहारा देने वाला फैटी टिश्यू होता है. प्लैंटर फेशिया के ऊपर अधिक दबाब या चोट लगने के कारण एड़ी की हड्डी बढ़ता है.
प्लैंटर फेशिया में और चोट लगने से बॉडी प्रभावित क्षेत्र को ठीक करने के लिए कैल्शियम एकत्रित करने लग जाता है, जब कैल्शियम जरुरत से अधिक एकत्रित हो जाता है तो एड़ी में हड्डी जैसा उभार बन जाता है.

एड़ी की हड्डी बढ़ने से बचाव:
एड़ी की हड्डी बढ़ने से बचने के लिए पैरों पर पड़ने वाले दबाब को कभी नजरअंदाज ना करें और अपने पैरों को आराम दें.
1. एड़ी में होने वाले किसी भी प्रकार के दर्द को नजरअंदाज न करें. दर्द होने पर किसी भी भारी गतिविधि में शामिल ना हो जैसे एक्सरसाइज करना या दौड़ना या फिर जूत्ते पहने रखने से एड़ी की हड्डी बढ़ने की समस्या उत्पन्न हो सकती है.
2. अगर किसी शारीरक गतिविधि से दर्द उत्पन्न होता है तो उस प्रभावित क्षेत्र पर इचे लगाएं और अपने पैरों को राहत पहुंचाए.
3. हमेशा सही नाप वाले जूत्ते ही पहने.
4. एड़ी और पंजे पर ज्यादा दबाब वाले जूत्ते न पहनें.

एड़ी के हड्डी बढ़ने का इलाज:
एड़ी के हड्डी बढ़ने का निम्नलिखित उपचार है:


नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट:-
1. मौजे- जूत्ते के अन्दर विशेष रूप से बनाए गए मौजों का इस्तेमाल करें, जो एड़ी के दबाब को कम करता है.
2. जब आप नंगे पैर चलते है तो आपके प्लैंटर फेशिया पर अधिक दबाब पड़ता है, इसलिए नंगे पैर न चलने की कोशिश करें.
3. हमेशा उचित नाप और आरामदायक जूत्ते पहनें, यह आपके पैर से दबाब और दर्द को कम करता है.
4. कोर्टीसोन के टीके से प्रभावित क्षेत्र में सूजन और दर्द कम होता है. अगर दवा से कोई असर नहीं होता है तो टीका एक प्रभावी उपाय हो सकता है.
5. दर्द से निदान पाने के लिए आइस भी एक प्रभावी उपचार साबित हो सकता है. यह दर्द और सूजन से राहत प्रदान करता है.
6. दर्द होने पर प्रयाप्त आराम भी प्रभावित क्षेत्र पर दर्द और सूजन को कम करता है.
7. दर्द से छुटकारा पाने के लिए पिंडली की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने वाले एक्सरसाइज से दर्द में कमी आती है.

सर्जिकल ट्रीटमेंट-
अगर ऊपर दिए गए उपचार से एड़ी की हड्डी बढ़ने का कोई निदान नहीं होता है तो आपको सर्जरी करवाना पद सकता है.

सर्जरी में दो तरीके अपनाए जाते है.
1.प्लैंटर फेशिया को निकाल कर एड़ी की बढ़ी हुई हड्डियों का इलाज किया जा सकता है.
2. सर्जरी के द्वारा बढ़ी हुई हड्डियों का निकाल कर भी निदान किया जा सकता है.

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When Do You Need Treatment For Sexual Problems?

BAMS
Sexologist, Delhi
When Do You Need Treatment For Sexual Problems?

How important sex is? The answer, for sure, is very important. It is one of the primary elements of a happy married life. As a matter of fact, having trouble in sex life can create havoc in your overall life. As a matter of fact, it has been observed that having trouble in sex life can make things extremely difficult for couples. There have been instances where trouble in sex life leads to the ending of married life. The very basis of a successful married life, to an extent, is physical intimacy which couples share.  If you are having trouble in your sex life and you think that it is only aggravating each passing day then consulting sexologist might help you.

Although there are several ingredients of happily married life sex plays an extremely important role for it strengthens the bond between the couple. In the present day and age, poor living habits, stress as well as odd working hours together contribute to conditions which can affect one’s sex life. In fact, these factors are also responsible for several other diseases. If you are wondering what exactly unhealthy sex life is then here is the answer. If your partner is not satisfied with you then it can prove detrimental for your happy married life.

If you fail to observe any kind of improvement in your sexual health then without having to worry much or panicking, just get in touch with the sexologist. There are several doctors who are providing treatment for such health conditions, it is important for you to remember that choosing the experienced doctor can help you get the treatment which is best for your sexual wellness and married life.  After all, having a satisfied and happy married life is extremely important for anyone under the sun. Let not sexual issues be the reason for its end. Get the right treatment. A sexologist can be consulted by those who are suffering from any kind of sexual problem and seeking the right treatment.

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Right Treatment Of Sexual Problems!

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Sexologist, Delhi
Right Treatment Of Sexual Problems!

The treatment for problems is all about curing the problem of erectile dysfunction. It refers to the condition in which the penis fails to get erect at the time of having physical intercourse. For satisfying and pleasurable sex, the erection of the penis is extremely important. Men who fail to have an erection for longer duration fail to satisfy their partner as well. Intake of medicines nourishes the penis, thus strengthening muscles and allowing you to have satisfying intercourse.

Sexologists have witnessed cases where Married couples got bored with their sexual life. Yes, it can happen. However, what one needs to do is rekindle that spark again by sharing and discussing things with the partner. Instead of restricting things to yourself, you are just making life difficult for both of you. No matter what the issue is, communicate with your partner at length. There is very possibility you both might be able to work out the best remedy for it. However, if nothing works out, then just consider visiting a sexologist for the right advice and treatment to enhance pleasure.

Sex is an indispensable part of a happy life.  The emotional bond which you both share increases when you have sex.  The act of lovemaking is much more than fun. It helps in strengthening your relationship with your partner. If you are not able to enjoy your sex life because of some medical reason then just get in touch with the experienced Sexologist and get set for the treatment which will add much-needed spice to your nowhere going sexual life.

Treatment For Erectile Dysfunction!

Sexual Health Clinic
Sexologist, Delhi
Treatment For Erectile Dysfunction!

One of the most common sex problems is that of erectile dysfunction which has affected the lives of millions of men all over the globe.  The reasons for it are many and vary from one person to the other.  Therefore, often many rounds of personal interaction, laboratory investigations and physical examination are needed to conclude the root cause of the problem. Some of the most probable causes for the problem are as follow:

Physiological problems – In some men, physiological issues may lead to the problem of ED. Hypertension, high levels of glucose and cholesterol are some of the prime culprits for the condition. Sexologist treats these problems with diet control, changes in lifestyle and effective medication. As soon as the physiological cause is determined, treatment is started. Usually, making certain changes improve the condition of the person.

Psychological problems – It is one of the most common reasons for ED. As a matter of fact, there is no issue in the reproductive system of men. Anxiety when combined with the workload, stress and professional tensions affect the hormonal balance which leads to the dip in testosterone hormones responsible for controlling sex vigor in men.

Intense sexual behavior fantasies involving strange objects, activities and situations. Well, it is a genuine problem.in most cases, it is associated with some kind of psychological issue. This might cause great distress in your occupational, personal and social life. If this is what you are going through then consult with a Sexologist without any delay.

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What are the symptoms of dengue? Also tell me what are the medicine which we can take in this disease.

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Delhi
What are the symptoms of dengue?
Also tell me what are the medicine which we can take in this disease.
Hi, High fever, rash, headache, and severe muscle and joint pain. If having any take ague nil homeopathic syrup 2 big a spoon after 2 hrs take fruits more.

Female Condoms - Know Merits & Demerits Of It!

Sexual Health Clinic
Sexologist, Delhi
Female Condoms - Know Merits & Demerits Of It!

Female condoms are generally pouches made of latex and polyurethane, which are used by women during sex in order to prevent pregnancy and thereby reduce the chances of infection by sexually transmitted diseases. Each end of these pouches are made of rings that are flexible. They should be inserted deep inside the vagina before sex is initiated and held in the position by utilizing the rings available at the closed end while the rings which are at the open end remain outside the vagina during sex.

Even though it can be safely used by most people, some women would find female condoms to be an inappropriate form of contraception and would not feel comfortable with their genital areas being touched. Thus, it is very important that the appropriate form of contraception be considered for you and your partner. Condoms should be used correctly. In case of need for extra protection, other options of contraception should be considered.

Pros of female condoms:

  1. Since the exchange of bodily fluids, such as semen and vaginal fluid is prevented, female condoms aid in offering protection against many sexually transmitted diseases such as HIV.
  2. Condoms can prove to be reliable pregnancy averting methods if they are properly and consistently used.
  3. Female condoms are only needed during the time of sex. Any form of advance preparation is not required, hence making them suitable for unplanned sex.
  4. Prescriptions are not needed
  5. The condoms are usually small in size, disposable as well as easy to carry
  6. Usually, using condoms does not show any medical side effects.
  7. Insertion of female condoms can be done up to a duration of eight hours before sex. The responsibility for utilizing condoms properly should be shared by the woman as well as the partner.

Cons of female condoms:

  1. Even though condoms are generally very strong, they are prone to splitting or tearing in case of improper use.
  2. Availability of female condoms pales in comparison to the male counterparts and they are usually more expensive.
  3. The outer ring might produce a cumbersome feeling.

Hernia - Get It Treated With Ayurveda?

Bachelor of Ayurveda, Medicine and Surgery (BAMS)
Ayurveda, Kanpur
Hernia - Get It Treated With Ayurveda?

Hernia or what in Ayurveda is known as Antra Vriddhi, is a condition that takes place when an internal organ in your abdomen gets displaced and protrudes outward, giving rise to swelling in the abdominal region. 
Even though you can develop a hernia anywhere in your body, it mostly occurs in the abdominal region and can affect both men and women at any age.

The causes of hernia are
Even though hernia can be a hereditary condition, certain factors can contribute in causing it. These are:

  1. Persistent coughing
  2. Putting excess pressure while passing faeces
  3. Straining your abdominal muscles by exercising or lifting objects that are heavy
  4. Obesity
  5. Buildup of fluid in your abdominal cavity

Symptoms: 
Some of the symptoms that indicate you have hernia include a visible, hard protrusion, development of soft lumps and pain. However, some people may not experience any symptoms at all. Hernia can be of many types, depending on the part of the body affected and even varying on the basis of your gender. In worst cases, you may require surgery but Ayurveda can cure your hernia completely without the need of you going through a surgical process.

How does Ayurveda help?
Ayurveda helps in curing your hernia by focussing on your diet. If you follow these rules, you can cure yourself of hernia completely.

  1. Reduce the amount of food you eat in a day and take small meals frequently instead of the standard three meals.
  2. While eating, make sure you eat your food slowly.
  3. Drink lots of water and other fluids, but do not consume aerated drinks
  4. It is advised not to take water with your meals, but only to drink a glass of water an hour after and half an hour before each meal. By doing this, you reduce your chances of getting heartburn and aid in the proper functioning of the digestive system.
  5. Eating any form of raw food, such as uncooked meat and vegetables is strictly forbidden along with processed foods such as bread, cakes, cookies etc. However, when eating cooked food, make sure it's lightly cooked and not overcooked.
  6. Having a glass of juice freshly squeezed from vegetables or fruits is recommended, especially carrot juice as it is enriched with calcium and vitamin A that help in the healing process.
  7. Make sure that whole grains, nuts, seeds, vegetables and fruits are a part of your diet.
  8. Lastly, go for a walk after each meal and do not sleep after eating, especially if you've had a heavy meal.
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